मंदसौरमध्यप्रदेश

समाचार मध्यप्रदेश मंदसौर 30 मई 2026 शनिवार

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माहवारी स्वच्छता दिवस (Menstrual Hygiene Day ) पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

मंदसौर 29 मई 26 / मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जीएस चौहान द्वारा बताया गया कि जिला चिकित्सालय मंदसौर में राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत माहवारी स्वच्छता दिवस (Menstrual Hygiene Day) कार्यक्रम का आयोजन राज्य शासन के निर्देश एवं जिला प्रशासन के निर्देशानुसार जिला चिकित्सालय मंदसौर में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ जीएस चौहान, डीटीओ डॉ आर के द्विवेदी, जिला कार्यक्रम प्रबंधन श्री निलेश गर्ग के नेतृत्व में कार्यक्रम का आयोजन किया गया इस संबंध में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा रैली को हरी झंडी दिखाकर रैली का शुभारंभ किया गया

जिसके पश्चात जिला प्रशिक्षण केन्द्र आई पी पी -6 के ट्रेनिंग हॉल में महावारी स्वच्छता दिवस के उपलक्ष में जागरूकता हेतु कार्यशाला ,रांगोली कार्यक्रम का आयोजन किया गया उक्त कार्यशाला में माहवारी स्वच्छता दिवस (Menstrual Hygiene Day) के अवसर पर जागरूकता कार्यक्रम में आर के एस के की परामर्शदाता श्रीमती प्रियंका शर्मा द्वारा कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं एवं किशोरियों को माहवारी स्वच्छता प्रबंधन के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी देते हुए बताया गया कि माहवारी के दौरान किशोरी बालिकाओं एवं महिलाओं को साफ सुथरे और सूती कपड़े या सेनिटरी नेपकिन का उपयोग करना चाहिए तथा साफ सफाई व खान पान पर ध्यान देना चाहिए सामान्य तौर पर व्यायाम भी करना चाहिए।

जिला समन्वयक श्री सुरेश चंद्र मुवेल द्वारा उक्त विषय पर प्रकाश डालते हुए बताया कि लड़कियों को किशोरावस्था के दौरान माहवारी एक ऐसा विषय है कि जिस पर आज तक समाज तथा ग्रामीण क्षेत्र या शहरी क्षेत्र में भी खुलकर चर्चा नहीं की जाती जिसके कारण समाज में अनेक प्रकार की मिथक या रूढ़िवादिता फैली हुई है जो कि गलत है जबकि यह एक प्राकृतिक प्रक्रिया है जो ईश्वर के द्वारा निर्मित है। आज भी समाज में अनेक प्रकार की मिथक है जैसे कि माहवारी के दौरान आचार को न छूना किचन में नहीं जाना पूजा घर में प्रवेश न करना पेड़-पौधे, तुलसी को स्पर्श न करना पापड़ या तुलसी को ना छूना इत्यादि मिथक फैली हुई है जबकि इसका मूल मंत्र यह है की माहवारी के दौरान महिलाओं को साइंटिफिक रूप से आराम करना चाहिए और अच्छा भोजन या साफ सफाई का ध्यान रखना चाहिए जिससे कि उनके इम्युनिटी पावर में कोई प्रभाव न पड़े इस आयोजन के अवसर पर मिरेकल नर्सिंग कॉलेज स्टूडेंट्स स्टाफ हॉस्पिटल स्टाफ, आशा, एवं अन्य स्टाफ उपस्थित रहेl

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ग्राम थड़ोद में आयुष्मान आरोग्य शिविर आयोजित

मंदसौर 29 मई 26 / जिले के ग्राम थड़ोद में आयुष्मान आरोग्य शिविर आयोजित किया गया। शिविर में ग्रामीणों को विभिन्न स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करते हुए स्वास्थ्य परीक्षण एवं जांच की गई। शिविर में लोगों ने स्वास्थ्य लाभ प्राप्त किया।

एक्‍सरे, सीवाय टेस्ट, बीपी, शुगर, बीएमआई, एचआईवी एवं अन्य जांचो की सुविधाएं ग्राम वासियों को प्रदान की गई ओर टी.बी. उपचार ले रहे मरीजों को फूड बास्केट प्रदान किए गए। टी.बी. की शपथ दिलाई गई।

