मंदसौरमध्यप्रदेश

गुरु केवल पाठ पढ़ाने वाला शिक्षक नहीं, बल्कि संस्कारों का संवाहक-आर. डी. जोशी

 
 मध्यप्रदेश शिक्षक संघ द्वारा डाइट आयोजित हुआ गुरु वंदन समारोह 

मंदसौर। गुरु केवल पाठ पढ़ाने वाला शिक्षक नहीं, बल्कि संस्कारों का संवाहक, जीवन का मार्गदर्शक और राष्ट्र निर्माण का आधार है। भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सदैव सर्वोच्च रहा है। जब ज्ञान के साथ संस्कार और चरित्र का निर्माण होता है, तभी शिक्षा सार्थक होती है। यह विचार मध्यप्रदेश शिक्षक संघ, ब्लॉक शाखा मंदसौर द्वारा जिला प्रशिक्षण संस्थान (डाइट), मंदसौर में आयोजित गुरु वंदन समारोह में मुख्य वक्ता श्री आर. डी. जोशी ने व्यक्त किए।
अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ से संबद्ध मध्यप्रदेश शिक्षक संघ द्वारा आयोजित इस समारोह में भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा, ज्ञान, संस्कार, नैतिक मूल्यों एवं राष्ट्र निर्माण में शिक्षक की भूमिका पर वक्ताओं ने अपने विचार रखे। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के पूजन-अर्चन से हुआ। इसके पश्चात श्री अंकित राठौर ने मधुर स्वर में मां सरस्वती की वंदना प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
मुख्य वक्ता श्री आर. डी. जोशी ने कहा कि प्राप्त ज्ञान को अपने तक सीमित रखना उचित नहीं है। अपने ज्ञान को कम से कम दस लोगों तक पहुंचाना ही गुरु के प्रति सच्ची गुरुदक्षिणा है। उन्होंने कहा कि माता-पिता, शिक्षक, पुस्तकें, अनुभव और प्रकृति—जीवन के पांच महत्वपूर्ण गुरु हैं। आज ए.आई. और आधुनिक तकनीक ज्ञान उपलब्ध करा सकती है, लेकिन संस्कार, संवेदना, अनुशासन और मानवीय मूल्यों का निर्माण शिक्षक ही कर सकता है।
मुख्य अतिथि डॉ. प्रमोद सेठिया ने कहा कि भारत केवल एक भू-भाग नहीं, बल्कि गुरु-शिष्य परंपरा, ज्ञान और तपस्या की पवित्र भूमि है। महर्षि वेदव्यास, चाणक्य और स्वामी विवेकानंद जैसे महापुरुषों की परंपरा यह प्रमाणित करती है कि गुरु केवल विद्यार्थियों का निर्माण नहीं करते, बल्कि उनके माध्यम से समाज और राष्ट्र का भविष्य गढ़ते हैं।
विशेष अतिथि श्री रामेश्वर डांगी ने कहा कि गुरु वंदन का उद्देश्य केवल गुरु का सम्मान करना नहीं, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति के मन में शिक्षक के प्रति सम्मान और कृतज्ञता का भाव जागृत करना है। गुरु-शिष्य परंपरा तभी सार्थक होती है, जब विद्यार्थी गुरु को केवल शिक्षक नहीं, बल्कि जीवन का मार्गदर्शक मानकर उनके संस्कारों और मूल्यों को अपने आचरण में उतारे।
समारोह में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के उद्देश्यों पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करना नहीं, बल्कि ज्ञानवान, चरित्रवान, संस्कारवान और जिम्मेदार नागरिक तैयार करना है। शिक्षक विद्यार्थियों में ज्ञान के साथ कर्तव्यबोध, राष्ट्रभाव और सामाजिक संवेदनशीलता विकसित करने का कार्य करें।
कार्यक्रम में ‘पंच परिवर्तन’ के माध्यम से स्व-बोध, कुटुंब प्रबोधन, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण एवं नागरिक अनुशासन को जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया गया। साथ ही ‘एक दीप अच्छाई का’ संदेश के माध्यम से नकारात्मकता का त्याग कर ज्ञान, संस्कार और सद्भावना का प्रकाश समाज में फैलाने का संकल्प दिलाया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता मध्यप्रदेश शिक्षक संघ ब्लॉक शाखा मंदसौर के अध्यक्ष श्री रघुवीर सिंह सिसोदिया ने की। कार्यक्रम की रूपरेखा जिलाध्यक्ष श्री विक्रम शर्मा एवं अतिथि परिचय श्री बलवंत लोहार ने प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का प्रभावी संचालन श्री रामगोपाल सालित्रा ने किया।
गुरु वंदन समारोह की समस्त व्यवस्थाएं  संयोजक श्री कांतिलाल राठौर के नेतृत्व में व्यवस्थित रूप से संपन्न हुईं। कार्यक्रम के अंत में श्री लोकेंद्र भाटी ने आभार व्यक्त किया। समापन अवसर पर श्री शम्भू सिंह चुंडावत द्वारा कल्याण मंत्र प्रस्तुत किया गया।
कार्यक्रम में शिक्षक संघ के प्रांतीय सह मीडिया प्रभारी रामचंद्र लोहार, संभागीय अध्यक्ष श्री शंकर लाल आंजना और समस्त पदाधिकारीगण, शिक्षक एवं गणमान्यजन उपस्थित रहे।

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