मध्यप्रदेशरतलाम

समाचार मध्यप्रदेश रतलाम 12 अगस्त 2026 बुधवार

स्वतंत्रता दिवस समारोह के लिए विभागीय अधिकारियों ने पुलिस लाइन मैदान परेड ग्राउंड का निरीक्षण किया

15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के जिला स्तरीय समारोह का आयोजन पुलिस लाइन मैदान परेड ग्राउंड पर किया जाना है। वर्षा ऋतु के मद्देनजर जिला प्रशासन के अधिकारी एवं विभागीय अधिकारियों ने पुलिस लाइन मैदान परेड ग्राउंड का निरीक्षण कर आवश्यक दिशा निर्देश दिए।

निरीक्षण के दौरान पुलिस अधीक्षक श्री अमित कुमार, एडीएम श्री बृजेंद्र कुमार रावत, एडिशनल एसपी श्री विवेक कुमार, एसडीएम श्री तरुण जैन, एस डी एम आर्ची हरित, नगर निगम आयुक्त श्री अनिल भाना एवं अन्य अधिकारी/कर्मचारी उपस्थित रहे।

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जनसुनवाई व्यवस्था में बड़ा बदलाव, अब हर विभाग में हर मंगलवार होगी जनसुनवाई : कलेक्टर श्री अजय कटेसरिया

अब जिला मुख्यालय आने की आवश्यकता नहीं, स्थानीय स्तर पर ही सुनी जाएंगी समस्याएं और होगा त्वरित निराकरण

आमजन को उनकी समस्याओं के निराकरण के लिए जिला मुख्यालय तक अनावश्यक रूप से आने की परेशानी से राहत दिलाने तथा प्रशासन को नागरिकों के अधिक निकट लाने के उद्देश्य से कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी श्री अजय कटेसरिया ने जिले में जनसुनवाई व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। अब प्रत्येक मंगलवार को प्रातः 11:00 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक जिले के सभी जिला स्तरीय, अनुविभागीय, तहसील, विकासखण्ड, जनपद पंचायत, नगरीय निकाय एवं अन्य शासकीय कार्यालयों में विकेन्द्रीकृत जनसुनवाई आयोजित की जाएगी।

कलेक्टर श्री अजय कटेसरिया ने जारी आदेश में कहा है कि शासन द्वारा नागरिकों की समस्याओं एवं शिकायतों के त्वरित, प्रभावी एवं संवेदनशील निराकरण के लिए प्रत्येक मंगलवार जनसुनवाई आयोजित करने के निर्देश पूर्व से प्रभावशील हैं। जिले में अब तक जिला मुख्यालय पर केंद्रीकृत जनसुनवाई की व्यवस्था प्रचलित थी, लेकिन इसकी समीक्षा में यह पाया गया कि दूरस्थ ग्रामीण एवं नगरीय क्षेत्रों से आने वाले नागरिकों को अपनी समस्या रखने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी। इससे समय, धन एवं श्रम की अनावश्यक हानि होती थी। विशेष रूप से किसानों, श्रमिकों, महिलाओं, वृद्धजनों, दिव्यांगजनों एवं आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों को अतिरिक्त कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।

कलेक्टर श्री कटेसरिया ने बताया कि जिला स्तरीय जनसुनवाई में प्राप्त अधिकांश आवेदन अंततः निराकरण के लिए संबंधित विभाग, अनुविभाग, तहसील, जनपद पंचायत, नगरीय निकाय अथवा मैदानी कार्यालयों को ही भेजे जाते हैं। ऐसे में पहले नागरिकों को जिला मुख्यालय बुलाकर आवेदन प्राप्त करना और बाद में उसी आवेदन को संबंधित कार्यालय भेजना प्रशासन एवं नागरिक दोनों के समय और संसाधनों का सर्वोत्तम उपयोग नहीं है। इसलिए अब स्थानीय स्तर पर ही समस्याओं के समाधान को प्राथमिकता दी जाएगी।

जारी निर्देशों के अनुसार प्रत्येक कार्यालय प्रमुख स्वयं जनसुनवाई में उपस्थित रहेंगे तथा नागरिकों से आवेदन प्राप्त कर यथासंभव मौके पर ही उनका निराकरण करेंगे। अपरिहार्य परिस्थिति में सक्षम वरिष्ठ अधिकारी को अधिकृत किया जाएगा। प्रत्येक कार्यालय में जनसुनवाई का स्थान स्पष्ट रूप से निर्धारित किया जाएगा तथा सूचना-पटल पर “जनसुनवाई – प्रत्येक मंगलवार, प्रातः 11:00 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक” प्रदर्शित किया जाएगा। साथ ही स्थानीय स्तर पर इसका व्यापक प्रचार-प्रसार भी सुनिश्चित किया जाएगा।

जनसुनवाई में प्राप्त प्रत्येक आवेदन का निर्धारित पंजी में पंजीयन किया जाएगा तथा आवेदक को पावती प्रदान की जाएगी। आवेदन पर की गई कार्रवाई, उसकी वर्तमान स्थिति एवं अंतिम निराकरण का पूरा अभिलेख संधारित किया जाएगा। जिन मामलों का समाधान संबंधित अधिकारी के स्तर पर संभव होगा, उनका निराकरण उसी स्तर पर प्राथमिकता से किया जाएगा तथा अनावश्यक रूप से आवेदन जिला मुख्यालय अथवा उच्च कार्यालयों को प्रेषित नहीं किए जाएंगे। केवल ऐसे प्रकरण, जिनमें जिला स्तर पर निर्णय, विभिन्न विभागों के समन्वय, नीतिगत मार्गदर्शन अथवा कलेक्टर स्तर के हस्तक्षेप की आवश्यकता होगी, उन्हें समुचित प्रतिवेदन सहित जिला कार्यालय भेजा जाएगा।

कलेक्टर श्री कटेसरिया ने कहा कि वर्तमान में राज्य शासन द्वारा संचालित “जनविश्वास” कार्यक्रम के अंतर्गत प्रत्येक शुक्रवार अधिकारी मैदानी क्षेत्रों में पहुंचकर नागरिकों से प्रत्यक्ष संवाद कर उनकी समस्याओं का निराकरण कर रहे हैं। इसी भावना के अनुरूप मंगलवार की जनसुनवाई को भी नागरिकों के निकटतम सक्षम कार्यालय में प्रभावी बनाया जा रहा है, जिससे प्रशासन और जनता के बीच सीधा संवाद मजबूत होगा तथा शिकायतों का समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण निराकरण सुनिश्चित किया जा सकेगा।

उन्होंने अनुविभागीय अधिकारियों (राजस्व) एवं जिला अधिकारियों को अपने अधीनस्थ कार्यालयों में जनसुनवाई व्यवस्था की नियमित समीक्षा एवं सतत पर्यवेक्षण के निर्देश दिए हैं। जिला स्तर से भी विकेन्द्रीकृत जनसुनवाई की नियमित मॉनिटरिंग की जाएगी तथा आवश्यकता अनुसार अधिकारियों की उपस्थिति एवं आवेदनों के निराकरण की स्थिति का आकस्मिक सत्यापन कराया जाएगा। अनावश्यक विलंब अथवा केवल एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय में आवेदन अग्रेषित करने की प्रवृत्ति स्वीकार नहीं की जाएगी।

कलेक्टर श्री अजय कटेसरिया ने स्पष्ट किया कि किसी भी नागरिक को ऐसे कार्य के लिए जिला मुख्यालय आने हेतु बाध्य नहीं किया जाएगा, जिसका निराकरण संबंधित तहसील, अनुविभाग, विकासखण्ड, नगरीय निकाय अथवा विभागीय कार्यालय के स्तर पर किया जा सकता है। जनसुनवाई के दौरान नागरिकों के साथ शिष्ट, संवेदनशील एवं सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित करने के साथ बैठने, पेयजल एवं अन्य आवश्यक मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था भी अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराई जाएगी।

कलेक्टर श्री अजय कटेसरिया ने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य नागरिकों को कार्यालयों के चक्कर लगवाना नहीं, बल्कि शासन एवं प्रशासन को नागरिकों के अधिक निकट पहुंचाकर सुशासन, पारदर्शिता और जनविश्वास को मजबूत करना है। इससे आमजन की समस्याओं का स्थानीय स्तर पर त्वरित एवं प्रभावी समाधान सुनिश्चित होगा तथा प्रशासनिक व्यवस्था अधिक उत्तरदायी और जनहितैषी बनेगी।

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पीएम विश्वकर्मा लाभार्थियों के लिए एक दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम 12 अगस्त को

योजना के लाभार्थियों को मिलेगी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और एक्सपोर्ट की जानकारी

भारत सरकार, एमएसएमई मंत्रालय, एमएसएमई विकास कार्यालय इंदौर के द्वारा जिला प्रशासन रतलाम के सहयोग से पीएम विश्वकर्मा लाभार्थियों के लिए एक दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन शासकीय आईटीआई रतलाम के सभागृह में 12 अगस्त 2026 को सुबह 10 बजे से किया जाएगा।

