मध्यप्रदेशरतलाम

समाचार मध्यप्रदेश रतलाम 09 अगस्त 2026 रविवार

विधायक डॉ. राजेंद्र पांडेय के प्रयासों से जावरा में स्वास्थ्य सुविधाओं का हुआ विस्तार

सिविल हॉस्पिटल जावरा में 70 वर्षीय बुजुर्ग महिला का हुआ सफल ऑपरेशन

जावरा विधानसभा क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार निरन्तर हो रहा है। विधायक डॉ राजेंद्र पांडेय लंबे समय से जावरा विधानसभा क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं के उन्नयन के प्रति निरंतर प्रयत्नशील है। इसी कड़ी में सिविल हॉस्पिटल जावरा में बुजुर्ग महिला का कूल्हे की हड्डी का सफल ऑपरेशन हुआ।

प्रभारी सुपरवाइजर शैलेन्द्र कुमार दवे ने जानकारी देते हुए बताया कि विधायक डॉ पांडेय के सतत प्रयासों से सिविल हॉस्पिटल जावरा में कूल्हे की हड्डी टूटने पर 70 साल की बुजुर्ग महिला प्रेमकुंवर पति नाहर सिंह सुजापुर का कूल्हे का ऑपरेशन कर रॉड एवं प्लेट डालकर फिक्स किया। प्रेम कुंवर बाई घर में फिसल गई थी, जिसके कारण कूल्हे की हड्डी टूट गई थी, प्रेमकुंवर बाई के कूल्हे का सफल ऑपरेशन आर्थोपेडिक सर्जन ने किया।

प्रेमकुंवर बाई का आयुष्मान कार्ड होने से सारी सुविधाएं निशुल्क सिविल हॉस्पिटल द्वारा प्रदान की गई। ऑपरेशन के बाद प्रेमकुंवर बाई ने मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव, विधायक डॉ राजेंद्र पांडेय को धन्यवाद प्रेषित किया।

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दो दिवसीय वेस्ट जोन रीजनल कॉन्फ्रेंस – “इन्हेंसिंग एक्सेस टू जस्टिस”

न्याय तभी संभव, जब हम पीड़ित के दु:ख-दर्द को उसकी भाषा में समझें : सीजेआई न्यायमूर्ति श्री सूर्यकांत
न्याय सबके लिए सहज, सुलभ, शीघ्र और मानवीय संवेदनाओं से परिपूर्ण हो : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
मध्यप्रदेश में 4 नए फास्ट ट्रैक शुरु, करने वाला देश का पहला राज्य
सीजेआई न्यायमूर्ति श्री सूर्यकांत ने नेशनल लीगल सर्विस अथॉरिटी की शिक्षा स्कीम सहित इसके थीम सॉन्ग को किया इंडियन साइन लैंग्वेज में लाँच
नेशनल लीगल सर्विस अथॉरिटी की योजनाओं के हिंदी संस्करण और ब्रेल लिपि में गाइड का हुआ विमोचन
जस्टिस टू चिल्ड्रन लिटिगेशन फेलोशिप प्रोग्राम तथा मध्यस्थता पर सर्टिफिकेट कोर्स का किया गया शुभारंभ
केंद्रीय विधि राज्य मंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल ने न्याय के स्वर पुस्तक का किया विमोचन
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री सूर्यकांत एवं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 2 दिवसीय वेस्ट जोन रीजनल कॉन्फ्रेंस का किया शुभारंभ
9 अगस्त तक चलेगी कॉन्फ्रेंस

भारत के मुख्य न्यायाधीश और राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के प्रमुख संरक्षक न्यायमूर्ति श्री सूर्यकांत, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उच्चतम न्यायालय के अन्य न्यायमूर्तिगणों ने शनिवार को इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में दो दिवसीय वेस्ट जोन रीजनल कॉन्फ्रेंस – ‘इन्हेंसिंग एक्सेस जस्टिस’ के उद्घाटन सत्र का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। यह कॉन्फ्रेंस 9 अगस्त तक चलेगी। कॉन्फ्रेंस का आयोजन राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली (नालसा), मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर (सालसा) और मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के संयुक्त तत्वावधान में किया गया है। इस 2 दिवसीय कॉन्फ्रेंस का विषय ‘इन्हेंसिंग एक्सेस टू जस्टिस’ तथा इसकी थीम ‘एकजुट आवाज, सशक्त भविष्य : संवाद, गरिमा और समावेशन के माध्यम से न्याय तक पहुंच’ रखी गयी है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री सूर्यकांत ने नालसा की शिक्षा स्कीम तथा नालसा के थीम सॉन्ग को इंडियन साइन लैंग्वेज में लाँच किया। कॉन्फ्रेंस में नालसा के थीम सॉन्ग का प्रदर्शन कर इसकी योजनाओं के हिंदी संस्करण और ब्रेल लिपि में गाइड का विमोचन किया गया। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री सूर्यकांत, मुख्यमंत्री डॉ. यादव सहित अन्य सभी अतिथियों ने ‘जस्टिस टू चिल्ड्रन लिटिगेशन फेलोशिप प्रोग्राम’ तथा मध्यस्थता पर सर्टिफिकेट कोर्स – विवाद से सहमति की ओर का भी शुभारंभ किया। केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री अर्जुनराम मेघवाल सहित अन्य न्यायमूर्तियों ने कॉन्फ्रेंस में आयोजकों द्वारा तैयार की गई ‘न्याय के स्वर’ नामक पुस्तक का विमोचन किया।

सीजेआई न्यायमूर्ति श्री सूर्यकांत ने कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि 2 पक्षों में विवाद के हल में संवाद की प्रक्रिया अनेक विचारों से एकमत या आवाज तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। सबके न्याय की पहुंच सिर्फ कानून के आधार पर तैयार नहीं हो सकती है। यह संवाद से ही संभव है। न्याय की प्रक्रिया केवल न्यायपालिका या किसी एक संस्था से पूरी नहीं होती है। इस यज्ञ में सबको मिलकर आहूति देनी होती है। किसी विवाद में मध्यस्थता की प्रक्रिया सामने वाले के सुनने से प्रारंभ होती है। न्याय मिलने से पहले पीड़ित को यह विश्वास होना आवश्यक है कि उसकी पीड़ा या समस्या को कोई सुन रहा है। उन्होंने कहा कि सभी की समस्याएं अलग-अलग हो सकती हैं, परंतु हर समस्या का समाधान एक जैसा नहीं होगा। समस्या की प्रकृति के अनुसार हमें अलग तरीके से सोचकर उसका समाधान देना होगा। स्थानीय समस्या को उसी सोच के साथ निदान तक लेकर जाना पड़ेगा। सीजेआई न्यायमूर्ति श्री सूर्यकांत ने कहा कि किसी पीड़ित की समस्या और उसके दुख-दर्द को हमें उसकी अपनी भाषा में अंर्तमन से सुनना पड़ेगा। इससे समस्या को समझने और उसका निदान करने में बड़ा अंतर देखने को मिलेगा और यही अंतिम न्याय का आधार बनेगा। उन्होंने कहा कि न्याय व्यवस्था के संदर्भ में सशक्त भविष्य, गरिमा, समावेशन सिर्फ शब्द नहीं, यह विधिक सहायता की वास्तविक परिभाषा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर के न्याय के प्रति समर्पण का जिक्र किया। लोकमाता के लिए न्याय सबके लिए समान अधिकार था। वे इकलौती महिला शासक थीं, जो प्रतिदिन नागरिकों, किसानों और विधवाओं से मुलाकात कर उनकी समस्याओं का समाधान करती थीं। वे सीधे नागरिकों से संवाद करती थीं, उनके शासनकाल में किसी के साथ भेदभाव नहीं होता था। इंदौर नगरी में इस सम्मेलन के आयोजन के लिए मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण बधाई का पात्र है।

