छल-कपट की कमाई से आता है क्लेश, नारायण सुमिरन से ही जीवन सफल: संत श्री

सीतामऊ में श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन उमड़ा जनसैलाब
गौ भक्त मनोहरथ राम जी महाराज ने दिया पर्यावरण संरक्षण, मर्यादा और सनातन संस्कारों का संदेश
सीतामऊ। पोरवाल मांगलिक भवन में आयोजित की जा रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन श्रद्धालुओं का भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा। थोड़ी देर के लिए मौसम की हल्की बारिश के बीच भी भक्तों की आस्था डिगी नहीं और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा स्थल पर डटकर दिव्य प्रवचनों का लाभ उठाया। कथा के तीसरे दिन सुप्रसिद्ध राष्ट्रीय चिंतक एवं परम गौ भक्त श्री मनोहरथ राम जी महाराज (मचलाना वाले) ने अपने मुखारविंद से ज्ञान, भक्ति और सामाजिक चेतना की अमृत वर्षा की।महाराज श्री ने कथा के दौरान धार्मिक प्रसंगों को आज के सामाजिक परिवेश से जोड़ते हुए कई महत्वपूर्ण संदेश दिए:
पर्यावरण संरक्षण का संकल्प: महाराज श्री ने अंधाधुंध कटते जंगलों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इंसान अपनी ज़रूरतों के लिए पृथ्वी को नुकसान पहुँचा रहा है। उन्होंने उपस्थित जनसमुदाय से जीवन में अनिवार्य रूप से पौधे लगाने और उनके संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया।
दधीचि का त्याग और मानवता: वृत्रासुर वध का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने ऋषि दधीचि के अस्थि दान के सर्वोच्च त्याग को याद किया। उन्होंने कहा कि संसार में आकर मानवता के लिए अच्छे कर्म करना ही जीवन की सार्थकता है, अन्यथा अंत समय में पछताना पड़ता है। मनुष्य को सदैव अपनी मर्यादाओं में रहना चाहिए।
संस्कारवान माँ का महत्व: मातृशक्ति की महिमा गाते हुए गुरुदेव ने कहा कि यदि माँ भक्ति भाव और उच्च संस्कारों वाली हो, तो संतान कभी कुमार्ग पर नहीं जा सकती। एक संस्कारवान माँ अपनी 21 पीढ़ियों को तारने की शक्ति रखती है।
ध्रुव-प्रह्लाद चरित्र और ईमानदारी की कमाई: भक्त ध्रुव और प्रह्लाद की कथा के माध्यम से महाराज श्री ने समझाया कि भगवान केवल सच्ची भक्ति के भूखे हैं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि छल-कपट और धोखाधड़ी से कमाया गया धन जीवन में केवल क्रोध, क्लेश और दरिद्रता लेकर आता है। प्रभु का नाम लेकर ईमानदारी से किया गया कार्य ही जीवन को सफल बनाता है।
गौ माता चलता-फिरता मंदिर: परम गौ भक्त मनोहरथ राम जी ने कहा कि गाय केवल एक पशु नहीं, बल्कि चलता-फिरता मंदिर हैं, जिसमें 33 कोटि देवताओं का वास है। गौ माता का पूजन और सेवा करने से जीवन के सभी दुखों का नाश होता है।
कथा के विश्राम पर मुख्य यजमान रमेश चंद्र गुप्ता पवन गुप्ता एवं परिवार सहित उपस्थित श्रद्धालुओं द्वारा भगवान की भव्य महाआरती की गई। इसके पश्चात जनसमुदाय के बीच प्रसादी का वितरण किया गया।
गौ भक्त मनोहरथ राम जी महाराज ने दिया पर्यावरण संरक्षण, मर्यादा और सनातन संस्कारों का संदेश