इस शिविर में सेक्टर सुपरवाइजर, पंचायत सचिव, लेब टेक्निशियन, आईसीटीसी काउंसलर, एक्‍स-रे टेक्निशियन सीएचओ, एएनएम, आशा सुपरवाइजर आशा कार्यकर्ता एवं आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं मौजूद थी।

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परिवहन विभाग द्वारा 23 वाहनों पर चालानी कार्यवाही एवं 3 वाहनों को किया जप्‍त

लोक परिवहन बसों का चैकिेंग अभियान 1.41 लाख की चालानी कार्यवाही की

मंदसौर 29 मई 2026/ परिवहन विभाग द्वारा लोक परिवहन बसों का चैकिेंग अभियान चलाया गया जिसमें 23 वाहनों पर चालानी कार्यवाही एवं 3 वाहनों को जप्‍त किया है। जिसमें परिवहन विभाग द्वारा 23 वाहनों मे कुल 1 लाख 41 हजार रू की चालानी कार्यवाही की एवं 3 वाहनों को जप्‍त किया है।

बिना परमिट/ परमिट शर्तों के उल्‍लंघन वाले 5 वाहनों पर 76 हजार रू, 6 ओवरलोड वाहन पर 30 हजार रू, बिना फिटनेट के 3 वाहनों पर 30 हजार रू, बिना वर्दी में ड्राईवर पर 9 वाहनों पर 5 हजार रू की चालानी कार्यवाही की गई। 3 वाहनों को जप्‍त किया गया।

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शासकीय आईटीआई में प्रवेश हेतु 30 जून तक डीएसडी एमपी ऑनलाईन पोर्टल पर करें आवेदन

अभ्यर्थियों के लिए चॉइस फिलिंग की प्रक्रिया 1 जून से 30 जून तक निर्धारित

मंदसौर 29 मई 26 / औद्योगिक प्रशिक्षण संस्‍था प्रचार्य द्वारा बताया गया कि मंदसौर शासकीय आईटीआई में सत्र 2026-27 के प्रवेश हेतु ऑनलाइन पंजीयन प्रक्रिया प्रारंभ हो गई है। इच्छुक अभ्यर्थी डीएसडी एमपी ऑनलाइन पोर्टल पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। ऑनलाइन पंजीयन की प्रक्रिया 30 जून 2026 तक चलेगी। वहीं अभ्यर्थियों के लिए चॉइस फिलिंग की प्रक्रिया 1 जून से 30 जून 2026 तक निर्धारित की गई है।

जिले की 6 शासकीय आईटीआई में फिटर, इलेक्ट्रिशियन, मोटर मैकेनिक, वेल्डर, स्टेनो हिंदी/इंग्लिश, कोपा, सोलर टेक्नीशियन, ड्राफ्टमैन सिविल, मशीनिस्ट एवं आरएसी सहित अनेक रोजगारपरक ट्रेडों में प्रशिक्षण उपलब्ध है। इन ट्रेडों के माध्यम से विद्यार्थियों को तकनीकी एवं व्यावसायिक कौशल प्रदान किया जाएगा, जिससे रोजगार एवं स्वरोजगार के बेहतर अवसर प्राप्त हो सकेंगे। प्रवेश प्रक्रिया, ट्रेड चयन एवं अन्य जानकारी के लिए अभ्यर्थी अपने नजदीकी शासकीय आईटीआई संस्थान में संपर्क कर सकते हैं।

कत्ताई एवं बुनाई का नि:शुल्क प्रशिक्षण हेतु 12 जून तक आनलाईन वेबसाइट https://mpkhadigramodyog.com/admin/registration/student login.php पर आवेदन करें

मंदसौर 29 मई 26 / म.प्र. खादी तथा ग्रामोद्योग प्रभारी प्रबंधक द्वारा बताया गया कि म.प्र. खादी तथा ग्रामोधोग बोर्ड द्वारा कोशल विकास योजनांतर्गत नि:शुल्क कत्ताई एवं बुनाई का प्रशिक्षण दिया जाना है। इच्छुक प्रशिक्षणार्थि आनलाईन आवेदन कर सकता हैं।

नवीन आवेदको के आवेदन पत्र प्राप्त करने हेतु बोर्ड की विभागीय वेबसाइट https://mpkhadigramodyog.com/admin/registration/student login.php के माध्यम से 12 जून 2026 तक आवेदन कर सकतें हैं।

