मंदसौर जिलासीतामऊ

बच्चों को मोबाइल देकर कार्टून दिखाने के चक्कर में एक दिन मां कार्टून बन जाती- संत श्री विष्णु जी शर्मा

पोरवाल मांगलिक भवन में हिंदू सम्मेलन हुआ संपन्न, बड़ी संख्या में महिला पुरुष उपस्थित रहें

किसी व्यक्ति का जीवन कैसे गुजरा वह ही बता सकता, ऐसे ही संघ का जीवन स्वयं सेवक ही बता सकता,संघ को जानने के लिए शाखा में आना पड़ेगा – श्री तारे

सीतामऊ । हम राम से कभी बाहर नहीं जा सकते हैं। सरस्वती शिशु मंदिर के बच्चों ने जो रामायण कि प्रस्तुति दी।वह ही है जो हमें जीवन जीना सिखाती है उक्त उद्बोधन रामेश्वरम समिति के तत्वाधान में पोरवाल मांगलिक भवन सीतामऊ में आयोजित विशाल हिंदू सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता संघ के पूर्व प्रचारक भालचंद तारें ने व्यक्त किए।

आपने कहा कि किसी भी मनुष्य कि चालीस पचास साल कि आयु हो और वह अपने जीवन का सिंहावलोकन करता है तो उसे लगता है कि कहां से कैसे गुजरें यह वह ही बता सकता है। ठीक वैसे ही संघ को एक स्वयं सेवक ही जान सकता है।संघ को समझना है तो प्रतिदिन शाखा में आना पड़ेगा।

श्री तारें ने कहा कि जब 1925 में डा हेडगेवार ने आर एस एस एसकि स्थापना कि तब आर एस एस को नो NO आर एस एस और अब क्नो KNO हमको पता है आर एस एस कहा जाता है पहले संघ सोशल मीडिया पेज पर पांच हजार आवेदन आते थे अब लाखों आवेदन आए हुए हैं।

श्री तारें ने कहा कि भारत बहुत धन संपत्ति वाला देश है। वहां बहुत सुंदर महिला और गुलाम है उनको लायेंगे। ये सब अफगानिस्तान में एक हजार साल पहले कहा जाता था।

उसी अफगानिस्तान से 3 हजार साल पहले गांधार से कुरुक्षेत्र में सेना लड़ने आयी थी। केराला स्टोरी बंगाल फाइल्स फिल्म स्टोरी देखी है। यह वही अफगानिस्तान है जहां बौद्ध धर्म गुंजा करता था। और आज वहां सब कुछ बदल गया है। आज विश्व लेवल पर दसकों से अमेरिका और रुस रसिया एक दुसरे को ताकतवर दिखाने में लगे हुए हैं।कही न कही लडा़ई चलती रहती है। आज कि लड़ाई दुनिया में एकेश्वरवाद चल रहा है।दुसरी ओर भारत सर्वे भवन्तु सुखिन कि कामना के साथ आगे बढ़ रहा है।

श्री तारें ने कहा कि पुरी दुनिया में भारत हिंदू संस्कृति के साथ आगे बढ़ रहा है एक डॉक्टर अपनी डिग्री लेकर नौकरी करेगा क्लिनिक खोलेगा पर एक डाक्टर जिसने भारत में कि सेवा के लिए हिंदुओं कि सांस्कृतिक कुरुतियों कि बिमारीयों को ठीक करने के लिए 1925 में संघ कि स्थापना कर शुरु किया।

संघ ने तीनों कठिनाईयो को पार किया।पहला उपहास डॉ सा शाखा लगाते तो उनकी मजाक उपहास उड़ाया जाता था।1948 में महात्मा गांधी कि हत्था हुई तो 1975 में इंदिरा गांधी अपने कारणों से हारी तो… 1992 में हिंदुओं ने बाबरी विध्वंस किया तो…वह समय था जब कुछ भी हो तो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर प्रतिबंध लगा दिया जाता था। और अब तक 2025 तक का सफर 100 वर्ष का विभिन्न घटकों अनुषांगिक संगठन को गढ़ते हुए अनुशासन समर्पण के साथ पार किया।

श्री तारें ने कहा कि कोराना कि परिस्थितियां सभी ने देखी थी भाई भाई को छुने को तैयार नहीं था। उस समय पंजाब गुजरात उत्तराखंड कि बाढ़ प्राकृतिक आपदा में संघ के स्वयं सेवकों ने अपनी सेवाएं दी हैं। जब हम अनुशासन छोड़ देते हैं। वैसे कि शरीर कि कोशिकाएं अनुशासन छोड़ देती है तो शरीर में कैंसर बीमारीयां आ जाती है वैसे ही समाज में भी विकृति बढ़ने लगती है।

