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चाणक्य से लेकर चंद्रशेखर आजाद तक राष्ट्र व सनातन की रक्षा हेतु ब्राह्मणों का विशेष योगदान रहा है – गोपालकृष्ण पंचारिया

शिवना नदी तट पर भगवान जगन्नाथ, बलभद्र व सुभद्रजी की काष्ठ विग्रह वाले प्राचीन जगदीश मंदिर पर “दीपावली मिलन व सम्मान समारोह” का आयोजन हुआ

पंडित दिलीपकुमार दुबे सर्व सम्मति से ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष नियुक्त

मन्दसौर (निप्र) राष्ट्र व सनातन हेतु ब्राह्मण समाज प्रारम्भ से ही समर्पित रहा है । चाणक्य से लेकर चंद्रशेखर आजाद तक राष्ट्र निर्माण व सनातन धर्म की रक्षा हेतु ब्राह्मण समाज सदैव आगे रहा है । मन्दसौर नगर में भी पंडित मस्तरामजी व १००८ श्री प्रत्यक्षानंद जी महाराज आदि ऐसे अनेक नामों को भुलाया नहीं जा सकता है । वर्तमान में भी मन्दसौर निर्माण में ब्राह्मण समाज सभी समाजों के साथ मिलकर अपना महत्वपूर्ण योगदान देगा ।
उक्त विचार ब्रह्म परिषद के संस्थापक गोपालकृष्ण पंचारिया ने व्यक्त किए । वे ब्रह्म परिषद द्वारा श्री पशुपतिनाथ मंदिर के सामने शिवना नदी तट पर ५०० से अधिक वर्ष प्राचीन भगवान जगन्नाथ, बलभद्र व सुभद्रा जी की काष्ठ की प्रतिमा वाले ऐतिहासिक श्री जगदीश मंदिर पर आयोजित “दीपावली मिलन एवं सम्मान समारोह” में बोल रहे थे ।
पंडित शिवकरण प्रधान “गुरुजी” ने अपने उद्बोधन में कहा कि वर्तमान समय बहुत ही चुनौतीपूर्ण है । इतिहास इस बात का साक्षी है कि ब्राह्मण समाज ने अपने त्याग, तपस्या व समर्पण भाव के कारण ही अपनी प्रतिष्ठा स्थापित की है ऐसे में ब्राह्मण समाज संस्कृति की रक्षा के लिए अपनी बुद्धि कौशल का उपयोग करे । अपने विचार रखते हुए इंजी. सुनील व्यास ने कहा कि राष्ट्र रहेगा तो ही समाज बचेगा । हम युवाओं में सद्विचारों का संप्रेषण करें । डॉ. क्षितिज पुरोहित ने अपनी बात रखते हुए कहा कि हमारी सनातन हिंदू संस्कृति आदि अनादि व प्रकृति आधारित है । ब्राह्मण समाज अपने ज्ञान का उपयोग सभी समाजों व जातियों को साथ लेकर नगर व राष्ट्र विकास में उपयोग करे ।
इस अवसर पर सभी ब्राह्मण समाजों के प्रमुख महानुभावों की उपस्थिति में सर्व सम्मति से पंडित दिलीपकुमार दुबे को अध्यक्ष पद पर नियुक्त किया गया ।
समारोह में पंडित शिवकरण प्रधान “गुरुजी” सुरेशचंद्र शर्मा, इंजी. सुनील व्यास, गायत्रीप्रसाद शर्मा, मदन तिवारी, मुकेश शर्मा (आदि गौड़), धीरेन्द्र त्रिवेदी, इंजी. प्रदीपकुमार शर्मा, लोकेश त्रिवेदी, ब्रजेश बिरथरे (सनाढ्य), गोपालकृष्ण शर्मा (मारु औदिच्य), डॉ. प्रवीणसिंह मंडलोई (राजपुरोहित), अरुण शर्मा, विष्णुप्रसाद आचार्य (सारस्वत), डॉ. क्षितिज पुरोहित, इंजी. दिलीप जोशी, दीपक ओझा (सिखवाल), प्रमोद पारीक, डॉ. घनश्याम बटवाल (पारीक), डॉ. देवेंद्र पुराणिक, रूपनारायण जोशी, नरेंद्र व्यास, सनत जोशी, सुनील पंचारिया (गुर्जर गौड़), संजय त्रिवेदी, राजेन्द्र मोड़, रजनीकांत शुक्ला, ओमप्रकाश मोड़ (मोड़), श्रीकांत वाजपेई (कान्यकुब्ज), नानालाल शर्मा, कपिल शर्मा (अम्बा औदिच्य), डॉ. प्रभुदयाल पालीवाल, हरिनारायण शर्मा (गर्ग), दिलीपकुमार काले (महाराष्ट्रीयन), इंजी. गोविंद नागर, मुकेश नागर (नागर), पं. दिलीप दुबे, (चौबीसा), विनोदकुमार तिवारी (जिझौतिया), मनोज दुबे, संतोष परसाई, लक्ष्मीनारायण त्रिवेदी, आशुतोष उपाध्याय (औदुम्बर), सुनीलकुमार दुबे, वीरेंद्र भट्ट, रूपेंद्र पंड्या (श्रीगौड़), राजेश शुक्ला (सरयूपारीय), निरंजन भारद्वाज (नागदा), चंद्रकांत शर्मा (शाकद्वीपीय), रामसेवक शर्मा (ऋषिश्वर) आदि सभी ब्राह्मण समाज के प्रमुखों ने भाग लिया ।

गोपालकृष्ण पंचारिया
संस्थापक, ब्रह्म परिषद
मन्दसौर (म. प्र.)
9827363040

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