समाचार मध्यप्रदेश मंदसौर 12 जुलाई 2026 मंगलवार

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फसल संग्रहालय में नेनौ यूरिया के ट्रायल आयोजित करे
वैज्ञानिक सलाहकार समिति की बैठक संपन्न हुई
मंदसौर 11 मई 2026,/ हाईब्रीड मोड़ में डाॅ. डी.एच. रानडे, अधिष्ठाता, उद्यानिकी महाविद्यालय, मन्दसौर की अध्यक्षता में कृषि विज्ञान केन्द्र, की खरीफ-2026 की वैज्ञानिक सलाहकार समिति की बैठक आयोजित की गई। जिसमें डाॅ. जी. एस. चुण्डावत, प्रभारी वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख कृषि विज्ञान केन्द्र, मन्दसौर ने प्रगति प्रतिवेदन रबी-2025-26 एवं खरीफ-2026 की प्रस्तावित कार्ययोजना की जानकारी प्रस्तुत की गई।
बैठक में अधिष्ठाता ने अपने अध्यक्षीय उदबोद्वन में कृषि विज्ञान केन्द्र के कार्यो कि सराहना करते हुए कहा कि केन्द्र द्वारा आयोजित अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन के परिणामों के आधार पर अंनुशंसित पद्धति का अंगीकरण जिले में कितने कृषकों द्वारा किया जा रहा है, उसका भी अध्ययन केन्द्र द्वारा किया जाये। उन्होने इफको से अनुरोध किया कि वे कृषि विज्ञान केन्द्र के प्रक्षेत्र पर लगाये जा रहे फसल संग्रहालय में नेनौ यूरिया के ट्रायल आयोजित करे जिससे कि उसके वास्तविक परिणामों से किसान अवगत हो सके।
डाॅ. मुकेश कुमार, वरिष्ठ वैज्ञानिक, अटारी, जोन-9, जबलपुर ने कहा कि कृषि विज्ञान केन्द्र कृृषको कि उत्तरोत्तर वृद्धि हेतु निरन्तर कार्य करते रहे जिससे कि उनकी प्रति इकाई आय में बढ़ोत्तरी हो सके। इस कार्यक्रम में निदेशक विस्तार सेवायें, रा.वि.सिं.कृ.वि.वि.,ग्वालियर के प्रतिनिधि एवं वैज्ञानिक के रूप में डाॅ. आर.सी. आसवानी ने कहा कि केन्द्र समन्वित कृृषि प्रणाली को अपनाने हेतु किसानों का जागरूक करें।
कार्यक्रम में वैज्ञानिक अटारी, जोन-9, जबलपुर से डाॅ. हरीश एम.एन., प्रधान वैज्ञानिक एवं प्रमुख, के.वी.के.,नीमच से डाॅ. सी.पी. पचैरी, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख, के.वी.के.,रतलाम से डाॅ एस.आर. काटवा, उप संचालक कृषि श्री रविंद्र मोदी़, आर.एस.ई.टी.आई. से श्री राजेन्द्र सिंह राठौर, बीज प्रमाणीकरण अधिकारी श्री रामेश्वर पाटीदार, एन.एच.आर.डी.एफ. से श्री ए.के. मिश्रा, एन.आर.सी.एस.एस., अजमेर से वैज्ञानिक डाॅ. मुरलीधर मीणा, ए.डी.ए. श्रीमती अनिता धाकड़, एस.ए.डी.ओ श्री चेतन पाटीदार, उद्यानिकी विभाग से श्री एस.एस. धाकड़ एवं श्री अविनाश पराशर, कृषि अभियांत्रिकी विभाग से श्री पंकज पाटीदार, इफको से श्री आदित्य पाटीदार, बीज निगम से श्री रमेश सिंह, एफ.पी.ओ. से डाॅ. राकेश पाटीदार एवं साॅलेरिडेड, एन.जी.ओ. से श्री अरविन्द पाटीदार, एवं जिले के उत्कृष्ट कृषक श्री बालकृष्ण पाटीदार, श्री कमलेश चैधरी, श्री बद्रीलाल जी ने भी अपने महत्वपूर्ण सुझाव दिये। कार्यक्रम का संचालन डाॅ. निशिथ गुप्ता एवं डाॅ. डाॅ. राजेश गुप्ता ने आभार ज्ञापित किया।
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सभी नगरीय निकाय फायर ब्रिगेड, एंबुलेंस एवं अन्य व्हीकल को ठीक करवाए : कलेक्टर श्रीमती गर्ग
मंदसौर 11 मई 26 / कलेक्टर श्रीमती अदिती गर्ग की अध्यक्षता में साप्ताहिक अंतर विभागीय समीक्षा बैठक सुशासन भवन स्थित सभागार में आयोजित की गई। बैठक में विभिन्न विभागों की योजनाओं एवं कार्यों की समीक्षा कर आवश्यक निर्देश दिए गए। बैठक के दौरान अपर कलेक्टर श्रीमती एकता जायसवाल, जिला अधिकारी मौजूद थे।
