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समाचार मध्यप्रदेश रतलाम 01 अगस्त 2026 शनिवार

भारत का पहला टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन ग्वालियर में होगा स्थापित : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

केन्द्रीय दूरसंचार और म.प्र. सरकार के मध्य हुआ ऐतिहासिक एमओयू
3,500 करोड़ के निवेश और 14 हजार से अधिक होगा रोजगार सृजन
भारत सरकार TMZ ग्वालियर में लैब इकोसिस्टम, उच्च-स्तरीय परीक्षण सुविधाओं और प्लग-एंड-प्ले अवसंरचना के लिये 493 करोड़ की प्रदान करेगी अनुदान सहायता
टीएमजेड के प्रथम चरण का 170 एकड़ क्षेत्र में होगा विकास
उद्योग जगत की अपार मांग को देखते हुए द्वितीय चरण की भी बढ़ी संभावना
CAPEX सहायता के मामले में मध्यप्रदेश सरकार के प्रोत्साहन विश्व में सर्वश्रेष्ठ जिसमें R&D का पूंजीकरण भी है शामिल
मुख्यमंत्री डॉ. यादव दिल्ली में टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन के एमओयू समारोह में हुए शामिल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत हर क्षेत्र में नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है। भारत सरकार के संचार मंत्रालय और मध्यप्रदेश सरकार के बीच ग्वालियर में ग्लोबल टेलीकॉम मैन्यूफैक्चरिंग हब एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन निर्माण के लिए नई दिल्ली में हुआ एमओयू ऐतिहासिक कदम है। अब मध्यप्रदेश की धरती पर निर्मित संचार उपकरण देश-दुनिया को उपलब्ध होंगे। ये उपकरण मेक इन इंडिया के माध्यम से प्रधानमंत्री श्री मोदी के फेथ इन मध्यप्रदेश का जरिया बनेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उद्योगपतियों के साथ हुई राउंड टेबल मीटिंग में 3500 करोड़ रूपये के निवेश तथा 14 हजार से अधिक रोजगार सृजन की संभावना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरूवार को विज्ञान भवन, नई दिल्ली में टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन के एमओयू हस्ताक्षर समारोह को संबोधित कर रहे थे। केंद्रीय संचार मंत्री श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया तथा केंद्रीय संचार राज्य मंत्री श्री पी.एस. चंद्रशेखरन भी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश वह राज्य है, जिस पर देश और दुनिया का विश्वास बढ़ता जा रहा है। उन्होंने कहा कि ग्वालियर की धरती पर ग्लोबल टेलीकॉम मैन्यूफैक्चरिंग जोन के रूप में एक नए दौर की शुरुआत हो रही है। आज भारत डिजिटल टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रॉनिक मेन्यूफैक्चरिंग, डिफेंस सेक्टर में नए कीर्तिमान गढ़ रहा है। ग्वालियर में ग्लोबल टेलीकॉम मैन्यूफैक्चरिंग जोन की शुरुआत से निर्यात बढ़ेगा और अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिलेगी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्तमान में टेलीकॉम सेक्टर के माध्यम से स्मार्ट एआई मेन्यूफैक्चरिंग, डिफेंस, हेल्थ और गुड गवर्नेंस के क्षेत्र में आधारशिला तैयार हो चुकी है। आज देश में आर्टीफिशियल इंटेलिजेंस आधारित नेटवर्क से टेलीकॉम सेक्टर को नई ऊंचाइयां मिली हैं। ग्वालियर अंचल को ग्लोबल टेलीकॉम मैन्यूफैक्चरिंग जोन की सौगात मिलना सोने पर सुहागा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में उपस्थित टेलीकॉम सेक्टर के निवेशकों को ग्वालियर में निवेश करने का आमंत्रण दिया। उन्होंने निवेशकों को भरोसा दिलवाया कि जो देश में कहीं नहीं मिलेगा, वो मध्यप्रदेश में निश्चित रूप से मिलेगा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि औद्योगिक विकास में तेज गति से विकास के लिए मध्यप्रदेश की अलग ही धाक बनी है। प्रदेश की संस्कृति गौरवशाली है। इसमें कोहिनूर के हीरे की तरह ग्वालियर का विशेष महत्व है। यहां 170 एकड़ क्षेत्र में प्लग एंड प्ले मोड पर बनने वाले देश के पहले टेलीकॉम मैन्यूफैक्चरिंग जोन का इंटीग्रेडेट इकोसिस्टम स्थापित होगा। इस जोन में डिजाइन से टेस्टिंग तक मैन्यूफेक्चरिंग से डेवलपमेंट तक सर्टिफिकेशन से एक्सपोर्ट तक भविष्य की वैल्यू चेन का निर्माण होगा। देश में 5जी, 6जी उपकरण, ऑप्टिकल फायबर उपकरण, सेमीकंडक्टर उपकरण, डिवाइस नेटवर्किंग उपकरण, इलेक्ट्रॉनिक हार्डवेयर मिलेगा। साथ ही इंजीनियरिंग सर्विसेस, लॉजिस्टिक, वेयर हाउसिंग, तकनीकी संस्थानों के साथ उत्तर भारत का नया केंद्र बनेगा।

