मध्यप्रदेश

कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल ने दो कालोनाइजरों पर कार्रवाई के दिए आदेश

 

कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल ने दो कालोनाइजरों पर कार्रवाई के दिए आदेश

रीवा! कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी प्रतिभा पाल ने दो अवैध कालोनी बनाने वालों पर एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं। कलेक्टर न्यायालय से जारी अलग-अलग आदेशों के अनुसार एसडीएम हुजूर को मेसर्स शांति इंफ्रास्ट्रक्चर एवं शांति विलास इंफ्रा प्रोजेक्ट के संचालक उपेन्द्र सिंह तथा करहिया में अवैध रूप से प्लाट एवं कालोनी बनाने पर शाहीन बेगम पति मोहम्मद शहीद अंसारी तथा अमरीन अंसारी पिता मेराज अहमद अंसारी के विरूद्ध एफआईआर दर्ज कराने के आदेश दिए हैं। सक्षम प्राधिकारी की अनुमति तथा कालोनाइजर लाइसेंस बिना प्राप्त किए कालोनी का निर्माण करने एवं अवैध निर्माण करके बीहर नदी के बहाव को अवरूद्ध करने के प्रयास के कारण यह कार्रवाई की गई है।

इस संबध में जारी आदेश के अनुसार श्री उपेन्द्र सिंह द्वारा बीहर नदी के किनारे शांति विलास इंफ्रा प्रोजेक्ट एवं शांति इंफ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से शांति रायल स्टेट कालोनी विकसित की जा रही है। इसके लिए कालोनाइजर लाइसेंस नहीं लिया गया है। बिना अनुमति के प्लाट और फ्लैटों की बिक्री की जा रही है। इसके साथ-साथ बीहर नदी के बाएं तट में मिट्टी और मलवा डालकर नदी के अपवाह क्षेत्र को बाधित करने का प्रयास किया गया है जो एनजीटी के मानक के प्रतिकूल है। इनके द्वारा मढ़ी और करहिया स्थित नालों के स्वरूप को परिवर्तित करके इन्हें संकरा किया गया है। प्रकरण की एसडीएम हुजूर तथा प्रभारी अधिकारी कालोनी सेल से जाँच कराई गई। जिसमें पाया गया कि कालोनाइजर श्री सिंह द्वारा ग्राम पंचायत करहिया नम्बर एक के सरपंच से अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त कर कालोनी का निर्माण किया गया है। जबकि कालोनी विकास नियम 2014 के तहत कालोनाइजर का पंजीकरण कराने एवं अनुमति देने के लिए शासन द्वारा कलेक्टर को सक्षम प्राधिकारी बनाया गया है। मध्यप्रदेश पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के नियम अध्याय 4 नियम 21 के अंतर्गत सक्षम प्राधिकारी अवैध कालोनी को अपने हाथ में ले सकता है। इसलिए मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 2013 की धारा 61-घ की उपधारा 3 के अनुसार अवैध कालोनाइजर के विरूद्ध थाने में आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाए। इसी तरह शाहीन बेगम तथा अमरीन अंसारी द्वारा करहिया में अवैध प्लाटिंग एवं कालोनी का निर्माण किया जा रहा है। इसके लिए कालोनाइजर द्वारा लाइसेंस एवं विकास अनुज्ञा की अनुमति नहीं ली गई है। साथ ही बीहर नदी के बाईं ओर मिट्टी और मलवा डालकर नदी के अपवाह क्षेत्र को बाधित करने का प्रयास किया गया है। एसडीएम द्वारा मामले की जाँच करने पर कालोनाइजर द्वारा केवल कृषि भूमि का उल्लेख किया गया है। जबकि सेटेलाइट इमेज से दोनों कालोनाइजरों के स्वामित्व के खसरों में मकान बने होना पाया गया। कालोनी विकास नियम 2014 के तहत कालोनाइजर का पंजीकरण कराने एवं अनुमति देने के लिए शासन द्वारा कलेक्टर को सक्षम प्राधिकारी बनाया गया है। मध्यप्रदेश पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के नियम अध्याय 4 नियम 21 के अंतर्गत सक्षम प्राधिकारी अवैध कालोनी को अपने हाथ में ले सकता है। इसलिए मध्यप्रदेश पंचायतराज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 2013 की धारा 61-घ की उपधारा 3 के अनुसार अवैध कालोनाइजर के विरूद्ध थाने में आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाए। अवैध रूप से कालोनी निर्माण करने पर भू राजस्व संहिता 1959 की धारा 172 के प्रावधानों के तहत कालोनाइजर को दोषी पाए जाने पर तीन से सात के कारावास तथा दस हजार रुपए तक के जुर्माने से दण्डित किया जा सकता है। कलेक्टर ने इन दोनों प्रकरणों की जाँच के लिए चार सदस्यीय टीम गठित की है। इसमें एसडीएम हुजूर, सहायक संचालक नगर तथा ग्राम निवेश, एसडीओ लोक निर्माण विभाग तथा एसडीओ लोक निर्माण विभाग विद्युत यांत्रिकी शाखा को सदस्य बनाया गया है। समिति को एक माह में जाँच पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। तहसीलदार हुजूर को भू अभिलेख को अद्यतन करके तीन दिवस में प्रस्तुत करने तथा एक सप्ताह में कब्जा रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

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