न्यायमूर्ति श्री सूर्यकांत ने कहा कि नालसा के संवाद और चर्चा के लिए कार्यक्रमों से राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जिला और तहसील स्तर की संस्थाएं जुड़ी हैं। हमारे पैरा लीगल वॉलेंटियर सामाजिक व्यवस्था के सबसे करीब होते हैं। उनकी भूमिकाएं अलग हो सकती हैं, लेकिन हम सभी एक समान संवैधानिक उद्देश्य से साथ जुड़े होते हैं। वेस्ट जोन में विधिक सेवाओं का विस्तार मध्यप्रदेश के जनजातीय समुदाय, गोवा के मछुआरा समुदाय, गुजरात के माइग्रेंट वर्कर और मुंबई में रहने वाली किसी महिला के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार कोई डॉक्टर, किसी मरीज से बात करके उसकी परेशानियों को समझता है। उसी प्रकार समुदायों की समस्या को जानने-समझने के लिए हमें संवाद का सहारा लेना चाहिए। यह क्रॉन्फ्रेंस सिर्फ अपने विचारों का आदान-प्रदान करने का मंच नहीं है, हमें सभी तक न्याय की पहुंच आसान बनाने के लिए एक बेहतर न्याय व्यवस्था का निर्माण करना है। सशक्त भविष्य के लिए हम आज संवाद, नागरिकों की गरिमा, समानता की आवश्यकता है। पीड़ित को सबसे पहले मानवीय व्यवहार के साथ रिसीव करें। उसकी समस्या सुनें और फिर उसके अंतिम निदान का प्रयास किया जाए। पीड़ित की गरिमा का पूरा सम्मान किया जाए। गरीब, लाचार, आर्थिक रूप से पिछड़े, महिलाओं, बच्चों की सहायता करना कोई चैरिटी नहीं है, न्याय पाना सबका संवैधानिक अधिकारी है। हम सब पीड़ित को न्याय दिलाने में उसके सहायक की भूमिका में रहें।

न्यायमूर्ति श्री सूर्यकांत ने कहा कि समाज के अंतिम छोर के व्यक्ति तक न्याय की पहुंच हो, इसी में समानता का भाव छिपा है। समानता सिर्फ शब्दों में नहीं वास्तविक अर्थों में भी आनी चाहिए, इसलिए जब खुद बड़ी भूमिका में आ जाएं, तो यह जरूर देखें कि हमारे बीच में से कोई पीछे तो नहीं रह गया ? हमें प्रगति और अधिकार दिलाने की कोशिश में यह जरूर देखना होगा कि कहीं कोई पीछे तो नहीं छूट गया ? उन्होंने कहा कि समानता और न्याय की पहुंच हर नागरिक का अधिकार है और यह सुनिश्चित करना भी हम सभी की ही जिम्मेदारी है। हमारी असली परीक्षा तो इस बात में है कि जो न्याय पाने के लिए हमारे पास नहीं आया है, हम उस तक कैसे पहुंचे ? न्यायमूर्ति श्री सूर्यकांत ने कहा कि देशभर में काम कर रहे न्यायमित्र (पैरा लीगल वॉलेंटियर्स) हमारी न्यायिक सेना (लीगल आर्मी) हैं। ये उन समाजसेवियों की तरह हैं, जिन्हें समाज के पीड़ितों, जरूरतमंदों और वंचितों को न्याय दिलाने का काम सौंपा गया है। महात्मा गांधी ने भी तत्कालीन समाज के लिए यही काम किया था। उन्होंने कहा कि समानता केवल स्कीम लॉन्च करने से ही नहीं आ जाएगी। इसके लिए संवाद किया जाना चाहिए। न्याय के लिए जरूरी है कि हर समस्या को पूरी संवेदनशीलता के साथ सुना जाए। सभी के साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार हो। समावेशन यह सुनिश्चित करता है कि न्याय पाने से कोई वंचित न रहे, कोई पीछे न रह जाए। उन्होंने पैरा लीगल वॉलेंटियर्स से आहवान किया कि वे समाज के विकास के लिए और वंचितों को बराबरी में लाने के लिए समर्पित होकर काम करें और हर पात्र व्यक्ति को उसका वाजिब हक और उसके अधिकार का लाभ दिलाएं।

संवाद, गरिमा और संवदेनशीलता…, ये हमारी न्याय प्रणाली की हैं आत्मा

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस अवसर पर कहा कि न्याय पाना इस धरती में जन्मे हर व्यक्ति का प्राथमिक और मानवीय अधिकार है। एक जागरूक नागरिक के रूप में यह हमारा कर्तव्य भी है कि हम समाज के हर उस पीड़ित व्यक्ति या समुदाय को न्याय के मंदिर तक न केवल पहुंचाए, वरन् उसे न्याय भी दिलवाएं जो न्याय पाने का वास्तविक अधिकारी है। उन्होंने कहा कि इसके लिए जरूरी है कि हमारी न्याय व्यवस्था ऐसी हो, जो सर्वव्यापी हो, सुलभ हो, सुगम हो, शीघ्र हो, सस्ती हो, समदर्शी हो और सबसे जरूरी यह कि न्याय मानवीय संवेदनाओं से भरा हो। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण भारतीय न्याय परंपरा को समृद्ध करने की दिशा में अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहा है। आज के इस पवित्र आयोजन की थीम – एक आवाज, सशक्त भविष्य, गरिमा, समावेशन के माध्यम से न्याय पहुंचाना है। न्याय, स्वतंत्रता और बंधुत्व को लोकतंत्र का आधार बनाया गया है। उन्होंने कहा कि मध्यस्थता से छोटे-छोटे मामलों का निपटारा कर हम केस पेंडेंसी जैसे गंभीर विषयों पर मंथन कर रहे हैं। हमारे लिए न्याय की अवधारणा पंच परमेश्वरों की परंपरा रही है, जिन्होंने कभी समझाइश देकर, कभी समझौतों से विवादों को सहजता से सुलझाया है। भगवान श्रीकृष्ण के गीता के ज्ञान में भी समाधान का मार्ग दिखाई देता है, उन्होंने महाभारत युद्ध के भीषण समय को टालने के लिए 5 गांवों से समाधान निकालने का प्रयास किया था। हमारे संविधान में हजारों वर्षों की न्याय परंपरा का आधुनिक उत्कृष्ट संगम है। यह देश का न्याय विधान है। हमारे सभी न्यायालय वास्तव में न्याय के मंदिर हैं। भारतीय अदालतों को लोग श्रद्धा से न्याय मिलने के स्थान के रूप में मानते हैं। न्याय की आस में न्यायालय की चौखट पर कदम रखते हैं। राज्य सरकार न्यायपालिका की भावना के अनुसार अपने सभी उपलब्ध संसाधनों के साथ सदैव सभी के लिए न्याय सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में परिवर्तन का स्वर्णिम समय चल रहा है। हमने अंग्रेजों के दौर के अनेक गैर-जरूरी कानूनों को समाप्त कर न्याय को सुलभ और सरल बनाया है। हमारे लिए आधुनिक समय में ई-केस फाइलिंग, वर्चुअल सुनवाई, डिजिटल डेटा संग्रह, आधुनिक न्याय प्रबंधन जैसी न्याय प्रणाली लागू की गई है। औपनिवेशक दौर के कानूनों के स्थान पर जो कानून लागू किए गए हैं, वे इसी कड़ी में जनविश्वास अधिनियम के जरिए छोटे उल्लंघनों को अपराध की श्रेणी से बाहर कर न्याय को अधिक सरल और नागरिक हितैषी बनाते हैं। राज्य सरकार भी इसी दिशा में आगे बढ़ रही है। हमारी सरकार ने इसके लिए सभी तरह के प्रबंधन किए हैं। अभी कुछ दिन पहले ही अनुच्छेद 44 के माध्यम से राज्य के सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता (यूसीसी) से संबंधित विधेयक विधानसभा में पारित किया है। इसे पूर्व न्यायाधीश श्रीमती रंजना प्रसाद देसाई के नेतृत्व में बनी समिति के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। इस कानून के जरिए राज्य सरकार ने अपनी प्रतिबद्धता सिद्ध की है कि न्याय में सभी धर्मों का सम्मान होगा और सर्वधर्म सद्भाव बनाए रखने के लिए सरकार हिंदू-मुस्लिम-सिख और ईसाई किसी धर्म में भेदभाव नहीं करेगी। युवा पीढ़ी के लिए प्रतिबद्धता दिखाते हुए हमने पेपर लीक, धोखाधड़ी के मामले में तेजी से निराकरण करने के लिए 4 फास्ट ट्रैक कोर्ट की स्थापना की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उच्च न्यायालय, जबलपुर के विशेष सहयोग से सरकार द्वारा 24 घंटे में ही इंदौर, भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर में फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित कर दी गई हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में सायबर सुरक्षा, राष्ट्रीय स्वचालित प्रणाली, ई-जीरो एफआईआर के माध्यम से पुलिस प्रणाली वर्तमान दौर की जरूरतों के अनुसार सुदृढ़ हो रही है। आज के आयोजन में जस्टिस टू चिल्ड्रन लिटिगेशन फेलोशिप प्रोग्राम का शुभारंभ और न्याय के स्वर पुस्तक का विमोचन अत्यंत अत्यंत ही सराहनीय कदम है। उन्होंने कहा कि मालवा की धरती सम्राट विक्रमादित्य और राजा हरिश्चंद्र के काल से वंदनीय रही है। जहां हर कालखंड में कदम-कदम पर न्याय के उत्कृष्ट उदाहरण सामने आए हैं। लगभग 250 वर्ष पूर्व इसी न्याय नगरी में लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर ने सुशासन की स्थापना की थी। कोई शासक न्याय करते समय पुत्र और प्रजा में भेदभाव न करे, यह उदाहरण होलकर सम्राज्य में ही देखने को मिला है। उन्होंने अपने इकलौते पुत्र को भी गलती के लिए उसी प्रकार दंडित किया, जैसा कोई न्यायाधीश करता है। इसी प्रकार लगभग 2 हजार वर्ष पूर्व सम्राट विक्रमादित्य का उदाहरण देखने को मिलता है। जब सम्राट विक्रमादित्य ने विदेशी आक्रांता शकों को पराजित कर उनकी बेटी से विवाह किया। जब उनके सैनिक पत्नी के भाइयों को बंदी बनाकर सामने लाते हैं तो दोष सिद्ध होने और पत्नी के द्वारा भाइयों के लिए प्राणदान की मांग करने पर भी न्याय के मार्ग से विचलित नहीं हुए। उन्होंने भारतीय न्याय व्यवस्था का सम्मान करते हुए कहा कि हमारे लिए देरी से दिया गया न्याय भी अन्याय के समान है। सम्राट विक्रमादित्य ने अपने सालों को प्राणदंड देकर उत्कृष्ट न्याय परंपरा का निर्वहन किया। उन्होंने कहा कि साइबर सुरक्षा, राष्ट्रीय स्वचालित फिंगरप्रिंट पहचान प्रणाली, ई-जीरो एफआईआर और स्मार्ट पुलिसिंग के माध्यम से आज प्रदेश की पुलिस डिजिटली और टेक्निकली बेहद सक्षम हो रही है।

सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री विक्रम नाथ ने कहा कि नालसा की शिक्षा स्कीम और साइन लैंग्वेज में थीम सॉन्ग न्याय की पहुंच को जन-जन तक पहुंचाने में सहायक सिद्ध होगा। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण की योजनाओं के हिंदी संस्करण और ब्रेल लिपि में गाइड का विमोचन दृष्टि बाधितों के लिए न्याय की आस बनकर सामने आएगा। स्पर्श के माध्यम से दिव्यांगजन किसी अन्य की सहायता लिए बगैर यह सुनिश्चित कर पाएंगे कि विधिक सेवाएं उनके लिए उपलब्ध हैं। नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी जबलपुर के सहयोग से मध्यस्थता पर सर्टिफिकेट कोर्स – विवाद से सहमति की ओर शुभारंभ भी नालसा के प्रयासों को आगे बढ़ाने में सहायक होगा। इससे परिवार, पड़ोसी और साझेदारी जैसे मुद्दों का संवाद के जरिए समाधान निकलेगा। मध्यस्थता एक ऐसा माध्यम बनेगा, जिसमें नागरिकों के पास सहमति से हल निकलाने की शक्ति होगी, न कि कोई समाधान उन पर थोपा जाए। न्याय सभी के लिए समान रूप से उपलब्ध है, जिन्हें इसकी आवश्यकता है।

सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री मनमोहन ने कहा कि न्याय केवल विधायी कानून के पुलिंदों और न्यायालयों के परिभाषित करने से संभव नहीं होता है। यह एक विश्वास है कि जब भी कोई मुश्किल में है, तो वह फोरम तक पहुंचे और समाधान प्रक्रिया की सहायता प्राप्त कर सके, जहां उसे न्याय मिलेगा। आज न्याय प्रक्रिया को अधिक प्रभावशाली बनाने के लिए संवाद, सम्मान और समानता पर जोर देनी की आवश्यकता है। यह हम सभी के एक लक्ष्य के साथ चलने और एक दिशा में कार्य करने से भी संभव हो सकता है। न्याय को केवल विवादों का हल करने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि फ्यूचर इंफ्रास्ट्रक्चर के तौर पर देखा जाना चाहिए। मध्यस्थता प्रक्रिया हमारी न्याय व्यवस्था के लिए मामलों का निपटारा करने का सबसे कारगर तरीका हो सकता है। आउट ऑफ द बॉक्स थिंकिंग से ही हम न्याय मांगने वाले नागरिकों को संतुष्ट कर सकते हैं। न्याय की समानता समाज के हर वर्ग के साथ जनजातीय समुदायों के लिए भी सुनिश्चित हो। उन्होंने कहा कि सभी को न्याय पाने के लिए सुगमतापूर्वक पहुंच सुनिश्चित की जानी चाहिए।

केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि भारतीय न्याय व्यवस्था में न्याय केवल न्यायालयों तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति तक इसकी पहुंच हो, यह हमारी प्रतिबद्धता है। दुनिया में भारत की पहचान लोकतंत्र की जननी के तौर पर है। हमारी सभ्यता ने रूल ऑफ लॉ, नेचुरल जस्टिस, मध्यस्थ संवाद और लोक कल्याण की परंपरा को आत्मसात किया है। भारतीय कानून में नैतिकता, समानता और मानव कल्याण का आधार रहा है। भारतीय संविधान निर्माताओं ने संविधान में सबसे पहले जस्टिस को स्थान दिया है। सोशल, इकोनोमिकल और पॉलिटिकल जस्टिस, ये तीनों शब्द भारतीय संवैधानिक दर्शन की आधारशिला है। आर्टिकल 39A के माध्यम से संविधान ने सभी राज्यों को यह दायित्व सौंपा है कि प्रत्येक नागरिक को नि:शुल्क न्याय की व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए। आर्थिक और सामाजिक स्थिति किसी भी व्यक्ति को न्याय से वंचित नहीं कर सकती है। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण ने न्याय को प्रत्येक व्यक्ति तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका उपलब्ध कराई है। न्याय समान अवसर है, न्याय विश्वास है। न्याय से ही यह भावना विकसित होती है कि संविधान हमारे अधिकारों के साथ खड़ा है। ईज ऑफ जस्टिस सरकार की महत्वपूर्ण प्राथमिकता है, जिस प्रकार हमने ईज ऑफ लिविंग और ईज ऑफ डूइंग को राष्ट्रीय अभियान बनाया है, उसी प्रकार न्याय व्यवस्था को भी पारदर्शी, सबसे लिए समान और आसान पहुंच वाली बनाना हमारा साझा प्रयास है। तकनीक के समावेश से न्याय प्रणाली में सरलता आई है। आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस (एआई) ने न्याय प्रक्रिया को बहुभाषीय बनाने में महत्वपूर्ण कार्य किया है। मोबाइल एप्लीकेशन की सहायता से लोगों को विधिक सेवाएं मिल रही हैं।