मध्यप्रदेश को मिली हैं 5 बड़ी परियोजनाएं

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हीरे की पहचान जौहरी को होती है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने मध्यप्रदेश को 5 बड़ी परियोजनाओं की सौगात दी है। भारत का सबसे बड़ा पीएम मित्र पार्क धार जिले में बनाया जा रहा है। यह कपास उत्पादक किसानों और टेक्सटाइल सेक्टर की बड़ी उपलब्धि है। रायसेन जिले में बीईएमएल के माध्यम से आधुनिक मेट्रो और रेलवे कोच निर्माण के लिए प्रदेश ने बड़ी छलांग लगाई है। बीना में पेट्रोलियम रिफायनरी के साथ ही भारत रत्न से सम्मानित स्व. अटल बिहारी वाजपेयी ने जो सपना देखा था, वह भी केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना और पार्वती-कालीसिंध-चंबल के माध्यम से पूर्ण होगा। केंद्र सरकार से मध्यप्रदेश को 2 रिवर लिंक प्रोजेक्ट की सौगात मिली हैं।

इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने कहा कि भारत का लक्ष्य केवल दूरसंचार उपकरणों का उपभोक्ता बनना नहीं, बल्कि उनका डिज़ाइन, विकास और निर्माण भारत में कर उन्हें दुनिया के विभिन्न देशों तक निर्यात करना है। उन्होंने कहा कि यह टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन ‘डिज़ाइन इन इंडिया, मेक इन इंडिया और एक्सपोर्ट फ्रॉम इंडिया’ के विजन को साकार करेगा। इससे भारत वैश्विक दूरसंचार विनिर्माण और निर्यात के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित होगा तथा आत्मनिर्भर भारत अभियान को नई गति मिलेगी। केन्द्रीय संचार राज्य मंत्री श्री पी.एस. चंद्रशेखरन ने भी संबोधित किया।

टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन (TMZ), ग्वालियर को देश के अत्याधुनिक टेलीकॉम उपकरण विनिर्माण, परीक्षण एवं अनुसंधान केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। लगभग 170.5 एकड़ में विकसित होने वाला यह प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक इकोसिस्टम उद्योगों को उत्पादन प्रारंभ करने के लिए विश्वस्तरीय अधोसंरचना उपलब्ध कराएगा। परियोजना का विकास विशेष प्रयोजन वाहन (एसपीवी) के माध्यम से किया जाएगा, जिसमें मध्यप्रदेश सरकार की 51 प्रतिशत तथा भारत सरकार के दूरसंचार विभाग की 49 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी। एमपीआईडीसी इस परियोजना का मास्टर डेवलपर होगा।

परियोजना के लिए भारत सरकार द्वारा 493 करोड़ रूपये की अनुदान सहायता स्वीकृत की गई है। इसमें 270.24 करोड़ रूपये अत्याधुनिक टेस्टिंग लैब एवं लैब इकोसिस्टम, 180 करोड़ रूपये आंतरिक अधोसंरचना, 34.20 करोड़ रूपये भवन एवं प्लग-एंड-प्ले सुविधाओं, 5 करोड़ रूपये टेक्नोलॉजी सेंटर तथा 4 करोड़ रूपये निवेश प्रोत्साहन गतिविधियों के लिए उपलब्ध कराए जाएंगे।

