मंदसौरमंदसौर जिला

अ.भा. साहित्य परिषद की संघ विषय काव्य गोष्ठी सम्पन्न

त्याग, तपस्या, राष्ट्रभाव का ये संदेश सुनाएगा- नरेन्द्र त्रिवेदी

‘‘करते जब स्वयं सेवक पथ संचलन, हृदय में होता राष्ट्र प्रेम का स्पंदन’’-ब्रजेश जोशी

मन्दसौर। अ.भा. साहित्य परिषद मंदसौर की संघ विषय, शाखा (संस्कार केन्द्र) डॉ. हेडगेवार श्री गुरूजी भगवा ध्वज, पथ संचलन, प्रशिक्षण वर्ग आनंद, विभाजन विभीषिका में, प्राकृतिक आपदा में, सेवा कार्य आपातकालीन संघर्ष गाथा, सेवा बस्ती कार्य, सामाजिक समरसता, गौ सेवा, कुटुम्ब प्रबोधन, पर्यावरण नागरिक अनुशासन पर काव्य गोष्ठी का आयोजन शासकीय महाविद्यालय मंदसौर के पूर्व प्राचार्य बी.आ. नलवाया के मुख्य आतिथ्य पत्रकार श्री घनश्याम बटवाल, पत्रकार श्री ब्रजेश जोशी के विशेष आतिथ्य तथा नरेन्द्रसिंह राणावत, गीतकार नंदकिशोर राठौर नादान, राजेन्द्र तिवारी, नरेन्द्र भावसार, इजि. दिलीप जोशी, एडवोकेट सुधा कर्मी, दशपुर की बेटी दीपिका किशोरी , श्रीमती हेमासिंह, नरेन्द्र त्रिवेदी, कवि सुरेन्द्र शर्मा, राजकुमार अग्रवाल, प्रकाश कल्याणी, राहुल राठौर के सानिध्य में सम्पन्न हुआ।
कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती चित्र पर माल्यार्पण के साथ हेमासिंह की सरस्वती वंदना से हुई। परिषद का गीत ‘‘भारती का लोकमंगल साधना साकार हो’’ नंदकिशोर राठौर ने प्रस्तुत किया।
इस अवसर पर बोलते हुए श्री नलवाया ने कहा कि संघ के सौ वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में संघ के विषयों पर आधारित यह कवि गोष्ठी हमारे दिलों में राष्ट्रप्रेम का संचार करते हुए सामाजिक समरसता को बढ़ाने वाली सिद्ध होगी। आपने अपनी कविता ‘‘पीले पत्तों के मत तोड़ों एक दिन ये स्वयं झड़जायेंगे, बैठो करो बुजुर्गों के पास एक दिन में तस्वीर बन जाएंगे‘‘ सुनाई। श्री बटवाल ने कहा कि कविता कल्पना विचारों का तालमेल है आज विश्व की चुनौतियों को समझकर हमें उर्जा संकट का समाधान समूह में यात्रा करके, अनावश्यक यात्राएं टाल कर तेल मितव्ययिता को बढ़ाना चाहिये।
श्री ब्रजेश जोशी ने पथ संचलन पर कविता ‘‘करते जब स्वयंसेवक पथ संचलन, हृदय में होता राष्ट्र प्रेम का स्पंदन’’ सुनाई। सुरेन्द्र शर्मा पहलवान ने कुटुम्ब प्रबोधन पर कविता बंटवारा सुनाई। राजेन्द्र तिवारी ने समरसता पर कविता ‘‘चलो हम इतना तो कर पाएं, मैं और तुम हम हो जाए’’ सुनाई। राहुल राठौर ने गौ सेवा पर कविता ‘‘गौ माता का दूध पीते हो, दूध का कर्ज भी चुकाए हम’’ सुनाई। नरेन्द्र त्रिवेदी ने भगवा पर कविता ‘‘ भगवा तो भगवा है हर हाल में फहराएगा, त्याग तपस्या राष्ट्र भाव का ये संदेश सुनाएगा’’ सुनाई। नरेन्द्र सिंह राणावत ने राष्ट्र प्रेम का गीत गाया, तो राजकुमार अग्रवाल ने ‘‘आरंभ है प्रचण्ड’’ गीत सुनाया। दिलीप जोशी व प्रकाश कल्याणी ने पर्यावरण पर अपनी बात कही। दीपिका किशोरी दाहोद ने कुटुम्ब प्रबोधन पर दोहे व घनाक्षरी के छन्द सुनाए। हेमा सिंह भावसार ने पर्यावरण पर कविता सुनाकर प्रकृति बचाने का संदेश दिया।
नरेन्द्र भावसार ने कुटुम्ब प्रबोधन पर कविता ‘‘कहा है रिश्तों की ठंडी छांव और ‘‘प्रवासी पक्षी आते है’’ कविता सुनाई तथा कार्यक्रम का संचालन किया। आभार नंदकिशोर राठौर ‘‘नादान‘‘ ने माना।

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