सम्मेलन को संबोधित करते हुए संत श्री विष्णु जी शर्मा रठाना ने कहा कि आज का यह अद्भुत विराट हिंदू सम्मेलन मानव के मन में दिव्य चेतना जगाने जा रहा है।यह परम पावन कार्य राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा पुरे देश में आयोजित किया जा रहा है।

संत श्री ने कहा कि गुरु के बिना कोई नहीं तर सकता है प्रथम गुरु मां दुसरा पिता तिसरा गुरु शिक्षा देने वाला, जब अच्छा गुरु मिल जाता है तो उसकी जिंदगी तर जाती है। यहां पर भगत सिंह शिवाजी विवेकानंद जी रानी लक्ष्मीबाई के चित्र लगाएं गये ये भी किसी मां के पुत्र थे। बच्चे को धुल से एलर्जी हो जाए ऐसा कह कर खेलने से मत रोकिए अपने भगवान श्री राम कृष्ण भी धुल मे खेलकर बढ़े हुए हैं। बच्चे को भारत मां से जुड़ने दिजिए। वृक्षों को काट कर हम पर्यावरण को क्षति पहुंचाकर पर्यावरण को असंतुलित कर दिया है। चंद्रमा मन और सूर्य पिता तथा यह पृथ्वी रुपनारायण है। इसलिए हमारी प्रकृति कि रक्षा करना भी दायित्व है। एक व्यक्ति को जीवन में सात पौधे लगाने चाहिए। सभी पौधे एक साथ नहीं लगाना है।जिस प्रकार अपने लिए जीवन बीमा कराते हैं और उसकी किस्त भरते हैं ऐसे ही हमें हवा पानी चाहिए तो एक पौधे आने वाले बरसात में लगाएं।आप भोजन करते हैं तो उसमें झूठा नहीं छोड़ना चाहिए।संकट में श्रीकृष्ण ने द्रौपदी की पुकार सुनी और वे तुरंत वहां आ पहुंचे। श्रीकृष्ण ने कहा-मुझे बहुत भुख लगी है द्रोपती ने कहा भोजन तो नहीं बचा क्या करें श्री कृष्ण ने “जरा अपना बर्तन मुझे दिखाओ तो सही।’द्रौपदी उस बर्तन को ले आई। श्रीकृष्ण उस बर्तन को अपने हाथ में लेकर देखा तो उसमें एक चांवल का दाना मिला। भगवान ने एक बचे चांवल से आधे से अपने तृप्त किया और आधे को श्रृष्टि को तृप्त कराया है।

संत श्री ने कहा कि वाणी और पानी का स्तेमाल आवश्यक हो वही करें ज्यादा पानी है तो नल और शावर नल खुला नहीं छोड़ते है। और वाणी जहां आवश्यक है जो बोलना वहीं बोलें एक बार जो बोल दिया वह वापस नहीं हो सकता है। और जीवन भर सामने वाले से झगड़ा हो जाता है।

संत श्री ने बच्चों को मोबाइल फोन नहीं देने को लेकर कहा कि छोटे बच्चों को मोबाइल देकर कार्टून दिखाने के चक्कर में एक दिन मां कार्टून बन जाती है। बच्चों को अच्छी शिक्षा और संस्कार देना चाहिए और अपनी बेटीयों को कम कपड़े पहनने से बचाएं। सोशल मीडिया का जमाना है आप उसी से जुड़े जिसको आप जानती हैं। ऐसे से कभी दोस्ती मत करो कि बाद में मरना पड़े। अपने बच्चे में कुरुती नहीं हो इसलिए समय दिजिए। तुलसी दास जी ने कहा कि व्यक्ति को 24 घंटे में 6 मीनट का समय पुजा के लिए अवश्य देना चाहिए।जब भी पुजा के लिए जाते हैं। किसी से बात नहीं करना है। खुल्ली मुठ्ठी थी तो हम बंद करने के लिए एकत्रित हुए हैं।

इस अवसर पर मातृशक्ति श्रीमती उमा कुंवर ने उपस्थित मातृ-शक्तियों को हमारी संस्कृति और संस्कार पूर्ण जीवन जीने तथा पांच प्रमुख कर्तव्य पर्यावरण, कुटुंब प्रबोधन सामाजिक समरसता स्वदेशी तथा नागरिक कर्तव्यों को लेकर विस्तार से उद्बोधन दिया तथा संकल्प दिलाया।

सम्मेलन के मंच से अतिथियों द्वारा पूर्व सैनिक गणों संयुक्त परिवार समाजसेवा में योगदान सहित गणमान्य जनों को सम्मानित किया गया। सम्मेलन का शुभारंभ गौ माता कि पुजन कर एवं भारत माता कि आरती कर समापन किया गया इस अवसर पर बड़ी संख्या में हिंदू समाज जन मय परिवार के उपस्थित रहें। समारोह का संचालन समाजसेवी मुकेश कारा आभार संयोजक अभिजीत सिंह परिहार ने व्यक्त किया।

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