भैरवनाथ लोक में गूंजेगा शिवमहापुराण का अमृत, 5 से 13 जून तक होगा श्री रुद्र महायज्ञ

10वीं-11वीं शताब्दी की अद्भुत भैरव प्रतिमा की छांव में होगा नौ दिवसीय धार्मिक आयोजन
क्षेत्र की सुख-शांति, राष्ट्र कल्याण और आध्यात्मिक जागरण के लिए जुटेंगे हजारों श्रद्धालु
गुढ़। रीवा जिले के गुढ़ क्षेत्र अंतर्गत खामदिह स्थित ऐतिहासिक एवं आस्था के केंद्र भैरवनाथ लोक एक बार फिर भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बनने जा रहा है। यहां 5 जून से 13 जून 2026 तक श्री रुद्र महायज्ञ एवं संगीतमय शिव महापुराण कथा का भव्य आयोजन किया जाएगा। इस धार्मिक महोत्सव में प्रदेश सहित विभिन्न क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। विशेष महत्व इस आयोजन को इसलिए भी प्राप्त है क्योंकि यह कार्यक्रम उस पवित्र स्थल पर आयोजित हो रहा है जहां 10वीं-11वीं शताब्दी की एक ही विशाल शिला से निर्मित लेटी हुई भैरव बाबा की अद्भुत प्रतिमा विराजमान है। स्थानीय जनमानस में महाकाल भैरव बाबा के रूप में पूजित यह प्रतिमा प्राचीन भारतीय शिल्पकला और धार्मिक विरासत का अनुपम उदाहरण मानी जाती है।
आस्था, संस्कृति और अध्यात्म का होगा संगम
आयोजन समिति के अनुसार कार्यक्रम का उद्देश्य क्षेत्र में सुख-शांति, जनकल्याण, सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक चेतना का प्रसार करना है। यज्ञ एवं शिवमहापुराण कथा के माध्यम से धर्म, संस्कृति और भारतीय परंपराओं के संरक्षण का संदेश दिया जाएगा।
कार्यक्रम का संचालन परमपूज्य धर्माचार्य श्री 1008 स्वामी डॉ. रामशंकर दास वेदान्ती जी महाराज के सान्निध्य में संपन्न होगा। कथा प्रवचन एवं धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान श्रद्धालुओं को शिव भक्ति, सनातन संस्कृति और जीवन मूल्यों से जुड़े प्रेरक प्रसंग सुनने का अवसर मिलेगा।
कलश यात्रा से होगा शुभारंभ
आयोजन की शुरुआत 5 जून को भव्य कलश यात्रा एवं मंडप प्रवेश के साथ होगी। इसके बाद वैदिक मंत्रोच्चार के बीच वेदी पूजन, यज्ञ और शिवमहापुराण पारायण प्रारंभ होगा। प्रतिदिन प्रातः 7:30 बजे से 11:30 बजे तक वैदिक अनुष्ठान एवं यज्ञ कार्यक्रम आयोजित होंगे, जबकि अपराह्न 3:30 बजे से 7:30 बजे तक संगीतमय शिवमहापुराण कथा का रसपान श्रद्धालु करेंगे। कार्यक्रम का समापन 13 जून को यज्ञ पूर्णाहुति, विशाल भंडारा एवं प्रसाद वितरण के साथ होगा।
भैरवनाथ लोक की बढ़ रही धार्मिक पहचान
खामदिह स्थित भैरवनाथ मंदिर अपनी अद्वितीय शिल्पकला और आध्यात्मिक महत्व के कारण लगातार श्रद्धालुओं का आकर्षण केंद्र बनता जा रहा है। घने प्राकृतिक वातावरण के बीच स्थित यह प्राचीन स्थल धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां विराजमान विशाल भैरव प्रतिमा को देखने और दर्शन करने के लिए वर्षभर श्रद्धालुओं का आगमन बना रहता है। स्थानीय नागरिकों का मानना है कि भैरवनाथ लोक केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान का प्रतीक है। ऐसे में श्री रुद्र महायज्ञ एवं शिवमहापुराण कथा जैसे आयोजन इस धार्मिक धरोहर को नई पहचान देने का कार्य कर रहे हैं।
श्रद्धालुओं से की गई सहभागिता की अपील
आयोजन समिति ने क्षेत्रवासियों एवं धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर धर्मलाभ प्राप्त करने तथा आयोजन को सफल बनाने की अपील की है। समिति का कहना है कि यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि समाज में सद्भाव, संस्कार और आध्यात्मिक जागृति का महापर्व है।