इस ज़ोन की सबसे बड़ी विशेषता इसकी अत्याधुनिक परीक्षण प्रयोगशालाएं होंगी। यहां 5जी कोर नेटवर्क, सैटेलाइट कम्युनिकेशन, ऑप्टिकल फाइबर केबल (OFC), सिम, पीओएन तथा राउटर जैसे टेलीकॉम उपकरणों की परीक्षण सुविधाएं विकसित की जाएंगी। साथ ही 4जी एवं 5जी नेटवर्क तथा अन्य टेलीकॉम उपकरणों की सुरक्षा जांच के लिए विशेष साइबर सिक्योरिटी लैब भी स्थापित होगी। इससे उद्योगों को परीक्षण एवं प्रमाणन के लिए अन्य राज्यों या विदेशों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

मध्यप्रदेश की केंद्रीय भौगोलिक स्थिति, 31 गीगावाट स्थापित विद्युत क्षमता, अधिशेष बिजली, 1 लाख एकड़ से अधिक औद्योगिक भूमि, 1000 एमसीएम समर्पित औद्योगिक जल, 8 हवाई अड्डे, 5 आर्थिक गलियारे तथा कुशल मानव संसाधन इस परियोजना को निवेश के लिए अत्यंत अनुकूल बनाते हैं। ग्वालियर हवाई अड्डा, रेलवे स्टेशन, आईसीडी मालनपुर, राष्ट्रीय राजमार्ग-44 तथा दिल्ली से निकटता उद्योगों को बेहतर लॉजिस्टिक सुविधा उपलब्ध कराएगी।

टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन में निवेश करने वाले उद्योगों को 30 वर्षों के लिए मात्र 1 रूपये प्रति वर्गमीटर वार्षिक लीज़ किराए पर भूमि, 100 प्रतिशत स्टाम्प ड्यूटी प्रतिपूर्ति, 1 रूपये का नाममात्र भूमि प्रीमियम, पहले पांच वर्षों तक 2 रूपये प्रति यूनिट विद्युत टैरिफ रिबेट तथा 25 रूपये प्रति केएलडी जल शुल्क जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इसके अतिरिक्त 50 प्रतिशत पूंजी सब्सिडी (अधिकतम 200 करोड़ रूपये), अनुसंधान एवं विकास सहायता (अधिकतम 25 करोड़ रूपये), निर्यात फ्रेट सब्सिडी, ईटीपी एवं जीरो लिक्विड डिस्चार्ज प्रणाली के लिए सहायता, प्रशिक्षण सहायता तथा रोजगार सहायता का भी प्रावधान किया गया है।

मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव तथा औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन एवं एमएसएमई श्री नीरज मंडलोई ने प्रेजेंटेशन में मध्यप्रदेश में भारत सरकार के औद्योगिक पार्कों के सिद्ध ट्रैक रिकॉर्ड एवं तीव्र प्रगति को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि यह ज़ोन अत्याधुनिक, विश्वस्तरीय अवसंरचना के साथ ऐसी साइट-अर्थव्यवस्था प्रदान करेगा जो परियोजना की व्यवहार्यता को उल्लेखनीय रूप से बेहतर बनाती है। मध्यप्रदेश में मात्र एक रूपये के सांकेतिक प्रीमियम पर भूमि, 30 वर्षों के लिये एक रूपये प्रति वर्ग मीटर की स्थिर वार्षिक लीज़ रेंट, 100% स्टाम्प ड्यूटी प्रतिपूर्ति, 30 वर्षों में संग्रहीत विकास शुल्क, प्रथम पाँच वर्षों के लिये 2 रूपये प्रति यूनिट की विद्युत दर और 25 रूपये प्रति केएलडी की दर से जल की आपूर्ति की जाती है।

