नगरवासियों का जल स्रोत सीतामऊ नगर के तालाब का न तो अतिक्रमण हटा न सौंदर्यीकरण हुआ

नगरवासियों का जल स्रोत सीतामऊ नगर के तालाब का न तो अतिक्रमण हटा न सौंदर्यीकरण हुआ
सीतामऊ। रियासत के समय से लगभग 100 बीघा के क्षेत्रफल में बना जमीन पर बना तालाब कभी साफ स्वच्छ रहा तालाब अब अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है। तालाब में पानी रहने से नगर का जल स्तर भी पर्याप्त बना रहता था। जिससे आसपास के कुओं से ग्रीष्मकाल के दौरान भी सीतामऊ नगर के साथ निचली सतह से लगे 10-15 किलोमीटर गांवों के कुएं नलकुप में पानी का स्तर बना रहने से नागरिकों को पानी मिल जाता था।
उल्लेखनीय है कि पूर्व के समय से यह तालाब जनपद पंचायत के अधीन था। जनपद पंचायत ने इसे अपनी आय का साधन माना और कभी भी इसके रखरखाव पर ध्यान नहीं दिया गया। जनता की और परिषद की मांग पर तालाब शासन ने नगर परिषद को हस्तांतरित कर दिया। तब नगरवासियों को उम्मीद थी कि नगर परिषद द्वारा तालाब को अतिक्रमण मुक्त करवाकर सौंदर्यीकरण करवाया जाएगा। जिससे यह जल स्तर बढ़ाए रखने के साथ एक पिकनिक स्थल भी होगा। पर नगर परिषद को मिल जाने के बाद भी के अब तक तालाब की सुध नहीं ली गई है।
वर्षों पूर्व लगभग 2008- 10 में कुछ कॉलोनाइजरों ने तालाब पानी की आवक के स्रोत मार्ग को अवरुद्ध किया।तथा अतिक्रमण मुक्त करने को लेकर आम जनता के द्वारा इस संबंध में आंदोलन भी किया गया था। उस समय प्रशासन में औपचारिकता निभाते हुए मार्ग खुलवाने का प्रयास किया। परंतु फिर स्थिति यथावत बन गई है। कुछ लोगों ने तालाब क्षेत्र के बड़े हिस्से पर अतिक्रमण कर रखा है और कहीं मिट्टी डालकर इसका क्षेत्रफल कम कर दिया पुराने मकान का निकला हुआ मलबा भी तालाब में डालकर इसका कैचमेंट एरिया कम किया जा रहा।नगर का गंदा पानी तालाब में छोड़ा जा रहा है। इसकी दुर्दशा के लिए नगर परिषद भी जिम्मेदार है।
पूर्व में नगर की जनता चद्दर पर तथा घाटों पर नहाने के लिए जाया करते थे परंतु अब स्थिति यह है। पूरे तालाब का पानी ही गंदा होने की वजह से नहाने लायक भी नहीं रहा।यहां पर बनी सीसी पाल पर लोगों का आवागमन लगा रहता है। यह पाल टुटी हुई होने से आने जाने वाले के लिए खतरा बना रहता है।
नागरिकों का कहना है कि तालाब गंदगी की वजह से इस पानी का उपयोग भी नहीं कर सकते है। इस तालाब में है में अब तक पानी रहता है। नगर के सभी हैंडपंप ट्यूबवेल तथा कुए रिचार्ज होते रहते हैं। नगर के साथ ही निचले क्षेत्र के 8-10 गांव कुए व हैंडपंप, रिचार्ज रहते हैं। ग्राम खेड़ा, पतलासी, राम खेड़ी गलिहारा, धाराखेड़ी सेमलिया रानी, खेरखेड़ा आदि आदि गांवों के कुवों बावड़ियों में जल स्तर बना रहता है।
इसको लेकर मुख्य नगर पालिका अधिकारी जीवन राय माथुर ने बताया कि तालाब के सौंदर्याकरण के लिए राज्य शासन को प्रस्ताव भेजा है। तालाब का सीमांकन कराया जाएगा तथा तालाब में गंदे पानी को रोकने की व्यवस्था की जाएंगी ।
कांग्रेस ने कि तालाब के विकास कि मांग – शहर कांग्रेस अध्यक्ष निर्मल फरक्या का कहना है कि वर्षों से इस तालाब की घोर उपेक्षाएं होती रही हैं। स्थानीय प्रशासन एवं जिम्मेदारों की लापरवाही ने इस तालाब को अपने अस्तित्व को बनाए रखने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। पूर्व में शहर कांग्रेस अध्यक्ष रहे स्वर्गीय संजय सोनी द्वारा धरना प्रदर्शन एवं आंदोलन किया था। तब प्रशासन द्वारा औपचारिक कार्यवाही हुई थी। समय बितने के साथ इस तालाब की दुर्दशा चरम सीमा पार करती जा रही है। वर्तमान समय में शासन द्वारा तालाब सौंदर्यकरण हेतु लाखों रुपए आवंटित किए गए थे। परंतु तालाब का सौंदर्यीकरण कही से कही तक दिखाई नहीं दे रहा है।तालाब को अतिक्रमण मुक्त करने और उसका सौंदर्यीकरण सहित नगर विकास के मुद्दों को लेकर समय रहते स्थानीय प्रशासन एवं नगर परिषद का अमला उचित कार्यवाही नहीं करता है तो नगर हित में शहर कांग्रेस द्वारा आंदोलन किया जाएगा।



