ई.ओ.डब्ल्यू. कि कार्यवाही, जमीन हडपने वाले आरोपी व षडयंत्र में सहयोगी सरपंच, सचिव, पटवारी, तहसीलदार पर किया अपराध पंजीबद्ध

किसने क्या अपराध किया और अपराध मे जिम्मेदार भी शामिल
- जिला नीमच के ग्राम बैंसला के आरोपी भगवान मीणा ने फर्जी वारिस बनने के लिए बदला स्वंय के पिता का नाम।
- > ग्राम के सरपंच व सचिव ने बनाया असत्य वारिसान प्रमाण पत्र।
- > पटवारी ने बनाई गलत वंशावली व पंचनामा।
- > तहसीलदार ने किया नियम विरूद्ध नामान्तरण।
- > लगभग 2 हेक्टेयर भूमि का बना फर्जी वारिस
- ▶ ग्राम पंचायत के सरपंच, सचिव, पटवारी व तहसीलदार भी बने आरोपी।
आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ मुख्यालय भोपाल में पंजीबद्ध शिकायत क्रमांक 772/25 के सत्यापन पर ग्राम बैसला निवासी भगवान मीणा पिता भेरूलाल मीणा, ग्राम पंचायत बैंसला सरपंच श्रीमती प्रेमलता अमर रावत, सचिव आनंद सक्सेना, तत्कालीन तहसीलदार रामपुरा श्री बालकृष्ण मकवाना एवं अन्य ने अनावेदक भगवान को मृतक केदार पिता धूरा के स्वामित्व की भूमि का भूमि स्वामी बनाने के उददेश्य से भगवान मीणा को भूमि स्वामी मृतक केदार का पुत्र एवं एक मात्र वारिस बताकर, कूट रचित दस्तावेज तैयार करने एवं वैध वारिसों को सदोष हानि पहुंचाने के आरोप प्रमाणित पाए जाने पर आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ मुख्यालय भोपाल द्वारा अपराध पंजीबद्ध किया गया।
आरोपी-1. भगवान मीणा पिता भेरूलाल मीणा निवासी बैंसला तहसील रामपुरा नीमच
2. श्रीमती प्रेमलता पति अमर रावत सरपंच बेंसला रामपुरा जिला नीमच
3. श्री आनंद सक्सेना सचिव ग्राम पंचायत बैंसला तहसील रामपुरा जिला नीमच
4. श्री अनुराग पाटीदार तत्कालीन पटवारी बैंसला तहसील रामपुरा नीमच निवासी ग्राम देवरी खवासा जिला नीमच
5. श्री बी.के. मकवाना तत्कालीन तहसीलदार रामपुरा जिला नीमच
6. एवं अन्य व्यक्ति
अपराध- नीमच जिले के ग्राम बैसला में आरोपी भगवान पिता भेरूलाल मीणा ने बैसला स्थित कृषि भूमि में मृतक केदार मीणा के स्वामित्व की भूमि का भूमिस्वामी बनने के लिए तत्कालीन सरपंच ग्राम पंचायत बैसला आरोपी प्रेमलता अमर रावत, तत्कालीन सचिव ग्राम पंचायत बैसला आरोपी आनंद सक्सेना से स्वयं के लिए केदार का वैध वारिस और पुत्र होने संबंधी असत्य वारिसान प्रमाण पत्र बनवा कर जारी करवाया। तत्पश्चात उक्त भूमि का फौती नामान्तरण अपने पक्ष में कराने के लिए न्यायालय तहसीलदार रामपुरा में आवेदन प्रस्तुत किया। उसके बाद तत्कालीन पटवारी बैसला आरोपी अनुराग पाटीदार से स्वयं के लिए केदार का वैध वारिस और पुत्र होने संबंधी असत्य वंशावली, पंचनामा एवं प्रतिवेदन तैयार करवाकर प्रकरण में प्रस्तुत करवाया। तत्कालीन तहसीलदार रामपुरा बालकृष्ण मकवाना ने मृतक केदार के वैध वारिसान के संबंध में जांच किए बगैर उक्त असत्य एवं कूटरचित प्रमाण पत्र, पंचनामा, वंशावली एवं प्रतिवेदन को आधार बनाकर अनावेदक भगवान के पक्ष में फौती नामान्तरण आदेश पारित कर दिया। इस प्रकार उक्त आरोपीगण एवं अन्य ने आरोपी भगवान को मृतक केदार पिता धूरा के स्वामित्व की भूमि का भूमिस्वामी बनाकर उसे सदोष लाभ पहुंचाकर और वैध वारिसों को सदोष हानि कारित कर धोखाधड़ी करने के उददेश्य से आपराधिक षड़यंत्र कर, षड़यंत्र के अनुसरण में आरोपी भगवान को भूमिस्वामी मृतक केदार का वैध पुत्र एवं एकमात्र वारिस बताकर, तत्संबंधी कूटरचित दस्तावेज तैयार कर, कूटरचित दस्तावेजों को असली की तरह प्रयुक्त कर, मृतक केदार की भूमि पर आरोपी भगवान का नामान्तरण कर दिया और भू राजस्व अभिलेख में उसका नाम अंकित कर दिया। उक्त सभी लोकसेवकों द्वारा अपने पद का दुरूपयोग भी किया गया और आरोपी भगवान के द्वारा इसका दुष्प्रेरण किया गया।
इस प्रकार उक्त आरोपीगण ने षड़यंत्रपूर्वक आरोपी भगवान के पक्ष में फौती नामान्तरण आदेश पारित करवाकर आरोपी भगवान को उक्त कृषि भूमि में सहखातेदार बना दिया। उक्त फौती नामान्तरण के संबंध में आरोपीगण द्वारा किए गए कृत्य आपराधिक षडयंत्र, धोखाधडी, कूटरचना, पद का दुरूपयोग एवं दुष्प्रेरण के अन्तर्गत होकर भारतीय दण्ड संहिता की धाराओं 420, 467, 468, 471, 120-बी एवं भ्र.नि.अ. 1988, भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधि. 2018 की धाराओं 7 (ग) एवं 12 के अन्तर्गत दण्डनीय संज्ञेय अपराध होना प्रथमदृष्टया पाया जाने से उक्त आरोपियों के विरूद्ध अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया है जिसमें त्वरित कार्यवाही संपादित की जावेगी।



