संत मिलन हो जाए तो प्रभु दर्शन होना ही हैः पं. श्री कृष्ण वल्लभ शास्त्री

संत मिलन हो जाए तो प्रभु दर्शन होना ही हैः पं. श्री कृष्ण वल्लभ शास्त्री
महर्षि विश्वामित्र के प्रसंग के साथ श्रीराम कथा के षष्टम दिवस का हुआ समापन
मंदसौर। श्री विश्वमंगल बालाजी एवं आयोजन समिति के तत्वावधान में पद्मावती रिसोर्ट के सामने स्थित श्री विश्व मंगल बालाजी मंदिर, नानेश नगर, इंदिरा कॉलोनी में भागवत विचार संस्थान के सानिध्य में आयोजित नौ दिवसीय श्रीराम कथा के षष्टम दिवस कथा का आयोजन श्रद्धा और भक्ति के साथ हुआ। कथा व्यास मालवा स्वामी भागवतभूषणाचार्य पं. श्री कृष्ण वल्लभ शास्त्री ने श्रद्धालुओं को महर्षि विश्वामित्र, भगवान श्रीराम एवं लक्ष्मण के प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन सुनाया।
पं. श्री कृष्ण वल्लभ शास्त्री ने कहा कि “संत मिलन हो जाए तो प्रभु दर्शन होना ही है।” उन्होंने कहा कि जहां यज्ञ और तप होते हैं, वहां उनकी पवित्रता भंग करने के लिए मारीच और सुबाहु जैसे राक्षस उपद्रव करते थे। यज्ञ की पवित्रता और विधि-विधान का वर्णन करते हुए उन्होंने बताया कि प्राचीन समय में यज्ञ मंडप की विशेष व्यवस्था की जाती थी तथा यज्ञ में प्रवेश के लिए भी शुद्धता के नियमों का पालन किया जाता था। कथा प्रसंग में उन्होंने बताया कि महर्षि विश्वामित्र अपने यज्ञ को मारीच और सुबाहु के उपद्रव से बचाने के लिए अयोध्या पहुंचे और राजा दशरथ से भगवान श्रीराम एवं लक्ष्मण को अपने साथ भेजने का आग्रह किया। महर्षि की बात सुनकर राजा दशरथ व्याकुल हो गए और अपने प्रिय पुत्र राम को उनके साथ भेजने में संकोच करने लगे। राजा दशरथ के मोह को देखकर महर्षि विश्वामित्र क्रोधित हुए। तब कुलगुरु महर्षि वशिष्ठ ने राजा दशरथ को समझाया कि महर्षि विश्वामित्र स्वयं दिव्य अस्त्र-शस्त्रों के ज्ञाता हैं और उनके साथ जाने से श्रीराम का ही कल्याण होगा। इसके बाद भगवान श्रीराम और लक्ष्मण महर्षि विश्वामित्र के साथ यज्ञ की रक्षा के लिए प्रस्थान करते हैं। कथा के दौरान सरयू नदी के तट पर महर्षि विश्वामित्र द्वारा भगवान श्रीराम और लक्ष्मण को ‘बला’ एवं ‘अतिबला’ जैसी दिव्य विद्याएं प्रदान किए जाने का भी भावपूर्ण वर्णन किया गया। इन विद्याओं के प्रभाव से उन्हें थकान, भूख-प्यास आदि से सुरक्षा प्राप्त होती थी।
कथा के षष्टम दिवस के समापन पर श्रद्धालु भगवान श्रीराम के भजनों में भाव-विभोर नजर आए। पूरे कथा पंडाल में जय श्रीराम के जयकारे गूंजते रहे। आयोजन समिति एवं श्री विश्व मंगल बालाजी के भक्तों ने बताया कि परम पवित्र श्रावण मास के पुनीत अवसर पर श्री विश्व मंगल बालाजी की असीम कृपा से नौ दिवसीय श्रीराम कथा का आयोजन किया जा रहा है।
प्रसिद्ध कथा व्यास पं. श्री कृष्ण वल्लभ शास्त्री मालवा स्वामी के मुखारविंद से प्रतिदिन दोपहर 1 बजे से शाम 5 बजे तक श्रीराम कथा की अमृतवाणी प्रवाहित हो रही है। आयोजक समिति ने समस्त श्रद्धालुओं से अपने परिवार एवं मित्रों के साथ अधिक से अधिक संख्या में कथा में पधारकर धर्मलाभ लेने का आग्रह किया है।



