पौधरोपण की अपेक्षा कम खर्चीला है सीड बाल से पौधे उगाना श्री मति सिसौदिया


मंदसौर। विगत दिन कलेक्टर श्री दिलीप कुमार यादव ने शिक्षा विभाग के सभी कर्मचारियों को अधिक से अधिक पौधें लगाने का निर्देश दिया था. माध्यमिक स्कूल की आदर्श शिक्षिका श्रीमती ललिता सिसोदिया ने निर्देश अनुसार सीड बाल से पौधे लगाने फैसला किया. और स्कूल बच्चों पढ़ाई के पश्चात वह जनता को पौधे लगाने के लिए जागरूक भी कर रही है. और सीड बाल पौधे जानकारी आमजन से साजा कर रहें… की अपेक्षा सीड बाल से पौधे उगाने की तकनीक कम खर्चीली है। स्कूल परिसर.छात्रावास. गौशाला. तथा अन्य चिन्हित जमीन पर बारिश से पहले गड्ढे खुदवाते है। फिर उनमें मिट्टी मिली हुई खाद डाली जाती है। इसके बाद बारिश में पौधरोपण होता है। इसकी अपेक्षा सीड बाल को सीधे जमीन में डाल दिया जाता है और पौधे आसानी से रोपित हो जाते हैं।
ऐसे तैयार होता है सीड बाल
आदर्श शिक्षिका श्रीमती सिसौदिया बताया कि इस तकनीक के बारे में कोरोना कै समय मंदसौर के एक अधिकारी ने मीटिंग से जानकारी ली गई थीं। सीड बाल टेक्नोलॉजी से बीज में नमी को लंबे समय तक बनाए रखना संभव होगा और इससे बीज के अंकुरण की क्षमता भी बढ़ेगी। सीड बाल गीली मिट्टी, केचुआ खाद, अन्य खाद, धान की भूसी व सरसों की खली से तैयार होती है। सभी चीजों को मिलाकर इसे गेंद की तरह बनाकर अंदर बीज डाल दिया जाता है फिर इसे धूप में सुखाकर भंडारित किया जाता है। बारिश शुरू होते ही इसे पौधरोपण करने वाली जगह फेंका जाता है।
ऊबड़-खाबड़ जमीन पर आसानी से रोपित होंगे पौधे
जहां की जमीन ऊबड़-खाबड़ है और वहां गड्ढे भी नहीं खोदे जा सकते। वहां पर यह तकनीक पौधरोपण में खासी कारगर साबित हो सकती है। सिर्फ एक श्रमिक द्वारा सीड बाल को जमीन में फेंककर पौधे उगाए जा सकते हैं।
कोरोना के समय जिला मीटिंग में मिली थी तकनीक की जानकारी-
आदर्श शिक्षिका श्रीमती सिसौदिया बताया कि हमारे यहां हर साल पौधरोपण तो होता है लेकिन, यह काम काफी खर्चीला होता है। हमें कोरोना के समय जिला के अधिकारी ने मीटिंग में जानकारी मिली कि सीड बाल तकनीक से कम खर्च में पौधे उगाए जा रहे हैं। इस पर तकनीक की जानकारी लेकर हमने सीड बाल तकनीक से करीब आठ हजार पौधे उगाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। जिसका कार्य प्रतिदिन जारी है. और पिछले वर्ष सात हजार सीड बाल बनाकर लोगों वितरित किए थे।


