आध्यात्ममंदसौर जिलासीतामऊ

मां, महात्मा और परमात्मा तीन ऐसी शक्तियां हैं जो आशीर्वाद देती है वह कभी खाली नहीं जाता, पर परीक्षा भी लेती हैं- पं डॉ नागर जी 

मां, महात्मा और परमात्मा तीन ऐसी शक्तियां हैं जो आशीर्वाद देती है वह कभी खाली नहीं जाता, पर परीक्षा भी लेती हैं- पं डॉ नागर जी

सात दिवसीय शिवमहापुराण कथा कि भक्तिमय ज्ञान गंगा में श्रोता आनंदित हो गये, 7001रुद्राक्ष वितरण के साथ आयोजन का हुआ समापन 

सीतामऊ।शिव महापुराण कथा के सातवें दिवस की ज्ञान गंगा प्रवाहित करते हुए पंडित डॉ मिथिलेश जी नगर में कहा कि देवताओं का भला करने के लिए देवाधिदेव महादेव प्रस्ताव समय प्रवेश करते हैं परंतु कहीं समय बीत गया गोरा शंकर आनंद से रहने लगे इधर ऋषि मुनि देवताओं विचार करने वालों की भगवान तो भूल गए यह सोचकर देवाधिदेव महादेव के पास पहुंचे उन्हें चरण वंदन किया और बोले भगवान ताड़कासुर का संकट कष्ट बहुत बढ़ गया है। इस कष्ट के निवारण के लिए देवाधिदेव महादेव ध्यान मुद्रा में बैठ गए और सोचने लगे सोचने में समाधि में लीन हो गए। डॉ नागर जी ने कहां की रामचरितमानस के बालकांड में भोलेनाथ की समाधि को लिखा गया की 87 हजार वर्ष तक भोलेनाथ समाधि में लग रहे चारों ओर बर्फ जम गई इधर देवता ऋषि प्रार्थना करते हुए पुकार रहे हैं। डॉ नागर जी ने प्रार्थना का महत्व बताते हुए कहा कि प्रार्थना करने से बाबा भोलेनाथ की कृपा निश्चित होती है। 2010 में एक बालिका ने मेरी बात प्रार्थना करने की मन और आज वह बालिका गूगल कंपनी की अधिकारी बन गई है। वही एक महिला के पत्र के माध्यम से बताया कि उनके पिता पेड़ से गिरने के बाद डॉक्टरों ने हड्डी जोड़ने और ठीक होने की मन कर दिया था परंतु भोलेनाथ की कृपा से और डॉक्टर के इलाज से वे आज स्वस्थ हैं यह प्रमाण है।

डॉ नागर जी ने कहा कि मां महात्मा और परमात्मा तीन ऐसी शक्तियां हैं जो आशीर्वाद देती है वह कभी खाली नहीं जाता है पर परीक्षा भी लेती हैं। नागर जी ने कबीर दास जी की पंक्ति दुख में सब सुमिरन करें सुख में सुमिरन करें न कोई को लेकर कहा कि दुख में तो हर कोई सुमिरन करता है पर सुख में अगर सुमिरन नाम जब करोगे तो दुख कभी नहीं होगा। देवताओं ऋषि मुनियों ने भी अपने संकट से उतारने के लिए भगवान की प्रार्थना की है हम भी प्रतिदिन प्रार्थना करें। भोलेनाथ ने प्रार्थना से प्रसन्न होकर सभी को दर्शन दिए। देवताओं ने तारकासुर के भय कष्ट की समस्या भोलेनाथ को बताइए भोलेनाथ ने कहा तारकासुर के पाप का घड़ा भर रहा है आपकी मनोकामना पूरी होगी।

