मध्यप्रदेशरतलाम

समाचार मध्यप्रदेश रतलाम 21 फरवरी 2026 शनिवार

शासकीय कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय में भारतीय ज्ञान परम्परा की भूमिका पर अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ

ज्ञान, चिंतन और विमर्श की गरिमामयी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए शासकीय कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय, रतलाम में 20 फरवरी को दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी ‘‘वैश्वीकरण के संदर्भ में भारतीय ज्ञान परम्परा की भूमिका‘‘के आयोजन का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों अश्विनी कुमार (डीआरएम), श्री प्रदीप खरे, डॉ. वाय.के. मिश्रा द्वारा मां वीणापाणि की मूर्ति पर माल्यार्पण व दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया, तत्पश्चात महाविद्यालय के संगीत विभाग की छात्राओं द्वारा मां शारदा की वंदना नृत्य के माध्यम से प्रस्तुत कर समां सुरमई बना दिया। साथ ही महाविद्यालय की छात्राओं ने अतिथियों का स्वागत नृत्य के माध्यम से किया।

उद्धाटन सत्र की अगली कड़ी में अतिथियों का स्वागत महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ मंगलेश्वरी जोशी, डॉ मणिक डांगे, डॉ सुरेश चौहान, डॉ तबस्सुम पटेल, डॉ वी एस बामनिया, डॉ सुनीता श्रीमाल, डॉ विनोद जैन, डॉ बी वर्षा, डॉ मधु गुप्ता, डॉ रोशनी रावत, प्रो एस पी गिरी, प्रो सौरभ गुर्जर, श्रीमती बबीता सिसोदिया, सुश्री अमिता वर्मा, श्री नंदलाल पंवार द्वारा किया गया। तत्पश्चात आईक्यूएसी प्रभारी एवं संगोष्ठी समन्वयक डॉ मणिक डांगे ने विषय पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान प्रणाली केवल प्राचीन ग्रंथों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह एक समग्र और जीवनमूल्य-आधारित दृष्टि है। वेद, उपनिषद तथा श्रीमद्भगवद्गीता जैसे ग्रंथों में निहित ज्ञान मानव जीवन के आध्यात्मिक, नैतिक और बौद्धिक आयामों को संतुलित रूप में प्रस्तुत करता है। यह ज्ञान केवल मोक्ष या आध्यात्म तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक व्यवस्था, कर्तव्य, नैतिकता और नेतृत्व के सिद्धांत भी प्रदान करता है। विषय प्रवेश के पश्चात अतिथियों का सम्मान पट्टी व शील्ड के माध्यम से किया गया, साथ ही ऑनलाइन अतिथियों का भी स्वागत, सम्मान किया गया। अतिथियों द्वारा संगोष्ठी हेतु आए शोध सारांश की प्रकाशित पुस्तिका ‘‘संचयिका‘‘ का विमोचन किया गया, इस अवसर पर वाणिज्य विभाग द्वारा शोध सेमिनार की पत्रिका का भी विमोचन किया गया।

उद्घाटन सत्र के प्रथम वक्ता के रूप में डॉ. पवन मिश्रा सर ऑनलाइन माध्यम से प्रतिभागियों से जुड़े व ‘‘भारतीय ज्ञान परंपरा और बौद्धिक संपदा अधिकार‘‘ विषय पर बोलते हुए कहा कि बुद्धि से जुड़े कार्य जो रचनाकार को प्रस्तुत करते है, बौद्धिक कहलाते है, यह परंपरा के रूप में चलते है, यह व्यक्तिगत न होकर सामाजिक होते है। भारतीय ज्ञान परंपरा की समृद्धि उसकी विविधता में निहित है। जिसमें वैज्ञानिक और दार्शनिक आधार, सांस्कृतिक विरासत सदियों से मौखिक परंपराओं , पांडुलिपियों और कला रुपों के माध्यम से पीढ़ी दर पीढ़ी हस्तांतरित होता रहा है। यह अथाह प्रवाह ही ज्ञान है जो वेदों, उपनिषदों, आयुर्वेद, योग, ज्योतिष कला के द्वारा समाज में निहित है। भारत में पारम्परिक ज्ञान के संरक्षण की चुनौतियों पर भी उन्होंने प्रकाश डाला, साथ ही उन्होंने इसके व्यवसायिक उपयोग और नैतिक विचार पर भी बताया कि कैसे इसे व्यवहार में लाना है, भविष्य की रणनीति, संरक्षण और संवर्धन हेतु उपाय भी बताएं। साथ ही कहा कि इस परम्परा को आगे आने वाली पीढ़ी के लिए संरक्षित कर सकते है।