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100 लाख मीट्रिक टन लक्ष्य के विरुद्ध हुई 104 लाख मीट्रिक टन से अधिक गेहूं की खरीदी : खाद्य मंत्री श्री राजपूत

देश में सर्वाधिक 13 लाख 41 हजार से अधिक किसानों से हुआ गेहूं का उपार्जन

कोविड अवधि को छोड़कर विगत 10 वर्षों में सर्वाधिक हुआ गेहूं उपार्जन

मंदसौर 29 मई 26 / मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में प्रदेश में 100 लाख मीट्रिक टन निर्धारित लक्ष्य के विरुद्ध 104 लाख 22 हजार मीट्रिक टन से अधिक गेहूँ का उपार्जन हुआ है। मध्यप्रदेश को गेहूं खरीदी के लिये 78 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य दिया गया था, लेकिन मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रयासों से केन्द्र सरकार द्वारा इस लक्ष्य को 100 लाख मीट्रिक टन कर दिया गया है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि मध्यप्रदेश न्यूनतम समर्थन मूल्य पर 13 लाख 41 हजार 266 किसानों से गेहूं का उपार्जन कर देश में नम्बर-1 है, वहीं गेहूं उपार्जन के मामले में पंजाब के बाद दूसरे स्थान पर है। कोविड-19 की अवधि को छोड़कर विगत 10 वर्षों में इस वर्ष समर्थन मूल्य पर गेहूं का सर्वाधिक उपार्जन किया गया है। प्रदेश में लघु एवं सीमांत किसानों से सबसे पहले गेहूं की खरीदी की गई। कुल 8 लाख 9 हजार 990 सीमांत एवं लघु कृषकों से 32 लाख 14 हजार मीट्रिक टन से अधिक गेहूं का उपार्जन किया गया।

सतत मॉनिटरिंग

प्रदेश में हो रहे गेहूँ उपार्जन की सतत मॉनीटरिंग की गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्वयं खरीदी केन्द्रों का औचक निरीक्षण कर तौल व्यवस्था, बारदाने की उपलब्धता और खरीदी केन्द्रों पर किसानों के लिये उपलब्ध जरूरी सुविधाओं का आकस्मिक निरीक्षण भी किया। साथ ही किसानों से संवाद कर उपार्जित गेहूँ के भुगतान आदि के बारे में जानकारी ली। उन्होंने किसानों के हित में जिन किसानों ने स्लाट बुक करा लिये थे, उनके गेहूं उपार्जन की अवधि 23 मई से बढ़ाकर 28 मई तक कर दी थी।

किसानों को हुआ 23,708.13 करोड़ से अधिक का भुगतान

किसानों को अब तक उपार्जित गेहूं का 23,708.13 करोड़ रूपये का भुगतान भी किया जा चुका है। उपार्जित गेहूं में से 96 लाख 52 हजार 957 मीट्रिक टन का परिवहन भी किया जा चुका है। यह उपार्जित गेहूं का 93 प्रतिशत है। किसानों से 2585 रूपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य एवं राज्य सरकार द्वारा 40 रूपये प्रति क्विंटल बोनस सहित 2625 रूपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं का उपार्जन किया गया है।

संभागवार उपार्जन

रीवा संभाग में 6 लाख 15 हजार 851 मीट्रिक टन, जबलपुर में 12 लाख 73 हजार 667, शहडोल में 70 हजार 666, सागर में 8 लाख 56 हजार 968, भोपाल में 28 लाख 47 हजार 284, नर्मदापुरम में 9 लाख 22 हजार 508, उज्जैन में 22 लाख 84 हजार 47, इंदौर में 8 लाख 62 हजार 719, ग्वालियर में 4 लाख 36 हजार 805 और चंबल संभाग में 2 लाख 40 हजार 581 मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन हुआ है।

उपार्जन के समुचित प्रबंध

प्रत्येक उपार्जन केन्द्र पर तौल काटों की संख्या 4 से बढ़ाकर 6 की गई तथा तौल काटों में वृद्धि का अधिकार जिलों को दिया गया। किसानों की सुविधा के लिये तौल पर्ची बनाने का समय शाम 6 बजे से बढ़ाकर रात 10 बजे तक किया गया। देयक जारी करने का समय भी रात 12 बजे तक कर दिया गया। गेहूं का उपार्जन सप्ताह में 6 दिन तक किया गया। उपार्जन केन्द्र पर किसानों की सुविधा के लिये पीने का पानी, बैठने के छायांदार स्थान और जन-सुविधाओं की व्यवस्थाएं की गई थी। समर्थन मूल्य पर उपार्जित गेहूं के भंडारण की भी समुचित व्यवस्था की गई है। किसानों की उपज की तौल समय पर हो सके, इसके लिये उपार्जन केन्द्रों में बारदाने, तौल कांटे, हम्माल तुलावटी, सिलाई मशीन, कम्प्यूटर, गुणवत्ता परीक्षण उपकरण और उपज की साफ-सफाई के लिये पंखा एवं छन्ना आदि की समुचित व्यवस्थाएं की गई थीं।

