मंदसौरमध्यप्रदेश
समाज को अपने अधिकारों से अधिक महत्व अपने देश के प्रति कर्तव्यों को देना होगा – डॉ. प्रकाश शास्त्री

संघ शिक्षा वर्ग ( विद्यार्थी ) का प्रकट एवं समापन समारोह का आयोजन
मंदसौर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, मालवा प्रांत का संघ शिक्षा वर्ग (विद्यार्थी) का प्रकट एवं समापन समारोह का आयोजन दिनांक 31 मई 2026, रविवार को किया गया। इस कार्यक्रम में 28 जिलों के 215 स्थान से आये 297 शिक्षार्थियों ने सहभाग किया। शारीरिक कार्यक्रम में स्वयंसेवकों ने समता, योग, आसान, घोष, दंड (लाठी) संचालन प्रयोगों का प्रदर्शन किया। जिसे देखने के लिए जिलेभर से बड़ी संख्या में समाजजन शामिल हुए।
प्रकटोत्सव स्थल पर प्रशिक्षण प्राप्त कुशलताओ का प्रदर्शन करते हुए स्वयंसेवक आम लोगो के चेहरों पर आत्मविश्वास की अनुभूति करवा रहे थे। पूरे परिसर स्थल को रंगोली से सजाया गया था जहाँ बड़ी संख्या में समाज, मातृशक्ति, बच्चे, बुजुर्ग शामिल हुए।
माननीय सर्वाधिकारी श्री जिनेंद्र जैन, समाज सेवी मुख्य अतिथि के रूप मे डॉ. समरथमल जैनं, जिला संघचालक श्री दशरथसिंह झाला व मुख्य वक्ता मालवा प्रान्त संघचालक डॉ. श्री प्रकाश शास्त्री मंचासीन रहे।
कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुऐं मुख्य अतिथि डॉ. समरथमल जैन ने कहा कि मन्दसौर की पुण्य भूमि पर राष्ट्र भक्ति का महासागर उमड़ पड़ा है। आज हमारे देश का भविष्य सुरक्षित है ऐसा सभी को विश्वास है। संघ 100 वर्षो से राष्ट्र प्रथम के मंत्र को लेकर कार्य करता आ रहा है।
डॉ. श्री प्रकाश शास्त्री मुख्य वक्ता ने बौद्धिक देते हुए कहा कि संघ का शताब्दी वर्ष चल रहा है। किसी भी संस्था के 100 वर्ष पूर्ण होने पर वह धूमधाम से मनाते है। परंतु संघ ऐसा कुछ नहीं करता है। संघ के शताब्दी वर्ष को समाज ने मनाया है। शताब्दी वर्ष में कई हिन्दू सम्मेलन हुऐं जिसमें लाखों हिन्दूओं ने सहभागिता की। 1925 में जब संघ की स्थापना हुई तब लोग अपने आप को हिन्दू कहने में भी घबराते थे आज हम कहतें हैं कि गर्व से कहों हम हिन्दू है। इस परिवर्तन की यात्रा में कई उतार-चढ़ाव आयें है। वर्तमान में 80 हजार से ज्यादा दैनिक संघ की शाखाऐं लग रही है, करीब 40 देशों में संघ अपना कार्य कर रहा है। समाज के प्रत्येक क्षैत्र में जाकर कार्यकर्ताओं ने कार्य किया है। व्यवस्था परिवर्तन पर्याप्त नहीं है, समाज का मन परिवर्तन करना आवश्यक है। अच्छी सरकार या अच्छे नेता से समाज में परिवर्तन नहीं हो सकता ये सहायक हो सकते हैं। परिवर्तन तो समाज से ही होना है। वर्तमान समय में हम कर्तव्यों को भूल गये है। अधिकारों की बात करने से पहले कर्तव्यों पर ध्यान देना होगा। संघ के बारें में अनेक भ्रम समाज में फैलायें गये है। संघ को समझना है तो संघ के निकट आने की आवश्यकता है। निकट आकर अनुभव प्राप्त करना