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औरंगाबाद जिले में जंगल से मैदानी इलाके में आ गये हाथियों के झुंड ने मचाया आतंक, मदनपुर के सुदूरवर्ती क्षेत्रों में पांच एकड़ में लगी ईंख की फसलों को रौंदा, किसानो को हुआ भारी नुकसान

औरंगाबाद जिले में जंगल से मैदानी इलाके में आ गये हाथियों के झुंड ने मचाया आतंक, मदनपुर के सुदूरवर्ती क्षेत्रों में पांच एकड़ में लगी ईंख की फसलों को रौंदा, किसानो को हुआ भारी नुकसान

 

 

बिहार औरंगाबाद से धर्मेंद्र गुप्ता

 

 

जिले के सुदूरवर्ती मदनपुर के जंगली-पहाड़ी इलाके में हाथियों के झुंड ने कहर ढ़ाया है। करीब 4-5 की संख्या में रहे हाथियों ने पिछुलियां में कई किसानों के खेतों में लगी ईंख की फसल तहस नहस कर दी है।

 

हाथियों के उपद्रव से गन्ना किसानों का अच्छा-खासा नुकसान हुआ है। हाथियों ने करीब पांच एकड़ खेतों में लगी गन्ना की फसल को रौंद डाला है। इससे किसानो को पांच लाख से अधिक का नुकसान पहुंचा है। घटना बीती रात के करीब ढ़ाई से तीन बजे के पास की है।

 

उस वक्त किसान अपने घरों में सोए हुए थे। सुबह होने पर जब वें खेतों में पहुंचे तो गन्ना की फसल तहस नहस हालत में पाई। हाथियों के आतंक मचाने के प्रत्यक्षदर्शी रहे पिछुलिया गांव के किसान महेश मेहता ने बताया कि रात में वें फसल की रखवाली के लिए खेत पर ही झोपड़ी में सोए हुए थे।

 

रात के करीब ढ़ाई-तीन बजे के पास चर-चर की आवाज से आंख खुली। आवाज की टोह लेते हुए जब वें गन्ना के खेत की ओर गये तो उन्हे चार-पांच हाथी फसल को रौंदते नजर आए। डर से वें गन्ना के खेत से दूर चले गये और वही से चुपचाप हाथियों की करतूत देखते रहे।

 

मतवाले हाथी फसलों को रौंदते रहे और वे डरे सहमे सारा तमाशा देखते रहे। करीब घंटे भर तक हाथी उपद्रव मचाते हुए पिछुलियां से पश्चिम की ओर जंगल-पहाड़ों में चले गये। मौके पर पटवन से गीले और सब्ज़ी की खेती के लिए खेतों में की गई कच्ची जुताई से हल्की हुई मिट्टी पर हाथियों के पैरों के ढ़ेर सारे निशान भी पाये गये है।

 

वैसे भी यह इलाका झारखंड से सटा हुआ है और वहां के जंगल में हाथी रहते है। पहले भी झारखंड के जंगल से भटक कर हाथी मदनपुर के जंगली इलाकों से होते मैदानी इलाकों में जान माल का नुकसान पहुंचा चुके है। करीब पांच साल पहले भी झारखंड के जंगलों से आये हाथियों के झुंड ने बादम और पिछुलियां समेत कई गांवों में आतंक मचाया था। उपद्रवी हाथियों ने फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया था।

 

हाथियों ने आधा दर्जन कच्चें घरों को भी ढाह दिया था और कुछ लोगों की जान भी गई थी। पांच साल के बाद एक बार फिर से हाथियों की इसी इलाके में आवक हुई है। इससे इलाके के किसान बेहद डरे सहमे है। उस वक्त वन विभाग की टीम काफी मशक्कत कर हाथियों को झारखंड के जंगलों में खदेड़ पाने में सफलता मिली थी। उस वक्त हाथियों को भगाने के लिए वन विभाग ने कई तरह का उपक्रम किया था। तब जाकर वें हाथियों को खदेड़ पाने में कामयाब हो सके थे।

 

हालांकि हाथी जब भी मैदानी इलाके में धमकते है, वें गन्ने की फसल पर जरूर अटैक करते है। मीठा स्वाद होने के कारण हाथियों के लिए गन्ना उनका पसंदीदा फसल है। इसी कारण मैदानी इलाके में हाथी गन्ने की फसल पर ही सबसे ज्यादा चोट करते है। हाथियों के उपद्रव से पीड़ित किसानों ने इसकी सूचना वन विभाग को दी है।

 

वन विभाग की टीम जंगल में हाथियों को खोजने में जुटी है। जिला वन पदाधिकारी(डीएफओ) तेजस जायसवाल ने बताया कि पिछुलियां में हाथियों के आकर फसलों को नष्ट करने की सूचना मिली। विभाग द्वारा एक एक्सपर्ट टीम मौके के लिए भेजी गयी है। टीम अपना काम कर रही है। उम्मीद है कि टीम हाथियों को खोजकर उन्हे झारखंड के जंगलों की ओर खदेड़ देगी।

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