आसमान की ऊंचाइयों को छूने निकली बापचा की ‘बेटी’, चांदनी कुंवर देवड़ा ने भारतीय वायुसेना में रचा इतिहास

आसमान की ऊंचाइयों को छूने निकली बापचा की ‘बेटी’, चांदनी कुंवर देवड़ा ने भारतीय वायुसेना में रचा इतिहास

चंदवासा। मंदसौर जिले की शामगढ़ तहसील के छोटे से गांव बापचा की माटी ने एक बार फिर गर्व से मस्तक ऊंचा कर दिया है। पूर्व सैनिक की लाड़ली चांदनी कुंवर देवड़ा ने अपनी मेहनत और जज्बे के दम पर भारतीय वायुसेना में अपनी जगह पक्की कर ली है। चांदनी न केवल वायुसेना के ‘X ग्रुप’ में चयनित हुई हैं, बल्कि पूरे मध्य प्रदेश में द्वितीय (सेकंड) रैंक हासिल कर जिले का मान बढ़ाया है।
वर्दी का संस्कार, बेटी का संकल्प
चांदनी की रगों में देशभक्ति का जज्बा उनके पिता, पूर्व सैनिक श्रवण सिंह देवड़ा से विरासत में मिला है। पिता की वर्दी को देखकर बड़ी हुई चांदनी का सपना भी वही था—देश की रक्षा के लिए नीले आसमान की ऊंचाइयों को छूना। उन्होंने साबित कर दिया कि हौसलों के आगे बड़े से बड़ा लक्ष्य भी बौना साबित होता है।
रॉयल एकेडमी से उड़ान तक
अपनी इस सफलता का श्रेय चांदनी अपनी लगन और रॉयल एकेडमी, शामगढ़ के कुशल मार्गदर्शन को देती हैं। एक छोटे से कस्बे की छात्रा होकर पूरे प्रदेश में दूसरा स्थान प्राप्त करना यह दर्शाता है कि संसाधन चाहे सीमित हों, लेकिन इरादे फौलादी हों तो सफलता निश्चित है।
बेटी है तो कल है’ का जीता-जागता उदाहरण
चांदनी की इस उपलब्धि ने न केवल उनके परिवार और गांव में खुशियों की लहर दौड़ा दी है, बल्कि पूरे क्षेत्र की बेटियों के लिए एक नया रास्ता खोल दिया है। शामगढ़ तहसील से भारतीय वायुसेना के ‘X ग्रुप’ में चयनित होने वाली प्रथम महिला बनकर उन्होंने यह सिद्ध कर दिया है कि आज की बेटियां किसी से कम नहीं हैं।
“बेटियों के पंखों में अब वो उड़ान है, जो उन्हें आसमान तक ले जा रही है। चांदनी का चयन केवल एक नौकरी नहीं, बल्कि उन लाखों लड़कियों के लिए एक उम्मीद की किरण है जो अपने सपनों को पूरा करने की हिम्मत जुटा रही हैं।”
आज पूरा मंदसौर जिला, उनके शिक्षक और शुभचिंतक चांदनी की इस ऐतिहासिक जीत का जश्न मना रहे हैं। हम भी चांदनी के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हैं और उम्मीद करते हैं कि वे देश की सेवा में नई ऊंचाइयों को छुएंगी।



