मध्यप्रदेशरतलाम

समाचार मध्यप्रदेश रतलाम 06 मई 2026 बुधवार

रतलाम जिले मे 9 नगरीय निकायों में हुई जल सुनवाई जल सुनवाई में 21 शिकायतों का हुआ निराकरण

कलेक्टर श्रीमती मिशा सिंह के निर्देशानुसार पी ओ डूडा श्री अरुण पाठक के मार्गदर्शन में रतलाम जिले में “स्वच्छ जल“ अभियान का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। अभियान अंतर्गत मंगलवार को जिले के सभी 9 नगरीय निकायो में ’जल सुनवाई’ आयोजित की गई । जल सुनवाई में कुल 21 शिकायतें प्राप्त हुई जिनका मौके पर ही निराकरण किया गया।

========

कलेक्टर ने अधिक समय से लंबित आवेदनों पर संबंधित विभाग प्रमुख की उपस्थिति में की सुनवाई

शासन के निर्देशानुसार प्रति मंगलवार को होने वाली जनसुनवाई में कलेक्टर श्रीमती मिशा सिंह द्वारा जनसुनवाई के ऐसे आवेदन जो अधिक समय से लंबित है, पर कार्यवाही करते हुए कलेक्टर कक्ष में संबंधित आवेदनकर्ता एवं संबंधित विभाग प्रमुख की उपस्थिति में समस्या को सुना तथा आवेदको एवं विभाग प्रमुखों से समक्ष मे चर्चा कर आवेदनों का निराकरण किया गया। आज 20 लंबित आवेदनों की सुनवाई की गई।

जनसुनवाई में पटवारियों के विरुद्ध शिकायतें, कलेक्टर ने जारी किए नोटिस

कलेक्टर श्रीमती मिशा सिंह द्वारा की गई अधिक समय से लंबित आवेदनों की सुनवाई में जिले के दो पटवारियों के विरुद्ध शिकायतें प्राप्त हुई । प्राप्त आवेदनों पर संज्ञान लेते हुए कलेक्टर द्वारा संबंधित पटवारियों को कारण बताओ सूचना पत्र जारी किए गए हैं।

तहसील पिपलौदा के ग्राम पंचेवा में पदस्थ पटवारी नारायण मोयल के विरुद्ध शासकीय कार्यों में लापरवाही, आवेदक से अभद्र व्यवहार, शिकायतों के बावजूद कार्य में सुधार नहीं करने, गरीब नागरिकों के साथ भेदभाव एवं धमकी देने, शिकायत के निराकरण में विलंब एवं कार्य में रुचि नहीं लेने पर पटवारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

तहसील रतलाम शहर के ग्राम उसरगार में पदस्थ पटवारी संगीता वर्मा द्वारा शासकीय चरागाह भूमि पर अवैध अतिक्रमण को समय पर नहीं रोका गया तथा शासकीय भूमि पर अवैध निर्माण होने पर भी कार्यवाही नहीं किये जाने पर कारण बताओं सूचना पत्र जारी किया गया है।

============

भावांतर से लेकर यंत्रीकरण तक, हर कदम पर किसानों की आय बढ़ाना और खेती की लागत घटाना ही हमारा संकल्प : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

2868 करोड़ से कृषि यंत्रीकरण को मिल रहा है बढ़ावा देश के सर्वाधिक 5629 कस्टम हायरिंग केंद्र प्रदेश में स्थापित सोयाबीन में 1476 करोड़ का भावांतर, श्रीअन्न पर 1000 रुपये बोनस से बदलेगी खेती

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि ‘कृषक कल्याण वर्ष 2026’ में कृषि विभाग ने अन्नदाता को अन्न से लेकर आय तक, परंपरा से लेकर तकनीक तक, हर मोर्चे पर सशक्त किया है। समर्थन मूल्य, भावांतर, श्रीअन्न प्रोत्साहन, भंडारण, डिजिटल व्यवस्था और कृषि यंत्रीकरण से प्रदेश का किसान अब लागत घटाकर, आय बढ़ाकर आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है।

