मध्यप्रदेश

‘फेक पेटीएम ऐप’ का आतंक बिना पैसे ट्रांसफर किए दुकानदारों को लगाया जा रहा है चूना, रहें सावधान!

‘फेक पेटीएम ऐप’ का आतंक बिना पैसे ट्रांसफर किए दुकानदारों को लगाया जा रहा है चूना, रहें सावधान!

रीवा शहर में इन दिनों साइबर ठगों और शातिर बदमाशों ने स्थानीय छोटे-मोटे व्यवसायियों और दुकानदारों को ठगने का एक नया और बेहद खतरनाक पैंतरा अपनाया है। शहर में एक ऐसा गिरोह सक्रिय है जो ‘फेक पेटीएम ऐप’ के जरिए दुकानदारों को शिकार बना रहा है। ये ठग सामान खरीदने के बाद बकायदा दुकानदार का QR कोड स्कैन करते हैं और उनके मोबाइल स्क्रीन पर ‘सक्सेसफुल ट्रांजैक्शन’ का मैसेज भी दिखाई देता है, लेकिन असलियत में व्यापारी के खाते में एक भी रुपया नहीं पहुंचता। इस नए ट्रेंड ने शहर के छोटे व्यापारियों, ठेले वालों और किराना दुकानदारों की रातों की नींद उड़ा दी है।

 

*ठगी का मॉडस ऑपेरेंडी (तरीका): ‘साउंड बॉक्स’ न होने का उठाते हैं फायदा*

ठगों का यह गिरोह बेहद शातिर तरीके से काम करता है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इन ठगों का मुख्य निशाना वो दुकानें होती हैं जहाँ “पेटीएम साउंड बॉक्स” नहीं लगी होती है।

 

*ठग इस तरह देते हैं वारदात को अंजाम*

ठग सबसे पहले किसी दुकान पर जाते हैं और जांचने के लिए केवल 1 रुपये का ऑनलाइन पेमेंट करते हैं। अगर दुकान से मशीन बोल पड़ती है कि “पेटीएम पर एक रुपया प्राप्त हुआ”, तो ठग समझ जाते हैं कि यहाँ दाल नहीं गलेगी और वे चुपचाप वहाँ से खिसक जाते हैं। अगर दुकान पर साउंड बॉक्स नहीं है या आवाज नहीं आती, तो ठग भारी मात्रा में सामान खरीदते हैं। पेमेंट के वक्त वे अपने मोबाइल में मौजूद एक फर्जी पेटीएम ऐप क्लोन ऐप से दुकानदार का स्कैनर स्कैन करते हैं।

इस नकली ऐप में हूबहू असली पेटीएम जैसा ट्रांजैक्शन पेज खुलता है, जिसमें दुकानदार का नाम, मोबाइल नंबर और ट्रांसफर की गई राशि (जैसे ₹500 या ₹2000) दिखाई देती है। ठग दुकानदार को मोबाइल दिखाकर कहते हैं, “भैया, पेमेंट हो गया है देख लीजिए। जल्दबाजी और भीड़-भाड़ के चक्कर में कई बार व्यापारी अपने बैंक का मैसेज चेक नहीं कर पाते और स्क्रीन देखकर मान लेते हैं कि पैसा आ गया। इसका फायदा उठाकर ठग सामान लेकर चंपत हो जाते हैं।

युवा लड़कों का गिरोह है सक्रिय

बताया जा रहा है कि इस ठगी के पीछे कुछ स्थानीय और बाहर के शातिर लड़कों का गिरोह सक्रिय है, जो महंगे शौक पूरे करने के लिए इस तरह के फर्जी और अवैध एप्लीकेशन्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। यदि समय रहते इन पर अंकुश नहीं लगाया गया, तो शहर के कई छोटे व्यवसाई भारी नुकसान के कारण बर्बादी की कगार पर पहुंच जाएंगे।

केवल स्क्रीन देखकर ना माने कि पैसा आ गया, बैंक बैलेंस या मैसेज जरूर चेक करें। संभव हो तो अपनी दुकान पर साउंड बॉक्स (बोलने वाली मशीन) जरूर लगवाएं।”

ठगों से कैसे बचें? इन बातों का रखें खास ख्याल

केवल स्क्रीन पर भरोसा न करें, ग्राहक के मोबाइल स्क्रीन पर ‘सक्सेसफुल’ का टिक देखकर संतुष्ट न हों। जब तक आपके खुद के मोबाइल पर बैंक का क्रेडिट मैसेज न आ जाए या आप अपना पासबुक/ऐप चेक न कर लें, तब तक ग्राहक को जाने न दें।अपनी दुकान पर साउंड अलर्ट (बोलने वाली मशीन) सेवा जरूर चालू करवाएं, यह इस ठगी से बचने का सबसे अचूक उपाय है। यदि कोई व्यक्ति आपकी दुकान पर संदिग्ध रूप से ₹1 डालकर चेक करता है या ट्रांजैक्शन दिखाने में आनाकानी करता है, तो तुरंत सतर्क हो जाएं।

प्रशासन और पुलिस को सक्रिय होने की जरूरत

रीवा के पीड़ित और जागरूक नागरिकों का कहना है कि इस मामले में रीवा पुलिस प्रशासन और साइबर सेल को तुरंत सक्रिय होने की आवश्यकता है। जगह-जगह चेकिंग चलाकर और ऐसे फर्जी ऐप का इस्तेमाल करने वाले लड़कों को पकड़कर सलाखों के पीछे भेजा जाना चाहिए। यदि आपकी दुकान पर भी कोई ऐसा फर्जीवाड़ा करने की कोशिश करता है, तो डरे नहीं। तुरंत शोर मचाकर आस-पास के लोगों को इकट्ठा करें, ठग को पकड़ें और तत्काल स्थानीय पुलिस के हवाले करें। सतर्कता ही इस ठगी का एकमात्र बचाव है।

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