डॉ नागर जी ने कहा कि किसी जरुरतमंद कि मदद भला करोगे तो परमात्मा लाभ देगा और याद करोगे तो वो दया करेगा। भोलेनाथ के तेज को अग्नि देव के कपोत कबूतर रुप ने धारण कर चोंच में  प्राप्त किया। तेज इतना गर्म था कि कबूतर का शरीर जलने लगा। इधर ऋषि मुनियों ने हवन में देवताओं के नाम की जैसे-जैसे आहुति दी उन देवताओं के शरीर में तेज प्रवेश हो गया। देवताओं का शरीर जलने लगा तो देवता महादेव के पास पहुंचे तो महादेव ने उनको कहा कि माघ मास में प्रयागराज में ब्रह्म मुहूर्त में यह तेज त्रिवेणी संगम में प्रवाहित कर देना जो पहले स्नान करने आएगा उनमें यह तेज प्रवेश हो जाएगा। प्रयागराज में यह तेज सप्त ऋषियों की 6 पत्नियां एक साथ स्नान कर ठंड से ताप के दौरान अग्नि देव ने उंगलियों के माध्यम से तेज प्रवेश कराया। अरुंधती को नहीं हुआ। तब से सप्त ऋषि और माता अरुंधति कि यज्ञोपवीत में पूजा की जाती है।

नागर जी ने कहा कि तेज चार प्रकार का होता है मनुष्य के संभोग, कान के मेल, आंखों के आंसु, शरीर के पसीने से होता है। भोलेनाथ का तेज ऋषि पत्नियों शरीर से बालक के अलग-अलग अंगों में उत्पन्न हुआ ऋषि पत्नियों ने गंगा में प्रवाहित कर दिया। गंगा ने सभी अंगों को जोड़कर एक बालक के रूप में पते पर बिठाकर किनारे पर लगा दिया। जिसे महर्षि विश्वामित्र ने तेजस्वी बालक को कृतिका लोक में पालन के लिए प्रदान कर दिया जहां पर उसका नाम कार्तिकेय रखा गया 6 कृतिकाओं  कि यह ममता से कार्तिकेय ने अपने छह मुख बनाए और षडानन होकर सभी से ममत्व प्राप्त किया। माता पार्वती ने भोलेनाथ से तेज को लेकर पूछा तो उन्होंने अग्नि देव के माध्यम से पूरी कहानी सुनाई फिर पार्वती ने अपने बालक को कृतिका लोक से मंगा कर उसका पालन पोषण किया। तथा बालक कुमार कार्तिकेय का अभिषेक कर देवताओं से सहत्र शास्त्र का ज्ञान एवं सूर्य देवता से रथ प्राप्त कर ताड़कासुर का वध किया। इस पर देवताओं ने मंगल गान किया।

इसी प्रकार डॉक्टर नागर जी ने भगवान गणेश के माता सती पार्वती के उबटन से प्रकट होने की कथा को श्रवण कराया। डॉ नागर जी ने कार्तिकेय और गणेश जी के विवाह का प्रसंग श्रवण कराया तथा उपस्थित भक्तजनों से कहा कि मां सबसे बड़ी होती है इसलिए गणेश जी की 10 दिन हनुमान जी राम जी कृष्ण की एक-एक दिन शिवजी की 30 दिन और माता पार्वती दुर्गा जगदंबा की 36 दिन साल में पूजा करते हैं।

डॉ नागर जी ने कहा कि ढाई अक्षर सत्य, ज्ञान, म्यान, प्रेम, और भक्ति हैं जिन पर सदैव होमवर्क करना चाहिए। आपने कहा कि जो लोग कहते हैं कि मुझे कथा सुनने भगवान के दर्शन के लिए टाइम नहीं है वह यह कह कर अपने आप को मूर्ख बना रहे हैं। जिस दिन उनके 100 दिन पूरे होने पर उन्हें परमात्मा के घर जाकर हिसाब देना पड़ेगा। जिसने कर लिया काम और भजन लिया राम नहीं तो भैंस बकरा बनकर रहना पड़ेगा।