राउंडटेबल में उपस्थित उद्योगपतियों ने मुख्य रूप से कहा कि टीएमजेड के लिये मध्यप्रदेश सरकार द्वारा प्रदत्त प्रोत्साहन CAPEX सहायता की दृष्टि से विश्व में सर्वश्रेष्ठ है। इसमें 200 करोड़ रूपये तक की 50% पूंजीगत सब्सिडी, जिसमें आर एंड डी के पूंजीकरण का महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल है। श्री अतुल बी. लाल ने टीएमजेड पहल की सराहना की तथा इस बात पर बल दिया कि भारत सरकार एवं मध्यप्रदेश सरकार की संयुक्त सहभागिता ग्वालियर में एक संपूर्ण, वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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जिले में अब तक 335.00 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज

जिले में इस वर्ष अब तक औसतन 335.00 मि.मी. वर्षा दर्ज की गयी है। जबकि पिछले 24 घन्टों में रतलाम जिले में 34.50 मिमी वास्तविक वर्षा दर्ज की गई है। पिछले 24 घन्टों में आलोट में 52.00 मि.मी., जावरा में 19.00  मि.मी., ताल में 16.0 मि.मी., पिपलोदा मे 19.0 मि.मी., बाजना में 21.0 मि.मी., रतलाम में 78.0 मि.मी., रावटी में 51.0 मि.मी. एवं सैलाना में 20.0 मि.मी., वास्तविक वर्षा दर्ज की गई है।विगत 1 जून से अब तक वर्षामापक केन्द्र आलोट में 374.0 मि.मी., जावरा में 368.0 मि.मी., ताल में 266.0 मि.मी., पिपलोदा में 383.0 मि.मी., बाजना में 213.0 मि.मी., रतलाम में 462.0 मि.मी., रावटी में 293.0 मि.मी. एवं सैलाना में 321.0 मि.मी., वास्तविक वर्षा दर्ज की गई है।

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नापतौल विभाग ने असत्यापित तौल उपकरण जब्त किए

नापतौल विभाग ने रतलाम शहर में विशेष जांच अभियान चलाया। सहायक नियंत्रक भारत भूषण ने विभिन्न दुकानों में उपयोग हो रहे इलेक्ट्रॉनिक एवं मेकेनिकल नापतौल उपकरणों की जांच की। विधिक मापविज्ञान अधिनियम, 2009 की धारा 24/33 के तहत कार्रवाई करते हुए विभाग ने 10 इलेक्ट्रॉनिक तौल उपकरण, 1 मेकेनिकल काउंटर मशीन तथा 6 बांट सहित कुल 17 नापतौल उपकरण जब्त किए। संबंधित दुकानदारों के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध किए गए।

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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्राकृतिक खेती कर रही उन्नतशील कृषि सखियों से किया संवाद

प्राकृतिक खेती सेहत और आमदनी का सबसे अच्छा स्रोत : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
झाबुआ में प्राकृतिक खेती के सबसे उन्नत अवसर
कृषि सखियों से प्राकृतिक खेती से हो रही आमदनी और प्राकृतिक तकनीकों के बारे में जाना

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि झाबुआ जिले में प्राकृतिक खेती के पर्याप्त अवसर हैं। प्राकृतिक खेती न सिर्फ सेहत के लिए, बल्कि अच्छी आमदनी का भी अवसर प्रदान कर रही है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में प्रदेश में नए अवसर पैदा हुए हैं। इसके लिए प्रदेश में कृषि कल्याण वर्ष के अंतर्गत सभी आवश्यक योजनाएं संचालित की जा रही हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को झाबुआ जिले के थांदला में प्रदेश स्तरीय “स्व-सहायता समूहों का क्षमतावर्धन एवं ऋण वितरण कार्यक्रम” में शामिल हुए। यहां उन्होंने जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आई प्राकृतिक खेती कर रहीं उन्नतशील कृषि सखियों और किसानों से संवाद किया। उन्होंने किसानों के अनुभव जाने तथा प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए शासन द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं एवं प्रयासों पर चर्चा की।

मुख्यमंत्री ने की जीवामृत और बीजामृत बनाने का प्रशिक्षण देने वाली उन्नत कृषि सखियों के कार्यों की सराहना

