थैलेसीमिया मरीजों के लिए सुविधाओं के विस्तार की उम्मीद, भोपाल की बैठक में नीमच से उठीं अहम मांगें

20 बच्चों का बोन मैरो ट्रांसप्लांट करा चुका है नीमचकी संस्था , सुरक्षित रक्त, नि:शुल्क स्क्रीनिंग और टेली-कंसल्टेशन की मांग
नीमच। थैलेसीमिया, सिकल सेल, हीमोफीलिया एवं अन्य हीमोग्लोबिनोपैथी से पीड़ित मरीजों को बेहतर उपचार और आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने को लेकर भोपाल में प्रदेश स्तरीय महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई। उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल की अध्यक्षता में हुई बैठक में इन गंभीर रक्त संबंधी बीमारियों की रोकथाम, समय पर जांच, सुरक्षित रक्त की उपलब्धता और उपचार सुविधाओं के विस्तार पर विशेष रूप से चर्चा हुई।
बैठक में थैलेसीमिया वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष थैलेसीमिया जन जागरण समिति के प्रदेश संरक्षक सत्येंद्र सिंह राठौड़ ने नीमच सहित प्रदेश के थैलेसीमिया मरीजों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए। उन्होंने मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ भविष्य में बीमारी की रोकथाम के लिए युवाओं की स्क्रीनिंग और विवाह पूर्व जांच को आवश्यक रूप से बढ़ावा देने का सुझाव दिया। स्वास्थ्य मंत्री ने इन सुझावों को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया।
थैलेसीमिया आई एम सिकल सेल वेलफेयर सोसाइटी नीमच द्वारा 20 सै अधिक बच्चों का बोन मैरो ट्रांसप्लांट
बैठक के दौरान नीमच में थैलेसीमिया मरीजों के लिए किए जा रहे कार्यों की जानकारी भी साझा की गई। संस्था अब तक 20 सै अधिक बच्चों का बोन मैरो ट्रांसप्लांट कराया जा चुका है। यह उपलब्धि थैलेसीमिया से जूझ रहे बच्चों और उनके परिवारों के लिए बड़ी राहत का विषय है।
बोन मैरो ट्रांसप्लांट थैलेसीमिया के उपयुक्त मरीजों के लिए बीमारी के उपचार की महत्वपूर्ण संभावनाओं में से एक है। ऐसे में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को भी BMT post केयर का लाभ मिल सके, इसके लिए सरकारी स्तर पर सहायता और सुविधाओं का विस्तार करने की मांग बैठक में रखी गई।
युवाओं की नि:शुल्क स्क्रीनिंग पर जोर
राठौड़ ने सुझाव दिया कि थैलेसीमिया की रोकथाम के लिए प्रदेशभर में युवाओं की नि:शुल्क स्क्रीनिंग कराई जाए। साथ ही विवाह पूर्व थैलेसीमिया जांच को लेकर व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जाए।
समय रहते जांच होने से व्यक्ति को अपनी स्थिति की जानकारी मिल सकती है और परिवार भी भविष्य में बच्चों में बीमारी के संभावित जोखिम को लेकर उचित चिकित्सकीय सलाह ले सकते हैं। इसके लिए स्कूल, कॉलेज और युवा वर्ग तक स्क्रीनिंग एवं जागरूकता कार्यक्रम पहुंचाने की आवश्यकता बताई गई।
मरीजों को मिले NAT टेस्टेड सुरक्षित रक्त एवं फ़िल्टर
थैलेसीमिया मरीजों को नियमित रूप से रक्त की आवश्यकता होती है। इसलिए बैठक में मरीजों को फिलटर एवं सुरक्षित रक्त उपलब्ध कराने की मांग भी प्रमुखता से रखी गई।
राठौड़ ने सुझाव दिया कि प्रदेश में नियमित रक्त चढ़ाने वाले थैलेसीमिया मरीजों के लिए रक्त की सुरक्षा और गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। सुरक्षित रक्त की उपलब्धता मरीजों के नियमित उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
बोन मैरो ट्रांसप्लांटपोस्ट केयर को सरकारी नीति में शामिल करने का सुझाव
बैठक में यह भी सुझाव दिया गया कि बोन मैरो ट्रांसप्लांट केसाथ साथ post care के लिए भी सरकारी सहायता की व्यवस्था को और मजबूत किया जाए तथा पात्र मरीजों को आर्थिक कारणों से उपचार से वंचित न होना पड़े। सरकार की स्वास्थ्य नीति में शामिल किया जाए.
नीमच में अब तक 20 बच्चों के बोन मैरो ट्रांसप्लांट कराए जाने का उदाहरण सामने रखते हुए यह भी बताया गया कि उचित सहयोग और सरकारी सहायता मिलने पर अधिक बच्चों को इस उपचार का लाभ मिल सकता है।
हर जिले को हीमेटोलॉजिस्ट से जोड़ने की मांग
राठौड़ ने मध्यप्रदेश के सभी जिलों में उपलब्ध हीमेटोलॉजिस्ट विशेषज्ञों को एक नेटवर्क से जोड़ने का सुझाव भी दिया। इसके साथ ही हीमेटोलॉजिस्ट टेली-कंसल्टेशन सुविधा शुरू करने की मांग रखी गई।
इस व्यवस्था से ऐसे जिलों के मरीजों को विशेष लाभ मिलेगा जहां विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियमित उपलब्धता नहीं है। जिला स्तर के चिकित्सक आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञों से ऑनलाइन परामर्श ले सकेंगे और मरीजों को समय पर उचित उपचार संबंधी मार्गदर्शन मिल सकेगा।
राष्ट्रीय स्तर पर भी उठते रहे हैं मरीजों के मुद्दे
सत्येंद्र सिंह राठौड़ ने बैठक में थैलेसीमिया वेलफेयर सोसाइटी द्वारा अब तक किए गए कार्यों, राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित सेमिनारों तथा मरीजों से जुड़े मुद्दों की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि संस्था लगातार थैलेसीमिया मरीजों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने और बीमारी के प्रति समाज में जागरूकता बढ़ाने के लिए प्रयासरत है।
बैठक में थैलेसीमिया इंडिया के अध्यक्ष दीपक चोपड़ा सचिव शोभा तुली मैंम और स्टेट नोडल ऑफिसर एवं डिप्टी डायरेक्टर एनएचएम डॉ. रूबी खान सहित संबंधित विशेषज्ञ एवं प्रतिनिधि मौजूद रहे।
नीमच के प्रयासों को प्रदेश स्तर पर पहचान
नीमच जिले में थैलेसीमिया मरीजों के उपचार और सहयोग की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। अब प्रदेश स्तर पर सुरक्षित रक्त, नि:शुल्क स्क्रीनिंग, विवाह पूर्व जांच, बोन मैरो ट्रांसप्लांट के लिए सरकारी सहायता और विशेषज्ञों की टेली-कंसल्टेशन सुविधा जैसे सुझावों पर अमल होता है तो इसका लाभ नीमच सहित पूरे मध्यप्रदेश के थैलेसीमिया मरीजों को मिल सकता है।
हीमोग्लोबिनोपैथी की स्टेट लेवल मीटिंग में संकल्प से समाधान शीर्षक पर
बैठक में स्वास्थ्य मंत्री द्वारा दिए गए आश्वासन से थैलेसीमिया मरीजों और उनके परिवारों में बेहतर उपचार सुविधाओं को लेकर उम्मीद जगी है।



