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AU स्मॉल फाइनेंस बैंक पर 25 हजार का जुर्माना!

AU स्मॉल फाइनेंस बैंक पर 25 हजार का जुर्माना!

रीवा ।AU स्मॉल फाइनेंस बैंक पर 25 हजार का जुर्माना! ऋण चुकता होने के बाद भी नहीं दिए मूल दस्तावेज और नोड्यूज, उपभोक्ता आयोग ने लगाई फटकार, 30 दिन में पैसा देने का आदेश

*सतना के महेन्द्र सिंह ने लिया था 5 लाख 10 हजार का लोन, ब्याज ज्यादा होने से LIC हाउसिंग में कराया था बैलेंस ट्रांसफर, बैंक ने 2.86 लाख लेकर भी नहीं लौटाए कागज, आयोग ने 4 माह में दस्तावेज लौटाने और 9% ब्याज के साथ भुगतान का दिया आदेश*

 

रीवा। ऋण चुकता होने के बाद भी मूल दस्तावेज और नोड्यूज नहीं देने पर AU स्मॉल फाइनेंस बैंक पर उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। यह आदेश एक परिवाद की सुनवाई के दौरान दिया गया है। साथ ही आदेश दिया है कि चार सप्ताह के भीतर मूल दस्तावेज और नोड्यूज परिवादी को दे। इतना ही नहीं उक्त राशि भी बैंक को 30 दिन के भीतर परिवादी को अदा करे। उक्त आदेश 17 सितंबर को अध्यक्ष रुदीप कुमार श्रीवास्तव, सदस्य कंचन अवधिया और डॉ. सुशील कुमार मिश्र की पीठ ने पारित किया।

 

*क्या है पूरा मामला?*

दरअसल परिवादी महेन्द्र सिंह पुत्र राजमणि सिंह निवासी ग्राम बिना करकहा टोला, अमरपाटन, सतना हाल निवासी ढेकहा कहारन बस्ती ने 31 जनवरी 2021 को AU स्मॉल फाइनेंस बैंक से 5 लाख 10 हजार 800 रुपये का ऋण लिया था। पत्नी संगीता सिंह सह-ऋणी थीं। सुरक्षा के तौर पर मौजा करहिया की भूमि खसरा नं. 26/5/19 का विक्रय विलेख दिनांक 22.02.2021 को बैंक में बंधक रखा था। जिसे परिवादी ने 25 नवंबर 2025 को चेक के माध्यम से जमा कर दिया था। लेकिन इसके बाद भी बैंक द्वारा बंधक बने जमीन के दस्तावेज और नोड्यूज नहीं दिया जा रहा है।

 

*LIC के माध्यम से भरा था लोन*

परिवादी ने बताया था कि AU फाइनेंस बैंक में अत्यधिक ब्याज के कारण लोन एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस में बैलेंस ट्रांसफर कराया गया था। बैंक ने 30.09.2005 के लोन क्लोजर टोटल में 2,82,055 रुपये तथा नकद एलआईसी हाउसिंग ने चेक क्र. 319531 ने 25.11.2025 को 2,86,75 रुपये ब्याज सहित अदा किया, जो चेक को 2.02.2025 को प्राप्त हो गया था। लेकिन नो-ड्यूज सर्टिफिकेट और मूल दस्तावेज वापस नहीं किए।

 

*आयोग में लगाया परिवाद*

लिहाजा उसने उपभोक्ता फोरम में 10 जनवरी 2026 को परिवाद दायर किया। जिसकी सुनवाई करते हुए 17 सितंबर को आयोग ने बैंक के खिलाफ फैसला सुनाते हुए 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। साथ ही विधिक व्यय राशि 5 हजार रुपये अदा करने को कहा है।

9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज का आदेश

आयोग ने स्पष्ट किया है कि आदेश दिनांक से 4 सप्ताह के भीतर बैंक विवादित दिनांक 22.02.2021 वापस करे और नकद विलेख निरस्त करने की कार्यवाही करे। इसी प्रकार दस्तावेज खारिज पावती लेकर रजिस्टर्ड स्पीड पोस्ट से परिवादी के पते पर वापस किए जाएं और इसकी सूचना दी जाए। साथ ही कमी के लिए बैंक को 30 दिन के अंदर परिवादी को 25,000 रुपये क्षतिपूर्ति अदा करे, असफल रहने पर आदेश दिनांक से भुगतान तक 9% वार्षिक ब्याज देय होगा। परिवादी की ओर से डॉ. आनन्द पाण्डेय अधिवक्ता ने पैरवी की।

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