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ग्राम देवीगढ़, विकासखंड मेघनगर की उन्नतशील कृषि सखी श्रीमती संगीता डामोर से संवाद कर प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में उनके अनुभवों एवं प्रयासों की सराहना की। संवाद के दौरान श्रीमती डामोर ने बताया कि उन्होंने कृषि सखी के रूप में प्राकृतिक खेती का पाँच दिवसीय प्रशिक्षण प्राप्त किया है। वर्तमान में वे अपने गांव एवं आसपास के 125 किसानों को प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण दे रही हैं। प्रशिक्षण में मुख्य रूप से बीजामृत, जीवामृत और नीमास्त्र जैसे प्राकृतिक आदान बनाने की विधियां बता रही हैं। उन्होंने बताया कि वे लगभग एक हेक्टेयर भूमि पर प्राकृतिक खेती कर रही हैं तथा पिछले चार वर्षों से आत्मा परियोजना से जुड़कर नवीन कृषि तकनीकों को अपनाने के साथ अन्य किसानों तक भी पहुंचा रही हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री को बताया कि प्राकृतिक खेती एवं बेहतर फसल प्रबंधन अपनाने से गेहूं का उत्पादन 35 क्विंटल से बढ़कर 45 क्विंटल प्रति हेक्टेयर हो गया, जिससे उनकी आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती किसानों की लागत कम करने, उत्पादन बढ़ाने और आय में वृद्धि का प्रभावी माध्यम बन रही है। श्रीमती डामोर ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रति आभार व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री स्वयं कृषि सखियों से पास पहुंच कर की चर्चा

मुख्यमंत्री डॉ. यादव स्वयं कृषि सखियों के पास जाकर उनसे प्राकृतिक खेती के अनुभवों को जाना और प्राकृतिक खेती से होने वाली आमदनी की जानकारी ली। उन्होंने सभी बहनों को आगामी रक्षाबंधन के त्योहार की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने झाबुआ जिले के विकासखंड झाबुआ के ग्राम खेड़ी निवासी प्रगतिशील कृषक श्री विमल भाबोर से संवाद कर प्राकृतिक खेती के उनके अनुभव जाने। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने उनसे प्राकृतिक खेती अपनाने की प्रेरणा, खेती में आए बदलाव, आय में हुई वृद्धि तथा अन्य किसानों को दिए जा रहे प्रशिक्षण के बारे में जानकारी प्राप्त की। संवाद के दौरान श्री विमल भाबोर ने बताया कि उनके पास 25 बीघा कृषि भूमि है तथा वे खेती के साथ पशुपालन भी करते हैं। कृषि विभाग के मार्गदर्शन, प्रशिक्षण, भ्रमण एवं कृषक संगोष्ठियों से उन्हें नई तकनीकों को सीखने का अवसर मिला। वे पिछले पाँच वर्षों से जैविक खेती तथा दो वर्षों से प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। श्री भाबोर ने मुख्यमंत्री को बताया कि राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के अंतर्गत उन्होंने अपने खेत पर जैव संसाधन केंद्र (बीआरसी) स्थापित किया है, जहां जीवामृत, बीजामृत एवं अन्य प्राकृतिक आदानों का निर्माण किया जाता है। इनका उपयोग वे अपने खेत में करने के साथ आसपास के किसानों को भी उपलब्ध कराते हैं। वर्तमान में वे प्राकृतिक विधि से सब्जियों, फलों एवं अन्य फसलों का उत्पादन कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री को जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि पहले खेती से उन्हें प्रतिवर्ष लगभग 50 हजार रुपये का लाभ मिलता था, जबकि प्राकृतिक खेती अपनाने के बाद उनकी वार्षिक आय बढ़कर लगभग 1 लाख से 1.50 लाख रुपये हो गई है। इसके अतिरिक्त मार्च से जून 2026 के दौरान जैव संसाधन केंद्र से 5 हजार 500 रुपये, नर्सरी से लगभग 1.50 लाख रुपये, प्राकृतिक सब्जियों एवं फलों से लगभग 1.60 लाख रुपये तथा वर्मी कम्पोस्ट खाद से लगभग 6 हजार रुपये की अतिरिक्त आय प्राप्त हुई है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कृषक श्री विमल भाबोर के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि प्राकृतिक खेती किसानों की आय बढ़ाने, उत्पादन लागत कम करने, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने तथा स्वस्थ कृषि व्यवस्था विकसित करने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने श्री भाबोर से अन्य किसानों को भी प्राकृतिक खेती के लिए प्रेरित करने का आग्रह किया।