राज्य शासन ने रबी विपणन वर्ष 2026-27 के लिए गेहूं खरीदी के लिये स्लॉट बुकिंग की अंतिम तिथि 9 मई से बढ़ाकर 23 मई 2026 तक कर दी है और प्रदेशभर में गेहूं का उपार्जन जारी है। न्यूनतम समर्थन मूल्य योजना में चना एवं मसूर का उपार्जन 30 मार्च से 28 मई 2026 तक किया जा रहा है। उड़द प्रोत्साहन योजना वर्ष 2026 में राज्य सरकार ने समर्थन मूल्य के अतिरिक्त 600 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देने का निर्णय लिया है। इससे ग्रीष्मकालीन उड़द का रकबा बढ़ेगा।

भावांतर भुगतान योजना में 7.10 लाख पंजीकृत किसानों द्वारा 16.95 लाख मीट्रिक टन सोयाबीन का विक्रय किया गया। समर्थन मूल्य और बाजार मूल्य के अंतर की 1476 करोड़ रुपये की राशि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण से सीधे किसानों के खातों में अंतरित की गई। सरसों में 1.5 लाख किसान पंजीकृत हैं और योजना संचालित है।

रानी दुर्गावती श्रीअन्न प्रोत्साहन योजना में 1 दिसंबर 2025 से 31 जनवरी 2026 तक प्रमुख उत्पादक 15 जिलों के 3,894 किसानों से 2,829.92 मीट्रिक टन कोदो-कुटकी का उपार्जन किया गया। राज्य सरकार द्वारा क्रय मूल्य के अतिरिक्त 1000 रुपये प्रति क्विंटल प्रोत्साहन राशि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण से किसानों को दी जाएगी। इससे श्रीअन्न की मूल्य श्रृंखला विकसित होगी और किसानों की आय बढ़ेगी।

किसानों की उपज सुरक्षित रखने के लिए खाद्यान्न भंडारण योजना के तहत 3.55 लाख मीट्रिक टन नई भंडारण क्षमता निर्मित की जा चुकी हैं। भंडार योजना-सामग्री में 15 लाख मीट्रिक टन क्षमता के आधुनिक गोदाम बनाए जा रहे हैं, जिनमें 11 लाख मीट्रिक टन का पंजीयन पूरा हो गया है। किसानों को बेहतर दाम दिलाने के लिए 50 कृषि उपज मंडियों में ग्रेडिंग-सॉर्टिंग एवं पैकेजिंग संयंत्र की स्थापना की जा रही है। किसान अपनी उपज की ग्रेडिंग-सॉर्टिंग तथा पैकेजिंग निःशुल्क करा सकेंगे, जिससे मूल्य संवर्धन होगा।

ई-विकास प्रणाली के जरिए किसानों को सुगमतापूर्वक उर्वरक उपलब्ध कराया जा रहा है। इस डिजिटल व्यवस्था से लंबी कतारें, कालाबाजारी और बिचौलियों की भूमिका समाप्त होगी। 01 अप्रैल 2026 से सभी जिलों में ई-किसान प्रणाली लागू है। किसान रजिस्ट्री से हर किसान को विशिष्ट पहचान और खेत की रजिस्ट्री से हर खेत की जियो-टैगिंग की जा रही है, जिससे फसल बीमा, ड्रोन छिड़काव और नुकसान का आंकलन आसान हुआ है।

राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत 3 लाख एकड़ में जैविक-प्राकृतिक खेती कार्यक्रम चल रहा है। प्रदेश के 56 कृषि विज्ञान केंद्र तकनीकी सहायता दे रहे हैं। प्राकृतिक खेती के लिये एक हजार से अधिक जैव संसाधन केंद्र और तीन हजार से अधिक कृषि सखी कार्यरत हैं। 200 से अधिक कृषि वैज्ञानिकों को संसाधन व्यक्ति के रूप में प्रशिक्षित किया गया है। भारत में सर्वाधिक प्रमाणित जैविक खेती मध्यप्रदेश में है। कुल 53 लाख हैक्टेयर से अधिक क्षेत्र में प्राकृतिक खेती हो रही है और 6 हजार से ज्यादा समूह बनाए गए हैं।

