व्यापम घोटाले में कोर्ट की बड़ी कार्रवाई, फर्जी डॉक्यूमेंट्स से डॉक्टर बने सीताराम शर्मा को 3 साल की जेल

व्यापम घोटाले में कोर्ट की बड़ी कार्रवाई, फर्जी डॉक्यूमेंट्स से डॉक्टर बने सीताराम शर्मा को 3 साल की जेल
भोपाल। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मेडिकल सीट हासिल करने वाले एक शासकीय डॉक्टर को कोर्ट ने शुक्रवार को सजा सुनाई। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अतुल सक्सेना की अदालत ने आरोपित डा सीताराम शर्मा को दोषी करार देते हुए तीन साल के सश्रम कारावास और दो हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।आरोपित सीताराम शर्मा वर्तमान में जिला भिंड के शासकीय चिकित्सालय में चिकित्सा अधिकारी के पद पर पदस्थ है। उन पर आरोप था कि उन्होंने वर्ष 2009 में पीएमटी परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद, प्रदेश के राज्य कोटे का अवैध लाभ लेने के लिए मुरैना जिले की अंबाह तहसील का एक कूटरचित (फर्जी) मूल निवासी प्रमाण पत्र पेश किया था।
आरोपित मूल रूप से उत्तर प्रदेश का निवासी है उसने अपनी हाईस्कूल (1984) और इंटरमीडिएट (2001) की शिक्षा उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद से पूरी की थी। अंबाह तहसील के रिकॉर्ड की जांच करने पर पता चला कि वहां से सीताराम शर्मा के नाम पर कोई मूल निवास प्रमाण पत्र कभी जारी ही नहीं हुआ था।
इस फर्जीवाड़े का खुलासा राज्यसभा सांसद व कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह की उस शिकायत के बाद हुआ था, जिसमें उन्होंने बताया था कि उत्तर प्रदेश के अभ्यर्थी फर्जी दस्तावेजों के जरिए मध्य प्रदेश की मेडिकल सीटों पर कब्जा कर रहे हैं। इस मामले में शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक आकिल खान और सुधाविजय सिंह भदौरिया ने मजबूती से पक्ष रखा।