कृषक श्री विमल भाबोर ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन और सरकार की योजनाओं से उन्हें प्राकृतिक खेती अपनाने तथा आत्मनिर्भर बनने की नई दिशा मिली है।

इस दौरान प्रभारी मंत्री श्री विजय शाह, महिला एवं बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया, संभागायुक्त श्री भास्कर लक्षकार, आईजी श्री अनुराग,कलेक्टर डॉ. योगेश तुकाराम भरसट, एसपी श्री देवेंद्र पाटीदार सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

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बहनों की शक्ति और आशीर्वाद से आगे बढ़ रहा मध्यप्रदेश : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

स्व-सहायता समूहों को प्रदान की 300 करोड़ रुपए ऋण राशि
माही नदी पर महर्षि श्रृंगी की तपोभूमि श्रृंगेश्वर तीर्थ स्थल पर निर्मित होगा घाट
झाबुआ में किया 174.64 करोड़ के 29 विकास कार्यों का भूमि-पूजन और 109.17 करोड़ लागत के 28 विकास कार्यों का लोकार्पण
हितग्राहियों को किये हितलाभ वितरित, मेधावी विद्यार्थियों का किया सम्मान

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश में महिला सशक्तिकरण का कार्य सरकार और सामाजिक दोनों स्तर पर हो रहा है। बहनें स्व-सहायता समूहों को नई ताकत दे रही हैं। कृषि, पशुपालन, बैंक, उद्यम सखियां भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। बहनों की सार्थक भूमिका से प्रत्येक परिवार में समृद्धि आ रही है। राज्य सरकार किसान कल्याण वर्ष मना रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बहनों की शक्ति और आशीर्वाद से प्रदेश आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में नगरीय निकायों और पंचायतों में 50 प्रतिशत स्थान बहनों के लिए आरक्षित है। सरकारी सेवाओं में बहनों के लिए 35 प्रतिशत स्थान आरक्षित रखे गए हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी लोकसभा और राज्यसभा में बहनों के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था के लिए प्रतिबद्ध हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को शासकीय महाविद्यालय ग्राउंड, थांदला, जिला झाबुआ में आयोजित स्व-सहायता समूहों के क्षमतावर्धन एवं ऋण वितरण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृ्त्व में मध्यप्रदेश तेज गति से आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री श्री मोदी जब लगातार तीन बार पड़ौसी राज्य गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब झाबुआ के आसपास जनजातीय अंचल में विकास के अद्भुत कार्य हुए। पूरी दुनिया गुजरात की शक्ति से परिचित हुई। प्रधानमंत्री श्री मोदी गरीब, किसान, युवा और नारी कल्याण के लिए कार्य कर रहे हैं। उनके मन में बहनों के लिए विशेष सम्मान है। उनके माध्यम से स्व-सहायता समूहों से जुड़ी बहनें के सशक्तिकरण के लिए 300 करोड़ रुपये के ऋण दिए गए हैं। स्व-सहायता समूहों से बहनों की समृद्धि का मार्ग खुल रहा है। यह आत्मनिर्भरता और समाजिक सशक्तिकरण का एक बड़ा आंदोलन बन रहा है। सहयोग और सहभागिता से समृद्ध होकर बहनें नए रिकॉर्ड बना रही हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अब हमारी बहनें 10 हजार रुपए प्रति महीना तक आय अर्जित कर रही हैं। प्रदेश की लाड़ली बहनें, उद्यमी बहनें, कृषि सखी सभी आगे बढ़ रही हैं। प्रदेश में स्व-सहायता समूहों के द्वारा 196 दीदी कैफे संचालित किए जा रहे हैं। झाबुआ में भी बहनें 4 कैफे चला रही हैं। प्रदेश में 85 आजीविका पुस्तकालयों का संचालन स्व-सहायता समूहों की बहनों के हाथों में है। गैर कृषि आधारित 150 से अधिक कार्य बहनें कर रही हैं। यह आयोजन महिला सशक्तिकरण का उत्कृष्ट प्रमाण है। होलकर साम्राज्य की रानी लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर ने भील पल्टन बनाकर जनजातीय समुदाय पर विश्वास जताया था। रानी दुर्गावती, वीरांगना अवंतीबाई, रानी पद्मावती, वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई जैसी बहनों ने सुशासन और त्याग के बल पर देश और प्रदेश का मान बढ़ाया।

