अल्कोलाइड फैक्ट्री निर्माण का काम अटका: वन विभाग ने जमीन आवंटन में लगाया गड़बड़ी का आरोप,

एसडीएम बोले- निर्धारित प्रक्रिया का किया पालन
सीपीएस पद्धति से अफीम की खेती के बाद प्राप्त डोडो से मार्फिन निकालने के लिए फैक्ट्री लगाने का काम दो विभागों की लड़ाई के चलते खटाई में पड़ गया है। शासन के राजस्व विभाग ने उद्योग के लिए भूमि आवंटित होने का हवाला दिया है, जबकि वन विभाग के अधिकारियों का दावा है कि आपत्ति के बावजूद कागजों में हेराफेरी कर भूमि का आवंटन कर दिया गया है।
जावद ब्लॉक के जनकपुर-बसेड़ी भाटी क्षेत्र में केंद्र सरकार द्वारा प्राइवेट कंपनी के माध्यम से स्थापित किए जा रही। अल्कोलायड फैक्ट्री का काम खटाई में पड़ गया है। इस मामले में शासन का राजस्व विभाग और वन विभाग आमने-सामने हो गए हैं।
एसडीएम ने वन विभाग पर कंपनी का सामान लूटने का आरोप लगाते हुए रिपोर्ट कर दी है, जबकि वन विभाग का दावा है कि एसडीएम ने कागजों में हेराफेरी की है। पूरे मामले में कलेक्टर दिनेश जैन जांच कर स्थिति साफ करने की बात कर रहे हैं।
वन विभाग का दावा कागजों में हुई हेराफेरी
जावद ब्लॉक के जनकपुर-बसेड़ी भाटी क्षेत्र की भूमि को शासन ने अल्कोलायड फैक्ट्री निर्माण के लिए अधिसूचित किया गया है। यह भूमि शासन के राजस्व विभाग की है या वन आरक्षित भूमि है। इसको लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है।
वन विभाग के रेंजर विपुल प्रभात का दावा है कि कलेक्टर के समक्ष भूमि आवंटन का जो प्रकरण चला था, उसमें वन विभाग ने पंचनामा प्रस्तुत कर आपत्ति पेश की गई थी, लेकिन राजस्व विभाग के एसडीएम ने पंचनामा के कागज में हेराफेरी कर दी। जिस कारण वन विभाग की भूमि औद्योगिक कार्य के लिए आवंटित हुई है।
1955 में रक्षित वन घोषित हुई थी जमीन
डीएफओ एसके अटोदे ने बताया कि वन विभाग को 14.60 हेक्टेयर भूमि आवंटित की गई। वह 1955 में रक्षित वन घोषित हुई थी। 1955 के बाद संरक्षित वन घोषित करने के लिए एफएसओ की नियुक्ति की गई। एफएसओ ने वन व्यवस्थापन की कार्रवाई पूर्ण कर राज्य शासन को प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। दावे आपत्ति निराकरण के बाद 1 जून 1985 को उक्त भूमि को आरक्षित वन घोषित किया गया।
उसमें 14.600 हेक्टेयर आरक्षित वन भूमि शामिल है। जिस भूमि का आवंटन किया गया उसका पूर्व में संयुक्त सर्वे नहीं किया। 31 मई को संयुक्त सर्वे किया उसका प्रतिवेदन अपेक्षित है। संयुक्त सर्वे के प्रतिवेदन के बाद उचित कार्रवाई करेंगे। हम अपनी भूमि मानकर कार्रवाई कर रहे हैं।
दावा, विवादित भूमि संवैधानिक रूप से वन विभाग की
वन विभाग के रेंजर विपुल प्रभात ने को बताया कि राजस्व कर्मचारियों की दी गई भ्रामक जानकारी के आधार पर कलेक्टर ने वन भूमि का अंतरण किया गया है। 31 जनवरी 2024 से सनलाइट एल्को लाइट कंपनी आरक्षित वन भूमि पर अवैध रूप से निर्माण कार्य कर रही है, जिसका वन विभाग लगातार विरोध कर रहा है।
30 मई को शासकीय दायित्वों का निर्वहन करते हुए कंपनी के विरुद्ध प्रकरण दर्ज कर कार्रवाई की गई है।
कंपनी प्रबंधन की ओर से एसडीएम राजस्व राजेश शाह को फोन किया गया और कंपनी प्रबंधन के मात्र एक फोन पर एसडीएम ने स्वयं के नाम और शासकीय पद के साथ वन विभाग की गई वैधानिक कार्रवाई को कंपनी के पक्ष में बताने का काम किया है।
विवादित भूमि संवैधानिक रूप से पूर्णत: आरक्षित वन भूमि है, जिसे विधि विरुद्ध राजस्व विभाग अपनी बता रहा है। भूमि अंतरण के प्रकरण में उल्लेख किया गया है कि वन विभाग की ओर से कोई आपत्ति पेश नहीं की गई है, जबकि कोई आपत्ति ली ही नहीं गई है।
छह माह पहले कलेक्टर ने आवंटित की भूमि
उल्लेखनीय है कि भारत सरकार के अधीन केंद्रीय नारकोटिक्स विभाग ने सीपीएस पद्धति (बिना चीरा लगे डोडे ) से अफीम की खेती शुरू की है। यह खेती क्षेत्र के लाइसेंसी किसान निर्धारित रकबे में करते हैं।
सीपीएस पद्धति से की गई खेती से प्राप्त डोडा यानी पॉपी स्ट्रा से अफीम/मार्फिन निकाले के लिए फैक्ट्री लगाने का निर्णय केंद्र सरकार ने लिया है। इसके लिए छह माह पहले कलेक्टर न शासन की ओर से उद्योग विभाग को भूमि का आवंटन किया है।
उद्योग विभाग को अंतरित हो चुकी जमीन
एसडीएम राजेश शाह का कहना है कि जनकपुर क्षेत्र की भूमि को उद्योग विभाग को दी जा चुकी है। जब भूमि को अंतरित किया जाना था, कलेक्टर न्यायालय में प्रकरण चलाया गया था। उस समय दोनों पक्षों को सुना गया। उस समय वन विभाग ने कोई आपत्ति प्रस्तुत नहीं की थी। आवंटित भूमि पर पहले कर निर्धारित प्रक्रिया को अपनाया गया है। इसलिए प्रक्रिया में कोई दोष नहीं है।