बैठक के दौरान कलेक्टर श्रीमती गर्ग ने निर्देश देते हुए कहा कि सभी नगरीय निकायों में फायर एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड एवं अन्य आवश्यक वाहनों को दुरुस्त स्थिति में रखा जाए। ग्रीष्मकाल को देखते हुए पेयजल व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ सुनिश्चित किया जाए। जहां भी पेयजल संबंधी समस्या उत्पन्न हो, उसका तत्काल समाधान किया जाए। सभी सीएमओ को निर्देश दिए गए कि जल स्रोतों की नियमित पानी की जांच करवाई जाए तथा पानी चोरी की घटनाओं पर सख्त कार्रवाई की जाए।
कलेक्टर ने गेहूं उपार्जन कार्य की समीक्षा करते हुए बारदानों की उपलब्धता एवं मंडी दरों की जानकारी ली। नोडल अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि वे नियमित रूप से फील्ड भ्रमण कर उपार्जन केंद्रों का निरीक्षण करें तथा किसानों को भुगतान में किसी प्रकार की देरी न हो, इसका विशेष ध्यान रखा जाए।
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को नवीन जल संरचनाओं को चिन्हित कर उनके निर्माण कार्य प्रारंभ करने के निर्देश दिए गए। साथ ही जल गंगा संवर्धन अभियान अंतर्गत किए जा रहे कार्यों की समय पर ऑनलाइन एंट्री सुनिश्चित करने को कहा गया।
बैठक में संबल अनुग्रह सहायता, संबल पंजीयन एवं भूमि आवंटन प्रकरणों की भी समीक्षा की गई। स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए गए कि फायर एनओसी संबंधी कार्यवाही शीघ्र पूर्ण करें। इसके अतिरिक्त सभी नगरीय निकायों को निर्माण कार्यों की नियमित समीक्षा करने के निर्देश भी दिए गए।
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पशुपतिनाथ मंदिर में हुआ सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का आयोजन
भारत के गौरवशाली इतिहास को स्मरण किया गया, परिसर में हुआ प्रधानमंत्री का लाइव प्रसारण
मंदसौर 11 मई 26 / भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा भगवान पशुपतिनाथ मंदिर के आराधना हाल में “सोमनाथ स्वाभिमान पर्व” का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ पूर्व विधायक श्री यशपाल सिंह सिसोदिया द्वारा भगवान पशुपतिनाथ की कांस्य प्रतिमा पर दीप प्रज्वलित कर किया गया।
कार्यक्रम के दौरान संस्कृत विद्यालय के बटुकों ने शंखनाद एवं वैदिक मंत्रोच्चार के साथ आध्यात्मिक वातावरण निर्मित किया। दतिया से आए कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दी गईं, जिन्हें उपस्थित जनसमुदाय ने सराहा।
इस अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम का लाइव प्रसारण भी देखा एवं सुना गया। कार्यक्रम में भारत के गौरवशाली इतिहास, सांस्कृतिक राष्ट्रवाद तथा सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के महत्व को रेखांकित किया गया।
“सोमनाथ स्वाभिमान पर्व” भारतीय सांस्कृतिक विरासत, आत्मगौरव एवं गुलामी की मानसिकता से मुक्ति का प्रतीक है। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को देश के समृद्ध इतिहास और सांस्कृतिक धरोहर से जोड़ते हुए वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को सशक्त बनाना है।
कार्यक्रम में अपर कलेक्टर श्रीमती एकता जायसवाल, मंदसौर एसडीएम श्री शिवलाल शाक्य, अन्य जनप्रतिनिधि, बड़ी संख्या में श्रद्धालु, दर्शकगण एवं पत्रकार उपस्थित रहे। फोटो संलग्न
