चतुर्थ समयमान वेतनमान का लाभ मिलने में देरी से शिक्षकों में असंतोष, कलेक्टर से हस्तक्षेप की मांग

चतुर्थ समयमान वेतनमान का लाभ मिलने में देरी से शिक्षकों में असंतोष, कलेक्टर से हस्तक्षेप की मांग
ताल। ब्यूरो चीफ शिवशक्ति शर्मा
ताल-आलोट क्षेत्र के संकुल केंद्रों से जुड़े शिक्षकों के वित्तीय प्रकरणों के निराकरण में हो रही देरी को लेकर शिक्षकों में असंतोष व्याप्त है। शिक्षकों का आरोप है कि वित्तीय कार्यों की वर्तमान व्यवस्था के कारण उनके प्रकरण लंबे समय से लंबित हैं, लेकिन समस्या के समाधान की दिशा में अपेक्षित पहल नहीं हो रही है। ऐसे में क्षेत्र में ही आहरण एवं संवितरण अधिकारी की नियुक्ति किए जाने की मांग उठने लगी है।
जानकारी के अनुसार, ताल-आलोट क्षेत्र के संकुल केंद्रों के वित्तीय प्रकरणों एवं वेतन संबंधी बिलों के निराकरण का दायित्व शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, ढोढर के प्राचार्य को सौंपा गया है। वहीं, संबंधित बाबू के जावरा में कार्यरत होने के कारण वित्तीय कार्यों के समय पर संपादन में कठिनाई आने की बात सामने आई है। इसका खामियाजा क्षेत्र के शिक्षकों को भुगतना पड़ रहा है और उनके विभिन्न वित्तीय प्रकरण लंबित बने हुए हैं।
चतुर्थ समयमान वेतनमान का लाभ अब तक नहीं
क्षेत्र के संकुल केंद्रों से जुड़े कर्मचारियों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिले के अन्य क्षेत्रों में शिक्षकों को चतुर्थ समयमान वेतनमान का लाभ दिया जा चुका है, जबकि ताल-आलोट के संकुल केंद्रों से संबंधित प्रकरण अब तक लंबित बताए जा रहे हैं। इससे प्रभावित शिक्षकों में नाराजगी है। उनका कहना है कि जब जिले के अन्य क्षेत्रों में यह प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, तो ताल-आलोट के शिक्षकों को लाभ मिलने में देरी क्यों हो रही है?
जिला शिक्षा अधिकारी से संपर्क नहीं होने की शिकायत
शिक्षकों की समस्या के निराकरण के लिए जिला शिक्षा अधिकारी से दूरभाष पर संपर्क करने का प्रयास किए जाने के बावजूद संपर्क नहीं हो पाने की शिकायत भी सामने आई है। बताया गया है कि इस समस्या से क्षेत्रीय विधायक चिंतामणि मालवीय को भी अवगत कराया गया था, लेकिन अभी तक कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया है।
कलेक्टर से हस्तक्षेप की उम्मीद
अब क्षेत्र के शिक्षकों की निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं। शिक्षकों की मांग है कि कलेक्टर रतलाम मामले का संज्ञान लेकर लंबित वित्तीय प्रकरणों के शीघ्र निराकरण के लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दें। साथ ही, ताल-आलोट क्षेत्र में ही आहरण एवं संवितरण अधिकारी की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि शिक्षकों को अपने वित्तीय कार्यों के लिए अनावश्यक विलंब और परेशानियों का सामना न करना पड़े।
अब सवाल यह है कि क्या जिला प्रशासन शिक्षकों की इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए लंबित प्रकरणों का शीघ्र निराकरण कराएगा और ताल-आलोट में ही आहरण एवं संवितरण अधिकारी की व्यवस्था करने की दिशा में ठोस कदम उठाएगा?



