सनातन धर्म छोटी सोच नहीं बल्कि विश्व का कल्याण हो, सर्वे भवंतु सुखिन् की कामना करने वाला है- डॉ पं नागर जी

कथा में अंबाजी धाम निपानिया के साधक गुरुवर पहुंचे,क्षेत्रीय विधायक डंग ने किया स्वागत वंदन
कथा के छठवें दिन भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने शिव महापुराण का ज्ञानामृत लाभ लिया, भाजपा जिलाध्यक्ष दिक्षित,एएसपी, डीएसपी भी पहुंचे आयोजन में
सीतामऊ। छोटी काशी के पावन धरा पर शिव महापुराण कथा के छठवें दिन शिव विवाह का प्रसंग सुनाते हुए कथा प्रवक्ता डॉक्टर मिथिलेश जी नागर ने कहा कि हिमाचल की नगरी पूरी सजी हुई है नगर के दरवाजों पर सुंदर रंगोलिया बनाई गई है। भगवान शंकर नंदी पर उल्टे बैठकर बारात लेकर पर्वतराज हिमालय रानी मैना के यहां भूत और भूतों के साथ पहुंचे उधर जैसे ही बारात आई नगर वासी अपने घर के झरोखों से बारात को देखने लगे नगर वासी ने भूतों की बरात देखकर सब ने खिड़की दरवाजे बंद कर लिया । देव ऋषि महाराज जी पहले से ही राजा पर हिमाचल के घर पर विवाह में पहुंच गए थे इधर बारातियों का स्वागत करने के लिए वधू पक्ष से थाल फूल माला सजाकर गए जहां पर बारातियों को देखकर सभी शरद में पड़ गए और वहां से भाग गए वहीं रानी मैनावती अपने जमाई के स्वागत बदावने के लिए पहुंची तो इस प्रकार की विचित्र बारात और दामाद जी भी भस्म रामाए हुए और शरीर सर्पों की माला देखकर मीनावती बेहोश हो गई मैनावती को घर ले जाया गया इधर नारद जी को पता चला तो उन्होंने रानी मैनावती को कहा कि आपने महादेव को अपनी इन आंखों से देखा है अपने ज्ञान के आंखों से उनको देखना वह विश्व कल्याण करने वाले देवाधिदेव महादेव हैं। जिसने काशी को स्थापित किया है। इधर सप्त ऋषियों ने भी रानी मीनावती को समझाया उसके बाद एक बार फिर रानी मैनावती अपने अपने दामाद का स्वागत करने पहुंची तो वहा नारद जी ने महादेव से अपने वास्तविक स्वरूप कि प्रार्थना कि तो दुल्हा बनें महादेव सुंदर सोने के मुकुट धारण कर नंदी पर सीधे सवार होकर सुंदर दूल्हे के रूप में दिखे मैनावती प्रसन्न हुई और अपने दामाद का स्वागत किया।
डॉ पंडित नागर जी ने कहा कि जिसने समय और व्यक्तित्व को पहचान वह आगे बढ़ गया और जिसने समय की कद्र नहीं की समय निकल जाता है और व्यक्तित्व भी वही नहीं रहता है।
डॉ पंडित नागर जी ने सीतामऊ नगर के इतिहास को लेकर प्रशंसा करते हुए कहा कि देवाधिदेव महादेव ने काशी को बसाया और दूसरी काशी छोटी काशी के नाम से यह नगरी जानी जाती है। यहां पर श्री रामेश्वरम मंदिर के भाव जिर्णोद्धार निमित यह कथा करने के लिए मुझे आमंत्रित किया गया यह नगर छोटे काशी के नाम से विख्यात है इस नगर के पास लदुना ग्राम में अखिल भारत जय गुरु संप्रदाय के साधन संत सीताराम दास जी ने तप साधना कि थी।यह नगरी वह नगरी है जहां वेद मित्रों का गुंजायमान मान रहा है यहां के राजा महाराजा ने इसको शिक्षा की नगरी बनाया है। यह नगरी वह नगरी है जहां हर गली के छोर पर और हर गली के मध्य में शिवालय यह हुआ नगरी है जहां पर सबसे उच्च कोटि की संस्कृत पाठशाला हुआ करती थी। और इस छोटी काशी में मुझे कथा करने का अवसर प्राप्त हुआ है।
