सभी कामनाओं को त्यागना भक्त का प्रमुख लक्षण होता है – स्वामी केशवानंद जी

नारद भक्ति सूत्र का समापन, कल से होगे सत्यव्रत चैतन्य जी के प्रवचन
मंदसौर। पुरूषोत्तम (अधिक) मास के अवसर पर केशव सत्संग भवन, खानपुरा में पुरूषोत्तम (अधिक) मास के शुभ अवसर पर पूज्य पाद केशवानंद जी महाराज चिन्मय मिशन आकोला ने नारद भक्ति सूत्र पर आधारित दिव्य प्रवचनों का आयोजन प्रात: 8.30 बजे से 10 बजे तक हो रहा है।
दिनांक 30 मई 2026, शनिवार को नारद भक्ति सूत्र का वाचन करते हुए केशवानंद जी महाराज चिन्मय मिशन आकोला ने बताया कि नारद मुनि भक्त के लक्षण बताते हुए कहते है कि भक्त का सिर्फ एक मुख्य लक्षण होता है कि वह अपनी सभी कामनाओं का त्याग कर देता है अपनी कामनाओं को त्याग कर मन को नियंत्रित करना भक्त का प्रमुख लक्षण है। आपने बताया कि सच्चे और परम भक्त को भगवान की कृपा स्वत: ही प्राप्त हो जाती है। मन को सदैव अच्छा और शुद्ध रखों, अपने मन में किसी को लेकर कोई मलीनता मत रखों सारे विकारों को त्याग दो और उस मन में भगवान को प्रतिष्ठित करो।
धर्मसभा में स्वामी जी ने बताया कि शास्त्र हमारे लिये ही बनाये गये शास्त्रों से हमे आदर्श आचार संहिता के बारे में जानकारी मिलती है कि हमें अपना जीवन कैसे जीना चाहिए अच्छे कर्मो और बुरे कर्र्माे से क्या फल मिलता हैं इसके कई उदाहरण हमारे शास्त्रों में मिलते है इसलिए जो गुण शास्त्रों में बताये गये है उनका पालन करों और दोष बतायें गये है उनको निषेद्य करो। शास्त्रों में लिखी हर बात हमारे जीवन के लिए महत्वपूर्ण है।
सत्संग की कमाई जन्मों जन्म तक चलती है
धर्मसभा मेंं स्वामी जी ने बताया कि व्यक्ति धन एकत्रित करने के लिए जीवन भर भागता रहता है। लेकिन उसके अपने धन से ही उसको अपने जीवन तक में भी शांति नही मिल पाती और उसका अपना कमाया धन ही उसके दुखों का कारण बन जाता है। वहीं सत्संग के माध्यम से की गई कमाई जन्मो जन्म तक हमारे काम आती है।
आज होगा नारद भक्ति सूत्र का समापन
केशव सत्संग भवन ट्रस्ट के अध्यक्ष जगदीश चंद्र सेठिया और सचिव कारूलाल सोनी ने बताया कि दिनांक 17 मई से प्रारंभ हुए नारद भक्ति सूत्र का आज समापन होगा जिसके साथ ही पूज्यपाद स्वामी श्री केशवानंद जी विदा लेगे और कल 1 जून से स्वामी सत्यव्रत चैतन्य जी नर्मदा तट के द्वारा रामचरित मानस का वाचन किया जायेगा। केशव सत्संग भवन ट्रस्ट मंडल ने नगर की धर्मप्रेमी जनता से अधिक से अधिक संख्या में प्रवचनों का लाभ लेने का निवेदन किया है।