कार्यक्रम में पीएम विश्वकर्मा स्कीम में रजिस्टर्ड लाभार्थी सीधे उपस्थित होकर भाग ले सकते हैं, जिसके लिए पीएम विश्वकर्मा आईडी कार्ड लाना अनिवार्य होगा।

कार्यक्रम के दौरान पीएम विश्वकर्मा लाभार्थियों को उद्यमिता, वित्तीय सहायता, ईकॉमर्स, केंद्र एवं राज्य शासन की योजनाओं, ट्रेनिंग, टूल किट आदि विषयों के साथ विशेष रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) एवं एक्सपोर्ट की जानकारी प्रदान की जाएगी। कार्यक्रम में एमएसएमई विकास कार्यालय इंदौर, जिला व्यापार उद्योग केंद्र, अग्रणी बैंक अधिकारी, भारतीय डाक, हथकरघा विभाग, शासकीय आईटीआई विभागों के अधिकारियों के द्वारा जानकारी दी जाएगी एवं साथ ही विभिन्न समस्याओं का भी निराकरण किया जाएगा।

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साप्ताहिक जनसुनवाई में 87 आवेदनों पर हुई सुनवाई

कलेक्टर कार्यालय रतलाम में मंगलवार को आयोजित साप्ताहिक जनसुनवाई में जिलेभर से आए नागरिकों की समस्याएं सुनीं तथा प्राप्त आवेदनों पर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।

जनसुनवाई के दौरान कुल 87 आवेदन प्राप्त हुए। जनसुनवाई में प्राप्त निराकरण योग्य प्रकरणों का मौके पर ही संबंधित विभागीय अधिकारियों से समाधान कराया गया। शेष आवेदनों के त्वरित एवं समय-सीमा में निराकरण के लिए संबंधित विभागों को निर्देशित किया गया।

जनसुनवाई के दौरान अशोक नगर निवासी श्रीमती यास्मीन ने अपने पुत्र के विद्यालय से स्थानांतरण प्रमाण पत्र दिलाने संबंधी आवेदन प्रस्तुत किया। आवेदन पर जिला शिक्षा अधिकारी को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए।

ग्राम सीखेड़ी निवासी श्रीमती देव कुंवर ने अपने पति की मृत्यु के पश्चात मुख्यमंत्री जनकल्याण संबल योजना के अंतर्गत अनुग्रह सहायता राशि स्वीकृत कराने हेतु आवेदन दिया। इस प्रकरण के निराकरण के लिए मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत रतलाम को निर्देशित किया गया।

ग्राम कलालिया निवासी श्री जगदीशनाथ ने भूमि अभिलेखों में पिता के नाम के संशोधन के संबंध में आवेदन प्रस्तुत किया। इस प्रकरण पर आवश्यक कार्रवाई के लिए अनुविभागीय अधिकारी राजस्व, जावरा को निर्देशित किया गया।

जनसुनवाई में विभिन्न विभागों से संबंधित राजस्व, शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा, पंचायत तथा अन्य नागरिक समस्याओं के आवेदन प्राप्त हुए, जिनके शीघ्र एवं गुणवत्तापूर्ण निराकरण के लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए गए।

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युवा संगम रोजगार एवं अप्रेन्टिसशिप मेला 12 अगस्त को आईटीआई रतलाम में

अधिक से अधिक युवा पहुंचकर रोजगार का लाभ उठाएं

जिला रोजगार अधिकारी श्री अभिषेक कटारा ने बताया कि तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार विभाग, मंत्रालय भोपाल एवं सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय, भोपाल द्वारा युवा संगम जिला स्तरीय रोजगार, स्वरोजगार एवं प्रधानमंत्री नेशनल अप्रेन्टिसशिप मेले का आयोजन 12 अगस्त 2026 को शासकीय आईटीआई रतलाम, सैलाना रोड रतलाम में किया जाएगा।

जिसमें 08 से 10 निजी क्षेत्र की कम्पनियों द्वारा अप्रेन्टिसशिप, मुख्यमंत्री सीखो कमाओ योजना अंतर्गत एवं अन्य रिक्त पदों पर भर्ती की जाएगी। साथ ही, युवा संगम मेले में प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना, प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना एवं मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के संबंध में मार्गदर्शन भी उपलब्ध कराया जाएगा।

युवा संगम रोजगार मेले में कम्पनियों द्वारा मशीन ऑपरेटर, सेल्स एग्जीक्यूटिव, बिजनेस डेवलपमेंट मैनेजर, सुपरवाईजर, स्टोरकीपर, फाइनेंशियल एडवाईजर, ट्रेनी, सेल्समैन आदि अनेक पदों पर सीधी भर्ती की जाएगी। युवा संगम रोजगार मेले में भाग लेने के लिए शैक्षणिक योग्यता 10वीं उत्तीर्ण से स्नातक एवं आईटीआई एवं आवेदकों की आयु 18 से 35 वर्ष तक होनी चाहिए।

युवा संगम रोजगार मेले में भाग लेने वाली कम्पनियों में श्री गणेश फुटवियर, एच.डी.एफ.सी. इंश्योरेंस रतलाम, कृषि दर्पण एग्रो प्राईवेट लिमिटेड उज्जैन, प्रतिमा स्वराज लिमिटेड उज्जैन, कवच ग्लोबल कनेक्ट प्रा. लि. अहमदाबाद, पेरेनियल प्राईवेट लि. पुणे, लेनोवो प्रा. लिमिटेड इन्दौर आदि शामिल हैं।

युवा संगम रोजगार मेले में भाग लेने वाली कम्पनियों में श्री गणेश फुटवियर, एच.डी.एफ.सी. इंश्योरेंस रतलाम, कृषि दर्पण एग्रो प्राईवेट लिमिटेड उज्जैन, प्रतिमा स्वराज लिमिटेड उज्जैन, कवच ग्लोबल कनेक्ट प्रा. लि. अहमदाबाद, पेरेनियल प्राईवेट लि. पुणे, लेनोवो प्रा. लिमिटेड इन्दौर आदि शामिल हैं।

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दस्तक अभियान के दोरान गंभीर कुपोषित बच्चे को मिला उपचार

आज रतलाम जिले के विकासखंड बाजना के ग्राम संदला में दस्तक अभियान के अंतर्गत मॉनिटरिंग एवं डाटा सत्यापन का कार्य किया जा रहा था। इस दौरान संभागीय समन्वयक श्री आशीष पुरोहित, DCM श्री कमलेश मुड़ेल एवं BPM श्री मोइन अंसारी द्वारा बच्चों के डाटा एवं स्वास्थ्य स्थिति का पुनः परीक्षण किया गया।

डाटा एवं पूर्व की दस्तक गतिविधियों की जानकारी के सत्यापन के दौरान 09 माह के बच्चे मुन्ना पिता राहुल की स्वास्थ्य स्थिति पर विशेष ध्यान दिया गया। पूर्व में ANM द्वारा दस्तक अभियान के दौरान बच्चे की जांच की गई थी, जिसमें बच्चा गंभीर कुपोषित एवं निर्जलीकरण की स्थिति में पाया गया था। बच्चे की गंभीर स्थिति को देखते हुए DSS टूल के माध्यम से उसे उच्च स्वास्थ्य संस्था/NRC में रेफर करने के लिए परिवार को आवश्यक सलाह दी गई थी। हालाकि परिवार के सदस्य बच्चे का स्थानीय स्तर पर उपचार करने का प्रयास करते रहे।

मॉनिटरिंग के दौरान जब टीम ने बच्चे का पुनः परीक्षण किया तो बच्चा गंभीर रूप से कुपोषित, अत्यंत सुस्त एवं चिंताजनक स्वास्थ्य स्थिति में प्रतीत हुआ। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए टीम ने तत्काल परिवार से चर्चा की।

परिवार को समझाया गया कि बच्चे को विशेषज्ञ चिकित्सकीय देखभाल, पोषण उपचार एवं नियमित निगरानी की आवश्यकता है, जो NRC में उपलब्ध हो सकती है। लगातार समझाइश एवं परामर्श के बाद बच्चे को NRC में भर्ती कराने के लिए सहमत हुईं।

NRC बाजना में चिकित्सक डॉ. पीयूष मंगरिया द्वारा बच्चे की विस्तृत स्वास्थ्य जांच एवं आवश्यक परीक्षण किए गए तथा बच्चे का उपचार तत्काल प्रारंभ किया गया।

मॉनिटरिंग टीम की तत्परता से बच्चे को समय पर उपचार मिल सका, जो गंभीर कुपोषण से जूझ रहे बच्चों के स्वस्थ भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

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वर्ष 2025-26 में लोक निर्माण विभाग ने हासिल की महत्वपूर्ण उपलब्धियां

