प्राइवेट शिक्षकों के लिए उठी मांग ; न्यूनतम वेतन तय करने और अतिरिक्त फीस वसूली पर लगें रोक, शिक्षिकाओं को मिले मातृत्व अवकाश

आप शिक्षा विंग ने उठाया शिक्षकों के शोषण का मुद्दा, बोले- निजी स्कूलों में शिक्षकों को मिले सम्मान, कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन
रीवा। रीवा में निजी विद्यालयों में पढ़ाने वाले हजारों शिक्षकों की आवाज अब बुलंद होने लगी है। निजी स्कूल शिक्षकों की विभिन्न समस्याओं, उनके शोषण और मांगों को लेकर आम आदमी पार्टी की शिक्षा विंग ने जिला प्रशासन के सामने मोर्चा खोल दिया है। शिक्षा विंग ने जिला कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपकर शिक्षकों के हित में ठोस नीति बनाने और कार्रवाई की मांग की है।
क्या है शिक्षकों की प्रमुख मांगें
आप शिक्षा विंग के प्रतिनिधि शिवम भारद्वाज ने बताया कि पार्टी ने शिक्षकों के हित में पांच सूत्रीय मांग पत्र सौंपा है। सबसे बड़ी मांग यह है कि प्राइवेट स्कूलों में काम करने वाले शिक्षकों के लिए सरकार द्वारा न्यूनतम वेतन तय किया जाए, क्योंकि कई निजी स्कूलों में शिक्षकों से पूरा काम लिया जाता है लेकिन वेतन के नाम पर बहुत कम राशि दी जाती है, जिससे उनका आर्थिक शोषण हो रहा है।
दूसरी बड़ी मांग अभिभावकों और छात्रों से जुड़ी है, जिसमें स्कूलों में ट्यूशन फीस के नाम के अलावा अन्य सभी तरह की अतिरिक्त फीस की वसूली पर पूर्ण रूप से रोक लगाने की मांग की गई है। कई स्कूल मनमाने तरीके से अलग-अलग मदों में फीस वसूलते हैं, जिससे गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है।
तीसरी अहम मांग महिला सशक्तिकरण से जुड़ी है। प्राइवेट स्कूलों में कार्यरत महिला शिक्षिकाओं को सरकारी कर्मचारियों की तरह मातृत्व अवकाश का लाभ दिए जाने की पुरजोर मांग की गई है, ताकि गर्भावस्था के दौरान उन्हें नौकरी जाने का डर न सताए और वे सुरक्षित रूप से इस अवस्था का सामना कर सकें।
इसके साथ ही ज्ञापन में शिक्षकों की नौकरी की सुरक्षा और सम्मानजनक कार्य वातावरण सुनिश्चित करने की भी बात कही गई है। पार्टी ने शासन-प्रशासन से इन सभी बिंदुओं पर जल्द से जल्द उचित और ठोस कार्रवाई करने की अपील की है, ताकि निजी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों को उनका हक और सम्मान मिल सके।



