मालवा के सेन रत्न श्री नंदकिशोर जी गेहलोद 96 बसंत की कर्म-यात्रा: “कुंडला वाले बासाहब”

मालवा के सेन रत्न श्री नंदकिशोर जी गेहलोद 96 बसंत की कर्म-यात्रा: “कुंडला वाले बासाहब”
मनासा, नीमच। जिला सेन समाज संगठन के सबसे वरिष्ठ समाजसेवी, 96 वर्षीय कर्मयोगी श्री नंदकिशोर जी गेहलोद “कुंडला वाले बासाहब” की जीवन-गाथा नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा है। सन् 1930 में कुंडला गाँव में जन्मे बाबूजी आज भी उसी ऊर्जा से समाज का मार्गदर्शन कर रहे हैं।
बचपन और संघर्ष:- चार छोटे भाई, दो बहिनों की जिम्मेदारी के बीच कुकडेश्वर-कुंडला-रामपुरा की पगडंडियों पर चलकर सातवीं तक पढ़ाई करना उस दौर में बड़ी उपलब्धि थी। घर चलाने को हलवाई की कढ़ाई थामी तो समाज में मिठास घोली। खानखेड़ी में सिलाई मशीन से कपड़ा कम, बिखरा समाज ज़्यादा सिला। उनका सूत्र रहा — “टूटो मत, जुड़ो और जोड़ो”।
संगठन सेवा:- सन् 1987 में कुकडेश्वर के सहस्त्र मुक्तेश्वर मंदिर प्रांगण में स्व. भंवरलाल शास्त्री जी के सानिध्य में श्री मांगीलाल राठौर जी द्वारा दावेदारी वापस लेने पर श्री गेहलोद निर्विरोध प्रथम तहसील अध्यक्ष बने। उन्होंने तहसील को सात भागों में विकेन्द्रीयकरण कर संगठन को गाँव-गाँव पहुँचाया।
ऐतिहासिक कार्य:-1991 में मनासा में 23 बेटियों का सामूहिक विवाह संपन्न कराकर समाज में मिसाल कायम की। भादवा माता सेन समाज धर्मशाला के निर्माण में उनका योगदान उल्लेखनीय है। 17 अक्टूबर 1976 को श्री मगनीबाई एवं भाई बालाराम, कंजार्डा के कर-कमलों से हुए शिलान्यास में उन्होंने ससुर के सानिध्य में सबसे ऊँची बोली लगाई थी।
धर्म-प्रचार:- गायत्री शक्तिपीठ से जुड़े निष्ठावान साधक के रूप में उन्होंने 2011 में असम, अरुणाचल प्रदेश में महीनेभर तक धर्म-प्रचार किया। आज भी “एक रहो, नेक रहो, प्रचारक बनो” का संदेश देते हैं।
राजनीतिक जीवन:- मनासा ब्लॉक कांग्रेस कमेटी सदस्य एवं कुंडला सहकारी समिति उपाध्यक्ष रहे। उनका मानना है — “पद दो दिन का है, पर सेवा सात पीढ़ी का सौदा है।”
सेवा की विरासत:* उनके सुपुत्र श्री दिनेश जी गेहलोद कुंडला-खानखेड़ी में तथा श्री अशोक जी गेहलोद 30 वर्षों से मज़ेजी नर्सिंग होम, मनासा में चिकित्सा सेवा दे रहे हैं। तीसरी पीढ़ी में पौत्र श्री प्रशांत गेहलोद जिला युवा सेन समाज संगठन में जिला सचिव एवं श्री ज्ञानेंद्र गेहलोद BDS कर रहे हैं।
नीमच, मंदसौर, रतलाम व राजस्थान तक उनकी ख्याति “कुंडला वाले बासाहब” के रूप में है। 96वें वर्ष में भी अखबार व सोशल मीडिया में समाज की खबरें पढ़ते हैं। उनका प्रिय सूत्र-वाक्य है — “संगठन सभी एक समान हैं, जैसे माला में मोती।”
समाजजनों का कहना है कि हलवाई की कढ़ाई से संगठन के अध्यक्ष तक का सफर तय करने वाले बाबूजी ने सिद्ध किया कि उम्र से नहीं, कर्म से बड़े बना जाता है।
उपरोक्त जानकारी जिला सचिव शिवम सेन चुकनी द्वारा दी गई।