शासन द्वारा कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा देने के लिये आगामी 5 वर्षों के लिए 2868.00 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है। लघु, सीमांत एवं पट्टाधारी कृषकों को सस्ते दर पर कृषि यंत्र उपलब्ध कराने के लिए प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति, किसान उत्पादक संगठन तथा ग्रामीण बेरोजगार युवाओं के माध्यम से देश में सर्वाधिक 5629 कस्टम हायरिंग केंद्र स्थापित किए गए हैं। एक हजार से अधिक कृषि ड्रोन संचालक तैयार किए गए हैं। पराली प्रबंधन के तहत फसल अवशेष आधारित उद्योगों को बढ़ावा दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषि विभाग की इन उपलब्धियों से स्पष्ट है कि मध्यप्रदेश का किसान अब उत्पादन के साथ-साथ प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और विपणन से भी जुड़ रहा है। समर्थन, प्रोत्साहन, यंत्रीकरण और डिजिटल नवाचार का यह संगम ‘समृद्ध किसान-विकसित मध्यप्रदेश’ की नींव है, जो ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को गति देगा।

========

जल गंगा संवर्धन अभियान अंतर्गत ग्राम आंबापाड़ा में जल चौपाल आयोजित

कलेक्टर श्रीमती मिशा सिंह के निर्देशन एवं कार्यपालन यंत्री श्री एस.आर. जांगड़े के मार्गदर्शन में जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में ग्रीष्मकाल के दौरान पेयजल व्यवस्थाओं को सुचारू बनाए रखने और जल संबंधी समस्याओं के निराकरण हेतु जल चौपालों का आयोजन किया जा रहा है।

इसी क्रम में विकासखंड सैलाना के आंबापाड़ा में मंगलवार को लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा जल चौपाल आयोजित की गई।

चौपाल में ग्रामीणजनों के साथ बैठकर जल व्यवस्थाओं पर चर्चा की गई। इस दौरान पंचायत में संचालित पेयजल योजनाओं के संचालन एवं संधारण, बंद योजनाओं को पुनः प्रारंभ करने, हैंडपंपों की स्थिति एवं उनकी रंग के आधार पर पहचान, जल संरक्षण एवं संवर्धन, जल गुणवत्ता तथा जल गंगा संवर्धन अभियान जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया गया।

चोपाल में ग्रामीणों ने अपनी समस्याएं और सुझाव भी साझा किए।

जल चौपाल में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के जिला सलाहकार श्री आनंद व्यास, सहायक यंत्री श्री पर्वत सिंह कटारा, उपयंत्री शुभा अर्गल, श्री कान्तु चरपोटा, श्री रामा चरपोटा, श्री लाल सिंह मईड़ा, श्रीमती गुड्डी बाई, श्री वीरजी डोडियार, श्रीमती भंवरी मईड़ा तथा हैंडपंप टेक्नीशियन श्री गोवर्धन बिलावर सहित ग्रामीणजन उपस्थित थे ।

===========

मंत्रि-परिषद की बैठक लोक कल्याणकारी और विकास कार्यों के लिए 38 हजार 555 करोड़ रुपये की स्वीकृति

व्यापारियों के कल्याण के लिए राज्य व्यापारी कल्याण बोर्ड के गठन का निर्णय “दलहनों में आत्मनिर्भरता मिशन” के लिए 2442.04 करोड़ रुपये की स्वीकृति सड़क निर्माण और आवास अनुरक्षण के लिए 32 हजार 405 करोड़ रुपये की स्वीकृति इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर्स और सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी कार्यों के लिए 1295.52 करोड़ रुपये की स्वीकृति आंगनवाड़ी केन्द्रों और समेकित बाल संरक्षण मिशन वात्सल्य के लिए 2,412 करोड़ रुपये की स्वीकृति मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई मंत्रि-परिषद की बैठक