सत्र के द्वितीय वक्ता दिल्ली विश्वविद्यालय से डॉ. चांदकिरण सलूजा जी ऑनलाइन संगोष्ठी में सम्मिलित हुए व अपने विचार व्यक्त करते हुए बोले कि भारतीय ज्ञान परंपरा व्यक्ति से तो जुड़ती है पर समाज की भी चर्चा करती है, परंपरा का अर्थ है परम-परा, भारत के ज्ञान में प्रतिक्षण जो नया हो वही वास्तविक अर्थों में परंपरा है, हमारी शिक्षा नीति का आधार ही ज्ञान की परंपरा है, शिक्षा नीति कहती है यह शिक्षा नीति प्राचीन ज्ञान को देखते हुए तैयार की गई है और इसे केवल भारत के संदर्भ में ही तैयार नहीं किया गया बल्कि वैश्विक धरातल पर लाने के लिए बनाया गया है। शिक्षा के चार सिद्धान्त स्तंभ होने चाहिए जिसमें पहला ज्ञान हेतु शिक्षा होना चाहिए, दूसरा मिल कर रहने हेतु शिक्षा, तीसरा मनुष्य बनने हेतु शिक्षा व चौथा अच्छा इंसान बनने की शिक्षा होना चाहिए। विश्व की शिक्षा को बचाना है तो ये चार स्तंभ हमें अपनाने होंगे। यह गठन किसी एक भूखंड तक सीमित नहीं है, बल्कि विश्व की संपदा है।

कार्यक्रम की अगली कड़ी में मुख्य वक्ता श्री अश्विनी कुमार जी ने अपना वक्तव्य देते हुए कहा कि वैश्वीकरण कोई नई बात नहीं है, केवल थोड़ा बदलाव हुआ है, चूंकि हम नए दौर में प्रवेश कर रहे है तो वैश्वीकरण में भी बदलाव आए है, आपकी आदतों व मूल्यों का आज के समय में बड़ा महत्व है, ज्ञान के स्थान पर आदतें, संस्कार ज़्यादा जरूरी है, आने वाले समय में हमें अपने मन पर नियंत्रण रखना होगा, शिक्षा में महत्वपूर्ण प्रश्न यही होगा कि व्यक्ति अपना समय कैसे बिताता है। जब भी वैश्वीकरण की बात उठती है तो पता चलता है कि ज्ञान की महत्ता क्या है, ज्ञान की उपयोगिता क्या है, आप सभी इन सब बातों और चर्चा करें व जाने की आज के समय मे यह प्रश्न कितना महत्वपूर्ण है। तकनीक व परंपरा के सम्मिश्रण स्वरूप रहे हमारे ये मुख्य वक्ता।

कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए अगले वक्ता डॉ प्रदीप खरे मंच से प्रतिभागियों से जुड़े और ‘‘भारतीय दार्शनिक परंपराओं के विभिन्न चिंतक‘‘ विषय पर अपने विचार व्यक्त किए, उन्होंने कहा कि हमें अपने मूल्यों का वैश्वीकरण करना होगा, अपने विचारों को विश्व तक पहुंचाना होगा, हमारी संस्कृति और मूल्य ही ज्ञान परंपरा है इसे वैश्विक स्तर पर ले जाना है। भारतीय संस्कृति की अवधारणा है कि जब तक आपका मन को गुरु के चरणों का आशीर्वाद नहीं मिला तब तक आप वास्तविक ज्ञान को प्राप्त नहीं कर सकते। भारत के आदिगुरु शंकराचार्य जी ने भारतीय ज्ञान परंपरा में निहित निर्गुण परंपरा को भक्ति के साथ स्वीकार करने की प्रेरणा प्रदान की, जब तक भक्ति नहीं टैब तक ईश्वर का साक्षात्कार नहीं, कोई ज्ञान ,वैराग्य नहीं होगा। हमारे शास्त्रों में कहा गया है कि धीरे धीरे ही विद्या का अर्जन होगा, चाहे धन का अर्जन करना हो तो वो भी धीरे ही होगा।

मुख्य अतिथि प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस के प्राचार्य डॉ वाय के मिश्रा ने अपने उद्धबोधन में कहा कि इस अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन करने पर कन्या महाविद्यालय को बहुत बधाई, वैश्वीकरण के संदर्भ में ज्ञान परंपरा ऐसा विषय है जो आज के समय में सार्थक है, इस विषय की सार्थकता इसी में निहित है कि आज की शिक्षा प्रणाली इसी ज्ञान को प्रस्तुत करता है। वर्तमान में हम नैतिकता को दरकिनार कर रहे है, हमें अपनी प्राचीन संस्कृति को अपनाकर नैतिकता को फिर से अपनाना होगा, चिंतन, मनन करने होगा, निष्कर्ष निकालना होगा, तभी हम इसे आगे बढ़ाने में व नई तकनीकी से जोड़ने में सफल होंगे। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ मंगलेश्वरी जोशी ने कहा कि आज की इस संगोष्ठी में इस गंभीर विषय को जिस प्रकार से उल्लेखित किया कि यह एक नव चिंतन को जन्म देता है, इतने महत्वपूर्ण विषय को सभी वक्ताओं ने इतने सहज ढंग से समझाया कि यह कठिन विषय भी सरस व सहज लगने लगा, सभी वक्ताओं ने नैतिक मूल्य पर अपने विचारों के माध्यम से सभी को लाभान्वित किया। सभी ने मिलकर इस संगोष्ठी को जीवंत बना दिया। कार्यक्रम में विभिन्न महाविद्यालय से पधारे प्राध्यापक, शोधार्थी व विद्यार्थियों के साथ महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापक व बड़ी संख्या में छात्राएं उपस्थित रहें। संगोष्ठी का संचालन डॉ अनामिका सारस्वत ने व आभार डॉ सुरेश चौहान ने माना।

