आध्यात्ममंदसौर जिलासीतामऊ

जहां दुखी कलह रुदन है वहां नर्क और जहां आनंद ही आनंद है वहां स्वर्ग है- संत श्री श्वासानंद जी 

जहां दुखी कलह रुदन है वहां नर्क और जहां आनंद ही आनंद है वहां स्वर्ग है- संत श्री श्वासानंद जी 

केसरिया हिंदू वाहिनी सनातन कल्याण समिति द्वारा सेवाभावी जनों का सम्मान किया गया 

सीतामऊ। हमारी नाव माया अभियान धन दौलत सत्ता के नशे से बंधी हुई है।तो पार कैसे पहुंचेगी। पार जाने के लिए धन दौलत माया, पद लोभ अभिमान सभी अज्ञान का ताज लेकर चल रहे हैं।जब तक यह ताज उतार कर ज्ञान से भक्ति का मार्ग पर चलकर ईश्वरत्व कि प्राप्ति कि जा सकती है। उक्त ज्ञानामृत छोटी काशी के पोरवाल मांगलिक भवन में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण कराते हुए संत श्री श्वासानंद जी महाराज ने कहीं।

आपने कहा कि जब मन बिगड़ जाता है तो सबकुछ नष्ट हो जाता है। मन सुधर जाता है तो सबकुछ प्राप्त किया जा सकता है। सत्रह बार जरासंध काल से शरीर को बच गया पर 18 वीं बार बिमारी के शरीर को नहीं बचाया जा सकता है।

राधा कृष्ण का मिलन 11 और 13 वर्ष में जिसे निष्काम भक्ति जहां कोई गलत आचरण पैदा नहीं होता है ऐसा ही भक्ति मार्ग है।

जब यज्ञ समाप्त हुआ तब कृष्ण बलराम ने गुरु आश्रम में प्रवेश किया गुरुदेव को प्रणाम किया।यह समर्पण है नमन तन और मन से समर्पित।

जब यज्ञ समाप्त हुआ तब कृष्ण बलराम ने गुरु आश्रम में प्रवेश किया गुरुदेव को प्रणाम किया।यह समर्पण है नमन तन और मन से समर्पित।

सांदिपनी ने कहा कि मै मथुरा में था और कंश के आतंक से मथुरा छोड़कर उज्जैन आ गये। गुरुदेव ने शिष्य कृष्ण बलराम से वार्तालाप में कहीं।

सेवा ही जीवन का सर्वोपरी है।सास, ससुर पति भगवान, समाज धर्म कि सेवा

पुंडरीक्ष अज्ञानी था उसके पास कुछ नहीं केवल मात्र भक्ति एवं सेवा थी। वह अपने माता-पिता कि सेवा कर अपने काम मजदूरी करने के लिए जाता था। भगवान भक्ति से प्रसन्न होकर उसके घर पहुंचे तो उसने आवाज लगाई तो उसने कहा कि जब मैं माता पिता कि सेवा से निवृत्त हो जाऊंगा तो आपसे मिल जाऊंगा।

कृष्ण सुदामा प्रसंग सुनाते हुए कहा कि जंगल में लकड़ी मौली लेने के लिए गये साथ में गुरु माता ने चने खाने के लिए दिए जंगल में पानी बरसने लगा दोनों पेड़ पर बैठे

मात्र 64 दिन भगवान श्री कृष्ण उज्जैन रहे उन्होंने अल्प समय में सब विद्या प्राप्त कर ली। गुरु माता के पुत्र जगन्नाथ पूरी में समुद्र में डुबकर मर गया।पुर्नदंत का पुनः जन्म देकर गुरु माता को सुपूर्द किया।

काल यवन का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि भगवान ने जनता को काल यवन के आतंक से बचाने के लिए द्वारका बसाई कृष्ण ने दौड़ लगाई और डाकोर में आराम किया जहां पर भगवान का रणछोड़राय का मंदिर है।उस पहाड़ी में कृष्ण बलराम गये जहां एक गुफ़ा में राजा मुचकन्द सो रहे थे उनपर कृष्ण ने अपनी पछेडी डाल दी और छिप गए। कालयवन ने कृष्ण समझ कर लात मारी जैसे राजा मुचकन्द जागें और कालयवन पर पड़ी कालयवन जलकर भस्म हो गया। राजा मुचकन्द खड़े हुए और कृष्ण बलराम के दर्शन किए। और 4500 वर्ष कि भक्ति कर दुसरे जन्म में नागर ब्राह्मण में नरसिंह मेहता नाम से जन्म लिया। उन्होंने भगवान कि राधे कृष्णा नाम कि भक्ति कर भगवान के धाम गए।

प्रभु कि कृपा सदैव बनी रहे तो आपको माता पिता साधु संत भिखारी, गाय कुत्ते सब कि यथा शक्ति सेवा करना चाहिए।

