रमजान के आखिरी अशरे में होती इबादत की खास रात : जहरा जहन्नुम की आग से आजादी का अशरा शुरू

रमजान के आखिरी अशरे में होती इबादत की खास रात : जहरा जहन्नुम की आग से आजादी का अशरा शुरू
ललित विश्वकर्मा/वरिष्ठ संवाददाता
बांदा। पाक रमजान का आखिरी अशरा जहन्नुम की आग से आजादी का बुधवार से शुरू हो गया है। इबादत के इस माह में पहला अशरा रहमत का दूसरा मगफिरत का तीसरा और आखिरी अशरा जहन्नुम की आग से आजादी का होता है। गत मंगलवार को मगफिरत का अशरा अलविदा हो गया। इबादत के इस माह में अल्लाह तआला की रहमत बरसती है। यह बात मासूम रोजेदार जहरा ने वरिष्ठ संवाददाता से मुखातिब होते हुए कही है। मासूम जहरा फरमाती है कि रमजान के अंतिम अशरे में महत्वपूर्ण रात लैलतुल- कद्र होती ये वो रात जो हजारों माह से बेहतर होती है। रोजेदार जहरा मुस्कुराते हुए बताती है कि पाक रमजानुल में बीमार हालो को छोड़ सभी को रोजे से रहना जरूरी है। इबादत में जहरा पांच वक्त की नमाज अदा करती है। अल्लाह तआला की मेहरबानी से मौसम के कड़े रुख अख्तियार करने से वे बेफिक्र है। नमाजी जहरा कहती है कि जुमेरात और जुमा में वे वक्त से नमाज अदा करती इबादत उसको दिल से अजीज है।