लोक निर्माण विभाग संभाग रतलाम से प्राप्त जानकारी अनुसार वर्ष 2025-26 में जिले में सड़क निर्माण के क्षेत्र में विभिन्न कार्य पूर्ण किए गए हैं। रविदास चौक से करमदी तक 4.30 कि.मी. की लंबाई का फोरलेन मार्ग, जिसका निर्माण 30 करोड़ 91 लाख रुपये की लागत से पूर्ण किया गया है। सी.आर.आई.एफ. योजना अंतर्गत जावरा-कालूखेड़ा-ढोढर 23.00 कि.मी. की लंबाई का मार्ग, जिसका निर्माण 37 करोड़ 34 लाख रुपये की लागत से पूर्ण किया गया है।

रतलाम शहर के आंतरिक मार्ग के उन्नयन कार्य के अंतर्गत राम मंदिर से कॉमर्स कॉलेज तक 1.86 कि.मी. लंबाई के मार्ग का निर्माण 9 करोड़ 28 लाख रुपये की लागत से पूर्ण किया गया है। उंकाला रोड गणेश मंदिर से सालाखेड़ी फोरलेन तक 1.20 कि.मी. लंबाई के फोरलेन मार्ग का निर्माण 6 करोड़ 40 लाख रुपये की लागत से पूर्ण किया गया है।

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जावरा विधानसभा क्षेत्र में पशु चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार हेतु 80 लाख रुपये की स्वीकृति

जावरा, असावती और रानीगांव में बनेंगे नवीन पशु चिकित्सालय भवन

जावरा विधानसभा क्षेत्र के सर्वांगीण विकास के लिए संकल्पित विधायक डॉ. राजेन्द्र पांडेय के प्रयासों से निरंतर विकास की सौगात मिल रही है। पशु पालकों की सुविधाओं के लिए क्षेत्र में तीन स्थानों पर लगभग 80 लाख रुपये की लागत से पशु चिकित्सालयों के नवीन भवनों की सौगात मिली है। इन चिकित्सालयों के भवनों की मांग लम्बे समय से की जा रही थी।

उल्लेखनीय है कि विधायक डॉ पांडेय द्वारा जावरा विधानसभा क्षेत्र में विभिन्न क्षेत्रों में सुविधाओं के विस्तार के लिए प्राथमिकता से प्रयास किये जा रहे है। पशु पालकों की कठिनाई के दृष्टिगत जर्जर पशु चिकित्सालयों व औषधालयों के भवनों की स्वीकृति के लिए लम्बे समय से प्रयास किये जा रहे है। इसी कड़ी में विधानसभा क्षेत्र में तीन स्थानों पर पशु चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार हेतु 80 लाख की स्वीकृति प्रदान की गई है। जिसमें पशु चिकित्सालय जावरा, पशु औषधालय असावती एवं पशु औषधालय रानीगांव के नवीन भवन निर्माण के लिए राशि स्वीकृत की गई है।

उल्लेखनीय है कि जावरा विधानसभा क्षेत्र में विधायक डॉ पांडेय के प्रयासों से विगत वर्षों में 10 स्थानों पर पशु औषधालयों के भवन स्वीकृत हुए थे। जो जावरा विकासखण्ड में गोंदीधर्मसी, बण्डवा, पिपल्याजोधा, धतरावदा, रिंगनोद, जावरा चिकित्सालय में अतिरिक्त कक्ष, पिपलौदा विकासखण्ड में उपरवाड़ा, बडायला चौरासी, सुजापुर तथा मावता में निर्माण किये जाकर संचालित किए जा रहे है।

नए भवनों के निर्माण से जावरा क्षेत्र सहित आसपास के ग्रामीण इलाकों के पशुपालकों को बेहतर एवं सुविधाजनक पशु चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध हो सकेंगी।

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जिले में अब तक 421.75 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज

जिले में इस वर्ष अब तक औसतन 421.75 मि.मी. वर्षा दर्ज की गयी है। जबकि पिछले 24 घन्टों में रतलाम जिले में 40.0 मिमी वास्तविक वर्षा दर्ज की गई है।

पिछले 24 घन्टों में आलोट में 53.00 मि.मी., जावरा में 46.00 मि.मी., ताल में 36.0 मि.मी., पिपलोदा में 45.0 मि.मी., बाजना में 34.0 मि.मी., रतलाम में 50.0 मि.मी., रावटी में 21.0 मि.मी. एवं सैलाना में 35.0 मि.मी., वास्तविक वर्षा दर्ज की गई है।

विगत 1 जून से अब तक वर्षामापक केन्द्र आलोट में 469.0 मि.मी., जावरा में 443.0 मि.मी., ताल में 335.0 मि.मी., पिपलोदा में 480.0 मि.मी., बाजना में 298.0 मि.मी., रतलाम में 585.0 मि.मी., रावटी में 346.0 मि.मी. एवं सैलाना में 418.0 मि.मी., वास्तविक वर्षा दर्ज की गई है।

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मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने जिले के 36 हजार 652 पेंशन के हितग्राहियों को 2 करोड़ 20 लाख 70 हजार रूपये का हितलाभ प्रदान किया

मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने मंत्रालय भोपाल से राज्य शासन की पेंशन योजनाओं के लगभग 35 लाख से अधिक हितग्राहियों को माह जुलाई 2026 पेड इन अगस्‍त, 2026 की कुल राशि रूपये 211.53 करोड़ का हितलाभ वितरण सिंगल क्लिक के माध्यम से किया। जिसका सीधा प्रसारण वेबकास्ट के माध्यम से किया गया। कलेक्ट्रेट सभा कक्ष में कलेक्‍टर श्री अजय कटेसरिया एवं हितग्राहियों ने देखा और सुना।

उपसंचालक सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग रतलाम ने बताया कि जिले में मुख्यमंत्री कन्या अभिभावक पेंशन योजना अंतर्गत 1398 हितग्राहियों को 600 रुपए प्रतिमाह के मान से 8 लाख 38 हजार रुपए, बहु मानसिक आर्थिक सहायता योजना अंतर्गत 1143 हितग्राहियों को 6 लाख 85 हजार रुपए, सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना अंतर्गत 9926 हितग्राहियों को 59 लाख 55 हजार रुपए, मुख्यमंत्री कल्याणी पेंशन योजना अंतर्गत 24170 हितग्राहियों को 1 करोड़ 45 लाख 2 हजार रुपए तथा मुख्यमंत्री अविवाहित पेंशन योजना अंतर्गत 15 हितग्राहियों को 90 हजार रुपए की राशि का वितरण किया गया है। इस प्रकार जिले में कुल 36652 हितग्राहियों को विभिन्न पेंशन योजनाओं के तहत कुल 2 करोड़ 20 लाख 70 हजार की राशि का वितरण किया गया है।

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साझी संस्कृति, शांति, पारस्परिक सम्मान और समावेशी विकास के संकल्प के साथ ब्रिक्स संस्कृति सम्मेलन बना ऐतिहासिक

साझा ब्रिक्स डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मिलेगी सांस्कृतिक कलाकारों की रचनात्मक जानकारी
विश्व धरोहर स्थल घोषित करने के लिए यूनेस्को में ब्रिक्स देश भेजेगा साझा नामांकन
ब्रिक्स संस्कृति सम्मेलन 2026 में अपनाया गया भोपाल घोषणा पत्र
मध्यप्रदेश के पर्यटन स्थल और सांस्कृतिक विरासत को देख अभिभूत हुए ब्रिक्स प्रतिनिधिमंडल, साझा किए अपने अनुभव
ब्रिक्स सांस्कृतिक महोत्सव रहा अद्भुत तो प्रोजेक्ट मौसम, बृहत्तर भारत और ज्ञान भारतम् की प्रदर्शनियां बनीं आकर्षण का केंद्र

11वीं ब्रिक्स संस्कृति मंत्रियों की बैठक और ब्रिक्स संस्कृति कार्य समूह (CWG) के सम्मेलनों का भोपाल में सफल समापन हो चुका है। ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ की शाश्वत भारतीय भावना और भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता की मुख्य थीम “लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण” (Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability) के संकल्प के साथ आयोजित इस तीन दिवसीय वैश्विक समागम ने अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति और सांस्कृतिक सहयोग का एक नया इतिहास रच दिया है। कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में संपन्न हुए इस बहुपक्षीय सम्मेलन ने साबित किया कि जब वैश्विक स्तर पर संस्कृति, परंपरा और रचनात्मकता आपस में जुड़ती हैं, तो वे भौगोलिक सीमाओं से परे शांति, परस्पर सम्मान और समावेशी विकास का एक स्थायी ढांचा तैयार करती हैं।