भारत वर्ष का व्यक्ति प्रभु से मांगता ही मांगता है। जबकि पहले से ही प्रारब्ध में पहले से लिखा हुआ वहीं मिलेगा। सब मांगने जाते भगवान से मिलने कोई नहीं जाता है।

रुक्मणी आत्मा और कृष्ण परमात्मा का वरण किया। क्या कहेंगे लोग इसको छोड़ मीरा का कृष्ण से वरण किया। रुक्मणी ने तय किया कि पति होंगे तो कृष्ण से ही यह वरण किया। लड़की देखने जाते हैं तो गुण आचरण देखते हैं केवल सुंदरता नहीं देखते सुंदरता देख कर शादी कर दी तो वह घर को बिगाड़ भी सकतीं हैं। पैसे से सम्मान तुलना नहीं हो सकती है। पुरुष में उत्तम बनना है तो मर्यादा पुरुषोत्तम राम बनना पड़ेगा और आदर्श नारी बनना तो सीता बनना पड़ेगा प्रेम से जुड़ना है तो कृष्ण रुक्मणी बनना पड़ेगा। वरण अगर सही किया था जीवन सुधर जाएगा। नहीं तो जैसी मती वैसी गति पुनः कुत्ते बिल्ली बनकर घूमोगे।

हर काम शांति से करना चाहिए।आज तो पुजारी को भी शांति नहीं कल इतने पैसे आए आज इतने ही आए वह भगवान के पास होते हुए भी दुर है शांति नहीं है। स्वर्ग और नरक यही है जहां दुखी कलह रुदन है। वहीं नर्क और जहां आनंद ही आनंद है वह स्वर्ग है।कथा में सबको आंनद आ रहा है यह स्वर्ग है।

श्रीकृष्ण सुदामा मित्रता,श्री कृष्ण के सात विवाह, जामवंत भोमासुर राक्षस ने 16100 कन्या को बंदी बनाया उन्होंने भगवान से प्रार्थना कि द्वारिकाधीश ने वध कर मुक्त कराया। और कर्म योगेश्वर बनकर उनसे शादीयां कि।सबके दस दस लड़के एक एक लड़की हुई। इतना बड़ा द्वारिकाधीश गुर्जर यदुवंश परिवार था।

सच पर कभी लेप मत लगाओं सौ झूठ से एक सच बोलना अच्छा है। किसी कि बुराई करने में समय मत गंवाओ। एक दिन सच्चाई बाहर आ ही जाती है।वहीं समय अच्छा बोलने अच्छा करने में लगाओ।

कथा के प्रारंभ में पं कृष्ण गोपाल दिक्षित,पं.राधेश्याम जी शर्मा द्वारा वैदिक मंत्रों के साथ हवन पूजन कराया गया इस अवसर पर रोहित सोनी, घनश्याम कामरिया, शंकर राठौड़ ने लाभ लिया इस अवसर सुंदर सुमधुर संगीत भजन व्यवस्था धर्मेंद्र सिंह देवड़ा, आशीष जागा, घनश्याम प्रजापत संतोष जागा द्वारा कि गई।

कथा में झालावाड़ राजस्थान आलोट से आए भक्तों तथा जिला कांग्रेस महामंत्री गोविंद सिंह पंवार, ब्लाक कांग्रेस अध्यक्ष हनुमंत सिंह राठौर, पिछड़ा प्रकोष्ठ अध्यक्ष रमेश चंद्र मालवीया, धर्मेंद्र शर्मा, नपं पूर्व अध्यक्ष श्रीमती हंसा राजेश गिरोठिया मदनलाल प्रजापति तितरोद, भेरुदास बैरागी धामनिया नीमच, दिनेश बैरागी मनासा राजेन्द्र बैरागी जावद सत्यनारायण बैरागी लदुना सहायक सचिव छत्रपाल सिंह राठौर महेश धनगर, हेमंत शर्मा, पप्पूलाल पाटीदार भरत व्यास पोरवाल समाज जनों ने भागवत पुराण ठाकुर जी और संत श्री का स्वागत वंदन अभिनंदन किया।

कथा के अवसर पर केसरिया हिंदू वाहिनी सनातन कल्याण समिति के संस्थापक महंत जितेंद्र दास जी महाराज द्वारा धार्मिक आयोजनों में निरंतर सहयोग प्रदान करने पर साध्वी जयमाला वैष्णवी, साध्वी चंपापुरी, बैरागी वैष्णव समाज नीमच जिलाध्यक्ष श्री भेरुदास बैरागी धामनिया लासुर, दिनेश बैरागी लासुर मनासा, राजेन्द्र बैरागी जावद, पोरवाल समाज संरक्षक दिनेश सेठिया अध्यक्ष कैलाश घाटिया काका वरिष्ठ उपाध्यक्ष लक्ष्मीनारायण मांदलिया वरिष्ठ रामदयाल घाटिया ओदम्बर ब्राह्मण समाज अध्यक्ष श्री नवीन विश्वास द्विवेदी भेरुलाल राठौर सहित सभी सहयोग प्रदान करने वाले को प्रशंसा पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।

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