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प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में प्रदेश का हो रहा है अधोसंरचात्मक विकास : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

3,540 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा हाई-स्पीड कॉरिडोर मध्य भारत में कनेक्टिविटी का नया मानक स्थापित करेगा

114 किलोमीटर लंबी परियोजना से मिलेगी जाम से राहत, व्यापार, पर्यटन और औद्योगिक विकास को मिलेगा नया आधार

जबलपुर आउटर रिंग रोड परियोजना से आवागमन होगा तेज

मंदसौर 29 मई 26 / प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में विकसित हो रहे आधुनिक अधोसंरचना नेटवर्क ने भारत की विकास यात्रा को नई गति प्रदान की है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में प्रधानमंत्री श्री मोदी के विजन के अनुरूप राष्ट्रीय राजमार्गों, एक्सप्रेस-वे, आर्थिक कॉरिडोर और मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी परियोजनाओं का तेजी से विस्तार किया जा रहा है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था, व्यापार और निवेश को नई ऊर्जा मिल रही है।

राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा मध्यप्रदेश में विकसित की जा रही जबलपुर आउटर रिंग रोड परियोजना महाकौशल क्षेत्र के विकास का नया अध्याय लिखने जा रही है। प्रदेश में सड़क अधोसंरचना को सुदृढ़ बनाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण परियोजना है। लगभग 3,540 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित हो रही 114 किलोमीटर लंबी यह महत्वाकांक्षी परियोजना जबलपुर और आसपास के क्षेत्रों में कनेक्टिविटी, व्यापार, पर्यटन एवं औद्योगिक विकास को नई गति प्रदान करेगी।

लोक निर्माण मंत्री श्री राकेश सिंह ने बताया कि जबलपुर क्षेत्र के विकास को नई दिशा देने वाली यह परियोजना शहर में बढ़ते यातायात दबाव को कम करने के साथ-साथ क्षेत्रीय व्यापार, पर्यटन, कृषि और औद्योगिक गतिविधियों को भी मजबूती प्रदान करेगी। फोर लेन वाले इस अत्याधुनिक ग्रीनफील्ड कॉरिडोर का निर्माण विशेष रूप से शहर के बाहर से आने-जाने वाले भारी एवं लंबी दूरी के यातायात को सुगम मार्ग उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया जा रहा है।

फोर लेन वाले इस अत्याधुनिक ग्रीनफील्ड कॉरिडोर का निर्माण विशेष रूप से शहर के बाहर से आने-जाने वाले भारी एवं लंबी दूरी के यातायात को सुगम मार्ग उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया जा रहा है। इसके पूर्ण होने के बाद जबलपुर शहर में यातायात का दबाव कम होगा तथा उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र की ओर जाने वाले वाहनों को शहर के भीतर प्रवेश करने की आवश्यकता नहीं रहेगी।

शहर को मिलेगी ट्रैफिक जाम से बड़ी राहत

विगत वर्षों में जबलपुर में तेजी से हुए शहरी विस्तार, औद्योगिक गतिविधियों में वृद्धि तथा यात्री एवं मालवाहक वाहनों की संख्या बढ़ने से यातायात दबाव लगातार बढ़ा है। शहर की प्रमुख सड़कों पर जाम, लंबा यात्रा समय और ईंधन की अतिरिक्त खपत आम समस्या बन गई थी।

आउटर रिंग रोड परियोजना इन चुनौतियों का दीर्घकालिक समाधान प्रस्तुत करती है। इसके संचालन से लंबी दूरी के वाहनों का आवागमन शहर के बाहर से होगा, जिससे शहरी सड़कों पर दबाव कम होगा और आम नागरिकों को अधिक सुगम एवं सुरक्षित यातायात व्यवस्था उपलब्ध होगी।