इस ऐतिहासिक आयोजन की पूर्व संध्या से लेकर समापन तक, भोपाल की धरा पर वैश्विक सहयोग का एक अभूतपूर्व दृश्य देखने को मिला। सम्मेलन में भारत सहित कुल 14 देशों के 55 उच्चस्तरीय प्रतिनिधि शामिल हुए। इनमें 10 ब्रिक्स सदस्य देश—ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात के साथ चार साझेदार देश बेलारूस, क्यूबा, कजाकिस्तान और थाईलैंड शामिल हुए। सम्मेलन की भव्यता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इंडोनेशिया, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात के संस्कृति मंत्रियों ने स्वयं भोपाल पहुंचकर इस विचार-विमर्श का नेतृत्व किया, जबकि मिस्र के संस्कृति मंत्री ने ऑनलाइन माध्यम से अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई।

यह आयोजन भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत संस्कृति क्षेत्र के अंतर्गत अपनाई गई एक अत्यंत सुव्यवस्थित और चरणबद्ध प्रक्रिया की ऐतिहासिक परिणति रहा। इस यात्रा की शुरुआत 29–30 अप्रैल 2026 को वर्चुअल माध्यम से आयोजित पहली ब्रिक्स संस्कृति कार्य समूह की बैठक से हुई थी। इसके पश्चात 4–5 जून को सांस्कृतिक नगरी वाराणसी में दूसरी कार्य समूह की बैठक आयोजित हुई, जिसमें नीतिगत प्राथमिकताओं का खाका खींचा गया। 5–6 अगस्त को भोपाल में संपन्न हुई तीसरी कार्य समूह की बैठक ने मंत्री-स्तरीय वार्ताओं का आधार तैयार किया। इन गहन और बहुस्तरीय विचार-विमर्शों का सफल समापन 8 अगस्त 2026 को 11वीं ब्रिक्स संस्कृति मंत्रियों की बैठक और सर्वसम्मति से ‘भोपाल घोषणा पत्र’ को अंगीकार किए जाने के साथ हुआ।

‘साझा ब्रिक्स डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मिलेगी सांस्कृतिक कलाकारों की रचनात्मक जानकारी

भोपाल सम्मेलन की दूरगामी और ऐतिहासिक सफलताओं में से एक भारत द्वारा प्रस्तुत ‘स्वैच्छिक कलाकार रजिस्ट्री’ का प्रस्ताव रहा, जिसे सभी सहभागी देशों ने सर्वसम्मति से स्वीकार किया। भारत द्वारा शुरू की गई यह पायलट पहल एक ‘साझा ब्रिक्स डिजिटल प्लेटफॉर्म’ के रूप में आकार लेगी। यह डिजिटल प्लेटफॉर्म ब्रिक्स देशों के बीच सांस्कृतिक संबंधों को केवल सरकारी स्तर तक सीमित न रखकर, उन्हें सीधे कलाकारों, विचारकों, शिल्पकारों और रचनात्मक उद्यमियों से जोड़ने का एक मजबूत संस्थागत जरिया बनेगा।

इस एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म से ब्रिक्स सदस्य देशों और साझेदार राष्ट्रों के कलाकारों की एक वृहद निर्देशिका (डायरेक्टरी) तैयार की जाएगी। साथ ही इस मंच पर सांस्कृतिक एवं रचनात्मक उद्योगों से जुड़ी नीतियां, दुर्लभ पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण, ऐतिहासिक स्थापत्य विरासत की जानकारी और रचनात्मक पद्धतियों का साझा दस्तावेजीकरण उपलब्ध रहेगा।

यह पहल ब्रिक्स देशों के बीच ज्ञान, तकनीकी संसाधनों और उत्कृष्ट सांस्कृतिक प्रथाओं के त्वरित और पारदर्शी आदान-प्रदान को अभूतपूर्व गति देगी। इसके माध्यम से सदस्य देशों के कलाकार न केवल एक-दूसरे के अनुभवों से सीख सकेंगे, बल्कि डिजिटल साधनों का उपयोग करके वैश्विक बाजारों तक सीधी पहुंच भी प्राप्त करेंगे। यह व्यवस्था ब्रिक्स देशों के रचनात्मक क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा करने, पेशेवर नेटवर्क को सुदृढ़ करने और वास्तविक अर्थों में जन-से-जन (People-to-People) संपर्क को गहरा करने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम सिद्ध होगी।

विश्व धरोहर स्थल घोषित करने के लिए यूनेस्को में ब्रिक्स देश भेजेगा साझा नामांकन

वैश्विक सांस्कृतिक परिदृश्य पर अपनी साझी पहचान को सशक्त रूप से स्थापित करने के उद्देश्य से, सम्मेलन में भारत द्वारा रखे गए दूसरे प्रमुख प्रस्ताव पर भी ऐतिहासिक सहमति बनी। इसके तहत ब्रिक्स देश अब यूनेस्को (UNESCO) की विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने के लिए अपनी साझा स्थापत्य, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक परंपराओं का संयुक्त या बहुराष्ट्रीय (Multinational) नामांकन दाखिल करेंगे।

यह पहल उन ऐतिहासिक और सभ्यतागत कड़ियों को वैश्विक मंच पर उजागर करेगी जो सदियों से सीमाओं के पार ब्रिक्स राष्ट्रों को आपस में जोड़ती रही हैं। संयुक्त नामांकन के इस सहयोगात्मक दृष्टिकोण से न केवल बहुपक्षीय सांस्कृतिक कूटनीति को मजबूती मिलेगी, बल्कि परस्पर संबद्ध विरासतों के संरक्षण और प्रबंधन में अंतरराष्ट्रीय सहयोग भी बढ़ेगा।

साझा धरोहरों के संरक्षण की इस भावना को आगे बढ़ाते हुए ‘भोपाल घोषणा पत्र’ में गैर-कानूनी रूप से हटाई गई या तस्करी की गई सांस्कृतिक संपदा के उद्गम-अनुसंधान और उनकी सुरक्षित वापसी व पुनर्स्थापन पर विशेष सहमति व्यक्त की गई है। इसके लिए आधुनिक तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित ट्रैकिंग टूल्स का उपयोग करने की संभावनाओं पर बल दिया गया है। इसके अलावा, पीढ़ियों से चली आ रही पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों, पारम्परिक सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों की सुरक्षा और संग्रहालयों, पुस्तकालयों और अभिलेखागारों के डिजिटलीकरण से दस्तावेजी विरासत को भावी पीढ़ियों के लिए सुरक्षित करने का संकल्प लिया गया है।

ब्रिक्स संस्कृति सम्मेलन-2026 में अपनाया गया ‘भोपाल घोषणा पत्र’

भोपाल में 8 अगस्त 2026 को अपनाया गया ‘भोपाल घोषणा पत्र’ (Bhopal Declaration) बहुपक्षीय वार्ताओं और गहन चर्चाओं का एक ठोस, व्यावहारिक और भविष्य-उन्मुख परिणाम है। यह घोषणा पत्र केवल एक औपचारिक दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह आगामी वर्षों में ब्रिक्स देशों के बीच सांस्कृतिक सहयोग, विरासत संरक्षण, डिजिटल नवाचार और रचनात्मक अर्थव्यवस्था को गति देने वाला एक सुस्पष्ट और रणनीतिक रोडमैप प्रस्तुत करता है।

घोषणा पत्र की प्रमुख प्राथमिकताओं में सांस्कृतिक एवं रचनात्मक उद्योगों को सतत विकास और आर्थिक समृद्धि का प्रमुख चालक मानना शामिल है। इसके माध्यम से ब्रिक्स देशों ने सांस्कृतिक नीतियों को आधुनिक अर्थव्यवस्था के साथ जोड़ने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। इसमें कलाकारों के अधिकारों के संरक्षण और वर्तमान डिजिटल युग की चुनौतियों से निपटने के लिए ठोस दिशा-निर्देश तय किए गए हैं। विशेष रूप से, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) प्रणालियों में कॉपीराइट संरक्षित कृतियों के उपयोग में पूर्ण पारदर्शिता बरतने और रचनाकारों को उनके बौद्धिक श्रम का उचित और न्यायसंगत पारिश्रमिक दिलाना इस घोषणा पत्र का एक प्रमुख बिंदु है।

यह ऐतिहासिक दस्तावेज ब्रिक्स देशों के प्रमुख सांस्कृतिक संस्थानों—संग्रहालयों, पुस्तकालयों और अभिलेखागारों—के बीच सीधी साझेदारी और विशेषज्ञता साझा करने का एक स्थायी ढांचा तैयार करता है। ‘भोपाल घोषणा पत्र’ ने यह स्पष्ट किया है कि ब्रिक्स देशों का सांस्कृतिक एजेंडा अब आवधिक बैठकों से आगे बढ़कर परिणाम-उन्मुख और संस्थागत सहयोग की ओर मजबूती से बढ़ चुका है।

मध्यप्रदेश के पर्यटन स्थल और सांस्कृतिक विरासत को देख अभिभूत हुए ब्रिक्स प्रतिनिधिमंडल, साझा किए अपने अनुभव

अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के औपचारिक सत्रों के साथ ब्रिक्स प्रतिनिधिमंडलों के लिए सांस्कृतिक भ्रमण और आतिथ्य कार्यक्रम इस आयोजन का एक बेहद जीवंत और यादगार अध्याय रहा। प्रतिनिधियों ने भोपाल स्थिति इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय का भ्रमण कर भारत की समृद्ध जनजातीय, लोक जीवन और सभ्यतागत यात्रा का अवलोकन किया। इसके उपरांत भोपाल की ऐतिहासिक हेरिटेज वॉक के दौरान प्रतिनिधियों ने गौहर महल, इकबाल मैदान और मोती मस्जिद के अद्वितीय वास्तुशिल्प को निहारा और वन विहार की समृद्ध जैव-विविधता एवं बड़ा तालाब में शिकारा सैर का अविस्मरणीय आनंद लिया।

प्रतिनिधिमंडल के लिए यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों सांची और भीमबेटका का भ्रमण ज्ञानवर्धक और अद्भुत रहा। केंद्रीय संस्कृति मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत के नेतृत्व में 42 सदस्यीय दल ने सांची के महान बौद्ध स्तूपों, तोरण द्वारों पर उकेरी गई प्राकृत संरचना और संग्रहालय का गहनता से अवलोकन किया। संध्या समय प्रतिनिधियों ने भव्य लाइट एंड साउंड शो के माध्यम से भगवान बुद्ध के जीवन-दर्शन और शांति व करुणा के संदेश को प्रत्यक्ष महसूस किया। वहीं, 9 अगस्त को प्रतिनिधियों ने यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल भीमबेटका के प्रागैतिहासिक शैलाश्रयों की यात्रा की। दक्षिण अफ्रीका, इंडोनेशिया, रूस, चीन सहित विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों ने हजारों वर्ष पुराने प्रागैतिहासिक शैलचित्रों को देखकर मानव सभ्यता के क्रमिक विकास और प्रारंभिक मानव जीवन के दुर्लभ प्रमाणों का साक्षात्कार किया।

मध्यप्रदेश की कालजयी विरासत और आतिथ्य से अभिभूत होकर ब्रिक्स प्रतिनिधियों ने अपने अनुभव साझा किए:

श्री फदली ज़ोन (संस्कृति मंत्री, इंडोनेशिया) ने सांची के विशाल स्तूपों और भीमबेटका के प्राचीन शैलचित्रों के अपने अनुभव को विस्मयकारी और अत्यंत समृद्ध बताया।

श्री जुआन कार्लोस मार्सन (राजदूत, क्यूबा) ने ‘भोपाल घोषणा पत्र’ को वैश्विक सांस्कृतिक संबंधों के क्षेत्र में एक मील का पत्थर बताते हुए कहा कि सांची और भीमबेटका की विरासत संपूर्ण मानवता के लिए एक अमूल्य धरोहर है।

डॉ. ओमिद बाबेलियन (ईरान दूतावास) ने भोपाल के झीलों के सौंदर्य, बेगमों के ऐतिहासिक स्थापत्य, सांची के शांति संदेश और वर्षा की फुहारों के बीच भीमबेटका के शैलचित्रों के इस सुंदर दौरे के लिए मध्यप्रदेश सरकार और यहाँ के निवासियों का हृदय से आभार प्रकट किया।

श्री लुकास गोडॉय विलेयला बारबोसा (सहायक, आर्थिक शासन प्रभाग, विदेश मंत्रालय, ब्राजील) ने कहा कि भीमबेटका के शैलाश्रयों को प्रत्यक्ष देखना एक अद्वितीय अनुभव रहा, जहाँ यह स्पष्ट दिखता है कि मानव सभ्यता और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों की निरंतरता कितनी गहरी और प्राचीन रही है।

सुश्री क्लिऑन नोआह (निदेशक, बहुपक्षीय एवं संसाधन विभाग, दक्षिण अफ्रीका) ने भोपाल के लोगों के मित्रवत व्यवहार, आतिथ्य और लजीज व्यंजनों की भरपूर सराहना की। उन्होंने सांची के बौद्ध स्तूपों और भीमबेटका के प्राचीन चित्रों को देखना अपनी जीवन यात्रा का एक बेहद महत्वपूर्ण और यादगार क्षण बताया।

इस ऐतिहासिक अवसर पर मध्यप्रदेश सरकार की ओर से प्रतिनिधियों को अद्वितीय आतिथ्य प्रदान किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा 8 अगस्त को कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में दोपहर के भोजन और सांची में रात्रिभोज का आयोजन किया गया। इन अवसरों ने प्रतिनिधियों के बीच अनौपचारिक बातचीत, सौहार्द और व्यक्तिगत मित्रता के नए तार जोड़े। सम्मेलन के समानांतर केंद्रीय संस्कृति मंत्री तथा संस्कृति सचिव स्तर पर विभिन्न प्रतिभागी देशों के साथ कई महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठकें भी हुईं, जिनमें परस्पर सांस्कृतिक सहयोग को बढ़ाने पर सार्थक सहमति बनी।

ब्रिक्स सांस्कृतिक महोत्सव रहा अद्भुत तो ‘प्रोजेक्ट मौसम’, ‘बृहत्तर भारत’ और ‘ज्ञान भारतम्’ प्रदर्शनियां बनीं आकर्षण का केंद्र

भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के अंतर्गत, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा 6–7 अगस्त 2026 को भोपाल के ऐतिहासिक रवींद्र भवन में दो दिवसीय भव्य ‘ब्रिक्स सांस्कृतिक महोत्सव’ का आयोजन किया गया। इस महोत्सव ने विभिन्न प्रतिभागी देशों की सांगीतिक और कलात्मक विधाओं के माध्यम से वैश्विक विविधता में एकता का एक अद्वितीय दृश्य प्रस्तुत किया।

महोत्सव में बेलारूस, ब्राजील, इंडोनेशिया, रूस और संयुक्त अरब अमीरात के कलाकारों ने अपनी पारंपरिक लोक एवं शास्त्रीय प्रस्तुतियां देकर दर्शकों को मुग्ध कर दिया। भारत की ओर से राजस्थान की विश्व प्रसिद्ध लोक नृत्य प्रस्तुति ‘मारू के रंग’ का मंचन किया गया, जिसने भारत के जीवंत लोक रंगों को वैश्विक मंच पर बिखेर दिया।

महोत्सव का सबसे भावुक और भव्य क्षण ‘ब्रिक्स पीस सॉन्ग’ की सामूहिक प्रस्तुति रही। इसमें प्रतिभागी देशों के कलाकारों ने अपनी-अपनी राष्ट्रीय भाषाओं में भारतीय लोकाचार के अमर मंत्र ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ का समवेत गायन किया। वहीं भारतीय गान-वृंद ने संबंधित देशों की भाषाओं में इस शांति मंत्र को दोहराकर सांस्कृतिक संवाद की एक अद्भुत मिसाल कायम की।

मध्यप्रदेश संस्कृति विभाग द्वारा निर्मित 35 मिनट की भव्य नृत्य-नाट्य प्रस्तुति ‘अमृतस्य मध्यप्रदेश: भारत के हृदय की एक नृत्य-नाट्य यात्रा’ इस सांस्कृतिक महोत्सव का सबसे बड़ा आकर्षण रही। 125 से अधिक कुशल कलाकारों द्वारा शास्त्रीय, लोक और जनजातीय नृत्य शैलियों के संगम से तैयार की गई इस प्रस्तुति ने राज्य की प्रागैतिहासिक काल से लेकर आधुनिक युग तक की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक यात्रा को जीवंत कर दिया। इसमें ‘ओंकार – सृष्टि की शुरुआत’, महाकालेश्वर, ओंकारेश्वर, राजा भोज की नगरी, मां नर्मदा की पावन धारा तथा आगामी सिंहस्थ महाकुंभ-2028 की सांस्कृतिक चेतना को उन्नत कोरियोग्राफी और इमर्सिव मल्टीमीडिया तकनीकों के साथ प्रस्तुत किया गया।

सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ-साथ, सम्मेलन स्थल कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर और मिंटो हॉल परिसर में भारत की सभ्यतागत विरासत और वैश्विक संपर्कों को उजागर करने वाली तीन विशेष प्रदर्शनियां आयोजित की गईं, जो आगंतुकों और प्रतिनिधियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनी रहीं।

प्रोजेक्ट मौसम (Project Mausam): इस प्रदर्शनी ने हिंद महासागर के समुद्री मार्गों के माध्यम से भारत के प्राचीन व्यापारिक, सांस्कृतिक और सभ्यतागत संपर्कों को प्रभावशाली ढंग से प्रदर्शित किया।

बृहत्तर भारत (Greater India): इसने दक्षिण-पूर्व एशिया और विश्व के विभिन्न हिस्सों में भारतीय कला, स्थापत्य, दर्शन और संस्कृति के ऐतिहासिक प्रभाव और प्रसार को रेखांकित किया।