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय में हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में मध्यप्रदेश के सर्वांगीण विकास और जन-कल्याण के लिए विभिन्न विभागों की 38 हजार 555 करोड़ रुपये की महत्वपूर्ण वित्तीय स्वीकृतियां प्रदान की गई। मंत्रि-परिषद ने प्रदेश के व्यापारियों के कल्याण के लिए राज्य व्यापारी कल्याण बोर्ड के गठन का ऐतिहासिक निर्णय भी लिया है। यह निर्णय प्रदेश के बुनियादी ढांचे, कृषि आत्मनिर्भरता और सामाजिक सुरक्षा को नई ऊंचाई देने के उद्देश्य से लिए गए हैं।

बैठक के प्रमुख निर्णयों में 16वें वित्त आयोग की अवधि (2026-2031) के लिए सड़क निर्माण, ग्रामीण मार्गों के उन्नयन और शासकीय आवासों के रखरखाव के लिए सर्वाधिक 32 हजार 405 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। कृषि क्षेत्र को मजबूती देने के लिए “दलहनों में आत्मनिर्भरता मिशन” को मंजूरी दी गई, इसमें आगामी 5 वर्षों में 2,442.04 करोड़ रुपये व्यय कर दलहन उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त महिला एवं बाल विकास के अंतर्गत नवीन आंगनवाड़ी केंद्रों के निर्माण और ‘मिशन वात्सल्य’ के सुचारू संचालन के लिए 2,412 करोड़ रुपये तथा आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए 1,295 करोड़ 52 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई है।

आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के लिए मंत्रि-परिषद ने ‘राज्य व्यापारी कल्याण बोर्ड’ के गठन का भी महत्वपूर्ण निर्णय लिया है, जो व्यापारियों की समस्याओं के त्वरित निराकरण और सरकार के साथ सीधे संवाद का सशक्त माध्यम बनेगा। यह पहल प्रदेश की अर्थव्यवस्था को गति देने और समावेशी विकास सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम हैं।

“दलहनों में आत्मनिर्भरता मिशन” के लिए 2442.04 करोड़ रूपये की स्वीकृति

मंत्रि-परिषद ने मध्यप्रदेश में “दलहनों में आत्मनिर्भरता मिशन” की आगामी 5 वर्षों 01 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक निरंतरता के लिए 2442 करोड़ 04 लाख रूपये की स्वीकृति दी। योजना के क्रियान्वयन के संबंध में आवश्यक नियम/दिशा-निर्देश जारी करने के लिए किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग को अधिकृत किया गया।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा दलहन फसलों में आत्मनिर्भर बनने के लिए राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन में से दलहन फसल को पृथक कर “दलहनों में आत्मनिर्भरता मिशन” 11 अक्टूबर 2025 को प्रारंभ किया गया। भारत सरकार ने केन्द्र प्रायोजित योजना के रूप में नए मिशन “दलहनों में आत्मनिर्भरता मिशन” को मंजूरी दी है।

मिशन का उददेश्य दलहनी फसलों के उत्पादन वृद्धि एवं क्षेत्रफल का विस्तार करना, किसानों के लिए जलवायु-अनुकूल उन्नत बीजों का उत्पादन एवं उपलब्धता बढ़ाना, कटाई के बाद प्रसंस्करण, भंडारण एवं प्रबंधन तकनीकों को प्रोत्साहित करना है।