केन्द्रीय राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री मेघवाल ने कहा कि मध्यप्रदेश हार्ट ऑफ इंडिया है, जहां सांस्कृतिक विरासत, जनजातीय परंपराओं और सामाजिक विविधताओं का संगम देखने को मिलता है। यहां राजा भोज की सुशासन परंपरा और लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर की न्यायिक शासन व्यवस्था हमें प्रेरणा देती है कि सुशासन का वास्तविक आधार न्याय ही है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति संवाद और सहभागिता की रही है। आज भारतीय न्याय व्यवस्था नागरिक केंद्रीय बनने की दिशा में अग्रसर है। मध्यस्थता प्रक्रिया आने वाले समय में भारतीय न्याय व्यवस्था का सबसे प्रभावी स्तंभ बनकर उभरेगी। परिवार, समाज और ग्राम पंचायतों में हमने बातचीत से समाधान की परंपरा को अपनाया है। समान न्याय व्यवस्था में जनजातीय समुदाय, घुमंतू समाज, नारी और बच्चे समान न्याय के अधिकारी हैं। उन्होंने स्वच्छ भारत मिशन में इंदौर को अवॉर्ड मिलने पर इंदौरवासियों को बधाई भी दी।

मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री विवेक रुसिया ने कहा कि मालवा की पावन धरती और लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर की धरती पर यह सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। इंदौर शहर अपनी सांस्कृतिक विरासत, अतुलनीय आतिथ्य, जीवंत परंपरा ही नहीं बल्कि अपनी संवेदनशीलता और सहनशीलता के लिए भी देश में विशेष पहचान रखता है। यह सम्मेलन हमारे संकल्प को नई दिशा प्रदान करेगा। हम सभी के एकीकृत प्रयासों से ही न्याय सभी के लिए समान रूप से आशा और उम्मीद की किरण बनेगा। एक्सेस ऑफ जस्टिस एक संवैधानिक सोच नहीं, बल्कि हमारी नैतिक जिम्मेदारी है। समानता को चैरिटी के रूप में नहीं देखा जाए, यह एक संवैधानिक अधिकार है। तकनीकी नवाचारों ने सभी वर्गों तक विधिक सेवाओं की पहुंच को सभी के लिए आसान और सुगम बनाया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का भी हमें विशेष सहयोग इस आयोजन में मिला है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश न्यायिक विधिक सेवा प्राधिकरण का प्रयास रहा है कि न्याय केवल न्यायालयों तक सीमित न रहे, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति तक इसकी सरल, सहज और सम्मानजनक पहुंच हो। लोक अदालतें, कारागार सुधार और विधिक सेवाओं का जनजातीय क्षत्रों तक विस्तार की पहल सराहनीय है। हमारे प्रशिक्षित मध्यस्थों का एक तंत्र अनेक मामलों का निपटारा न्यायालयों से पूर्व संवाद और सहमति से कर रहा है। हमारे यहां दिव्यांगों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन भी किया जा रहा है।

 

मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री आनंद पाठक ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया। कॉन्फ्रेंस में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री सतीश चंद्र शर्मा, न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री विजय विश्नोई, न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री आलोक आराधे, न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री शील नागु, न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री संजीव सचदेवा, उच्च न्यायालय गुजरात की मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्रीमती सुनीता अग्रवाल, मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री विवेक अग्रवाल सहित विभिन्न उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशगण, विधिक सेवा प्राधिकरणों के वरिष्ठ पदाधिकारी, न्यायिक अधिकारी, महापौर श्री पुष्यमित्र भार्गव सहित अनेक प्रतिष्ठित नागरिक और बड़ी संख्या में पैरा लीगल वॉलेंटियर्स उपस्थित थे।

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मंत्री श्री चैतन्य काश्यप की दूरदर्शी सोच से उत्कृष्ट विद्यालय रतलाम को मिली कृषि संकाय की सौगात

हजारों विद्यार्थियों के भविष्य को मिलेगी नई दिशा, कृषि शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट विद्यालय रचेगा नया इतिहास

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग मध्यप्रदेश शासन के मंत्री श्री चैतन्य काश्यप की दूरदर्शी सोच, विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के प्रति उनकी सकारात्मक दृष्टि तथा रतलाम को शिक्षा के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने के संकल्प का एक और महत्वपूर्ण परिणाम सामने आया है। उनके सतत प्रयासों से शासकीय उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, रतलाम सहित जिले के आलोट, जावरा-2, पिपलौदा एवं रतलाम-2 विकासखंड के कुल छह विद्यालयों में कृषि संकाय प्रारंभ करने की स्वीकृति प्राप्त हुई है। यह निर्णय केवल नए संकाय की शुरुआत नहीं, बल्कि जिले के हजारों विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला रखने वाला ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।

मंत्री श्री काश्यप का सदैव यह मानना रहा है कि शिक्षा तभी सार्थक होती है, जब वह स्थानीय आवश्यकताओं, रोजगार की संभावनाओं और भविष्य की चुनौतियों से जुड़ी हो। मालवा अंचल की कृषि प्रधान पहचान तथा विद्यार्थियों की बढ़ती शैक्षणिक आवश्यकताओं को देखते हुए उन्होंने लंबे समय से उत्कृष्ट विद्यालय रतलाम में कृषि संकाय प्रारंभ करने की आवश्यकता महसूस की। विद्यालय के प्राचार्य, विद्यार्थियों एवं पालकों की मांग को गंभीरता से लेते हुए उन्होंने इस विषय को शासन स्तर पर प्रभावी ढंग से उठाया, जिसके परिणामस्वरूप आज यह बहुप्रतीक्षित सौगात जिले को प्राप्त हुई है।

विद्यालय के प्राचार्य सुभाष कुमावत ने बताया कि कृषि संकाय प्रारंभ होने से विद्यार्थियों को आधुनिक कृषि विज्ञान, प्राकृतिक एवं जैविक खेती, कृषि अनुसंधान, कृषि प्रौद्योगिकी, नवाचार, एग्री-बिजनेस, कृषि उद्यमिता तथा स्वरोजगार के विविध अवसरों का व्यावहारिक एवं गुणवत्तापूर्ण ज्ञान प्राप्त होगा। विशेष रूप से ग्रामीण एवं कृषक परिवारों के छात्र-छात्राओं को अपनी रुचि के अनुरूप उच्च शिक्षा एवं बेहतर कैरियर निर्माण का सशक्त अवसर मिलेगा। साथ ही वे आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर कृषि क्षेत्र में नवाचार और आत्मनिर्भरता को नई दिशा दे सकेंगे।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप यह पहल कौशल आधारित एवं रोजगारोन्मुख शिक्षा को और अधिक सशक्त बनाएगी। अब विद्यार्थियों को कृषि शिक्षा के लिए अन्य शहरों की ओर पलायन नहीं करना पड़ेगा, बल्कि अपने ही जिले में गुणवत्तापूर्ण अध्ययन की सुविधा उपलब्ध होगी। इससे न केवल शिक्षा का स्तर ऊँचा होगा, बल्कि क्षेत्र के सामाजिक, आर्थिक एवं कृषि विकास को भी नई गति मिलेगी।

इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर प्राचार्य सुभाष कुमावत ने विद्यालय परिवार की ओर से मंत्री श्री चैतन्य काश्यप के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी दूरदर्शी सोच, संवेदनशील नेतृत्व और विद्यार्थियों के हित में किए गए सतत प्रयासों से रतलाम जिले को शिक्षा के क्षेत्र में एक अमूल्य सौगात प्राप्त हुई है। उन्होंने इस महत्वपूर्ण स्वीकृति के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तथा स्कूल शिक्षा मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह के प्रति भी कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन एवं सहयोग से जिले के विद्यार्थियों को भविष्य निर्माण का एक सशक्त अवसर मिला है। विद्यालय परिवार ने विश्वास व्यक्त किया कि यह निर्णय आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत सिद्ध होगा तथा रतलाम जिले को कृषि शिक्षा के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने में मील का पत्थर साबित होगा।

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कृषि यंत्र किराये की दुकान स्थापित करने के लिए आवेदन 21 अगस्त तक आमंत्रित

