वृद्ध मां कि बेटीयां बनी मिशाल, वृद्धावस्था में भरण पोषण के बाद अंतिम संस्कार कि रस्म भी निभाई

मां कि सेवा कर बेटीयों ने बेटे का फर्ज निभाया, बेटियों ने समाज को एक अच्छा उदाहरण दिया- अध्यक्ष श्री पटेल
सीतामऊ।नगर में क्षत्रिय खाती समाज कि वृद्ध महिला कि बेटीयां बनी मिसाल बनी, बेटे के द्वारा अपनी मां कि सेवा नहीं करने पर बेटीयों ने अपनी मां का वृद्धावस्था में भरण पोषण का अच्छे से ख्याल रखा तथा उसके बाद अपनी उम्र के 90 वर्ष पूर्ण कर निधन होने पर बेटियो ने ही अंतिम संस्कार कि रस्म भी निभाई ।
जानकारी के अनुसार नगर में क्षत्रिय खाती समाज कि वृद्ध महिला श्रीमती सलिया बाई पति स्वर्गीय बसंतीलाल जी भंभोरिया के आठ पुत्र पुत्रियां हैं। जिनमें एक पुत्र और सात पुत्रियां हैं। जिनमें सातों बहनों कि विवाह सीतामऊ शामगढ़, कुकडेश्वर, विवाह किया गया वहीं पुत्र कि भी शादी सीतामऊ हुई। बताया जा रहा है कि पुत्र द्वारा अपनी मां कि सेवा नहीं करने पर भाई कि बहिनें आगे आई और अपने बेटी होने के साथ बेटे का भी धर्म निभाया। मां का भरण-पोषण करने से लेकर निधन होने पर सातों बहनों ने ही अपनी मां के घर से लेकर श्मशान में मुखाग्नि देकर अंतिम संस्कार कि रस्म निभाई। तथा मां कि सेवा कर आशीर्वाद प्राप्त कर धन्य हो गई।खाती समाज व नगर क्षेत्र में बहिनों द्वारा अपने मां के जीवन काल में सेवा और अंतिम संस्कार करने कि चर्चा का विषय बना हुआ है।
क्षत्रिय खाती समाज अध्यक्ष श्री घनश्याम पटेल ने बताया कि मां कि सेवा करने के साथ अंतिम संस्कार कर बेटीयों ने बेटे का फर्ज निभाया। आज के समय में बेटियां बेटे से कम नहीं का समाज को एक अच्छा उदाहरण दिया है। एक बेटा होने पर भी अपनी मां कि सेवा नहीं कर पाया वो बेटियो के द्वारा वृद्धावस्था में मां कि अंतिम समय तक सेवा कर मुखाग्नि दी।यह अच्छी पहल कि है।