पांच पैकेजों में हो रहा निर्माण

परियोजना को प्रभावी क्रियान्वयन के लिए 5 अलग-अलग पैकेजों में विभाजित किया गया है। इनमें बरेला से मानेगांव, मानेगांव से एनएच-45, एनएच-45 से कुशनेर, कुशनेर से अमझर तथा अमझर से बरेला तक के खंड शामिल हैं। सभी पैकेज मिलकर जबलपुर के चारों ओर एक मजबूत बाहरी परिवहन नेटवर्क तैयार करेंगे। इन मार्गों के विकसित होने से जबलपुर हवाई अड्डे सहित क्षेत्र के प्रमुख कस्बों और ग्रामीण इलाकों को बेहतर सड़क संपर्क प्राप्त होगा। परियोजना के विभिन्न हिस्से इस वर्ष तथा अगले वर्ष चरणबद्ध रूप से यातायात के लिए खोले जाएंगे।

किसानों की उपज समय पर पहुंचेगी बाजार

परियोजना का सीधा लाभ किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा। वर्तमान में बरेला, शाहपुरा, पाटन, सिहोरा और आसपास के क्षेत्रों के किसानों को अपनी उपज मंडियों तक पहुंचाने में ट्रैफिक जाम और परिवहन संबंधी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

आउटर रिंग रोड बनने के बाद कृषि उत्पादों का परिवहन तेज होगा, जिससे समय की बचत होगी और किसानों को बेहतर बाजार अवसर उपलब्ध होंगे। परिवहन लागत कम होने से उनकी आय पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

स्थानीय किसानों का मानना है कि परियोजना के कुछ प्रारंभिक हिस्सों के संचालन से ही यात्रा में होने वाली देरी में कमी महसूस होने लगी है और पूर्ण परियोजना शुरू होने के बाद यह लाभ और अधिक स्पष्ट रूप से दिखाई देगा।

लॉजिस्टिक्स और माल परिवहन को मिलेगी नई गति

जबलपुर मध्य भारत का एक महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र है। आउटर रिंग रोड बनने के बाद मालवाहक वाहनों को शहर के भीतर प्रवेश नहीं करना पड़ेगा, जिससे परिवहन लागत और समय दोनों में कमी आएगी। ईंधन की बचत होगी और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क अधिक कुशल बन सकेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना भविष्य में जबलपुर को मध्य भारत के प्रमुख लॉजिस्टिक्स हब के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

पर्यटन क्षेत्र को मिलेगा बड़ा लाभ

जबलपुर की पहचान केवल औद्योगिक और प्रशासनिक शहर के रूप में नहीं, बल्कि एक प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में भी है। भेड़ाघाट की संगमरमरी घाटियां, धुआंधार जल प्रपात, ग्वारी घाट, नर्मदा तट और निकटवर्ती कान्हा राष्ट्रीय उद्यान देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।

नई रिंग रोड इन पर्यटन स्थलों तक पहुंच को अधिक तेज और सुविधाजनक बनाएगी। साथ ही अमरकंटक जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों तक यात्रा भी पहले की तुलना में अधिक सुगम होगी। इससे क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों और स्थानीय रोजगार के अवसरों में वृद्धि होगी।

नर्मदा पर बनेगा आधुनिक इंजीनियरिंग का प्रतीक

परियोजना का सबसे आकर्षक और महत्वपूर्ण हिस्सा नर्मदा नदी पर निर्मित किया जा रहा लगभग 750 मीटर लंबा एक्सट्राडोज्ड ब्रिज है। आधुनिक तकनीक से तैयार किया जा रहा यह पुल न केवल परिवहन सुविधा को बेहतर बनाएगा बल्कि भविष्य में क्षेत्र की एक विशिष्ट पहचान के रूप में भी स्थापित होगा।

मध्यप्रदेश की जीवन रेखा मानी जाने वाली नर्मदा नदी पर निर्मित यह पुल आधुनिक विकास और सांस्कृतिक विरासत के समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण होगा।

व्यापक अधोसंरचना निर्माण

इस महत्वाकांक्षी परियोजना के अंतर्गत 14 बड़े पुल, 37 छोटे पुल, 4 रेलवे ओवरब्रिज, 3 फ्लाईओवर, 12 वाहन अंडर-पास, 23 हल्के वाहनों के अंडर-पास, 2 एलिवेटेड स्ट्रक्चर, 3 ओवर-पास तथा लगभग 332 पुलियाओं का निर्माण किया जा रहा है।