आपने महामृत्युंजय की शक्ति को बताते हुए कहा कि दिल्ली एम्स में डॉक्टरों ने महामृत्युंजय मंत्र का प्रयोग कर व्यक्ति कि एक बार मृत्यु को भी रोक लिया था। उन्होंने कहा कि हमने भी इसका प्रयोग किया उसे व्यक्ति की मृत्यु आई और वह टल गई उसने अपना कार्य संकल्प पूर्ण किया। और फिर उसकी मृत्यु हुई।

डॉ नागर जी ने कहा कि रुद्राक्ष का प्रतिदिन जल पीने से से बीपी हाई लो ठीक हो जाती है तथा शुगर हाई लो को ठीक करने के लिए बिल पत्र के साथ तुलसी पत्र लेने से ठीक हो जाती है। रुद्राक्ष के आध्यात्मिक और वैज्ञानिक ही महत्व है।

डॉ नागर जी ने कहा कि मंदिर में जाना भगवान की पूजा दर्शन आदि करना यह धर्म है पर अपने माता-पिता की सेवा सम्मान करना सबसे बड़ी पूजा धर्म है। माता-पिता ही भगवान का स्वरूप है उनसे जाकर पूछो माता-पिता के बिना जीवन कैसा है जिनकी माता-पिता नहीं है।

डॉ नागर जी ने 12 ज्योतिर्लिंग और दो रावण द्वारा स्थापित ज्योतिर्लिंगों की कथा का वर्णन श्रवण कराया। उन्होंने देश के नेताओं को लेकर कहा कि देश की आजादी के समय सरदार वल्लभभाई पटेल जैसे नेता थे जिन्होंने कहा कि काठियावाड़ गुजरात स्थित सोमनाथ जी के मंदिर का जब तक जिर्णोद्धार का भूमि पूजन राष्ट्रपति जाकर नहीं करेंगे तब तक में गृहमंत्री का पद ग्रहण नहीं करूंगा। उनकी इस बात पर राष्ट्रपति ने उन्हें पत्र लिखा और राष्ट्रपति ने स्वयं जाकर सरदार वल्लभभाई पटेल की उपस्थिति में सोमनाथ मंदिर जीर्णोद्धार का भूमि पूजन कर निर्माण संपन्न कराया जिसका प्रमाण वहां पर लगी तस्वीर से मिलता है।

पंडित डॉ मिथिलेश जी नागर के सानिध्य में कथा के छठवें दिन 06 अगस्त को रात्रि में संगीतमय सुंदरकांड पाठ का आयोजन किया। वहीं 01 अगस्त से पंडितो के वैदिक मंत्रोच्चार के साथ प्रतिदिन पार्थिव शिवलिंग का श्रद्धालुओं ने पूजन अभिषेक किया तथा भगवान शिव बाबा को 7001 रुद्राक्ष धारण करवा कर अभिमंत्रित किया गया।  सप्तम दिवस कथा विश्राम के पश्चात आयोजन समिति द्वारा उपस्थित सभी भक्तों को रुद्राक्ष वितरण किया गया।

कथा इस अवसर पर दर्शन पूजन एवं सहभागिता में मंदसौर काल भैरव के साधक पंडित शिवकरण प्रधान बगलामुखी की साधक किन्नर गुरु अनीता दीदी, क्षेत्रीय विधायक हरदीप सिंह डंग जिला पंचायत अध्यक्ष दुर्गा पाटीदार भाजपा नेता अरविंद सारस्वत गौशाला अध्यक्ष संजय लाला जाट मंडल अध्यक्ष जितेंद्र बामनिया, सत्यनारायण सोनी काका, जिला योजना समिति सदस्य अनिल पांडेय रामलाल जाट, राधेश्याम घाटिया दाऊदी बोहरा समाज जन सहित जनप्रतिनिधि गण समाज सेवक पत्रकार धर्म प्रेमी जनता उपस्थित रहे।मंचीय संचालन सभापति विवेक सोनगरा एवं आभार नगर परिषद अध्यक्ष मनोज शुक्ला ने व्यक्त किया।

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