आध्यात्ममंदसौर जिलासुवासरा
समय हर क्षण परिवर्तनशील है, सुख दुःख जीवन के अंग है, मंथरा रूपी लोभ से रहे सावधान -पं. दशरथ भाईजी

समय हर क्षण परिवर्तनशील है ,सुख दुःख जीवन के अंग है ,मंथरा रूपी लोभ से रहे सावधान – पं. दशरथ भाईजी
पंकज बैरागीसुवासरा । दोपहर में राम राज्य अभिषेक की घोषणा हुई और शाम होते होते वनवास की परिकल्पना निर्मित हो गई। समय एक जैसा नहीं होता इसलिए जीवन में सहज रहना चाहिए।
समाज के वर्ग को साथ लेकर चलना ही राम राज्य का संकल्प है कोई उपेक्षित नहीं वन में रहने वाले वन्यजाति के जन जन से राम राज्य की शुरुआत भगवान राम ने करी।
राम वन गमन के भावपूर्ण वक्तव्य पर श्रोताओं की आंखे नम हो गई। निषादराज से मिलन व केवट प्रसंग पर सुंदर कथा का वाचन व्यासपीठ से हुआ।



