श्रम संहिता और राज्य सरकार की नीतियों के विरोध में आउटसोर्स,संविदा, ठेका,स्थाई,अस्थाई कर्मियों ने दिया ज्ञापन

श्रम संहिता और राज्य सरकार की नीतियों के विरोध में आउटसोर्स,संविदा, ठेका,स्थाई,अस्थाई कर्मियों ने दिया ज्ञापन
सीटू के साथ नव वर्ष के पहले दिन ही भरी हुंकार, घोषणा पत्र के विरुद्ध कर्मियो के साथ धोखाधड़ी
नीमच दिनांक 1 जनवरी 2026। नए वर्ष के पहले ही दिन संघर्ष का शंखनाद करते हुए नीमच के विभिन्न विभागों में कार्यरत आउटसोर्स, संविदा, ठेका, दैनिक वेतन भोगी, स्थाई और अस्थाई कर्मियों ने भारत सरकार द्वारा लागू श्रम संहिता और मध्य प्रदेश सरकार द्वारा उक्त कर्मियों के विरोध में बनाई गई नीति के विरोध में आज एक ज्ञापन मुख्यमंत्री के नाम स्थानीय कलेक्टर कार्यालय में डिप्टी कलेक्टर श्री पराग जैन को सौपा। उपरोक्त जानकारी देते हुए सीटू के प्रदेश सचिव कामरेड शैलेंद्र सिंह ठाकुर और जिला कार्यकारी अध्यक्ष कामरेड किशोर जवेरिया विद्युत कर्मचारियों के नेता कामरेड रमेश चंद्र गार्सिया ने बताया कि ज्ञात रहे 21 नवंबर को केंद्र सरकार द्वारा मेहनतकश वालों को गुलाम बनाने वाली श्रम संहिता लागू करने की घोषणा की गई है तथा इस श्रम संहिता के क्रियान्वयन का पहला राज्य मध्य प्रदेश बना है। जिसने अपने यहां के इस श्रेणी के लगभग 3 लाख पद समाप्त करने की घोषणा की है तथा आउटसोर्स संविदा और इसी श्रेणी के लोगों को 31 मार्च 2027 तक नौकरी से निकलने का भी शंकास्पद और अमानवीय निर्णय लिया है ।इसी संबंध में आज का ज्ञापन सोपा गया है ।ज्ञापन का वाचन भगवती लाल धनगर ने किया ज्ञापन में लिखा गया है कि विभिन्न समाचार पत्रों के माध्यम से पता चला है कि सरकार द्वारा आउटसोर्स ,संविदा, ठेका सहित स्थाई अन्य और अस्थाई श्रेणी को मार्च 2027 तक समाप्त करने तथा लगभग 3 लाख पद समाप्त करनेका निर्णय लिया है तथा उसके पश्चात इनमें से कुछ लोगों को फिक्स्ड टर्म एम्पलाईमेंट (निश्चित अवधि का रोजगार) देने की बात की गई है ।
कई संविदा, आउटसोर्स और ठेका स्थाई ,अस्थाई या इसी श्रेणी के अन्य लोगो को कार्य करते हुए 20 वर्ष से अधिक हो गए हैं। ऐसी स्थिति में इनके इतने वर्षों की सेवा अवधि का क्या होगा? तथा इन समस्त श्रेणी के लोग इस आस में लगातार कार्य कर रहे थे कि एक न एक दिन वह स्थाई नौकरी पा लेंगे। यहां आपके संज्ञान में एक बात और लाना चाहते हैं भारतीय जनता पार्टी के चुनावी घोषणा पत्र में 81 नंबर के बिंदु पर इसी श्रेणी के लोगों को केंद्र सरकार के समान वेतन और स्थाई करने की बात कही गई थी आज सरकार अपने इस घोषणा पत्र से ही मुकर रही है जो कि कर्मचारियों के साथ धोखाधड़ी, अन्याय ही नहीं अमानवीय भी है। इस संबंध में मांग है कि 1.चार श्रम संहिताएं मध्य प्रदेश में भी लागू नहीं की जाए।2.आउटसोर्स, ठेका, संविदा, दैनिक वेतन भोगी, अंशकालीन, कार्य भारित, ग्राम पंचायत नल चालक, भृत्य, चौकीदार सहित समस्त अस्थाई श्रेणी के लोगों को स्थाई किया जाकर ,उन्हें स्थाई श्रेणी का वेतन दिया जाए एवं अन्य समुचित लाभ भी दिए जाएं 3.वर्तमान में मध्य प्रदेश पश्चिम क्षेत्र व पूर्वी क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी में स्थाई भरती निकाली गई है ।संविदा कर्मचारियों के भांति आउटसोर्स कर्मचारी को भी इस भर्ती में बोनस अंक दिए जाएं ताकि वह भी स्थाई नौकरी पा सके। इस हेतु 1 वर्ष के अनुभव पर तीन अंक दिए जाकर बोनस अंक दिए जाएं । अन्य सभी सरकारी भर्ती में संविदा आउटसोर्स ठेका स्थाई कर्मी एवं अन्य स्थाई श्रेणी के लोगों के लिए यही प्रक्रिया अपनाई जाए। 4.तब तक न्यूनतम वेतन ₹30000 प्रति माह किया जाए।5. निश्चित अवधि के रोजगार की नीति को पूरी तरह समाप्त किया जाए। 6. नीमच नगर पालिका के संविदा कर्मियों को उचित वेतन नहीं दिया जा रहा है इस संबंध में उनकी फाइल नगरी प्रशासन मंत्रालय में 1 वर्ष से लंबी थे तुरंत निराकरण किया जाए।
इस अवसर पर मोहसिन खान,गोपाल बोरीवल, सुनील शर्मा, निरंजन गुप्ता राही, मुकेश नागदा,गुणवंत लाल राठौर,संजय चंदेल, राजेंद्र सिंह, अशफाक खान,मनीष शर्मा विशाल सिंह, मनीष राठौर, मनोहर शर्मा, रमेश बोरासी इत्यादि उपस्थित थे। इसके पूर्व रैली निकाल कर नारेबाजी भी की गई।