सहायक कृषि यंत्री ने बताया कि‍ कृषकों को किराये पर ट्रैक्टर एवं यंत्र उपलब्ध करा कर सेवाएं देने के उद्देश्‍य से बैंक ऋण आधार पर कृषि यंत्र किराये की दुकान (CHC)) स्थापित करने के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। इच्छुक आवेदक विभाग के पोर्टल www.chc.mpdage.org के माध्यम से आवेदन कर सकते है। आवेदक को सहायक कृषि यंत्री उज्जैन के नाम से 10 हजार रुपये का डिमांड ड्राफ्ट धरोहर राशि के रूप में बैंक से बनवाकर 07 अगस्त से 21 अगस्त 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते है। कंप्युटराइज्ड लॉटरी पद्धती से जिलेवार प्राथमिकता सूची का निर्धारण 22 अगस्त 2026 को किया जावेगा। वर्ष 2026-27 के लिए रतलाम जिले में सामान्य वर्ग के लिए 13, अनुसूचित जाति के लिए 03, अनुसूचित जनजाति के लिए 04 एवं कृषक उत्पादक सगठंन के लिए 01 कुल 21 कृषि यंत्र किराये की दुकान स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। कृषक 10 लाख से 25 लाख रुपये तक के कृषि यंत्र का क्रय बैंक ऋण के माध्यम से कर सकते है, जिसमे शासन ‌द्वारा 40% या अधिकतम 10 लाख तक का अनुदान क्रेडिट लिंक बैंक एंडेड सब्सिडी के रूप में दिया जाएगा। रतलाम जिले में निजी क्षेत्र में कृषि यंत्र किराये की दुकान स्थापित करने के लिए ट्रैक्टर 50 एचपी से अधिक, मल्चर/बेडर/स्ट्रॉ रीपर, लेजर लैंड लेवलर/ क्रॉप थ्रेशर/मल्टी क्रॉप थ्रेशर, ब्रॉड बेड फरो प्लांटर/रेज्ड बेड प्लांटर/मल्टी क्रॉप प्लांटर/न्यूमेटिक प्लांटर तथा रिवर्सिबल प्लाऊ/डिस्क हैरो जैसे यंत्र अनिवार्य है अतिरिक्त प्रोजेक्ट की लागत सीमा (25 लाख) के अंतर्गत आवेदक स्थानीय एवं फसल आवश्यकतानुसार कृषि अभियांत्रिकी संचालनालय के पोर्टल पर पंजीकृत यंत्रों में से एच्छिक यन्‍त्र क्रय कर सकते है। आवेदन के लिए आवेदक की उम्र 01 अगस्‍त 2026 को 18 वर्ष से कम और 40 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए। आवेदक न्यूनतम 12 वी कक्षा उत्तीर्ण होना आवश्यक है। आवेदक जिस ग्राम में केंद्र स्थापित करना चाहता है, उस ग्राम में स्वयं अथवा माता-पिता के नाम से भूमि होने पर ही केंद्र के आवेदन हेतु पात्रता होगी। जिस ग्राम में 01 अप्रैल 2017 के पश्चात केंद्र स्थापित किया जा चुका है, उस ग्राम में आवेदक को केंद्र स्थापित करने की पात्रता नहीं होगी। अधिक जानकारी के लिए पोर्टल www.chc.mpdage.org पर उपलब्ध विज्ञापन देख सकते है।

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म.प्र. पर्यटन क्विज प्रतियोगिता में 169 विद्यालयों के 507 विद्यार्थियों ने की प्रतिभागिता

अग्रवाल विद्या मंदिर रतलाम प्रथम, महावीर जैन विद्या मंदिर ताल द्वितीय तथा शा. सांदीपनी विनोबा वि. रतलाम ने तृतीय स्थान प्राप्त

म.प्र. पर्यटन विभाग द्वारा प्रदत्त निर्देशानुसार जिला पुरातत्व, पर्यटन एवं संस्कृति परिषद जिला रतलाम द्वारा कलेक्टर श्री अजय कटेसरिया के मार्गदर्शन में म.प्र. पर्यटन क्विज प्रतियोगिता 2026 का आयोजन जिला मुख्यालय के शासकीय उत्कृष्ट उ.मा.विद्यालय सागोद रोड रतलाम पर किया गया। कार्यक्रम में नगर पालिक निगम रतलाम अध्यक्ष श्रीमती मनीषा शर्मा सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। प्रदेश के बच्चों में प्रतियोगिता के माध्यम से प्रदेश के समृद्धशाली इतिहास, परम्पराओं, ऐतिहासिक धरोहर, सांस्कृतिक रंगो, कला, प्राकृतिक समृद्धि, महापुरूषों, पर्यटन महत्व की संभावनाओं आदि से परिचित कराने तथा पर्यटन के माध्यम से सीखने की प्रक्रिया को विकसित करने के उद्देश्य से पर्यटन क्विज प्रतियोगिता 2026 का आयोजन किया गया । प्रतियोगिता के प्रथम चरण के लिए प्रातः 09.00 से 10.00 बजे तक पंजीयन कार्य किया गया तथा प्रातः 10.00 बजे से 12.00 बजे तक लिखित प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें जिले के 241 विद्यालयों के पंजीयन प्राप्त हुए जिसमे से 169 विद्यालयों के 507 विद्यार्थियों ने प्रतिभागिता की। मूल्यांकन पश्चात 06 सर्वश्रेष्ठ टीमों का चयन द्वितीय चरण मल्टीमीडिया क्विज के लिए किया गया। प्रतियोगिता में अग्रवाल विद्या मंदिर रतलाम की टीम ने प्रथम, श्री महावीर जैन विद्या मंदिर ताल की टीम ने द्वितीय तथा शासकीय सांदीपनी विनोबा रतलाम की टीम ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। उपविजेता टीमों में शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय प्रीतमनगर रतलाम ने प्रथम, शासकीय सांदीपनी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बिरमावल ने द्वितीय तथा शासकीय हाई स्कूल मउ ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। 06 टीमों (18 विद्यार्थियो) में से जिले की टॉप 03 विजयी टीम को म.प्र. राज्य पर्यटन विकास निगम के होटलों में 02 रात्रि एवं 03 दिन तथा शेष 03 उपविजेता टीमों को 01 रात्रि 02 दिन ठहरने हेतु कूपन, प्रमाणपत्र तथा मेडल प्रदाय किये गये तथा शेष सभी प्रतियोगियों को भी प्रमाणपत्र दिए गए । मल्टीमीडिया क्विज तथा कार्यक्रम का संचालन क्विज मास्टर डॉ. ललित मेहता द्वारा किया गया।

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एडीएम श्री बृजेंद्र कुमार रावत ने वन स्टॉप सेंटर का किया औचक निरीक्षण

अपर कलेक्टर श्री बृजेंद्र कुमार रावत द्वारा वन स्टॉप सेंटर रतलाम का औचक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने 181 से प्राप्त प्रकरणों की जानकारी ली तथा प्रकरणों के संबंध में चर्चा की। उन्होंने आश्रय में निवासरत अंत:वासिनियों से बातचीत कर उन्हें उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की जानकारी ली। अपर कलेक्टर श्री रावत ने वन स्टॉप सेंटर में कर्मचारियों के उपस्थिति रजिस्टर का अवलोकन किया।

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गढ़ीगमना राशन दुकान में खाद्यान्न स्टॉक में गड़बड़ी पर चार के विरुद्ध एफआईआर दर्ज

मुख्यमंत्री राशन आपके द्वार योजना के तहत संचालित वाहन से गेहूं ले जाने तथा उचित मूल्य दुकान के राशन स्टॉक में अनियमितता पाए जाने के मामले में अनुबंधित वाहन के मालिक अनीस भगोरा, वाहन चालक मोहन चरपोटा तथा उचित मूल्य दुकान गढ़ीगमना की विक्रेता रीना पति मुकेश टांक एवं मुकेश टांक पिता शंकर टांक के विरुद्ध पुलिस थाना बाजना में एफआईआर दर्ज की गई है।