व अनुभव के आधार पर निर्णय समाज को करना है। संघ महत्वकांक्षी नहीं है पर समाज में बड़ा परिवर्तन लाना आवश्यक है। हिन्दू जीवन पद्धति को जीवन में उतारना आवश्यक है। अगर राष्ट्र को बलशाली बनाना है तो समरस समाज बनाने की आवश्यकता है। यह समरस मजबूरी में नहीं होना चाहिए। प्रत्येक नागरिक को अनुशासित जीवन जीना होगा। प्रत्येक क्षेत्र में अनुशासन का दर्शन होना चाहियें। आज कुटुम्ब एक रहें तथा उनमें स्नेह का भाव रहें, इसकी महत्ती आवश्यकता है। प्रत्येक नागरिक में स्व का जागरण हो यह देश मेरा है, मेरी भाषा, पहनावा संस्कृति के अनुसार हो ऐसा भाव जागृत करने की आवश्यकता है। हमारे देश में भूमि को माता माना गया है हम नदियों, पहाड़ों, वृक्षों की पूजन करते हैं तो इनका संरक्षण करने की जवाबदारी भी हमारी है। वसुधैव कुटुम्बकम, सर्वे भवन्तु सुखिनः हम बरसों से कह रहें है यहीं हमारी प्राचीन संस्कृति का आधार है।
ग्रीष्म की छूट्टियों में जब की सामान्यतः लोग किसी पहाड़, पठार या ठंडे स्थान पर जाकर आराम करना पसंद करते हैं, तब प्रांत का एक बड़ा युवा वर्ग अपनी स्वरुचि से संघ के अभ्यास वर्ग में आकर कड़ा श्रम किया और अपना पसीना बहाया। किसी गुरुकूल के विद्यार्थी की भांति, यहां व्यक्ति, व्यक्तित्व विकास व राष्ट्र चिंतन हेतु कष्टप्रद परिस्थितियों में रहकर प्रशिक्षण की दक्षताओं को प्राप्त किया।
समाज को अपने अधिकारों से अधिक महत्व अपने देश के प्रति कर्तव्यों को देना होगा, तभी भारत माता को हम परम वैभव पर ले जा सकेंगे।

मंदसौर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, मालवा प्रांत का संघ शिक्षा वर्ग (विद्यार्थी) का प्रकट एवं समापन समारोह का आयोजन दिनांक 31 मई 2026, रविवार को किया गया। इस कार्यक्रम में 28 जिलों के 215 स्थान से आये 297 शिक्षार्थियों ने सहभाग किया। शारीरिक कार्यक्रम में स्वयंसेवकों ने समता, योग, आसान, घोष, दंड (लाठी) संचालन प्रयोगों का प्रदर्शन किया। जिसे देखने के लिए जिलेभर से बड़ी संख्या में समाजजन शामिल हुए।प्रकटोत्सव स्थल पर प्रशिक्षण प्राप्त कुशलताओ का प्रदर्शन करते हुए स्वयंसेवक आम लोगो के चेहरों पर आत्मविश्वास की अनुभूति करवा रहे थे। पूरे परिसर स्थल को रंगोली से सजाया गया था जहाँ बड़ी संख्या में समाज, मातृशक्ति, बच्चे, बुजुर्ग शामिल हुए।
माननीय सर्वाधिकारी श्री जिनेंद्र जैन, समाज सेवी मुख्य अतिथि के रूप मे डॉ. समरथमल जैनं, जिला संघचालक श्री दशरथसिंह झाला व मुख्य वक्ता मालवा प्रान्त संघचालक डॉ. श्री प्रकाश शास्त्री मंचासीन रहे।
कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुऐं मुख्य अतिथि डॉ. समरथमल जैन ने कहा कि मन्दसौर की पुण्य भूमि पर राष्ट्र भक्ति का महासागर उमड़ पड़ा है। आज हमारे देश का भविष्य सुरक्षित है ऐसा सभी को विश्वास है। संघ 100 वर्षो से राष्ट्र प्रथम के मंत्र को लेकर कार्य करता आ रहा है।