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नायब तहसीलदार न्यायालय प्रवाचको की दो- दो वेतन वृद्धि रोकी औचक निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने की कार्यवाही

कलेक्टर श्रीमती मिशा सिंह द्वारा कार्यालय तहसीलदार, तहसील रतलाम ग्रामीण के औचक निरीक्षण के दौरान शासकीय कार्य में लापरवाही बरतने के कारण प्रवाचक, न्यायालय नायब तहसीलदार टप्पा बिलपांक श्री रामबाबु पंवार, एवं प्रवाचक, न्यायालय तहसीलदार श्री देवांशु सांकले की दो-दो वेतनवृद्धि असंचयी प्रभाव से रोक दी गई है।

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ब्लिंक कॉमर्स पर बिक रही थी एक्सपायर चने की दाल

ब्लिंक कॉमर्स प्रा लि रतलाम पर एक्सपायरी डेट के समान बिक्री की शिकायत प्राप्त होने पर कलेक्टर श्रीमती मिशा सिंह के निर्देश पर 20 फरवरी को खाद्य एवं औषधि प्रशासन की टीम ने फर्म ब्लिंक कॉमर्स प्रा लि अकबरी रोड का निरीक्षण किया। मौके पर निरीक्षण के दौरान एक्सपायरी डेट की टू स्टोरी ऑर्गेनिक चने की दाल का विक्रय होना पाया गया, खाद्य सुरक्षा अधिकारी शैलेश गुप्ता द्वारा ऑर्गेनिक चने की दाल एवं केरला बनाना चिप्स के नमूने जांच हेतु लिये जाकर एक्सपायरी डेट के खाद्य सामग्री के विक्रय का प्रकरण पंजीबद्ध किया गया।

साथ ही फर्म गायत्री इंटरप्राइजेज से प्रयाग घी एवं किंग घी के नमूने, मां अन्नपूर्णा ट्रेडर्स कस्तूरबा नगर से घी एवं पोहा के नमूने लिये गये। फार्म केसरिया ट्रेडर्स से बेली सुपारी का नमूना जांच हेतु संग्रहित किया गया। फर्म गगन बेकरी काटजू नगर से क्रीम रोल, अजवाइन फ्लेवर, कोकोनट पाउडर और फिनोलेक्स के नमूने लिए गए। गगन बेकरी पर गंदगी में खाद्य सामग्री निर्माण होते पाया गया जिस पर विभाग द्वारा नोटिस जारी किया जा रहा है।

इसी प्रकार ताल में खाद्य सुरक्षा अधिकारी कमलेश जमरा एवं प्रीती मंडोरिया द्वारा ताल में कार्यवाही करते हुए बस स्टैंड ताल स्थित भेरुनाथ आईसक्रीम सेंटर से बादाम शेक, आलोट नाका ताल स्थित जय श्री कृष्णा पानीपुरी सेंटर, लवयांशी पानीपुरी एवं नीम चौक स्थित लक्ष्मी पानी पतासे से पानीपुरी के पानी के नमूने लिए गए। आलोट नाका ताल स्थित ओम ट्रेडर्स से तुवर दाल, चना दाल, मूंग दाल तथा हरिनारायण सूरजमल किराना से मसूर दाल, उड़द दाल एवं नमक के नमूने लिए गए सभी नमूने राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला भोपाल भेजे गए जहां से प्राप्त जांच रिपोर्ट के आधार पर खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के अंतर्गत नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी। सभी खाद्य संस्थानो को गुणवत्तायुक्त खाद्य पदार्थों के संग्रहण एवं विक्रय करने के निर्देश दिए गए। आगे भी कार्यवाही जारी रहेगी।

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‘‘प्रशासन गांव की ओर अभियान’’ अंतर्गत आलोट ब्लॉक की क्लस्टर पंचायत मुख्यालय भोजाखेड़ी मे हुई सुनवाई