ज्ञान भारतम् (Gyan Bharatam): इस प्रदर्शनी ने भारत की प्राचीन पांडुलिपियों, वैज्ञानिक खोजों, खगोलशास्त्र और सदियों पुरानी मौखिक ज्ञान परंपराओं का एक विस्तृत परिदृश्य प्रस्तुत किया।

इन तीनों प्रदर्शनियों ने ब्रिक्स प्रतिनिधियों को यह समझने का गहरा अवसर दिया कि भारत की संस्कृति सदैव से ज्ञान, शांति और वैश्विक कल्याण की पक्षधर रही है।

भोपाल की धरा से “सर्वे भवन्तु सुखिनः” का वैश्विक संदेश

भोपाल में संपन्न हुए 11वें ब्रिक्स संस्कृति मंत्रियों के इस ऐतिहासिक समागम ने यह स्पष्ट किया है कि सांस्कृतिक कूटनीति अब केवल औपचारिक आयोजनों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अंतर्राष्ट्रीय संबंधों को नई गहराई और स्थिरता देने वाला एक सशक्त माध्यम बन चुकी है।

अप्रैल 2026 में वर्चुअल वार्ताओं से प्रारंभ होकर, जून में वाराणसी के आध्यात्मिक क्षितिज से गुजरती हुई, अगस्त में भोपाल की ऐतिहासिक और प्राकृतिक धरा पर ‘भोपाल घोषणा पत्र’ के रूप में संपन्न हुई यह यात्रा बहुपक्षीय सहयोग की एक मिसाल बन गई है। ‘स्वैच्छिक कलाकार रजिस्ट्री’ जैसा संस्थागत ढांचा, यूनेस्को का साझा एजेंडा, AI और डिजिटल तकनीक का न्यायसंगत उपयोग तथा उच्चस्तरीय सांस्कृतिक आदान-प्रदान इस बात के प्रमाण हैं कि भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स संस्कृति ट्रैक ने नीतिगत और व्यावहारिक दोनों स्तरों पर दूरगामी परिणाम हासिल किए हैं।

भोपाल सम्मेलन ने न केवल मध्यप्रदेश की समृद्ध पर्यटन और ऐतिहासिक धरोहर को दुनिया के मानचित्र पर नई चमक दी है, बल्कि ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ के अमर संदेश को संपूर्ण विश्व में प्रसारित कर वैश्विक शांति, पारस्पारिक सम्मान और साझी संस्कृति का एक मजबूत रोडमैप प्रस्तुत किया है।

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बलराम कृषि महोत्सव को सांस्कृतिक उत्सव के रूप में मनाएं : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की स्वतंत्रता दिवस एवं अन्य पर्वों के आयोजन की तैयारियों की समीक्षा

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि बलराम कृषि महोत्सव सिर्फ किसानों का नहीं, यह हमारी भारतीय कृषि संस्कृति का उत्सव है। इसीलिए इसे एक सांस्कृतिक पर्व के रूप में मनाया जाए। इन दिनों प्रदेश में सभी जिलों में बलराम कृषि महोत्सव मनाया जा रहा है। जिसमें उन्नत कृषि पर केंद्रित प्रदर्शनी भी लगाई जा रही है। बड़ी संख्या में किसानों और ग्रामीणों की इसमें सहभागिता इस बात का प्रतीक है कि किसान स्वप्रेरणा से इस महोत्सव से जुड़ रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि संस्कृति विभाग बलराम कृषि महोत्सव में विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियां आयोजित कर किसानों की बड़ी संख्या में उपस्थिति का लाभ उठाए और उन्हें मनोरंजक तरीके से हमारी संस्कृति और सरकार की उपलब्धियों के बारे में बताया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस सहित आगामी सभी पर्व पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाए जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को मंत्रालय में स्वतंत्रता दिवस और अन्य पर्वों से जुड़ी तैयारियों की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रावण मास चल रहा है। कांवड़िये शिवालयों की तरफ बढ़ रहे हैं। इनके सहज आवागमन, भोजन, पानी, सुरक्षा सभी के लिए व्यापक प्रबंध किए जाएं। कांवड़ियों को कोई कठिनाई नहीं हो।

14 अगस्त को मनाया जाएगा भारत विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस

अपर मुख्य सचिव गृह विभाग श्री संजय कुमार शुक्ल ने बैठक में बताया कि 14 अगस्त को वंदेमातरम् 150 वर्ष समारोह एवं भारत विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस मनाया जाएगा। इस दिन शौर्य स्मारक में एक ‘चित्र प्रदर्शनी’ आयोजित की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव इस प्रदर्शनी का शुभारंभ कर इसका अवलोकन भी करेंगे। इस अवसर पर शौर्य स्मारक में ही प्रवासी भारतीय और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महत्वपूर्ण योगदान को रेखांकित करती ‘प्रवासी सेनानी वीथी’ का लोकार्पण मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा किया जाएगा। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री इसी स्थान से पुलिस बल की तिरंगा बाईक रैली को हरी झंडी दिखाकर इस रैली को रवाना करेंगे। रैली की शुरुआत शौर्य स्मारक से होकर विभिन्न मार्ग होते हुए इसका समापन भी शौर्य स्मारक में ही होगा।

स्वतंत्रता दिवस पर सुबह शौर्य स्मारक में पुष्पांजलि और शाम को रविन्द्र भवन में मनेगा आजादी का महापर्व

अपर मुख्य सचिव श्री शुक्ल ने बताया कि स्वतंत्रता दिवस अवसर पर सुबह 8.30 बजे शौर्य स्मारक भोपाल में मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा शौर्य स्मारक स्थित शहीद स्तम्भ पर पुष्प चक्र एवं भारतमाता की मूर्ति पर पुष्पांजलि अर्पित की जाएगी। इसी दिन शाम 6.30 बजे रवीन्द्र भवन के हंसध्वनि सभागार में मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उपस्थिति में आजादी का महापर्व कार्यक्रम मनाया जाएगा। इसमें सुप्रसिद्ध पार्श्व गायिका श्रीमती कविता कृष्णमूर्ति और उनके दल द्वारा सांगीतिक प्रस्तुति दी जाएगी।

28 अगस्त को मनाया जाएगा रक्षाबंधन

अपर मुख्य सचिव संस्कृति श्री शिव शेखर शुक्ला ने बताया कि 28 अगस्त को रक्षा पर्व के रूप में रक्षाबंधन बनाया जाएगा। इस वर्ष यह सामाजिक संबंधों के राष्ट्रीय पर्व के रूप में मनाया जाएगा। इस दिन मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री निवास में लाड़ली बहनों से रक्षा सूत्र बंधवाएंगे। साथ ही इस दिन सभी वरिष्ठजन समाज के कमजोर वर्गों, जरूरतमंदों और निराश्रितों की रक्षा करने का भाव लेकर उनसे रक्षा सूत्र बंधवाएंगे।

2 सितम्बर को मनाई जाएगी बलराम जयंती

अपर मुख्य सचिव श्री शुक्ला ने बताया कि 2 सितम्बर को बलराम जयंती मनाई जाएगी। इस दिन संस्कृति विभाग द्वारा कृषि संबंधी पारम्परिक कलारूपों की प्रस्तुतियां, खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा ग्रामीण अंचलों में खेल-कूद प्रतियोगिता तथा किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग द्वारा कृषि संबंधी आधुनिक उपकरण, खाद, बीज और औषधि केन्द्रित प्रदर्शनी, सह-संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

‘श्रीकृष्ण पर्व’

अपर मुख्य सचिव संस्कृति श्री शुक्ला ने बताया कि संस्कृति विभाग द्वारा 29 अगस्त से 6 सितम्बर तक प्रदेश भर में ‘श्रीकृष्ण पर्व’ मनाया जाएगा। इसमें 29 अगस्त से 4 सितम्बर तक रविन्द्र भवन में सात दिवसीय श्री रासलीला समारोह जैसे अन्य आयोजन भी किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि श्रीकृष्ण पर्व के दौरान प्रदेश के 101 स्थानों पर श्रीकृष्ण की लीलाओं पर आधारित सांस्कृतिक गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने श्रीकृष्ण पर्व से जुड़ी गतिविधियों में स्कूल शिक्षा विभाग, जनजातीय कार्य विभाग और नगरीय निकायों को भी शामिल करने और इनका सहयोग लेने के निर्देश दिए।

