28 साल का इंतज़ार मध्यप्रदेश में IPS प्रमोशन अटका, वर्दी में बढ़ता असंतोष

28 साल का इंतज़ार मध्यप्रदेश में IPS प्रमोशन अटका, वर्दी में बढ़ता असंतोष
मध्यप्रदेश में राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों के लिए आईपीएस पदोन्नति अब सम्मान से ज्यादा इंतज़ार की कहानी बन चुकी है। जहां दूसरे राज्यों में 2011 और 2012 बैच के अधिकारी आईपीएस बन चुके हैं, वहीं मध्यप्रदेश में 1997 बैच के अधिकारी अब भी कतार में खड़े हैं। यानी 28 साल की सेवा के बाद भी प्रमोशन का दरवाज़ा पूरी तरह नहीं खुला। यह देरी केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि सिस्टम की धीमी चाल और उपेक्षा का आईना है।
इस हालात का सबसे बड़ा असर पुलिस अधिकारियों के मनोबल पर पड़ रहा है। जिन अधिकारियों ने वर्षों तक मैदान में अपराधियों से मुकाबला किया, कानून व्यवस्था संभाली और संकट के समय जिम्मेदारी निभाई, वही अधिकारी फैसले लेने वाले ऊंचे पदों तक नहीं पहुंच पा रहे। समान बैच के आईएएस अधिकारी आगे निकल चुके हैं, जबकि पुलिस सेवा के अधिकारी अब भी फाइलों के बोझ तले अटके हैं। कई अफसर एएसपी या एसपी स्तर से ऊपर बढ़े बिना ही रिटायरमेंट की ओर बढ़ रहे हैं।
यह सिर्फ पदोन्नति का मुद्दा नहीं, बल्कि अनुभव की अनदेखी और प्रतिभा के अपमान का विषय है। सरकार अगर कैडर समीक्षा, नए पदों का सृजन और लंबित प्रमोशन प्रक्रिया को समय पर पूरा नहीं करती, तो यह असंतोष आगे चलकर बड़ी चुनौती बन सकता है। वर्दी पहनकर सेवा देने वालों को अगर इंतज़ार ही इनाम मिले, तो सवाल व्यवस्था पर ही उठेंगे।
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