योजना में प्रदेश में “दलहनों में आत्मनिर्भरता मिशन” क्रियान्वयन से प्रजनक बीज, बीज उत्पादन, बीज वितरण, प्रदर्शन और ट्रेनिंग होगी। साथ ही पोस्ट हार्वेस्ट इंफ्रास्ट्रक्चर (प्रसंस्करण एवं पैकेजिंग इकाई) इकाई विकसित होने से कृषक लाभान्वित होगें तथा दलहनी फसलों के क्षेत्रफल में विस्तार को प्रोत्साहन मिलेगा तथा उत्पादन में वृद्धि होगी।

सड़क निर्माण और आवास अनुरक्षण के लिए 32 हजार 405 करोड़ रूपये की स्वीकृति

मंत्रि-परिषद द्वारा लोक निर्माण विभाग के अंतर्गत सड़क निर्माण और आवास अनुरक्षण के लिए 32,405 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी है।

स्वीकृति अनुसार सड़क एवं सेतु के संधारण से संबंधित योजना को 16वें वित्त आयोग की अवधि 1 अप्रैल, 2026 से 31 मार्च, 2031 तक निरंतर संचालन के लिए 6 हजार 150 करोड़ रूपये का अनुमोदन दिया गया है। इसी तरह ‘एफ’ टाईप एवं उससे नीचे की श्रेणी के शासकीय आवासों के अनुरक्षण के लिए 1 हजार 345 करोड़ रूपये की राशि स्वीकृत की गई है। ग्रामीण सड़कों एवं अन्य जिला मार्गों का निर्माण और उन्नयन के लिए 24 हजार 300 करोड़ रूपये का अनुमोदन सहित सड़क सुरक्षा से संबंधित कार्यों से जुड़ी योजना की 16वें वित्त आयोग की अवधि 1 अप्रैल, 2026 से 31 मार्च, 2031 की निरंतरता के लिए 610 करोड़ रूपये स्वीकृत किये गए।

फिर अचानक गेहूं उपार्जन केंद्र पहुंचे सीएम डॉ. मोहन, रिलीज किया वेयरहाउस की क्षमता बढ़ाने का ऑर्डर

मंत्रि-परिषद द्वारा विज्ञान एवं प्रौ‌द्योगिकी विभाग के अंतर्गत इलेक्ट्रॅानिक्स मैन्युफेक्चरिंग क्लस्टर्स और सूचना प्रौ‌द्योगिकी संबंधी कार्य से संबंधित योजनाओं की निरंतरता और संचालन के लिए 1295 करोड़ 52 लाख रूपये की स्वीकृति प्रदान की गई। स्वीकृति अनुसार आरसीबीसी , डीईजीएस और एनआईसी आदि केन्द्रों के आगामी पांच वर्षों 1 मार्च 2026 से 31 मार्च 2031 तक संचालन के लिए 244 करोड़ 20 लाख रूपये की स्वीकृति दी गई है। ई-दक्ष प्रशिक्षण कार्यक्रम अंतर्गत राज्य के सभी शासकीय अधिकारियों और कर्मचारियों को सूचना प्रौद्योगिकी एवं ई-गवर्नेंस संबंधित प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है।

मंत्रि-परिषद द्वारा 16वें वित्त आयोग की अवधि के लिए प्रदेश में इलेक्ट्रानिक्स मैन्युफेक्चरिंग क्लस्टर्स की स्थापना (EMC 2.0) के लिए 225 करोड़ 32 लाख रूपये की स्वीकृति दी गयी। इसके अंतर्गत भोपाल के बांदीखेड़ी में 209.47 एकड़ क्षेत्र में क्लस्टर की स्थापना की जायेगी। साथ ही सूचना प्रौ‌द्योगिकी निवेश प्रोत्साहन संबंधी योजना की निरंतरता के लिए 300 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी गई। राज्य में सूचना प्रौद्योगिकी आधारित उद्योगों की स्थापना एवं विकास को बढ़ावा देने के लिए निजी क्षेत्र की सहभागिता सुनिश्चित करना तथा राज्य को आईटी एवं आईटीईएस सेवाओं के लिए आकर्षक गंत्वय के रूप में स्थापित करने के लिए पूंजीगत अनुदान कर संबंधी रियायतें, प्रशिक्षण एवं मानव संसाधन विकास तथा आईटी पार्क/ईएमसी (इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफेक्चरिंग क्लस्टर्स) की स्थापना को बढ़ावा दिये जाने संबंधी कार्य किया जायेगा। इसका संचालन एमपीएसईडीसी के माध्यम से होगा।