‘श्रीकृष्ण पर्व’ के दौरान होने वाली गतिविधियों का स्वरुप

अपर मुख्य सचिव श्री शुक्ल ने बताया कि श्रीकृष्ण पर्व आयोजन के दौरान प्रदेश में श्रीकृष्ण की लीलाओं और प्रसंगों से जुड़े 25 स्थलों में उस स्थल से जुड़े हुए प्रसंग/आख्यान के अनुसार कलाकारों की प्रस्तुति, लीला केन्द्रित गतिविधियां, श्रीकृष्ण से जुड़े विभिन्न प्रसंगों पर नृत्य-नाट्य प्रस्तुतियाँ एवं भगवान बलराम-श्रीकृष्ण केन्द्रित भक्ति गायन कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके अलावा श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर संबंधित जिला प्रशासन के अंतर्गत आने वाले सभी कृष्ण मंदिरों, मठों, देवालयों का विशेष श्रृंगार एवं अन्य सार्वजनिक स्थानों में स्वच्छता अभियान भी चलाया जाएगा। इसके अलावा प्रत्येक जिले के महत्वपूर्ण स्थल पर संस्कृति विभाग के माध्यम से अन्य आयोजन भी किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि इस संदर्भ में कलेक्टर्स को भी निर्देश जारी कर दिए गए हैं। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर सभी श्रीकृष्ण मंदिरों में होने वाली गतिविधियों के आयोजन में तीर्थ स्थान एवं मेला प्राधिकरण का सहयोग भी लिया जाएगा।

बैठक में मुख्य सचिव श्री अशोक बर्णवाल, अपर मुख्य सचिव श्री नीरज मंडलोई, अपर मुख्य सचिव श्री अनुपम राजन, अपर मुख्य सचिव श्रीमती दीपाली रस्तोगी, पुलिस महानिदेशक श्री कैलाश मकवाना, प्रमुख सचिव श्री सुखबीर सिंह, आयुक्त जनसम्पर्क श्री मनीष सिंह, मुख्यमंत्री के संस्कृति सलाहकार श्री श्रीराम तिवारी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

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कुटीर एवं ग्रामोद्योग उत्पादों की ग्लोबल मार्केटिंग के करेंगे समस्त प्रयास : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग के पोर्टल को मिला देश में पहला स्थान
प्रदेश के बुनकर, शिल्पकार और कलाकारों की समृद्धि के लिए सदैव तत्पर सरकार
मृगनयनी डॉट कॉम और ओडीओपी मार्ट एमपी ई-कॉमर्स पोर्टल्स का किया शुभारंभ
मृगनयनी पोर्टल पर अभी 460 प्रोडक्ट उपलब्ध, जल्द ही 1 हजार तक बढ़ेगी संख्या
अब देश में 16 हजार स्थानों पर होगी मृगनयनी एम्पोरियम के प्रोडक्ट्स की डिलीवरी
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्य स्तरीय समारोह में 15 बुनकरों और शिल्पियों को किया पुरस्कृत और सम्मानित

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि कुटीर एवं ग्रामोद्योग हमारी ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने इन उद्योगों से जुड़े भारत के सभी बुनकरों, शिल्पकारों, मूर्तिकारों और अन्य कलाकारों के परिश्रम को पूरा सम्मान दिलाने का संकल्प लिया है। हमारी सरकार प्रधानमंत्री श्री मोदी के संकल्प को पूरा करने के लिये सभी परिश्रमी किसानों, हुनरमंद बुनकरों, समर्पित शिल्पियों और बेहतरीन ग्रामीण कलाकारों को सम्मानित करने के लिये हरसंभव प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में ऐसे कई कलाकार हुए हैं, जिन्होंने मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को विश्व पटल पर सुशोभित किया है। हमारी सरकार सभी कलाकारों की समृद्धि के लिए सदैव तत्पर है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘लोकल टू ग्लोबल’ का महामंत्र दिया है। हमारी सरकार प्रधानमंत्री के इसी महामंत्र के अनुसार ठोस कदम उठा रही हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय सभागार में हाथकरघा सप्ताह के अंतर्गत आयोजित बुनकरों एवं शिल्पियों के सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने प्रदेश की हाथकरघा और हस्तशिल्प परम्परा को समृद्ध करने वाले प्रदेश के 15 श्रेष्ठ शिल्पियों और बुनकर को विभिन्न पुरस्कार श्रेणी में सम्मानित कर उन्हें बधाई दी। मुख्यमंत्री ने दीप प्रज्जवलित कर इस बुनकर-शिल्पी सम्मान समारोह का शुभारंभ किया। उन्होंने बुनकर-हस्तशिल्प प्रदर्शनी का अवलोकन किया एवं मिट्टी से शिवलिंग (पिंडी) भी बनाया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग द्वारा तैयार किए गए 2 वेब कॉमर्स पोर्टल – मृगनयनी (www.the mrignayani.com) और ओडीओपी मार्ट एमपी (www.odopmartmp.com) नामक ई-कॉमर्स पोर्टल्स का शुभारंभ किया।

विभागीय पोर्टल को देश में प्रथम स्थान मिलना उल्लेखनीय उपलब्धि

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के सभी बुनकरों, सूक्ष्म एवं लघु उद्योग से जुड़े कलाकारों और विशेष तौर पर ओडीओपी उत्पादों को ग्लोबल मार्केट से जोड़ने के लिए 2 ई-कॉमर्स वेब पोर्टल्स की शुरुआत की गई है। इसी पोर्टल को देश में पहला पुरस्कार मिला है। यह राज्य सरकार और कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग के लिए बड़ी उपलब्धि है। ई-कॉमर्स पोर्टल से मृगनयनी इंपोरियम के प्रोडक्ट्स की डिलीवरी देश के 16 हजार से अधिक स्थानों पर सुनिश्चित हो रही है। पहले चरण में मृगनयनी पोर्टल पर 460 से अधिक उत्पाद पोर्टल पर उपलब्ध करा दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि चंदेरी का कुर्ता, महेश्वर की साड़ी, बाग की शॉल और जरी का बैग सभी वस्तुएं प्रदेशवासियों को गौरव का अनुभव कराती हैं।

युवा पीढ़ी को भी लुभा रहे हैं कुटीर एवं ग्रामोद्योग उत्पाद

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के किसानों के अथक परिश्रम से उपजे से बुनकर कपड़ा, बुटिक और खादी तैयार करते हैं। खादी मध्यप्रदेश की विशेष पहचान रही है। मध्यप्रदेश आज सभी क्षेत्रों में तेज गति से आगे बढ़ रहा है, लेकिन हाथकरघा और शिल्पकला को प्रोत्साहन पर विशेष जोर देने की आवश्यकता है। वे अपने खून-पसीने और अथक परिश्रम से समृद्ध परंपरा और कला को संरक्षित करते हुए आगे कर रहे हैं। शिल्पकार और कलाकारों के हाथों में चमत्कारिक प्रतिभा होती है। उन्होंने कहा कि लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर ने लगभग 250 वर्ष पूर्व महेश्वरी साड़ी के माध्यम से देशभर के बुनकरों को संरक्षण प्रदान किया। चंदेरी, इंदौर और उज्जैन प्रत्येक शहर में बुनकर और शिल्प कलाकारों को अनेक अवसर मिल रहे हैं। वर्तमान युवा पीढ़ी भी अब कुटीर एवं ग्रामोद्योग के उत्पादों को अपना रही है। अब भोपाल और इंदौर के प्रमुख बाजारों में ये उत्पाद उपलब्ध हो रहे हैं। अब नए पोर्टल्स के शुभारंभ से यह उत्पाद ऑनलाइन शॉपिंग के लिए युवाओं के लिए उपलब्ध होंगे। ओडीओपी उत्पादों में भी हम चंदेरी की साड़ी, सीधी की दरी, उज्जैन का बटिक, धार का बाग प्रिंट को बढ़ावा दे रहे हैं। प्रदेश के 7 जिलों के कारीगरों द्वारा निर्मित 2 हजार से अधिक उत्पादों की देशभर में आपूर्ति की जा रही है। बाजार में इन उत्पादों की मार्केटिंग के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने के लिए सरकार साथ है।

उज्जैन में जल्द शुरू होगा यूनिटी मॉल, मिलेंगे देश के सभी उत्पाद

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, कुटीर एवं ग्रामोद्योग उद्योग, स्टार्टअप और स्व-सहायता समूहों के माध्यम से बुनकरों, शिल्पियों और कलाकारों को सभी जरूरी मदद मुहैया करा रही है। हाल ही में उज्जैन में हैंडलूम सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की शुरुआत की गई है। यहां पहले बड़ी संख्या में कॉटन मिल संचालित होती थीं। मध्यप्रदेश अब गारमेंट सेक्टर में बड़ी छलांग लगाने के लिए आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने धार जिले को पीएम मित्र पार्क की अनुपम सौगात दी है। यहां लाखों लोगों को रोजगार मिलेगा। खेत से लेकर कारखाने (फार्म टू फैक्ट्री) तक पूरी वैल्यू चेन तैयार होगी। इंदौर-उज्जैन मेट्रोपोलिटन सिटी में 6 जिले – इंदौर, उज्जैन, धार, देवास, शाजापुर और रतलाम को शामिल किया है। इन इलाकों में 3 एयरपोर्ट, 6 रेलवे जंक्शन, 8 से अधिक औद्योगिक क्षेत्र और रोजगार को बढ़ाने वाले टूरिज्म सेंटर उपलब्ध हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अब प्रतिवर्ष 8 करोड़ से अधिक श्रद्धालु उज्जैन आ रहे हैं। उज्जैन शहर में एक यूनिटी मॉल बनाया जा रहा है, जिसका निर्माण कार्य अगले माह तक पूरा कर लिया जाएगा। कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग के माध्यम से देशभर के उत्पादों को इस यूनिटी मॉल में उपलब्ध कराया जाएगा।

