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सुवासरा जिम्मेदार कौन, आम जनता मौन, पर्यावरण दिवस एक दिन का शोर एम: हामिद ईज्जी 

सुवासरा जिम्मेदार कौन, आम जनता मौन, पर्यावरण दिवस एक दिन का शोर एम: हामिद ईज्जी 

✍️पंकज बैरागी

सुवासरा(निप्र) एक दिन पौधारोपण साल भर कटते जंगल याने सिर्फ फोटो अवसर बनकर रह गया पर्यावरण दिवस

हर साल विश्व पर्यावरण दिवस पर कहीं नेता कहीं अधिकारी और विभिन्न संस्थाएं बड़े उत्साह से पौधे लगाते हुए कैमरे के सामने पौधारोपण करते हैं पर्यावरण संरक्षण के संकल्प लिए जाते हैं एक पौधे को 25 से 30 सदस्य उसको ऐसे पकड़ के फोटो खिंचवाते हैं जैसे पौधा कहीं भाग न जाए उसके बाद सोशल मीडिया पर तस्वीरें साझा की जाती हैl लेकिन अब सवाल यह है जब हर रोज जंगल की कटाई की जाती है बीच बाजार से हरे भरे वृक्ष ट्रैक्टर ट्राली दिन रात आपकी आंखों के सामने निकलते हैं तो फिर यहां एक दिन का अभियान कितना प्रभावी है ?

पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि केवल पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं है बल्कि उनका संरक्षण और जंगलों को बचाना अधिक महत्वपूर्ण है कहीं क्षेत्र में विकास के नाम पर विनाश हम देख रहे जल जंगल बचाने के लिए आदिवासी क्षेत्र में आदिवासी सड़कों पर संघर्ष कर रहे कारखाने सड़क निर्माण खनन शहरी विस्तार के नाम पर बड़ी संख्या में पेड़ काटे जा रहे! ऐसे में पर्यावरण दिवस पर लगाए गए कुछ पौधे उन नुकसानों की भरपाई नहीं कर सकते वास्तव में हमें पर्यावरण बचाना है तो सबसे पहले जंगल की कटाई रोकी जाए यहां एक रोज नहीं 365 दिन पर्यावरण बचाने का संकट लिया जाए तब जाकर पृथ्वी पर जल और हरियाली बचेगी नहीं तो यह औपचारिकता बन्द की जाए ।

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