यह अधोसंरचना न केवल यातायात को निर्बाध बनाएगी बल्कि भविष्य की बढ़ती परिवहन आवश्यकताओं को भी पूरा करेगी।

महाकौशल क्षेत्र के विकास को मिलेगा नया आधार

आउटर रिंग रोड का लाभ केवल जबलपुर तक सीमित नहीं रहेगा। बरेला, मानेगांव, शाहपुरा, सिहोरा, पाटन, अमझर, कुशनेर, आधारताल और गढ़ा सहित अनेक क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही मंडला, डिंडोरी, नरसिंहपुर और कटनी जैसे जिलों की कनेक्टिविटी भी बेहतर होगी।

बेहतर सड़क नेटवर्क के कारण उद्योगों, वेयरहाउस, कोल्ड स्टोरेज, लॉजिस्टिक्स पार्क और नए निवेश के अवसर विकसित होंगे, जिससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों रोजगार सृजित होने की संभावना है।

हरित विकास की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

परियोजना में पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता दी गई है। निर्माण कार्य में लगभग 40 लाख मीट्रिक टन फ्लाई ऐश का उपयोग किया जा रहा है, जो औद्योगिक अपशिष्ट के पुनः उपयोग का उत्कृष्ट उदाहरण है। इसके अलावा पौधरोपण, हरित पट्टी विकास और आधुनिक जल निकासी व्यवस्था के माध्यम से पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के प्रयास किए जा रहे हैं।

विकास, संपर्क और समृद्धि का नया अध्याय

जबलपुर आउटर रिंग रोड परियोजना केवल एक सड़क निर्माण परियोजना नहीं, बल्कि महाकौशल क्षेत्र के भविष्य को आकार देने वाली विकास यात्रा है। बेहतर कनेक्टिविटी, तेज आवागमन, कम ईंधन खपत, मजबूत लॉजिस्टिक्स, बढ़ते पर्यटन, औद्योगिक विस्तार और रोजगार सृजन के माध्यम से यह परियोजना क्षेत्र की आर्थिक प्रगति का नया अध्याय लिखने जा रही है। आने वाले वर्षों में यह कॉरिडोर मध्य भारत के विकास मानचित्र पर एक महत्वपूर्ण पहचान स्थापित करेगा।

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जिले में 39,004 किसानों से 2,28,822.17 MT गेहूं खरीदी की गई

मंदसौर 29 मई 26 / मंदसौर जिले में गेहूं उपार्जन (खरीदी) का कार्य सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस वर्ष गेहूं की खरीदी 9 अप्रैल 2026 को प्रारंभ होकर अंतिम तिथि 28 मई 2026 तक की गई । विपणन वर्ष 2026-27 वर्ष में कुल 66,035 किसानों ने पंजीकरण कराया था। इनमें से 45,292 किसानों ने अपनी उपज बेचने के लिए ऑनलाइन स्लॉट बुक किए थे। जिले भर में स्थापित सभी 72 उपार्जन केंद्रों के माध्यम से गेंहू की उपज को समर्थन मूल्य पर विक्रय करने हेतु पहॅुंचे कुल 39,004 किसानों से 2,28,822.17 MT गेहूं की खरीदी की गई है। प्रशासन द्वारा इस वर्ष मंदसौर जिले के लिए 2,25,000 MT का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, जिसे समय रहते न सिर्फ हासिल किया गया, बल्कि उससे अधिक की खरीदी दर्ज कर प्रदेश की रैंकिंग में जिले ने अपनी मजबूत स्थिति दर्ज कराई है।

किसानों को आर्थिक संबल देने के लिए सरकार द्वारा इस बार 2 हजार 585 रुपये समर्थन मूल्य के साथ 40 रुपये प्रति क्विंटल का विशेष बोनस दिया गया, जिससे मंदसौर के किसानों को कुल 2 हजार 625 रुपये प्रति क्विंटल का आकर्षक दाम मिला है।

इस वर्ष मंदसौर जिले की गेहूं खरीदी ने पिछले साल के कई रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। जहां पिछले साल कुल खरीदी 1,82,714 MT थी, वहीं इस साल यह बढ़कर 2,28,822.17 MT तक पहुंच गई है।