ग्राम लोटखेड़ी में आयुष्मान आरोग्य शिविर आयोजित
मंदसौर 11 मई 26 / प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत संचालित 100 दिवसीय आयुष्मान आरोग्य अभियान के तहत एचडब्ल्यूसी केंद्र लोटखेड़ी में आयुष्मान आरोग्य शिविर का आयोजन किया गया। शिविर का मुख्य उद्देश्य प्रत्येक वर्ग, विशेषकर उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों के निवासियों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना एवं टीबी जैसी गंभीर बीमारी की समय पर पहचान करना रहा।
शिविर के दौरान टीबी जागरूकता अभियान अंतर्गत उपस्थित ग्रामीणों को टीबी शपथ दिलाई गई। ब्लॉक भानपुरा के टीबीएचवी श्री देवेंद्र तिवारी द्वारा ग्रामीणों को टीबी रोग के प्रति जागरूक करते हुए इसके प्रमुख लक्षणों की जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि लगातार कई दिनों तक खांसी आना, भूख न लगना, वजन में कमी होना, रात में पसीना आना तथा बुखार बने रहना टीबी के संभावित लक्षण हो सकते हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि टीबी एक पूरी तरह से उपचार योग्य बीमारी है और घबराने की आवश्यकता नहीं है। बलगम जांच में पॉजिटिव आने पर 6 माह तक नियमित उपचार से मरीज पूर्णतः स्वस्थ हो सकता है। साथ ही शासन द्वारा मरीजों को उपचार अवधि के दौरान प्रति माह 1000 रुपये की पोषण सहायता राशि सीधे उनके बैंक खाते में प्रदान की जाती है।
शिविर में आए नागरिकों की व्यापक स्वास्थ्य जांच की गई। इसमें टीबी स्क्रीनिंग हेतु एक्स-रे के माध्यम से संदिग्ध एवं पूर्व उपचाररत मरीजों की जांच की गई। इसके अतिरिक्त हीमोग्लोबिन, रक्तचाप, रक्त शर्करा एवं बीएमआई सहित सामान्य स्वास्थ्य परीक्षण भी किए गए।
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अनुसूचित जाति एवं जनजातीय छात्रावासों में प्रवेश हेतु 25 जून तक करें आवेदन
मंदसौर 11 मई 26/ जनजातीय कार्य विभाग की जिला संयोजक श्रीमती अंगुरबाला भगोरा ने बताया कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए जिले में संचालित अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति छात्रावासों एवं आश्रमों में नवीन प्रवेश की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। पूर्व वर्षों के विद्यार्थियों के नवीनीकरण प्रवेश के उपरांत रिक्त सीटों पर नए विद्यार्थियों को नियमानुसार प्रवेश दिया जाएगा।
जिले के प्रत्येक विकासखंड में कुल 36 अनुसूचित जाति वर्ग के छात्रावास एवं 2 अनुसूचित जनजाति वर्ग के छात्रावास/आश्रम संचालित हैं। इनमें उत्कृष्ट छात्रावास (कक्षा 9 से 12), सीनियर छात्रावास (कक्षा 9 से 12), जूनियर छात्रावास (कक्षा 6 से 8) तथा विकासखंड मंदसौर एवं सीतामऊ में महाविद्यालयीन छात्रावास (कॉलेज स्तर) शामिल हैं।
विद्यार्थियों का चयन प्राप्तांक एवं निवास स्थान से छात्रावास की दूरी के आधार पर नियमानुसार किया जाएगा। अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के इच्छुक विद्यार्थी संबंधित छात्रावास में 25 जून 2026 तक आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं। निर्धारित तिथि के पश्चात प्राप्त आवेदन पत्र मान्य नहीं किए जाएंगे।
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अब खुले जंगल में घूमेंगे और 2 चीते, सीएम डॉ. मोहन यादव बोले- ‘प्रोजेक्ट चीता’ में रोज कीर्तिमान रच रहा एमपी
– मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किया कूनो नेशनल पार्क का भ्रमण
– प्रदेश के मुखिया ने बाड़े से आजाद किए दो मादा चीते
– अब देश में चीतों की संख्या हुई 57
– प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सफलता से आगे बढ़ रही चीता परियोजना
मंदसौर 11 मई 26 / मध्यप्रदेश वाइल्डलाइफ के लिए 11 मई का दिन खास रहा। दो और चीते अपने बाड़े से निकल कर खुले जंगल में पहुंच गए। अब दोनों प्रदेश के साथ-साथ दूसरे राज्यों के इको-सिस्टम को मजबूत करने में सहयोग करेंगे। दरअसल, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने श्योपुर जिले स्थित कूनो नेशनल पार्क पहुंचे। उन्होंने यहां दो मादा चीतों को बाड़े से मुक्त कर दिया। बाड़े से निकलते ही दोनो चीते उछलते-कूदते जंगल की ओर चले गए।
इस मौके पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश की धरती ने चीतों को अंगीकृत कर अपने परिवार का हिस्सा बनाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लगभग साढ़े तीन वर्ष पूर्व कूनो में चीता प्रोजेक्ट की शुरुआत की गई थी। भारत में चीता पुनःस्थापना की यह परियोजना सफलता के साथ आगे बढ़ रही है। चीता पुनर्विस्थापन के इस महत्वपूर्ण कार्य में मध्यप्रदेश नित नए कीर्तिमान रच रहा है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश धर्म, निवेश एवं जैनेटिक जैव विविधता के प्रमुख केंद्र के रूप में उभर रहा है। नामीबिया, दक्षिण अफ्रीका और अब बोत्सवाना से लाए गए चीतों के पुनर्स्थापन को निरंतर सफलता मिल रही है। आज प्रदेश ने देश में चीता स्टेट के रूप में पहचान बनाई है। वर्तमान में चीतों की संख्या 57 है, जिनमें से 54 कूनो नेशनल पार्क में और 03 गांधी सागर अभ्यारण्य में हैं।
मध्यप्रदेश ने बनाया एक नया इतिहास
भ्रमण के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मीडिया से कहा कि मध्यप्रदेश ने एक नया इतिहास बनाया है। हमने आज कूनो नेशनल पार्क में बोत्सवाना से लाए गए दो मादा चीतों को छोड़ा है। हमने सह-अस्तित्व की भावना प्रकट करते हुए दोनों को खुले जंगल में, खुले वातावरण में प्रकृति के साथ रहने के लिए छोड़ा है। मैं श्योपुर और चंबल के क्षेत्र के लोगों को बधाई देता हूं। इन चीताों का बसेरा अब 5 हजार किमी में हुआ है। हमारे लिए गौरव की बात है कि अब ये हमारे साथ परिवार की तरह रहने लगे हैं। हमें पता ही नहीं चलता कि कब हमारा चीता दौड़ते-दौड़ते राजस्थान पहुंच जाता है। उन्होंने कहा कि चीते चंबल के इलाकों ग्वालियर-शिवपुरी-राजगढ़ सहित कई इलाकों में दस्तक दे रहे हैं। हमें इन चीतों के रूप में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बड़ी सौगात दी है। मैं केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव को भी बधाई देता हूं। मैं उन सभी अधिकारियों को बधाई देता हूं, जिन्होंने प्रोजेक्ट चीता के लिए अथक पसीना बहाया है। उन्होंने कहा कि कूनो नेशनल पार्क प्रोजेक्ट चीता का नया रिकॉर्ड बना रहा है। हमारे फॉरेस्ट के अधिकारी, मेडिकल स्टाफ के लोग, यहां के संरक्षक, स्थानीय जनों और चीतों ने एक-दूसरे को परिवार मान लिया है। यह विश्व की अनूठी घटना है। यह फॉरेस्ट विभाग के लिए गौरव की बात है। चीते जीवन बिताने के लिए इस माहौल में ढल गए हैं। यह इको-सिस्टम के लिए अच्छा है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को जो चीते मिले थे, धीरे-धीरे हम उनको खुले वातावरण में छोड़ रहे हैं। हम जीयो और जीने-दो के सिद्धांत पर विश्वास करते हैं।
