
देश के प्रसिद्ध शायर बशीर बद्र को समग्र मालवा द्वारा भावभीनी श्रद्धांजलि
जावरा – समग्र मालवा इकाई द्वारा शायर बशीर बद्र के निधन पर श्री राम विधा मंदिर जावरा पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया। उनके चित्र पर माल्यार्पण कर उपस्थित लोगों ने श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
कार्यक्रम में उपस्थित वरिष्ठ साहित्यकार श्री रमेश मनोहरा ने बशीर बद्र के बारें में बताते हुए उनसे मुलाकात के क्षण का जिक्र किया जब वे जावरा एक मुशायरे में आए थे। बशीर बद्र साहब अटल बिहारी वाजपेई को अदब की दुनिया में अपना पिता मानते थे।उनके लेखन को उन्होंने प्रेरणादाई निरूपित किया,जिससे नई पीढ़ी प्रेरणा पाती रहेगी।
सैय्यद अमजद अली क्षेत्रीय सह संयोजक मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने बशीर बद्र साहब को आम लोगो का शायर कहा उन्होंने कहा बशीर बद्र साहब अटल बिहारी वाजपेई के साथ पाकिस्तान जाने वाली पहली बस में मुसाफिर बन गए पाकिस्तान की यात्रा की थी।
श्री वीरेन्द्र सिंह चौहान ने बशीर बद्र साहब के कुछ शेर सुनकर श्रद्धांजलि अर्पित दी गई।
शायर फसल हयात ने बशीर बद्र साहब के साथ मुशायरे में बिताए पलों को यादकर उन्हे याद किया कुछ चुनिंदा शेर भी सुनाकर उन्हें याद किया।
शिक्षाविद श्री जगदीश उपमन्यु ने उन्हें उम्दा शायर और सरल सहज स्वभाव का धनी कहा।
संस्था के संस्थापक अध्यक्ष श्री अभय कोठारी ने बशीर बद्र साहब की कमी को साहित्य क्षेत्र के साथ ही उर्दू अदब की अपूरणीय क्षति बताया और कहा की डा बशीर बद्र ने अपनी शायरी से देश – दुनिया मे नाम कमाया।उन्होने बुरे समय मे भी हिम्मत नही हारी और शायरी करते रहे
उन्होने लिखा……..
लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में,तुम तरस नहीं खाते बस्तियां जलाने में।
इस अवसर पर संचालन कर रहे गीतकार मनोहर मधुकर ने बीच बीच में डा बद्र साहब के जीवन पर उनके लेखन पर जानकारी दी।कार्यक्रम का सुंदर संचालन किया।
कार्यक्रम के अंत में आभार श्री जगदीश उपमन्यु प्रकट किया।