सहायक आपूर्ति अधिकारी सैलाना/बाजना श्री मुकेश चौहान द्वारा जांच प्रतिवेदन के अनुसार 19 जुलाई 2026 को ग्राम गढ़ीगमना के ग्रामीणों द्वारा मुख्यमंत्री राशन आपके द्वार योजना के वाहन क्रमांक MP43G5042 को रोककर पुलिस थाना बाजना में खड़ा कराया गया था। 20 जुलाई को ग्राम पंचायत गढ़ीगमना के सरपंच दलीचंद पिता रंगलाल मेडा एवं अन्य ग्रामवासियों की उपस्थिति में पुलिस थाना बाजना के समक्ष वाहन की जांच की गई। जांच के दौरान वाहन में 50 किलोग्राम क्षमता वाले जूट के 30 कट्टों में गेहूं एवं तौल कांटा पाया गया। गेहूं एवं तौल कांटा जब्त कर प्राथमिक कृषि साख समिति बाजना द्वारा संचालित उचित मूल्य दुकान के विक्रेता पन्नालाल टांक को सुपुर्द किया गया तथा वाहन को चालक मोहन चरपोटा की सुपुर्दगी में दिया गया।

जांच के दौरान पुलिस थाना बाजना में उपस्थित उपभोक्ताओं,ग्रामवासियों तथा संरपंच दलीचंद मईडा ने बताया कि गढ़ीगमना उचित मूल्य दुकान से राशन वितरण का कार्य विक्रेता रीना टांक एवं उनके पति मुकेश टांक द्वारा किया जाता है। उनके द्वारा राशन सामग्री उपलब्ध नहीं कराई जाती तथा बची हुई राशन सामग्री बाजार में बेच दी जाती है। ग्रामीणों के अनुसार दुकान माह में 2 से 3 दिन खोली जाती है तथा ई-केवाईसी के लिए उपभोक्ताओं को बाजना स्थित घर पर बुलाया जाता है।

जांच में उचित मूल्य दुकान गढ़ीगमना कोड क्रमांक 1706004 के विभागीय पोर्टल पर दर्ज स्टॉक तथा गोदाम में उपलब्ध स्टॉक का मिलान किया गया। मिलान में गेहूं 4000 किलोग्राम, चावल 1000 किलोग्राम तथा शक्कर 40 किलोग्राम कम पाई गई। कम पाए गए खाद्यान्न की अनुमानित आर्थिक कीमत 1 लाख 59 हजार रुपये पाई गई।

जांच में प्रथम दृष्टया पाया गया कि मुख्यमंत्री राशन आपके द्वार योजना के वाहन में उचित मूल्य दुकान से गेहूं के 30 कट्टे बाजार में बेचने के उद्देश्य से ले जाए जा रहे थे। वाहन में अन्य राशन सामग्री नहीं पाई गई। जांच प्रतिवेदन के आधार पर अनुबंधित वाहन के मालिक अनीस भगोरा एवं वाहन चालक मोहन चरपोटा द्वारा निर्धारित वाहन व्यवस्था संबंधी प्रावधानों तथा उचित मूल्य दुकान की विक्रेता रीना पति मुकेश टांक एवं मुकेश टांक पिता शंकर टांक द्वारा मध्यप्रदेश सार्वजनिक वितरण प्रणाली नियंत्रण आदेश, 2015 की कडिका 10 (4) 11 (1) (2) व 18, 19 के प्रावधानों का उल्लंघन किया जाना पाया गया। उक्त कृत्य आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 3/7 के अंतर्गत दंडनीय पाए जाने पर चारों के विरुद्ध थाना बाजना में एफआईआर दर्ज कर वैधानिक कार्रवाई की गई।

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रतलाम उद्यानिकी के क्षेत्र में प्रगतिशील जिला, डेयरी विकास की अपार संभावनाएं : कलेक्टर श्री अजय कटेसरिया

सभी जिला अधिकारी ई-ऑफिस का सुव्यवस्थित संचालन करें

कलेक्टर श्री अजय कटेसरिया ने शनिवार को कलेक्टर कार्यालय सभागार में जिले के सभी जिला अधिकारियों की संयुक्त बैठक लेकर विभागीय योजनाओं एवं विकास कार्यों की प्रगति की समीक्षा की। बैठक में सीईओ जिला पंचायत सुश्री वैशाली जैन, अपर कलेक्टर श्री बृजेंद्र रावत सहित विभिन्न विभागों के जिला अधिकारी उपस्थित रहे।

बैठक में कलेक्टर श्री कटेसरिया ने कहा कि रतलाम जिला उद्यानिकी के क्षेत्र में प्रदेश का एक प्रगतिशील जिला है। यहां उद्यानिकी फसलों का व्यापक उत्पादन होता है तथा अंगूर की खेती जिले की विशेष पहचान है। उन्होंने कहा कि जिले में दूध उत्पादन एवं डेयरी विकास की भी अपार संभावनाएं हैं, जिनका लाभ किसानों और पशुपालकों को दिलाने के लिए संबंधित विभाग समन्वित रूप से कार्य करें।

कलेक्टर ने मेडिकल कॉलेज में मरीजों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं एवं व्यवस्थाओं की सराहना की। इस दौरान उन्हें ब्लड बैंक की कार्यप्रणाली की भी जानकारी दी गई।

उन्होंने जिला रोजगार अधिकारी को युवा संगम कार्यक्रम के प्रभावी आयोजन के साथ-साथ कौशल विकास एवं युवाओं के रोजगार सृजन पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। पशुपालन विभाग को हितग्राहीमूलक योजनाओं के अधिक से अधिक प्रकरण तैयार कर लीड बैंक मैनेजर के माध्यम से स्वीकृत कराने तथा पात्र हितग्राहियों को लाभान्वित करने के निर्देश दिए।

जल निगम एवं जल जीवन मिशन के अंतर्गत संचालित कार्यों में आम नागरिकों की समस्याओं का त्वरित निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए। वरिष्ठ कोषालय अधिकारी को जिले के सभी शासकीय बैंक खातों एवं उनमें उपलब्ध राशि की जानकारी लीड बैंक मैनेजर के समन्वय से एकत्रित कर प्रस्तुत करने को कहा गया।

कलेक्टर ने सभी जिला अधिकारियों को निर्देशित किया कि ई-ऑफिस प्रणाली का सुव्यवस्थित एवं प्रभावी संचालन सुनिश्चित करें। यदि संचालन में किसी प्रकार की तकनीकी या प्रशासनिक समस्या आती है तो तत्काल अवगत कराएं, ताकि उसका शीघ्र निराकरण किया जा सके। उन्होंने न्यायालयों में लंबित प्रकरणों की नियमित समीक्षा कर समय-सीमा में जवाब प्रस्तुत करने के भी निर्देश दिए।

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होम गार्ड विभाग का आपदा मित्र प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न

मध्यप्रदेश आपदा प्रबंधन प्राधिकरण एवं मुख्यालय से प्राप्त निर्देशानुसार कलेक्टर श्री अजय कटेसरिया के मार्गदर्शन में आज एसडीईआरएफ एवं होमगार्ड विभाग द्वारा होमगार्ड लाईन जिला रतलाम में 7 दिवसीय आपदा मित्र प्रशिक्षण कार्यक्रम के प्रथम दिवस पर प्रशिक्षण का शुभारंभ किया गया ।

अपर कलेक्टर श्री बृजेन्द्र कुमार रावत एवं डिस्ट्रिक्ट कमांडेंट होमगार्ड / एसडीआरएफ श्रीमती रोशनी बिलवाल द्वारा मां सरस्वती की तस्वीर पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन कर प्रशिक्षण का शुभारंभ किया गया ।

प्रशिक्षण कार्यक्रम के शुभारंभ में डिस्ट्रिक्ट कमांडेंट होमगार्ड / एसडीआरएफ द्वारा प्रशिक्षण कार्यक्रम के बारे में संक्षिप्त जानकारी देते हुए बताया कि आगामी 07 दिनों में जिले के विभिन्न शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों से आए प्रशिक्षु, स्वयं सेवी आपदा के समय काम में आने वाली विभिन्न रेस्क्यू तकनीके, प्राथमिक उपचार तकनीके एवं आगजनी की घटना के समय काम आने वाले उपकरणों का संचालन एवं उपयोग करना सीखेंगे। इन आपदा मित्रों की सहायता से भविष्य में आने वाली आपदाओं से निपटने में स्थानीय स्तर पर सहयोग लिया जाएगा।