वाइल्डलाइफ में जुड़ा अहम अध्याय
गौरतलब है कि, इसी साल फरवरी के अंत में बोत्सवाना से 9 नए चीते कूनो नेशनल पार्क लाए गए थे। इनमें 6 मादा और 3 नर शामिल हैं। यहां लाने के बाद इन सभी को क्वारंटीन किया गया था। क्वारंटीन की अवधि पूरी करने के बाद सभी को छोटे बाड़ों में रखा गया। इससे वे स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप ढल गए। इन्हीं 9 में से 2 चीतों को आज खुले जंगल में छोड़ा गया है। इन चीतों को खुले जंगल में छोड़ने से ‘प्रोजेक्ट चीता’ को नई गति मिलेगी। इससे भारत की वाइल्डलाइफ के इतिहास में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ेगा।
ज्यादा जेनेटिक विविधता लेकर आए बोत्सवाना की चीते
वाइल्डलाइप एक्सपर्ट्स का मानना है कि बोत्सवाना से लाए गए चीते ज्यादा जेनेटिक विविधता लेकर आए हैं। इनसे कूनो में चीतों की स्वस्थ और दीर्घकालिक आबादी विकसित करने में मदद मिलेगी। एक्सपर्ट्स ने यह भी उम्मीद जताई है कि ये चीते कूनो के वातावरण में तेजी से घुल-मिल जाएंगे। इन चीतों को गांधी सागर और नौरादेही जैसे अन्य अभ्यारण्यों में भी बसाने की तैयारी की जा रही है।
कब-कब कहां-कहां से लाए गए चीते
इन चीतों के साथ ही भारत में चीतों की कुल संख्या 57 हो गई है। बता दें, नामीबिया से 17 सितंबर 2022 को 8, वर्ष 2023 में दक्षिण अफ्रीका से 12 चीते कूनो नेशनल पार्क लाए गए थे। बोत्सवाना से आए चीतों को भारतीय वायुसेना के विशेष विमान के माध्यम से ग्वालियर लाया गया था। यहां से उन्हें हेलीकॉप्टर द्वारा कूनो नेशनल पार्क पहुंचाया गया। प्रोजेक्ट चीता का उद्देश्य प्रदेश से लुप्त हुये चीतों की प्रजाति को पुनर्स्थापित करना, उनकी संख्या में वृद्धि करना और उन्हें स्वतंत्र रूप से शिकार और विचरण के लिए तैयार करना है।
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मुख्यमंत्री डॉ. यादव 13 मई को नरसिंहपुर से 1835 करोड़ की राशि का अंतरण
1.25 करोड़ लाड़ली बहनों को मिलेगी 36वीं किश्त
मंदसौर 11 मई 26 / मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 13 मई को मध्यप्रदेश की करोड़ों महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण, आत्मनिर्भरता और सम्मान के लिये नरसिंहपुर जिले के गोटेगांव में ‘मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना’ की 36वीं किश्त जारी करेंगे। प्रदेश की 1 करोड़ 25 लाख 22 हजार 542 लाड़ली बहनों के बैंक खातों में 1,835 करोड़ 67 लाख 29 हजार 250 रूपये की राशि सिंगल क्लिक से अंतरित की जाएगी।
लाड़ली बहना योजना महिलाओं के जीवन में आर्थिक सुरक्षा, आत्मविश्वास और सम्मान का आधार बन चुकी है। नियमित आर्थिक सहायता से महिलाओं की परिवार के निर्णयों में भागीदारी बढ़ी है, पोषण एवं स्वास्थ्य स्तर में सुधार हुआ है और ग्रामीण तथा शहरी दोनों क्षेत्रों में महिलाओं की आर्थिक भूमिका मजबूत हुई है।
योजना की शुरुआत से अब तक सशक्तिकरण की यात्रा निरंतर जारी
वर्ष 2023 जून में शुरू की गई इस महत्वाकांक्षी लाड़ली बहना योजना में अप्रैल 2026 तक 35 मासिक किस्तों का सफलतापूर्वक अंतरण किया जा चुका है। मई 2026 में जारी की जा रही राशि योजना की 36वीं किश्त जारी होगी। जून 2023 से अप्रैल 2026 तक महिलाओं के खातों में कुल 55,926.51 करोड़ रूपये की राशि सीधे डीबीटी के माध्यम से जमा की जा चुकी है।