प्रशासन गांव की ओर अभियान में प्रशासनिक अधिकारी पहुंचे गांव में अनुश्रवण शिविर में ग्रामीणों से की चर्चा कलेक्टर ने स्कूल एवं ग्रामों में निर्माणाधीन कार्यो का किया निरीक्षण

भारत सरकार एवं राज्य सरकार की चिन्हित फ्लैगशिप योजनाओं में शत् प्रतिशत सेचुरेशन प्राप्त करने हेतु ‘‘प्रशासन गांव की ओर अभियान’’ के तहत आज शुक्रवार को सभी जिला स्तरीय अधिकारियों ने भोजाखेड़ी क्लस्टर अंतर्गत 20 ग्राम पंचायतों मे पहुँच कर आमजन की समस्याएं सुनी एवं समाधान योग्य समस्याओं का मौके पर समाधान किया गया। जिला स्तर एवं राज्य स्तर से समाधान योग्य समस्याओं को अनुश्रुवण पंजी मे दर्ज किया गया। क्लस्टर पंचायत मुख्यालय भोजाखेड़ी पर सभी पंचायतों के नोडल अधिकारियों की कलेक्टर श्रीमती मिशा सिंह द्वारा ग्राम पंचायतवार समीक्षा की गई। भ्रमण के दौरान कलेक्टर के साथ सीईओ जिला पंचायत वैशाली जैन, एसडीएम आलोट रचना शर्मा, सीईओ जनपद आलोट पूजा गुप्ता सहित जिला स्तरीय नोडल अधिकारी एवं मैदानी शासकीय अधिकारी/कर्मचारी उपस्थित थे।

कलेक्टर ने अनादिकल्पेश्वर महादेव मंदिर जीर्णोद्धार कार्य का निरीक्षण किया

प्रशासन गांव की ओर अभियान के तहत भ्रमण के दौरान कलेक्टर श्रीमती मिशा सिंह ने आलोट में अनादिकल्पेश्वर महादेव मंदिर परिसर में चल रहे जीर्णोद्धार कार्य का निरीक्षण कर धर्मशाला निर्माण करवाने के निर्देश दिए। मंदिर जीर्णोद्धार के लिए स्वीकृत सभी निर्माण कार्यो की समन्वित फाईल बना कर सभी निर्माण एजेंसियों को समन्वय से काम करवाने के निर्देश दिए।

खामरिया गौशाला का निरीक्षण किया 

कलेक्टर श्रीमती मिशा सिंह ने खामरिया गौशाला का निरीक्षण किया। निरीक्षण में मेन रोड से गौशाला तक आने वाली रोड निर्माण के लिए जिन व्यक्तियों की जमीन आ रही है उन व्यक्तियों से दानपत्र भरवाने की कार्यवाही करने के लिए एसडीएम रचना शर्मा को निर्देश दिए। खामरिया गौशाला को क्षीर धारा योजना में जोड़ कर कार्यवाही करने के निर्देश दिए। गौशाला मे गाय का पूजन कर गुड़ खिलाया।

ग्राम जोयन में प्राथमिक विद्यालय का निरीक्षण किया

कलेक्टर ने ग्राम जोयन में प्राथमिक विद्यालय का निरीक्षण कर बच्चों एवं शिक्षकों से चर्चा कर शिक्षा की गुणवत्ता का परीक्षण किया। किचन शेड मे बन रहे मध्याह्न भोजन का अवलोकन किया। प्राथमिक विद्यालय की बालिकाओं के साथ जमीन पर बैठ कर कलेक्टर श्रीमती मिशा सिंह, सीईओ जिला पंचायत सुश्री वैशाली जैन, एसडीएम आलोट रचना शर्मा, नायब तहसीलदार आलोट सविता राठौर, सीईओ जनपद आलोट पूजा गुप्ता ने मध्याह्न भोजन मे बच्चों के साथ भोजन कर बच्चों एवं रसोईयनो से चर्चा की। कलेक्टर के साथ भोजन करके बालिकाएं काफी उत्साहित हुई। बालिकाओं ने कलेक्टर के साथ फोटो भी खिंचवाई । कलेक्टर ने बच्चों को उज्जवल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी। बी आर सी को सभी स्कूलों में टाइम टेबल लगवाने एवं स्कूलों के पेयजल की जांच संबंधित रिपोर्ट संस्था प्रमुखों के पास रखवाने के निर्देश दिए।

ग्राम जोयन में ग्रामीण जनो ने घरो के ऊपर से जा रही विद्युत लाईन शिफ्ट करवाने के लिए कलेक्टर को आवेदन दिया। कलेक्टर ने ग्रामीणों को शिफ्टिंग की राशि जमा करवाने एवं एम पी ई बी के संबंधित अधिकारी को राशि प्राप्त होते ही कार्यवाही करने के निर्देश दिए।

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