 

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अपर कलेक्टर श्री बृजेन्द्र कुमार रावत ने प्रशिक्षणार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि “आपदा में सहायता के लिए सदैव तत्पर रहे क्योंकि आपदा के समय बिना किसी स्वार्थ के मुसीबत में फंसे अंजान व्यक्तियों की सेवा करना ही सबसे बड़ा मानव धर्म है और हमें इसे कभी भी भूलना नही चाहिए।” कार्यक्रम में मुख्य अतिथि द्वारा आपदा मित्र किट का वितरण भी किया गया जो कि प्रशिक्षणार्थियों को भविष्य में किसी भी प्रकार के रेस्क्यू कार्य हेतु उपयोगी रहेगी।

शुभारंभ कार्यक्रम के अंत में समस्त होमगार्ड अधिकारियों द्वारा मुख्य अतिथि को भेंट स्वरुप स्मृति चिन्ह प्रदाय किया गया। कार्यक्रम में होमगार्ड कम्पनी कमाण्डर श्री बद्री मण्डलोई, प्लाटून कमाण्डर श्रीमती ज्योति बघेल एवं समस्त होमगार्ड / एसडीईआरएफ जवान उपस्थित रहे, जिनके द्वारा आपदा मित्रों को आपदा से निपटने की बारिकियों के साथ प्रशिक्षण दिया जाएगा।

जिले में कुल 500 आपदा मित्रों को प्रशिक्षण दिया जाना है, जिसमें से यह प्रथम 100 आपदा मित्रों के प्रशिक्षण का शुभारंभ था। भविष्य में इस प्रकार के अन्य 04 प्रशिक्षण ओर संचालित किए जाएंगे। कार्यक्रम का संचालन सैनिक तुषार भट्ट द्वारा किया गया।

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हाथकरघा क्षेत्र को प्रोत्साहन, पारंपरिक कला को संरक्षित करने तथा महिलाओं को रोजगार के अवसर उपलब्धर करवाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मृगनयनी एक जिला-एक उत्पाद पर आधारित देश का पहला सरकारी स्वामित्व वाला डिजिटल प्लेटफार्म बना
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ‘हैण्डलूम सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ का शुभारंभ किया
घर पर ही चरखा चलाकर महिलाएं बनेगी आत्मनिर्भर

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की मंशानुरुप हाथकरघा क्षेत्र को प्रोत्साहन देने, पारंपरिक कला को संरक्षित करने तथा स्थानीय महिलाओं एवं बुनकरों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है। अब पुन: कॉटन और अन्‍य कपड़ों का निर्माण कार्य उज्‍जैन में प्रारंभ होगा। इस केंद्र पर महिलाओं को कार्य का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे घर पर ही चरखा चलाकर महिलाएं आत्‍मनिर्भर बनेगी और उन्‍हें 15 से 20 हजार रुपए महीने की आय प्राप्‍त होगी। लूम के संचालन से रोजगार के अवसर बढ़ेगें कॉटन के साथ-साथ रेशम उत्‍पादन की भी योजना बनाई जाएगी। यह बातें राष्‍ट्रीय हाथकरघा दिवस के अवसर पर उज्‍जैन में मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ‘हैण्डलूम सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ के शुभारंभ अवसर पर कही।

मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश के कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग के अंतर्गत संचालित मृगनयनी ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए देश का पहला सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (पीएसयू)के स्वामित्व वाला एक जिला-एक उत्पाद (ओडीओपी) केंद्रित डिजिटल प्लेटफॉर्म बनने का गौरव प्राप्त किया है। यह पहल न केवल मध्यप्रदेश के स्थानीय उत्पादों को डिजिटल पहचान प्रदान करेगी, बल्कि प्रदेश के कारीगरों, बुनकरों, शिल्पकारों और उद्यमियों के लिए राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार के नए द्वार भी खोलेगी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के मुख्‍य आतिथ्‍य में शुक्रवार को बाबा साहब नातू सामुदायिक भवन, प्रशांति धाम के पास, इंदौर रोड में कौशल एवं तकनीकी विकास योजना अंतर्गत ‘हैण्डलूम सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ का शुभारंभ मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने किया। इस अवसर पर उन्‍होंने सेंटर पर उपस्थित महिलाओं से चर्चा कर हथकरघा उद्योग के बारे में जानकारी ली। प्रशिक्षण केंद्र पर मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने चरखा भी चलाया। उन्‍होंने कहा कि इस ट्रेनिंग सेंटर में प्रथम तल पर निरंतर प्रशिक्षण का आयोजन किया जाए ताकि अधिक से अधिक लोगों को रोजगार मिल सके। साथ ही भूतल पर पर बने उत्‍पादों की बिक्री के लिए यहां पर शो-रूम भी बनाया जाए।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के कुशल नेतृत्‍व में भारत में बने खादी के कपड़ों को पूरे विश्‍व में पहुंचाया गया है। विगत 12 वर्षों में खादी ग्रामोद्योग के मुनाफे में आशा से अधिक 200 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। पिछले वर्ष पीएम मि‍त्रा पार्क का शिलान्‍यास धार में किया गया था। यह देश का सबसे बड़ा औद्योगिक पार्क बनेगा।इस अवसर पर सांसद श्री अनिल फिरोजिया ने कहा कि मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव के द्वारा आज एक ओर सौगात दी गई है। महिलाएं इससे निश्‍चित रूप से स्‍वावलंबी बनेगी।

कार्यक्रम में महापौर श्री मुकेश टटवाल, नगर निगम सभापति श्रीमती कलावती यादव, विधायक बड़नगर श्री जितेन्‍द्र पंड्या, उज्‍जैन विकास प्राधिकरण के अध्‍यक्ष श्री रवि सौलंकी, पूर्व अध्‍यक्ष श्री जगदीश अग्रवाल, श्री संजय अग्रवाल, श्री राजेन्‍द्र भारती, आयुक्‍त हाथकरघा निगम श्री मदन कुमार, कलेक्‍टर श्री रौशन कुमार सिंह, आयुक्‍त नगर पालिका निगम श्री अभिलाष मिश्रा, सीईओ जिला पंचायत श्री श्रेयांस कूमट एवं अन्‍य गणमान्‍य नागरिक उपस्थित थे।

कार्यक्रम में एसीएस कुटीर एवं ग्राम उद्योग श्री के.सी. गुप्‍ता ने स्‍वागत भाषण देते हुए कहा कि मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव की मंशा के अनुरुप खादी ग्रामोद्योग को बढ़ावा देने और हाथ करघे का प्रशिक्षण देने के लिए आज इस केंद्र का शुभारंभ किया गया है। पूरे प्रदेश में इसका विस्‍तारीकरण किया जाएगा। प्रशिक्षण के माध्‍यम से अधिक से अधिक लोगों को रोजगार के अवसर प्राप्‍त होंगे।

उल्‍लेखनीय है कि हैण्डलूम सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में महिलाओं को लगभग 6 माह का बुनियादी हाथकरघा प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। प्रशिक्षण के माध्यम से महिलाओं को हाथकरघा संचालन, बुनाई एवं कपड़ा निर्माण की तकनीकों में दक्ष बनाया जाएगा।

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ब्रिक्स संस्कृति सम्मेलन प्रदेश के लिए अत्यंत गर्व और ऐतिहासिक अवसर: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल घोषणा पत्र से वैश्विक सांस्कृतिक सहयोग को मिलेगी ऐतिहासिक दिशा
भोपाल घोषणा पत्र से व्यावहारिक और दीर्घकालिक सहयोग का मार्ग प्रशस्त: केंद्रीय मंत्री श्री शेखावत
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किया विभिन्न देशों के डेलिगेट्स का स्वागत और अभिनंदन
11वीं ब्रिक्स संस्कृति मंत्रियों की बैठक भोपाल में संपन्न