राशि में क्रमिक वृद्धि: 1,000 से बढ़कर 1,500 रूपये प्रतिमाह
योजना के प्रारंभ में प्रत्येक पात्र महिला को 1,000 रूपये प्रतिमाह प्रदान किए जाते थे। अक्टूबर 2023 में इसे बढ़ाकर 1,250 रूपये प्रतिमाह किया गया। इसके बाद नवंबर 2025 से राशि में पुनः वृद्धि कर इसे 1,500 रूपये प्रतिमाह कर दिया गया। सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के अंतर्गत कम राशि प्राप्त करने वाली महिलाओं को भी इस योजना के माध्यम से अतिरिक्त सहायता देकर कुल देय राशि सुनिश्चित की जा रही है।
महिला कल्याण के लिए वित्तीय प्रतिबद्धता
लाड़ली बहना योजना पर राज्य सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2023-24 में 14,726.05 करोड़ रूपये, वर्ष 2024-25 में 19,051.39 करोड़ रूपये तथा वर्ष 2025-26 में 20,318.53 करोड़ रूपये की राशि व्यय की गई। वर्ष 2026-27 में अप्रैल 2026 तक 1830.54 करोड़ रूपये की राशि की गई है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए लाडली बहना योजना में 23,882.81 करोड़ रूपये का बजट प्रावधान किया गया है, जो महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के प्रति सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
करोड़ों महिलाओं के जीवन में आया व्यापक परिवर्तन
मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना ने मध्यप्रदेश में महिला कल्याण के क्षेत्र में एक नई मिसाल स्थापित की है। यह केवल आर्थिक सहायता योजना नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का प्रभावी माध्यम बन गई है। योजना से प्रदेश की महिलाओं के जीवन में व्यापक और सकरात्मक परिवर्तन आए है। नियमित आर्थिक सहायता ने महिलाओं को घरेलू खर्चों के प्रबंधन ने अधिक आत्मनिर्भर बनाया है, जिससे वे अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ बच्चों के पोषण, शिक्षा और स्वास्थ्य पर अधिक प्रभावी ढंग से खर्च कर पा रही है। योजना से प्राप्त राशि ने अनेक महिलाओं को स्व-सहायता समूहों, लघु उद्योगों और स्व-रोजगार गतिविधियों से जुड़ने के लिये प्रेरित किया है। इससे उनकी आय के अतिरिक्त स्त्रोत विकसित हुए है। आर्थिक रूप से सशक्त होने के साथ महिलाओं के परिवार के महत्वपूर्ण निर्णयों में भागीदारी बढ़ी है और उनकी राय को अधिक महत्व मिलने लगा है। बैंक खातों में सीधे राशि अंतरण की व्यवस्था ने महिलाओं को औपचारिक बैंकिग और वित्तीय सेवाओं से जोड़ा है। इससे उनमें वित्तीय साक्षरता और आर्थिक आत्मविश्वास में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
ग्रामीण और शहरी महिलाओं के लिए समान रूप से उपयोगी
योजना का लाभ ग्रामीण, आदिवासी, शहरी, कल्याणी, तलाकशुदा और परित्यक्त महिलाओं सहित व्यापक वर्ग को मिल रहा है। पात्र महिलाओं के सक्रिय और आधार-लिंक्ड बैंक खातों में राशि सीधे जमा होने से प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और त्वरित बनी है। राज्य सरकार ने विभिन्न विशेष अवसरों और त्योहारों पर अतिरिक्त आर्थिक सहायता उपलब्ध कराकर महिलाओं के जीवन में उत्साह और खुशियों का संचार किया है। इससे योजना केवल नियमित सहायता तक सीमित न रहकर भावनात्मक संबल का भी माध्यम बनी है।
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