मंत्रि-परिषद द्वारा प्रदेश में स्टेट वाईड एरिया नेटवर्क की स्थापना (स्वान) और संचालन संबंधी योजना की 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक निरंतरता के लिए 526 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी गई है। इस योजना का उद्देश्य राज्य, जिला और ब्लॉक स्तर पर सभी शासकीय कार्यालयों को आपस में जोड़कर सुगम संचार एवं सूचना के आदान-प्रदान की सुविधा उपलब्ध कराना है।

आंगनवाड़ी केंद्रों और समेकित बाल संरक्षण मिशन वात्सल्य के लिए 2412 करोड़ रूपये की स्वीकृति

मंत्रि-परिषद द्वारा महिला एवं बाल विकास अंतर्गत नवीन, निर्माणाधीन अपूर्ण एवं अप्रारंभ आँगनवाड़ी भवनों के निर्माण और समेकित बाल संरक्षण योजना के लिए लगभग 2 हजार 412 करोड़ रूपये स्वीकृत किये गए। स्वीकृति अनुसार आँगनवाड़ी केन्द्रों के लिए भवन निर्माण अंतर्गत 1500 नवीन आँगनवाड़ी केंद्रों के निर्माण से सम्बंधित योजना की प्रदेश में 16वें वित्त आयोग की निर्धारित अवधि वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-2031 में क्रियान्वयन के लिए 1800 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी। साथ ही इसी अवधि में भारत सरकार द्वारा स्वीकृत कार्य योजना समेकित बाल संरक्षण योजना मिशन वात्सल्य के संचालन के लिए 606 करोड़ 68 लाख और स्वच्छता एक्शन प्लान के संचालन के लिए 5 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी गई। समेकित बाल संरक्षण योजना अंतर्गत किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम 2015 एवं नियम 2016 में प्रावधानित विधि विवादित एवं देखरेख तथा संरक्षण के जरूरतमंद बालकों को पोषण, शिक्षा, आश्रय एवं संरक्षण प्रदान किया जाकर पारिवारिक पुनर्वास किया जाता है।

व्यापारियों के कल्याण के लिए ‘राज्य व्यापारी कल्याण बोर्ड’ के गठन का निर्णय

मंत्रि-परिषद ने राज्य के व्यापारिक समुदाय के हितों के संरक्षण , उनके सर्वांगीण विकास और समस्याओं के त्वरित निराकरण के लिए ‘राज्य व्यापारी कल्याण बोर्ड’ और जिला स्तरीय समितियों के गठन की मंजूरी दी है। भारत सरकार द्वारा स्थापित राष्ट्रीय व्यापारी कल्याण बोर्ड के उद्देश्यों की पूर्ति के लिए उठाए गए इस कदम का मुख्य लक्ष्य प्रदेश के व्यापारियों और सरकार के बीच एक सीधा संवाद तंत्र स्थापित करना है, जिससे व्यापारिक क्षेत्र की बाधाओं को दूर कर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को गति दी जा सके।