डॉ. श्री प्रकाश शास्त्री मुख्य वक्ता ने बौद्धिक देते हुए कहा कि संघ का शताब्दी वर्ष चल रहा है। किसी भी संस्था के 100 वर्ष पूर्ण होने पर वह धूमधाम से मनाते है। परंतु संघ ऐसा कुछ नहीं करता है। संघ के शताब्दी वर्ष को समाज ने मनाया है। शताब्दी वर्ष में कई हिन्दू सम्मेलन हुऐं जिसमें लाखों हिन्दूओं ने सहभागिता की। 1925 में जब संघ की स्थापना हुई तब लोग अपने आप को हिन्दू कहने में भी घबराते थे आज हम कहतें हैं कि गर्व से कहों हम हिन्दू है। इस परिवर्तन की यात्रा में कई उतार-चढ़ाव आयें है। वर्तमान में 80 हजार से ज्यादा दैनिक संघ की शाखाऐं लग रही है, करीब 40 देशों में संघ अपना कार्य कर रहा है। समाज के प्रत्येक क्षैत्र में जाकर कार्यकर्ताओं ने कार्य किया है। व्यवस्था परिवर्तन पर्याप्त नहीं है, समाज का मन परिवर्तन करना आवश्यक है। अच्छी सरकार या अच्छे नेता से समाज में परिवर्तन नहीं हो सकता ये सहायक हो सकते हैं। परिवर्तन तो समाज से ही होना है। वर्तमान समय में हम कर्तव्यों को भूल गये है। अधिकारों की बात करने से पहले कर्तव्यों पर ध्यान देना होगा। संघ के बारें में अनेक भ्रम समाज में फैलायें गये है। संघ को समझना है तो संघ के निकट आने की आवश्यकता है। निकट आकर अनुभव प्राप्त करना व अनुभव के आधार पर निर्णय समाज को करना है। संघ महत्वकांक्षी नहीं है पर समाज में बड़ा परिवर्तन लाना आवश्यक है। हिन्दू जीवन पद्धति को जीवन में उतारना आवश्यक है। अगर राष्ट्र को बलशाली बनाना है तो समरस समाज बनाने की आवश्यकता है। यह समरस मजबूरी में नहीं होना चाहिए। प्रत्येक नागरिक को अनुशासित जीवन जीना होगा। प्रत्येक क्षेत्र में अनुशासन का दर्शन होना चाहियें। आज कुटुम्ब एक रहें तथा उनमें स्नेह का भाव रहें, इसकी महत्ती आवश्यकता है। प्रत्येक नागरिक में स्व का जागरण हो यह देश मेरा है, मेरी भाषा, पहनावा संस्कृति के अनुसार हो ऐसा भाव जागृत करने की आवश्यकता है। हमारे देश में भूमि को माता माना गया है हम नदियों, पहाड़ों, वृक्षों की पूजन करते हैं तो इनका संरक्षण करने की जवाबदारी भी हमारी है। वसुधैव कुटुम्बकम, सर्वे भवन्तु सुखिनः हम बरसों से कह रहें है यहीं हमारी प्राचीन संस्कृति का आधार है।
ग्रीष्म की छूट्टियों में जब की सामान्यतः लोग किसी पहाड़, पठार या ठंडे स्थान पर जाकर आराम करना पसंद करते हैं, तब प्रांत का एक बड़ा युवा वर्ग अपनी स्वरुचि से संघ के अभ्यास वर्ग में आकर कड़ा श्रम किया और अपना पसीना बहाया। किसी गुरुकूल के विद्यार्थी की भांति, यहां व्यक्ति, व्यक्तित्व विकास व राष्ट्र चिंतन हेतु कष्टप्रद परिस्थितियों में रहकर प्रशिक्षण की दक्षताओं को प्राप्त किया।
समाज को अपने अधिकारों से अधिक महत्व अपने देश के प्रति कर्तव्यों को देना होगा, तभी भारत माता को हम परम वैभव पर ले जा सकेंगे।