कुटीर एवं ग्रामोद्योग राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री दिलीप जायसवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के संकल्प को मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में म.प्र. कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार ने कुटीर एवं ग्रामोद्योग उत्पादों की बिक्री के लिए ई-कॉमर्स पोर्टल की शुरुआत की है। इन प्रोडक्ट्स पर लेबलिंग और क्यूआर कोड के माध्यम से जानकारी प्रदान करने की शुरुआत की गई है। अब हमारे उत्पाद देश के विभिन्न शहरों के बाजारों में उपलब्ध होंगे।

अपर मुख्य सचिव कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग श्री के सी गुप्ता ने कहा कि मध्यप्रदेश में लगभग ढाई लाख से अधिक बुनकर, शिल्पकार और कलाकार हैं, जो पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना अपनी आजीविका से जुड़ा काम कर रहे हैं। ये हमारी परंपराओं का निर्वहन करते हुए सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित भी कर रहे हैं। कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग में कार्यरत 70 प्रतिशत महिलाएं हैं। उन्होंने बताया कि आज से कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग को 2 नए ई-पोर्टल और डिजीटल प्लेटफॉर्म की सौगात मिली है। इनके माध्यम से मृगनयनी इम्पोरियम और विभाग के 7 ओडीओपी उत्पादों की आपूर्ति देशभर में की जाएगी।

इन्हें मिला सम्मान

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में बुनकर, शिल्पकार और कलाकारों को उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए पुरस्कृत किया। प्रथम पुरस्कार के रूप में 1 लाख रुपए, द्वितीय पुरस्कार के रूप में 50 हजार रुपए, तृतीय पुरस्कार के रूप में 25 हजार रुपए और प्रोत्साहन पुरस्कार के रूप में 15 हजार रुपए की राशि और प्रशस्ति पत्र देकर इन्हें सम्मानित किया गया।

प्रथम कबीर बुनकर पुरस्कार वर्ष 2022-23- श्री साकिब अहमद (चंदेरी)

प्रथम राज्य स्तरीय विश्कर्मा पुरस्कार वर्ष 2022-23-श्री रोहित रूसिया (छिंदवाड़ा)

प्रथम कबीर बुनकर पुरस्कार वर्ष 2023-24-श्री मसीहउद्दीन (चंदेरी)

प्रथम कबीर बुनकर पुरस्कार वर्ष 2024-25- श्री मोहम्मद गुलफाम (चंदेरी), द्वितीय कबीर बुनकर पुरस्कार वर्ष 2022-23, श्री सिद्दीक अंसारी (महेश्वर)

द्वितीय राज्य स्तरीय विश्कर्मा पुरस्कार वर्ष 2022-23- श्री मोहम्मद रफीक छीपा (उज्जैन)

द्वितीय कबीर बुनकर पुरस्कार वर्ष 2023-24 -श्रीमती मंजुला बंडे (महेश्वर)

द्वितीय कबीर बुनकर पुरस्कार वर्ष 2024-25-श्री पृथ्वीराज सिंह कोली (चंदेरी)

तृतीय कबीर बुनकर पुरस्कार वर्ष 2022-23– श्री महमूद अहमद (चंदेरी)

तृतीय राज्य स्तरीय विश्कर्मा पुरस्कार वर्ष 2022-23-श्री सतीश विश्वकर्मा (ग्वालियर)

तृतीय कबीर बुनकर पुरस्कार वर्ष 2023-24- श्रीमती वकीलन बी (महेश्वर), तृतीय कबीर बुनकर पुरस्कार वर्ष 2024-25,श्री शेषराव निमजे (सौंसर)

प्रोत्साहन पुरस्कार, राज्य स्तरीय विश्वकर्मा पुरस्कार वर्ष 2022-23-श्रीमती दीपा अहिरवार (इंदौर),श्री तानसिंह बामने (भोपाल), श्री हरीश धवन (ग्वालियर)

कार्यक्रम में म.प्र. राज्य खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के अध्यक्ष श्री पंकज जोशी, बोर्ड के उपाध्यक्ष डॉ. राकेश जादौन, हाथकरघा विभाग के आयुक्त श्री मदन कुमार नागरगोजे, रेशम उत्पादन आयुक्त श्री मोहित बुंदस सहित विभागीय अधिकारी-कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए बुनकर, शिल्पकार और कलाकार उपस्थित थे।

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योजना के लाभार्थियों को मिलेगी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और एक्सपोर्ट की जानकारी

बुजुर्गो को पेंशन का संबल, बहनों को रक्षाबंधन का उपहार
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिंगल क्लिक से दो विभागों की योजनाओं के पात्र हितग्राहियों के खातों में अंतरित किए 311 करोड़ रुपए

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंगलवार को मंत्रालय से प्रदेश के लाखों पात्र हितग्राहियों के खातों में सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना की पेंशन राशि तथा प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के अंतर्गत पात्र महिलाओं को गैस सिलेंडर रिफिल की प्रोत्साहन राशि सिंगल क्लिक से अंतरित की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के सभी जिलों में मौजूद हितग्राहियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से संबोधित करते हुए कहा कि समाज के हर वर्ग के विकास और कल्याण के लिए हमारी सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। सबके घरों में खुशहाली आए, यही हमारी भावना है। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता सेवा और अंत्योदय है तथा प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में गरीब, युवा, नारी शक्ति और किसान कल्याण के लिए ऐतिहासिक कार्य किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि समर्पण भाव से सबकी सेवा हमारा धर्म और अंत्योदय ही हमारा अंतिम लक्ष्य है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभिन्न सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के अंतर्गत प्रदेश के 35 लाख 25 हजार से अधिक पात्र हितग्राहियों के बैंक खातों में 211 करोड़ 53 लाख रुपये अंतरित किये। यह राशि जुलाई 2026 की पेंशन के रूप में संबंधित हितग्राहियों के खातों में पहुंचाई गई है। उन्होंने कहा कि पेंशन की राशि भले छोटी हो, लेकिन इससे मिलने वाला सहारा बहुत बड़ा होता है। बुजुर्गो के चेहरे की मुस्कान से ही सरकार को लोक कल्याण के लिए और भी बेहतर काम करने की नई ऊर्जा मिलती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे त्यौहार उत्सव का अवसर ही नहीं, समाज के अंतिम व्यक्ति की खुशियों से जुड़ने का अवसर भी होते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार के लिए नागरिकों के सम्मान और सबकी खुशी से बढ़कर दूसरा कोई त्यौहार नहीं है। इसीलिए हमने आने वाले त्यौहारों पर सबसे पहले बुजुर्गजनों को पेंशन राशि अंतरित करने का फैसला लिया।

 

श्रावण मास और आगामी रक्षाबंधन पर्व का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश की लगभग 22 लाख 20 हजार से अधिक बहनों के खातों में अप्रैल और मई 2026 की गैस सिलेंडर रिफिल की राशि भी सिंगल क्लिक से अंतरित की। इसके तहत करीब 99 करोड़ रुपये की दो माह की सब्सिडी बहनों के खातों में पहुंचाई गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सावन तो बहनों का ही महीना होता है। बहनें खुश न हों, तो घर में रौनक नहीं होती, इसीलिए हमने अभी से ही उन्हें रक्षाबंधन का उपहार देना शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री ने प्रदेश की सभी बहनों को रक्षाबंधन की आत्मीय शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सभी आनंद से रक्षाबंधन मनाएं, अच्छे पकवान बनाएं और अपने भाईयों को खिलायें। उन्होंने कहा कि बहनों की खुशी में ही हमारी खुशी है, बहनों के कल्याण में हम कोई कमी नहीं रखेंगे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों को हरियाली तीज, स्वतंत्रता दिवस और रक्षाबंधन की शुभकामनाएं देते हुए महाकाल की कृपा से सभी के जीवन में सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की। उन्होंने हर घर तिरंगा अभियान के तहत प्रदेश के सभी नागरिकों से अपने-अपने घरों पर तिरंगा लगाने का आह्वान किया।

मंत्रालय में हुए कार्यक्रम को खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्री गोविंद सिंह राजपूत और सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण, उद्यानिकी तथा खाद्य प्रसंस्करण मंत्री श्री नारायण सिंह कुशवाह ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम में अपर मुख्य सचिव खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति श्री रश्मि अरूण शमी, प्रमुख सचिव सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण श्रीमती सोनाली वायंगणकर सहित अन्य विभागीय अधिकारी भी उपस्थित थे।

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