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मजदूरी भुगतान की जांच के आदेश के बाद भी सवालों के घेरे में प्रतिभा सिंह पटेल!

सिरमौर में पदस्थ, हनुमना में ड्यूटी प्रधानमंत्री आवास की ब्लॉक समन्वयक पर गंभीर आरोप!

विधायक के कथित संरक्षण को लेकर भी उठे सवाल?

मऊगंज। जनपद पंचायत हनुमना में मजदूरी भुगतान में कथित फर्जीवाड़े की शिकायत पर जिला प्रशासन द्वारा जांच के आदेश दिए जाने के बाद अब प्रधानमंत्री आवास योजना की ब्लॉक समन्वयक प्रतिभा सिंह पटेल की भूमिका को लेकर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। शिकायत में तत्कालीन आवास बीसी, प्रभारी अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी एवं सहायक लेखा अधिकारी से जुड़े कार्यकाल के दौरान शासकीय राशि के कथित दुरुपयोग और मजदूरी भुगतान में अनियमितता के आरोप लगाए गए हैं। संयुक्त कलेक्टर एवं प्रभारी कलेक्टर राजेश मेहता द्वारा 23 मार्च 2025 को जारी पत्र में मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत मऊगंज को शिकायत की नियमानुसार जांच कर 7 दिवस में जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे। यह कार्रवाई लोकायुक्त कार्यालय भोपाल से प्राप्त शिकायत के आधार पर की गई थी।

सिरमौर में पदस्थापना, हनुमना में ड्यूटी पर सवाल❓

प्रतिभा सिंह पटेल की पदस्थापना सिरमौर में होने के बावजूद हनुमना जनपद में ड्यूटी किए जाने की स्थिति को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। वह प्रधानमंत्री आवास योजना की ब्लॉक समन्वयक के रूप में कार्यरत बताई जा रही हैं। ऐसे में सवाल यह है कि उनकी ड्यूटी व्यवस्था किस आदेश के तहत और किन परिस्थितियों में हनुमना जनपद में संचालित हो रही है?

भाई के नाम फर्म और पंचायतों के भुगतान पर उठे सवाल?

स्थानीय स्तर पर यह आरोप भी लगाया जा रहा है कि कोरोना काल से पहले प्रतिभा सिंह पटेल के भाई के नाम ‘अनिलेश टेंडर्स’ नाम से फर्म पंजीकृत की गई थी और वर्तमान में क्षेत्र की अनेक पंचायतों से संबंधित भुगतान इसी फर्म के माध्यम से किए जाने की बात कही जा रही है।

यदि यह आरोप सही है तो सरकारी योजनाओं में कार्यरत अधिकारी-कर्मचारी के निकट संबंधी के नाम संचालित फर्म के माध्यम से पंचायतों की राशि के लेन-देन की स्थिति की निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी हो जाती है। यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि संबंधित फर्म को किन पंचायतों से कितने भुगतान किए गए और उन भुगतानों की प्रक्रिया में प्रतिभा सिंह पटेल अथवा उनके परिवार से जुड़े किसी व्यक्ति की कोई भूमिका रही या नहीं।

एपीओ का प्रभार भी बना जांच का विषय!

प्रतिभा सिंह पटेल के पूर्व में अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी (एपीओ) का प्रभार संभालने के दौरान भी नियमों की अनदेखी कर शासकीय राशि के कथित गबन के आरोप लगाए जा रहे हैं। मजदूरी भुगतान से जुड़ी लोकायुक्त शिकायत में भी तत्कालीन अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं। ऐसे में जांच का दायरा केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित न रखकर संबंधित अवधि के मस्टर रोल, एफटीओ, बैंक भुगतान, पंचायतवार भुगतान, फर्म के बिल-वाउचर और शासकीय आदेशों की जांच तक बढ़ाया जाना जरूरी है।

विधायक के कथित संरक्षण का आरोप!

निष्पक्ष जांच पर सवाल

स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रतिभा सिंह पटेल को क्षेत्रीय विधायक प्रदीप पटेल का कथित राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है। आरोप है कि इसी राजनीतिक प्रभाव के चलते जनपद स्तर पर शिकायतों के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पा रही है और भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल रहा है।

सात दिन में मांगी गई रिपोर्ट का क्या हुआ?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब जिला प्रशासन ने वर्ष 2025 में सात दिवस के भीतर जांच प्रतिवेदन मांगा था, तो उस जांच का परिणाम क्या निकला? क्या जांच पूरी हुई? यदि हुई तो रिपोर्ट में किसे दोषी पाया गया? क्या किसी अधिकारी या कर्मचारी पर कार्रवाई हुई? और यदि जांच पूरी नहीं हुई तो एक साल से अधिक समय बाद भी रिपोर्ट लंबित क्यों है?

मऊगंज जिले में भ्रष्टाचार के आरोपों पर कार्रवाई को लेकर पहले से सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में हनुमना जनपद की इस शिकायत में भी यदि जांच केवल पत्राचार तक सीमित रही तो यह प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा करेगा। अब निगाह जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई पर है। क्या मजदूरी भुगतान के कथित करोड़ों रुपये के फर्जीवाड़े की निष्पक्ष जांच होगी या मामला फाइलों में ही दबकर रह जाएगा? यह आने वाला समय बताएगा।

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