डॉ पंडित नागर जी ने कथा व्यास पीठ से भगवान देवाधिदेव महादेव से सबके लिए मंगल कामना करते हुए कहा कि वो काशी और ये छोटी काशी और हम आपके हैं सब में शिव तत्व जागे शिव में हो और सब पर कृपा बरसाए रखना मनोकामना पूर्ण करना। डॉ नागर जी ने भजन शिव के हृदय से प्रगति काशी बोर के मन भाए काशी का भजन श्रवण कराया गया। डॉक्टर पंडित नागर जी ने कहा कि जिस प्रकार से देव ऋषि नारद जैसे सद्गुरु से रानी मीनावती के 11वीं ज्ञानेंद्रिय खुल गई और अपने दामाद को देवाधिदेव महादेव के रूप में स्वीकार कर लिया ऐसे ही जीवन में जब सच्चा सतगुरु आता है और सद्गुरु के ज्ञान के चोट जैसे ही लगती है ज्ञान की 11वीं ज्ञानेंद्र खुल जाती हैं तो उसका जीवन धन्य हो जाता है। सद्गुरु कभी गलत नहीं करते हैं सत्य से सत्य और अंधेरे से प्रकाश की ओर विश्व से अमृत की ओर ले जाता है वहीं हमारा सतगुरु है।
डॉ पं नागर जी ने कहा कि हम भगवान को भगवान की नहीं मानते हैं जबकि वह हमारा सब कुछ है उसे हम तो त्वमेव माता च पिता त्वमेव,त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव।त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव,त्वमेव सर्वं मम देव देव, के मंत्र के साथ प्रार्थना भी करते हैं। भवानी और शंकर के दो रुप श्रद्धा और विश्वास है इन दोनों के बिना कोई भी संत या भक्त अपने मन में ईश्वर को नहीं देख सकता है।श्रद्धा और विश्वास के बिना ईश्वर की प्राप्ति नहीं हो सकती, उसी प्रकार इन दोनों शक्तियों का मिलन ही जीवन में भक्ति को पूर्ण करता है।
डॉ पंडित नागर जी ने कहा कि सनातन धर्म को लेकर कहा कि हम वह है जो छोटी सोच नहीं रखते हैं हमने तो बड़ी सोच रखी है हम वसुधैव कुटुंबकम् कि सोच रखने वाले हैं हम तो विश्व का कल्याण हो, का जय घोष लगाते है।हमने कंकड़ कंकड़ में शंकर और पत्ते पत्ते में भगवान को देखा है और हमारे श्लोक सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया:।सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मां कश्चित दुःख भाग भवेत्।को बोलकर सबके सुखी रहने सब चराचर जगत के जीव के स्वस्थ और किसी को कोई दुःख नहीं कि कामना करतें हैं। कथा मध्य अंबाजी धाम निपानिया के साधन गुरुवर कुंवर जितेंद्र सिंह बन्ना के आगमन पर डॉ पं नागर जी ने स्वागत अभिनंदन करते हुए कहा कि जहां परम पिता को और माता शिव जगदंबा का भजन किर्तन आराधना हो और मां अंबा जगदंबा के साधक संत का आना दो संतों के साथ ऐसा अद्भुत संयोग शिव जगदंबा का साक्षात आगमन होकर आशिर्वाद मिल रहा है। इस अवसर पर अंबाजी धाम गुरुवर कुंवर जितेंद्र बन्ना ने व्यास पीठ को नमन करते हुए डॉ मिथिलेश जी नागर का स्वागत अभिनंदन किया।
इस अवसर पर क्षेत्रीय विधायक हरदीप सिंह डंग अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री राम स्नेही डीएसपी दिनेश प्रजापति, जन प्रतिनिधि गण समाज सेवकों भाजपा कार्यकर्ताओं सहित भक्तों और नागरिकों ने शिव पुराण को नमन करते हुए डॉ पं मिथलेश जी नागर का फुल माला से स्वागत अभिनंदन किया। मंचीय संचालन सभापति विवेक सोनगरा ने किया तथा आभार नगर परिषद अध्यक्ष मनोज शुक्ला ने व्यक्त किया।

कथा के छठवें दिन भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने शिव महापुराण का ज्ञानामृत लाभ लिया, भाजपा जिलाध्यक्ष दिक्षित,एएसपी, डीएसपी भी पहुंचे आयोजन में