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि ब्रिक्स देशों के संस्कृति मंत्रियों एवं वैश्विक प्रतिनिधियों का सम्मेलन संपूर्ण राज्य के लिए अत्यंत गर्व और गौरव का विषय है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के सक्षम नेतृत्व में भारत अपनी सांस्कृतिक धरोहर, समृद्ध प्राचीन परंपराओं और ऐतिहासिक गौरव को विश्व पटल पर अत्यंत प्रभावशीलता और गर्व के साथ प्रस्तुत कर रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में ब्रिक्स संस्कृति मंत्रियों और संस्कृति कार्य समूह की बैठकों के समापन अवसर पर मीडिया प्रतिनिधियों से चर्चा कर रहे थे। ब्रिक्स संस्कृति मंत्रियों के गहन मंथन और बहुपक्षीय चर्चाओं के उपरांत सर्वसम्मति से ‘भोपाल घोषणा पत्र’ को अपनाया गया, जो ब्रिक्स सदस्य देशों के बीच सांस्कृतिक संबंधों, विरासत संरक्षण और रचनात्मक अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए मील का पत्थर सिद्ध होगा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भारतीय चिंतन के मूल मंत्रों—’वसुधैव कुटुंबकम’, ‘जीओ और जीने दो’ तथा ‘सर्वे भवंतु सुखिनः’—का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की यह प्राचीन अवधारणा विश्व शांति, सद्भाव और वैश्विक कल्याण की पक्षधर रही है। उन्होंने कहा कि देश का ‘हृदय स्थल’ मध्यप्रदेश इस ऐतिहासिक आयोजन का साक्षी और मेजबान बनकर गौरवान्वित हुआ है। मध्यप्रदेश की आध्यात्मिक चेतना, ऐतिहासिक स्थापत्य कला और जनजातीय विरासत का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सभी विदेशी मेहमानों को राज्य की समृद्ध कला-संस्कृति, विशिष्ट व्यंजनों और आत्मीय आतिथ्य का एक अलौकिक अनुभव प्राप्त हुआ है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इस बैठक के माध्यम से न केवल ब्रिक्स राष्ट्रों के बीच सांस्कृतिक साझेदारी प्रगाढ़ हुई है, बल्कि मध्यप्रदेश के पर्यटन, हस्तशिल्प और लोक कलाओं को भी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान मिली है। उन्होंने इस ऐतिहासिक आयोजन के सफल प्रबंधन के लिए केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय और सभी सहभागी देशों के प्रतिनिधियों का हृदय से धन्यवाद और आभार व्यक्त किया।

‘भोपाल घोषणा पत्र’ से व्यावहारिक और दीर्घकालिक सहयोग का मार्ग प्रशस्त-केंद्रीय मंत्री श्री शेखावत

केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के अंतर्गत संस्कृति कार्य समूह की बैठकों का एक सुव्यवस्थित क्रम आयोजित किया गया। इसके अंतर्गत पहली ब्रिक्स संस्कृति कार्य समूह की बैठक 29–30 अप्रैल 2026 को वर्चुअल माध्यम से आयोजित की गई, दूसरी बैठक 4–5 जून 2026 को वाराणसी में और तीसरी बैठक 5–6 अगस्त 2026 को भोपाल में आयोजित की गई। इन बैठकों के गहन विचार-विमर्श का समापन 8 अगस्त 2026 को भोपाल में आयोजित 11वीं ब्रिक्स संस्कृति मंत्रियों की बैठक के साथ हुआ, जिसमें सर्वसम्मति से ‘भोपाल घोषणा पत्र’ को पारित किया गया।

केंद्रीय मंत्री श्री शेखावत ने कहा कि इस वर्ष भारत की अध्यक्षता में सम्मेलन की मूल थीम “लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण” (Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability) रखी गई थी। सामान्यतः अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों के घोषणा पत्र केवल सैद्धांतिक बातों तक सीमित रहते हैं, लेकिन ‘भोपाल घोषणा पत्र’ एक परिणामोन्मुख (Outcome-based), व्यावहारिक और भविष्य-उन्मुख दस्तावेज है, जिसमें स्पष्ट लक्ष्य, क्रियान्वयन का मार्ग और समय-सीमा तय की गई है। इस बैठक में भारत सहित 14 देशों के 55 प्रतिनिधियों ने सहभागिता की, जिनमें 10 ब्रिक्स सदस्य देश (ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात) तथा 4 साझेदार देश (बेलारूस, क्यूबा, कजाकिस्तान और थाईलैंड) शामिल थे।

भोपाल घोषणा पत्र की मुख्य विशेषताओं को साझा करते हुए केंद्रीय मंत्री श्री शेखावत ने बताया कि ब्रिक्स देशों ने सांस्कृतिक और रचनात्मक उद्योगों (CCI) तथा रचनात्मक अर्थव्यवस्था में सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की है। इसके तहत कलाकारों, शिल्पकारों और रचनाकारों की नेटवर्किंग, सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान और डिजिटल माध्यमों के जरिए उन्हें अंतर्राष्ट्रीय बाजारों तक पहुँच प्रदान करने का तंत्र विकसित किया जाएगा। भारत के विशेष प्रस्ताव पर सभी ब्रिक्स एवं साझेदार देशों ने सर्वसम्मति से ‘स्वैच्छिक कलाकार रजिस्ट्री’ (Voluntary Artists Registry) बनाने का निर्णय लिया है, जिसका उद्देश्य कलाकारों का एक एकीकृत नेटवर्क तैयार करना और ‘जन से जन संपर्क’ (People-to-People Contact) को सुदृढ़ बनाना है।

 

केंद्रीय मंत्री श्री शेखावत ने बताया कि घोषणा पत्र में पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों व सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों के संरक्षण, संग्रहालयों, पुस्तकालयों और अभिलेखागारों के डिजिटलीकरण तथा दस्तावेजी धरोहरों के दीर्घकालिक संरक्षण के लिए संस्थागत ढांचा विकसित करने पर सहमति बनी है। भारत के सारनाथ स्तूप का उदाहरण देते हुए घोषणा पत्र में यूनेस्को की बहुराष्ट्रीय नामांकन प्रक्रिया के माध्यम से साझा सांस्कृतिक धरोहरों को वैश्विक मान्यता दिलाने में आपसी सहयोग का निर्णय भी शामिल किया गया है।

मुख्य सचिव श्री अशोक बर्णवाल ने कहा कि भोपाल घोषणा पत्र के माध्यम से मध्यप्रदेश और भोपाल की छवि में पूरे विश्व में निखार आयेगा। मुख्य सचिव श्री बर्णवाल ने मध्यप्रदेश की ओर से केन्द्र सरकार का भी आभार व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किया विभिन्न देशों के डेलिगेट्स का स्वागत और अभिनंदन

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ब्रिक्स देश के प्रतिनिधियों और अन्य डेलिगेट्स का स्वागत और अभिनंदन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर केंद्रीय संस्कृति मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत का स्वागत किया और उनके प्रति केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय द्वारा इस अभिनव आयोजन के लिए आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर केंद्रीय संस्कृति सचिव श्री विवेक अग्रवाल और अपर मुख्य सचिव संस्कृति श्री शिवशेखर शुक्ला उपस्थित थे।

भोपाल में सम्मेलन के दौरान 6 और 7 अगस्त को भोपाल में ‘ब्रिक्स संस्कृति महोत्सव’ का भी भव्य आयोजन किया गया, जिसमें बेलारूस, ब्राजील, इंडोनेशिया, रूस, संयुक्त अरब अमीरात और भारत के कलाकारों ने अपनी-अपनी पारंपरिक एवं लोक कलाओं की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। इस महोत्सव का मुख्य आकर्षण मध्यप्रदेश शासन के सहयोग से प्रस्तुत की गई ‘अमृतस्य मध्यप्रदेश’ नृत्य नाटिका रही। 35 मिनट की इस भव्य प्रस्तुति में 125 से अधिक कलाकारों ने भाग लिया और मध्यप्रदेश की शास्त्रीय, लोक तथा जनजातीय नृत्य परंपराओं के माध्यम से राज्य की ऐतिहासिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक यात्रा का जीवंत प्रदर्शन किया।

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