मंदसौरमध्यप्रदेश

मंदसौर में आध्यात्मिक ऊर्जा के साथ भारतीय नववर्ष का अभिनंदन- पशुपतिनाथ मंदिर में हुआ भव्य ‘विक्रमोत्सव‘ और सूर्य उपासना

मंदसौर में आध्यात्मिक ऊर्जा के साथ भारतीय नववर्ष का अभिनंदन- पशुपतिनाथ मंदिर में हुआ भव्य ‘विक्रमोत्सव‘ और सूर्य उपासना

मंदसौर। मालवा की पावन नगरी मंदसौर के सुप्रसिद्ध श्री पशुपतिनाथ मंदिर बालाजी परिसर में आज भारतीय नव संवत्सर 2083 के शुभागमन पर श्रद्धा और संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिला। विश्वगीता प्रतिष्ठानम् उज्जैन और मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस ‘विक्रमोत्सव’ ने संपूर्ण वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर कर दिया। अलसुबह जब सूर्य की प्रथम किरणें धरा पर उतरीं, तब मंदिर परिसर में सामूहिक सूर्य उपासना और पारंपरिक अनुष्ठानों के साथ नवीन वर्ष का अभिनंदन किया गया।

ब्रह्म मुहूर्त में प्रातः 5 बजे से शुरू हुए इस गरिमामय आयोजन की शुरुआत मंगल तिलक और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। दीप प्रार्थना के पश्चात वैदिक रीति-रिवाज से ब्रह्मध्वज का रोहण किया गया, जो विजय और धर्म की ध्वजा के रूप में आकाश में लहराया। देशप्रेम की भावना से ओतप्रोत श्वंदे मातरमश् के गान के साथ कार्यक्रम आगे बढ़ा, जिसके बाद संस्कृत पाठशाला के बटूकों ने अपने ओजस्वी मंत्रोच्चारण से स्वस्तिवाचन और संकल्पवाचन किया। शंखनाद की गूँज और ब्रह्मनाद के बीच उपस्थित श्रद्धालुओं ने सूर्य उपासना और सूर्य नमस्कार कर प्रकृति और परमात्मा के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त की।
आयोजन के दौरान भारतीय काल-गणना की वैज्ञानिकता और इसके ऐतिहासिक महत्व पर विशेष प्रकाश डाला गया। विश्वगीता प्रतिष्ठानम् के पदाधिकारियों ने सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित करने के पश्चात पंचांग पूजन संपन्न किया। इस अवसर पर वक्ताओं ने विस्तार से बताया कि कैसे हमारी सनातन परंपराएं और विक्रम संवत की गणना खगोलीय दृष्टि से सटीक और प्रासंगिक है। कल्याण मंत्र और आरती के साथ वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया, जहाँ हर नागरिक ने लोक-कल्याण की कामना की। इस आयोजन ने न केवल भारतीय नववर्ष की परंपरा को जीवंत किया, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से रूबरू होने का सुअवसर भी प्रदान किया।
इस महत्वपूर्ण आयोजन को सफल बनाने में विश्वगीता प्रतिष्ठानम् के जिला संयोजक सुरेश कुमार शर्मा और जिला सप्तोत्सव प्रमुख कविता चौहान सहित मानसिंह चौहान, धर्मपालसिंह देवड़ा, भोला भारती सोनी और जितेन्द्र गोड़ ने सक्रिय भूमिका निभाई। साथ ही शशि झलौया, सरोज शर्मा, लक्ष्मी धाणक, कौशल्या शर्मा, रानू दीदी, कौशल्या पाठक और मधुसुदन पाठक की गरिमामयी उपस्थिति रही। संस्कृति विभाग की ओर से जिला शिक्षा अधिकारी टेरेसा मिंज, राहुल शर्मा और अर्चना दवे ने कार्यक्रम की व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से संपन्न कराया

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