एक ऐसा शहर जहां भोलेबाबा कि भक्ति का 03 से 04 पीढ़ी से चढ़ा हुआ रंग, लगभग 150 वर्षों से निरंतर भक्तों का बाबा से अटूट नाता है

छोटी काशी वैद्यनाथ धाम पर शिव महिम्न स्तोत्र पाठ का हुआ विश्राम भक्तों ने लगाया महादेव को छप्पन भोग
सीतामऊ। छोटी काशी के वैद्यनाथ धाम पर प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी देवाधिदेव महादेव का अभिषेक पूजन एवं शिव महिम्न स्तोत्र पाठ मंडली के भक्तों द्वारा पूरे श्रावण मास किया गया। पाठ के विश्राम का आयोजन 29 अगस्त शनिवार को रात्रि में महादेव का मनमोहक श्रंगार किया गया तथा सर्वे भवंतु सुखिन् सर्वे संतु निरामया…कि कामना के साथ बाबा भोलेनाथ और बालाजी महाराज को छप्पन भोग लगाकर शिव महिम्न स्तोत्र पाठ कर महाआरती कर महाप्रसादी वितरण कि गई।
इस अवसर पर वरिष्ठ शांतिलाल सोनी सोहनलाल सर कंठाली प्रकाश नीम कैलाश साकी, सत्यनारायण सोनी काका,जीवन नीमा, गोपाल नीमा , महेश नीमा आशीष नीमा, विशाल राठौर संजय नीमा मितांशु सोनी प्रकाश राठौड़ सागर राठौर गौरव राठौर नवदीप चंचावत, मनीष नेमा निलेश डोशी, गोपाल साकी, कैलाश घाटिया काका लक्ष्मीनारायण मांदलिया, सिद्धार्थ सोनी सचिन सोनी सुनील परमार, प्रदीप चौरड़िया, हेमंत जैन, आदि भक्तों जनों सहित मातृशक्ति नागरिक उपस्थित रहें।
उल्लेखनीय है कि छोटी काशी के नाम से जाना जाने वाला यह नगर केवल शिक्षा से ही नहीं बल्कि सनातन शिव वैष्णव धर्म का केंद्र रहा है ऐसी जनश्रुति है कि यहां पर भोलेनाथ शिव के अनन्य उपासकों कि तप साधना स्थली होने से नगर को छोटी काशी नाम से जाना जाने लगा। यहां पर शिव मंदिर सहित पांच मंदिरों के बारे में कहा जाता है कि भोलेनाथ के तपस्वीयों ने इस स्थान को तप साधना के लिए सुरक्षित मान कर मंदिरों कि बाहर से लाकर स्थापना कि थी।उन मंदिरों में नगर के महावीर चौक स्थित बाबा वैद्यनाथ महादेव मंदिर भी है।
भक्तों ने बताया कि भगवान भोलेनाथ से हमारा अटुट नाता है यहां पर तीन से चार पीढी़ लगभग 150 से अधिक वर्षों से भगवान देवाधिदेव महादेव कि भक्ति कि जारी है। यह पीढ़ी कि एक मंडली है जो निरंतर बाबा कि सेवा में लगी रहती है।यही नहीं प्रतिवर्ष श्रावण मास में शिव बाबा कि अभिषेक पूजा अर्चना तथा शिव महिम्न स्तोत्र पाठ किया जाता है तथा श्रावण के अंतिम दिवस के पश्चात महिम्न स्तोत्र पाठ विश्राम पर भोलेनाथ को छप्पन भोग महाआरती का आयोजन किया जाता है।