मुख्यमंत्री, राज्य व्यापारी कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष होंगे। औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन तथा सूक्ष्म , लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री सदस्य होंगे। प्रशासनिक समन्वय सुनिश्चित करने के लिए वित्त, कृषि, स्वास्थ्य, ऊर्जा, खनिज, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, तकनीकी शिक्षा और पर्यटन जैसे महत्वपूर्ण विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ राज्य नीति आयोग, भारतीय रिजर्व बैंक, नाबार्ड, एनएचएआई और एफएसएसएआई जैसे प्रमुख राष्ट्रीय संस्थानों के प्रमुखों को भी बोर्ड का आधिकारिक सदस्य बनाया गया है। अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन संस्थान और आरसीपीवी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को पदेन सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। बोर्ड में देश के प्रतिष्ठित व्यापारिक संगठनों जैसे सीआईआई, फिक्की, डिक्की, फिओ और लघु उद्योग भारती के राज्य प्रमुखों को पदेन सदस्य के रूप में जोड़ा गया है। क्षेत्रीय प्राधिकरण डीजीएफटी को सदस्य एवं मध्यप्रदेश इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक को सदस्य सचिव के रूप में शामिल किया गया है।

राज्य व्यापारी कल्याण बोर्ड में आवश्यकतानुसार संशोधन अध्यक्ष की अनुमति से किया जा सकेगा। जिला स्तरीय समिति के गठन एवं कार्य क्षेत्र का निर्धारण सदस्य सचिव द्वारा किया जायेगा। राज्य व्यापारी कल्याण बोर्ड की बैठक कैलेंडर वर्ष में चार बार अर्थात् प्रत्येक 3 माह में एक बार तथा जिला स्तरीय समिति की बैठक प्रत्येक माह में एक बार आयोजित की जाएगी।

============

जनसुनवाई में 126 आवेदन पर हुई सुनवाई

कलेक्टर कार्यालय में आज जनसुनवाई आयोजित की गई। कलेक्टर श्रीमती मिशा सिंह ने कलेक्टर कक्ष में अधिक समय से लंबित आवेदनों पर सुनवाई की एवं कलेक्टर कार्यालय सभाकक्ष में सीईओ जिला पंचायत सुश्री वैशाली जैन एवं एडीएम डॉ शालिनी श्रीवास्तव ने आवेदकों को सुना एवं आवेदकों से आवेदन प्राप्त किये। जनसुनवाई में 126 आवेदन प्राप्त हुए। निराकरण योग्य आवेदनों का मौके पर उपस्थित विभागीय अधिकारियों से निराकरण करवाया गया एवं शेष आवेदनों का समय सीमा में निराकरण करने के लिए संबंधित विभाग प्रमुखों को निर्देशित किया गया।

आवेदक सुरेश पिता जगदीश निवासी ग्राम उपरवाडा विकासखण्ड जावरा ने बताया कि उनकी पुत्री का जाति प्रमाण पत्र बनवाने हेतु संबंधित कार्यालय में आवेदन देने के पश्चात आज दिनांक तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है। कार्यवाही हेतु एसडीएम जावरा को निर्देशित किया गया। आवेदक प्रहलाद सिंह निवासी ग्राम भारोडा ने प्रधानमंत्री आवास योजना अंतर्गत जमा हुई राशि कृषि केसीसी लोन बकाया होने के कारण बैंक द्वारा नहीं दिए जाने के संबंध में आवेदन दिया। कार्यवाही हेतु एलडीएम को निर्देशित किया गया।

आवेदक सलीम पिता फकीर निवासी ग्राम चोरासी बडायला तहसील पिपलौदा ने प्रधानमंत्री आवास योजना सूची में नाम आने के पश्चात आज दिनांक तक आवास योजना की राशि न मिलने के संबंध में आवेदन दिया। कार्यवाही हेतु संबंधित अधिकारी को निर्देशित किया गया।

जनसुनवाई में आवेदक विक्रमसिंह पिता भगवानसिंह निवासी ग्राम तालोद तहसील आलोट ने कृषि भूमि के उपर से निकल रहे विद्युत लाईन के तारों की उंचाई बढ़ाने तथा खराब हो रहे विद्युत पोल के स्थान पर नवीन पोल लगाये जाने के संबंध में आवेदन दिया। कार्यवाही हेतु एमपीईबी के संबंधित अधिकारी को निर्देशित किया गया।