रोजगार दिलवाना प्राथमिकता

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार युवाओं को रोजगार दिलवाने के लिये निरन्तर नई पहल कर रही है। मध्यप्रदेश में ग्वालियर अंचल में संचार क्षेत्र में नई इकाई की स्थापना की जाएगी। इससे 14 हजार नये रोजगार के अवसर सृजित होंगे। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने गत 17 सितम्बर को धार जिले में देश के पहले पीएम मित्र पार्क का शिलान्यास किया। पीएम मित्र पार्क से 3 लाख लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। कपास उत्पादक किसान इस पार्क से बड़ी संख्या में लाभान्वित होंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय बहुल क्षेत्र में जो पट्टे दिए गए हैं, उनकी नि:शुल्क रजिस्ट्री भी करवाई जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कोई मिशनरी धर्मान्तरण नहीं कर सकेगी। स्थानीय निवासी ज्यादा से ज्यादा गौशाला खोलें, दूध का उत्पादन बढाएं। ऐसे कार्यों के लिए सरकार पूरी सहायता कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में उद्योग और एमएसएमई के माध्यम से रोजगार के अवसर सृजित किए जा रहे हैं। अब झाबुआ, धार, आलीराजपुर के लोगों को रोजगार के लिए पलायन करने की जरूरत नहीं होगी। अपने घर में ही काम मिलेगा। बड़े-बड़े कारखाने यहां आएंगे।

स्व-सहायता समूहों को राशि वितरित

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत स्व-सहायता समूहों के सशक्तिकरण के लिए 300 करोड़ रुपये के ऋण का वितरण किया। इसमें झाबुआ जिले के 215 स्व-सहायता समूहों के लिए 10.8 करोड़ का ऋण भी शामिल है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने झाबुआ जिले को 174.64 करोड़ रुपये के 29 विकास कार्यों के भूमि-पूजन और 109.17 करोड़ रुपये के 28 विकास एवं आधारभूत संरचना कार्यों के लोकार्पण की सौगात दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभिन्न योजनाओं के हितग्राहियों को हितलाभ वितरण किया और मेधावी विद्यार्थियों को भी सम्मानित किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने “आजीविका मेला” प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया।

प्राकृतिक खेती के लिए अनुकूल झाबुआ

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि झाबुआ क्षेत्र प्राकृतिक खेती के लिए वरदान है। उन्होंने प्राकृतिक खेती करने वाले प्रगतिशील किसानों से संवाद किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए शासन की विभिन्न योजनाओं एवं प्रयासों पर चर्चा भी की। महिला कृषक बहनों ने बताया कि प्राकृतिक खेती से पिछले दो-तीन साल में जीवन में बड़ा बदलाव आया है। राज्य सरकार कृषि कल्याण वर्ष मना रही है। इसमें बहनों की बड़ी भूमिका है। हमारी बहनें ट्रैक्टर से लेकर ड्रोन तक चला रही हैं। ड्रोन दीदीयां खेतों में कीटनाशकों क छिड़काव कर रही हैं। इस वर्ष गेहूं उपार्जन में भी दीदीयों ने कमाल कर दिया। मध्यप्रदेश ने पूरे देश में सबसे अधिक गेहूं खरीदा है। प्रधानमंत्री श्री मोदी और केन्द्रीय कृषि मंत्री के सहयोग से 104 लाख मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन किया। इसमें भी बहनों ने अपने समूहों को लाभान्वित किया। प्रदेश में 89 ड्रोन दीदीयां, पशुपालन दीदीयां, बैंक सखी जैसी बहनें काम कर रही हैं। व्यावसायिक सब्जी उत्पादन, पशुपालन और जैविक खेती में बहनों ने उत्कृष्ट कार्य किया है। महिला किसान उत्पादक संगठनों ने 958 करोड़ रुपए का व्यापार किया है। झाबुआ जिले में 11 हजार 900 से अधिक स्व-सहायता समूह एक लाख 56 हजार से अधिक परिवारों को सामाजिक सुरक्षा और आजीविका का अधिकार दे रहे हैं। प्रदेश में 64 हजार लखपति दीदीयां जनजातीय क्षेत्र में आर्थिक उत्थान का कार्य कर रही हैं। समूहों के सशक्तिकरण के लिए 285 करोड़ की सहायता दी गई है। झाबुआ में अब कड़कनाथ जनता के आर्थिक