सबसे बड़ा अंतर किसानों को किए गए भुगतान में है। पिछले साल जहां जिले में कुल 475 करोड़ 63 लाख 85 हजार 500 रुपये का भुगतान किया गया था, वहीं इस साल 600 करोड़ 65 लाख 72 हजार 731 रुपये का भुगतान किया गया है। वही इस वर्ष खरीदी की गयी सम्पूर्ण उपज को जिले में स्थित गोदामों में सुरक्षित भंडारण किया गया, जिससे उपार्जित गेहूं के भीगने या खुले में पड़े रहने के कारण खराब होने की कोई संभावना नहीं रही|

जिला प्रशासन मंदसौर ने इस सफल और निर्बाध खरीदी प्रक्रिया के लिए सभी उपार्जन केंद्रों के स्टाफ, परिवहनकर्ताओं और सहयोग करने वाले किसान भाइयों का आभार व्यक्त किया है।

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3 दिवसीय प्रायोगिक प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रारंभ

मन्दसौर। 29 मई शुक्रवार से जिला मंदसौर के सभी हायर सेकंडरी स्कूलों के भौतिक, रसायन एवं जीवविज्ञान के शिक्षकों का 3 दिवसीय प्रायोगिक प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रारंभ हुआ। जिसमें जिले के 120 शिक्षकों ने भाग लिया।
उत्कृष्ट विद्यालय मंदसौर में आयोजित प्रशिक्षण के उद्घाटन सत्र में जिला शिक्षा अधिकारी सुश्री टेरेसा मिंज,डाईट प्राचार्य श्री दिलीप सिंह राठौर, एडीपीसी श्री लोकेन्द्र डाभी,जिला योजना अधिकारी श्री दिलीप मुजावदिया, महारानी लक्ष्मीबाई कन्या उमावि के प्राचार्य  श्री के सी सोलंकी,प्रशिक्षण प्रभारी श्री आर.डी जोशी उपस्थित थे।
कार्यक्रम के प्रारंभ में अतिथि महानुभाव ने मॉ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण किया। सुश्री आरती शर्मा ने सरस्वती वंदना तथा प्रेरणा गीत श्रीमती कीर्ति सक्सेना ने किया। अतिथि परिचय तथा कार्यक्रम संचालन श्री मुकेश सोनी ने किया। कार्यक्रम की भूमिका डाईट व्याख्याता एवं प्रशिक्षण प्रभारी श्री आर डी जोशी ने प्रस्तुत की।
मंचासीन अतिथि महानुभाव ने अपने उद्बोधन में प्रशिक्षण की उपादेयता पर प्रकाश डाला। प्रशिक्षण कार्यक्रम के मास्टर ट्रेनर भौतिकी के श्री दिनेश नागर, श्री प्रदीप शर्मा, रसायन के श्री मुकेश सोनी, निर्मल सूर्यवंशी, जीवविज्ञान विषय के श्रीमती कीर्ति सक्सेना तथा कमलेश भट्टड़ उपस्थित रहे।

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 शासकीय संगीत महाविद्यालय में प्रवेश प्रारंम्भ

लता मंगेशकर शासकीय संगीत महाविद्यालय में प्रवेश प्रारंम्भ हैं, प्राचार्य डॉ. उषा अग्रवाल ने बताया की राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला fप्रवेश लिंक  02/07/2026 तक के लिए खोली गई है | गायन, तबला, कथक, यलिन विषय में प्रवेश लिया जा सकता हैं |1 स्कूल  4th कक्षा उत्तीर्ण अनिवार्य हैं |2- ग्रेजुएशन की कक्षा बैचलर ऑफ़ परफोर्मिंग आर्ट हेतु  2th कक्षा उत्तीर्ण अनिवार्य हैं |3 प्रवेश फॉर्म MP Online के माध्यम से राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला वि.वि. ग्वालियर की Site पर भरना होगा | Site पर स्कूल में अध्यन कर रहे fo|kर्थी डिप्लोमा की कक्षा प्रवेशिका सर्टिफिकेट में स्कूल लेवल लिंक पर फॉर्म भर सकेंगे |  4-12th बारवीं पास की लिंक पर ग्रेजुएशन हेतु बैचलर ऑफ़ परफोर्मिंग आर्ट में फॉर्म भर सकेंगे |–  अधिक जानकारी के लिए कार्यालय में दोपहर 02:00 से सायं 05:00 बजे  तक सम्पर्क किया जावें |

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