=======

फिर अचानक गेहूं उपार्जन केंद्र पहुंचे सीएम डॉ. मोहन, रिलीज किया वेयरहाउस की क्षमता बढ़ाने का ऑर्डर

उज्जैन के नागझिरी स्थित अडानी एग्रो साइलो उपार्जन केंद्र पहुंचे सीएम डॉ. यादव

सुविधाएं देखने के बाद अधिकारियों को दिए दिशा-निर्देश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार मना रही किसान

उज्जैन के नागझिरी स्थित अडानी एग्रो साइलो उपार्जन केंद्र पहुंचे सीएम डॉ. यादव सुविधाएं देखने के बाद अधिकारियों को दिए दिशा-निर्देश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार मना रही किसान कल्याण वर्ष

मैं कहीं भी हेलीकॉप्टर उतार सकता हूं और गेहूं उपार्जन केंद्र का आकस्मिक निरीक्षण कर सकता हूं..।’ कुछ दिनों पहले ये बात कहने वाले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 5 मई को उज्जैन की सेवा सहकारी संस्था दताना के नागझिरी स्थित अडानी एग्रो साइलो उपार्जन केंद्र पहुंचे। उन्होंने यहां केंद्र का निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को सुविधा संबंधी जरूरी दिशा-निर्देश भी दिए। इसके अलावा उन्होंने वेयरहाउस की क्षमता बढ़ाने का भी फैसला किया। वेयरहाउस की क्षमता बढ़ने से गेहूं को बेमौसम बारिश से बचाया जा सकेगा। इससे पहले सीएम डॉ यादव शाजापुर और खरगोन में भी गेहूं उपार्जन का आकस्मिक दौरा कर चुके हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मैं यहां गेहूं उपार्जन केंद्र पर आया हूं। हमने पूर्व में घोषित किया है कि गेहूं खरीदी को लेकर पूरे प्रदेश में स्लॉट बुकिंग की तारीख बढ़ाई है। गेहूं उपार्जन लगातार चल रहा है। मुझे बताया गया है कि हर जगह हमारी खरीदी सहज और सामान्य हुई है, लेकिन फिर भी आकस्मिक दौरे लगाकर हमने किसानों के साथ अपनी भावना व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि जानकारी मिल रही है कि अब नियमित अंतराल से सात दिन के अंदर भुगतान भी हो रहा है। इस बीच लोगों का माल ढुलाई का काम भी चल रहा है। ऐसी परिस्थिति में तौल कांटे भी बढ़वाए गए हैं। सरकार ने सुविधाएं भी बढ़ाई हैं। किसानों को मिलें सभी सुविधाएं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मुझे बताया गया था कि वेयरहाउस के अंदर अगर क्षमता बढ़ा दें, तो बारिश के मौसम में काफी लाभ होगा। आज हमने वेयरहाउस की क्षमता बढ़ाने के ऑर्डर भी निकाल दिए हैं। किसानों को किसी प्रकार की कोई तकलीफ नहीं होनी चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हमारी सरकार यह साल किसान कल्याण वर्ष के रूप में मना रही है। हमारा प्रयास है कि किसानों को सब प्रकार की सुविधा मिले। उन्होंने कहा कि अभी तक मेरी जानकारी में सरकार ने कल तक 41 लाख मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन किया है। हम अपनी कैपेसिटी और बढ़ा सकते हैं। मैं किसान भाइयों से कहना चाहता हूं कि अपने क्षेत्र के तौल कांटे पर जाकर प्रक्रिया में भागीदार बनें। इस दौरान कोई भी कष्ट होने पर जिला प्रशासन से संपर्क करें। जिला प्रशासन ने कंट्रोल रूप की स्थापना की है। हम गेहूं उपार्जन की रोज मॉनिटरिंग कर रहे हैं। गेहूं के साथ चना और मसूर की खरीदी भी चल रही है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
WhatsApp Icon
Whatsapp
ज्वॉइन करें
site-below-footer-wrap[data-section="section-below-footer-builder"] { margin-bottom: 40px;}