सशक्तिकरण का सशक्त माध्यम बन गया है। बहनें मुर्गीपालन, पशुपालन, मछली पालन कर आगे बढ़ रही हैं। लाड़ली बहनों के खाते में हर माह 1500 रुपए की राशि भेजी जा रही है। हमारी सरकार जो कहती है, करके दिखाती हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्व-सहायता समूहों की बहनों के माध्यम से अगले साल से स्कूली बच्चों को सिली हुई ड्रेस उपलब्ध करवाई जाएंगी।

समान नागरिक संहिता

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार ने सभी धर्मों के लोगों के सम्मान के लिए एक समान कानून लागू करने का निर्णय लिया है। इसमें जनजातीय समुदाय को मुक्त रखा गया है। यूसीसी बिल विधानसभा से पास हो चुका है।

दुराचार करने वालों को फांसी

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि झाबुआ और धार में धर्मांतरण करने वालों को कानून के अनुसार सजा दिलवाई जाएगी। महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए महिला सुरक्षा डेस्क और प्रत्येक जिले में महिला थाने बनाए जा रहे हैं। महिलाओं के साथ दुराचार करने वालों को फांसी की सजा मिलेगी। केंद्र सरकार के सहयोग और नक्सलवाद को पूरी तरह से समाप्त करने के दृढ़ संकल्प के कारण प्रदेश के बालाघाट, मंडला, डिंडौरी अंचल से नक्सलवाद को पूर्णत: समाप्त कर दिया गया है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने झाबुआ को दी सौगातें

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि 70 करोड़ की लागत से झाबुआ में आयुर्वेदिक चिकित्सा महाविद्यालय का भूमि-पूजन किया गया है। प्रदेश को अब तक 9 आयुर्वेदिक कॉलेजों की सौगात मिल चुकी है। यहां 35 करोड़ 29 लाख की लागत से सांदीपनि विद्यालय प्रारंभ होंगे। झाबुआ के थांदला से अब रेलगाड़ी भी गुजरेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि थांदला में पक्का हेलीपैड बनेगा। प्रत्येक विधानसभा में खेल स्टे़डियम बनाएंगे। पद्मावती नदी पर घाट निर्माण किया जाएगा। छोटी काशी में भी घाट बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रणजी टीम में चयनित थांदला के क्रिकेटर श्री अर्पित भटेवरा को ट्रॉफी भेंटकर शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों और युवाओं को हेलमेट वितरित किए।

जनजातीय कार्य मंत्री एवं झाबुआ जिले के प्रभारी कुंवर विजय शाह ने कहा कि झाबुआ में यह जनजातीय बहनों की सबसे बड़ी सभा है। प्रदेश को रोड और रेलवे की बड़ी सौगातें मिली हैं। महिला बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने झाबुआ जिले को अनेक विकास कार्यों की सौगात दी है। अब जनजातीय क्षेत्र के बच्चों को भी सर्व सुविधायुक्त सांदीपनि विद्यालयों में शिक्षा ग्रहण करने का अवसर मिल रहा है। सांसद श्रीमती अनीता चौहान ने कहा कि झाबुआ एक जनजातीय बहुल जिला है। यहां खेलों में युवाओं को आगे बढ़ाने के लिए स्पोर्ट्स स्टेडियम बनाए जाने की आवश्यकता है। झाबुआ के युवा खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मध्यप्रदेश का नाम रोशन करेंगे। कार्यक्रम को पूर्व विधायक श्री कलसिंह भांवर और श्री भानू भूरिया ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम में अनेक जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में लाड़ली बहनें, आजीविका समूह की बहनें तथा स्थानीय नागरिक उपस्थित थे।

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