समाचार मध्यप्रदेश मंदसौर 23 मार्च 2025 सोमवार

/////////////////////////////////
महामहिम राज्यपाल कर्नाटक श्री थावरचंद गहलोत ने सोहरा यूपीवीसी उद्योग का किया शुभारंभ
मंदसौर 22 मार्च 2026/ जिले के जग्गाखेड़ी में आज सोहरा यूपीवीसी उद्योग का शुभारंभ महामहिम राज्यपाल कर्नाटक श्री थावरचंद गहलोत द्वारा किया गया। इस अवसर पर राज्यसभा सांसद श्री बंशीलाल गुर्जर, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती दुर्गा विजय पाटीदार, मंदसौर विधायक श्री विपिन जैन सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं श्री सतीश मालवीय, गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए महामहिम राज्यपाल श्री गहलोत ने कहा कि केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं का लाभ उठाकर युवा आगे बढ़ें। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे केवल नौकरी पाने तक सीमित न रहें, बल्कि स्वयं उद्यम स्थापित कर अन्य लोगों को भी रोजगार प्रदान करें। उन्होंने कहा कि देश को आत्मनिर्भर बनाने में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है।
इस अवसर पर उद्योग से संबंधित जानकारी देते हुए बताया गया कि यूपीवीसी (UPVC) एक अत्यंत लोकप्रिय एवं टिकाऊ कंस्ट्रक्शन मटेरियल है, जिसका उपयोग मुख्यतः खिड़कियों एवं दरवाजों के निर्माण में किया जाता है। यह पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ-साथ लंबे समय तक टिकाऊ और कम रखरखाव वाला विकल्प है, जिसके कारण आजकल घरों और कार्यालयों में इसका उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। फोटो संलग्न
राज्य की जीएसडीपी पंहुचेगी 18.48 लाख करोड़ रुपये
प्रदेश का 4.38 लाख करोड़ का बजट बढ़ाएगा आर्थिक विकास की गति
राजस्व आधिक्य का अनुमान, पूंजीगत व्यय 80 हजार करोड़ से अधिक किसान समृद्धि पर विशेष ध्यान
मंदसौर 22 मार्च 2026/ मध्यप्रदेश में मोहन सरकार के अथक प्रयासों से राज्य की अर्थव्यवस्था 2026-27 में 18.48 लाख करोड़ रुपये तक पहुँच जायेगी। राज्य के बजट प्रावधानों को देखते हुए उल्लेखनीय वृद्धि का अनुमान लगाया गया है। वर्ष 2025-26 में जीएसडीपी 16.48 लाख करोड़ रुपये रही जो अब बढ़ रही है। राज्य की अर्थव्यवस्था तेज़ी से बढ़ रही है।
सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 4 लाख 38 हजार 317 करोड़ रुपये के बजट में विकास, सामाजिक सुरक्षा और अधोसंरचना विस्तार को केंद्र में रखा है। सरकार के प्रयासों से स्पष्ट है कि वित्तीय वर्ष के अंत में 44 करोड़ रुपये का राजस्व आधिक्य रहेगा।
बजट में अधोसंरचना और विकास परियोजनाओं को गति देने के लिए 80 हजार 266 करोड़ रुपये का पूंजीगत व्यय प्रस्तावित किया गया है। यह राज्य के जीएसडीपी का 4.80 प्रतिशत है। इससे प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियों, शहरी अधोसंरचना और ग्रामीण विकास परियोजनाओं को नई गति मिलेगी।
विकास योजनाओं को गति देने के लिए कई प्रमुख विभागों के आवंटन में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। ग्रामीण विकास विभाग के बजट में 37 प्रतिशत, नगरीय विकास एवं आवास विभाग में 16 प्रतिशत, महिला एवं बाल विकास विभाग में 26 प्रतिशत, राजस्व विभाग में 43 प्रतिशत और स्कूल शिक्षा विभाग में 11 प्रतिशत की वृद्धि होगी। आगामी वर्ष में ग्रामीण आधारभूत संरचना, शहरी सुविधाओं और सामाजिक क्षेत्र को मजबूत बनाया जाएगा।
किसान समृद्धि
कृषि और किसानों के कल्याण को विशेष प्राथमिकता दी गई है। कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों के लिए 88 हजार 910 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। गैर-बजटीय संसाधनों को सम्मिलित करने पर इस क्षेत्र के लिए कुल लगभग 1 लाख 15 हजार करोड़ रुपये उपलब्ध होंगे। किसानों की आय बढ़ाने और कृषि गतिविधियों को आधुनिक बनाने में यह पहल मील का पत्थर साबित होगी ।
महिला सशक्तिकरण की दिशा में राज्य सरकार की प्रमुख योजना लाड़ली बहना योजना के लिए इस बजट में लगभग 23 हजार 800 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा वीबीजी राम जी योजना के लिए लगभग 10 हजार 400 करोड़ रुपये, मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के लिए लगभग 5 हजार 500 करोड़ रुपये तथा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के लिए लगभग 4 हजार 600 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। आगामी सिंहस्थ आयोजन की तैयारियों के लिए भी लगभग 3 हजार करोड़ रुपये की राशि प्रस्तावित है।
स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने के लिए इस वर्ष 23 हजार 747 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। वहीं सामाजिक और आर्थिक उत्थान से जुड़ी योजनाओं के लिए 1 लाख 83 हजार 708 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिसमें अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए 26 प्रतिशत और अनुसूचित जाति वर्ग के लिए 17 प्रतिशत राशि निर्धारित है।
बजट में नई दीर्घकालिक योजनाओं की भी घोषणा की गई है। द्वारका योजना के तहत अगले तीन वर्षों में 5 हजार करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। स्वामित्व योजना के लिए 3 हजार 800 करोड़ रुपये तथा यशोदा दुग्ध प्रदाय योजना के लिए 700 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिनसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पशुपालन गतिविधियों को बल मिलेगा।
राज्य की राजकोषीय स्थिति के अनुसार कुल राजस्व प्राप्तियां 3 लाख 8 हजार 703 करोड़ रुपये अनुमानित हैं, जबकि पूंजीगत प्राप्तियां 80 हजार 694 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है।
वर्ष 2026-27 में अधोसंरचना विकास, कृषि सशक्तिकरण, महिला कल्याण और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को गति देने के साथ राज्य की आर्थिक वृद्धि को बनाए रखने की रणनीति पर काम होगा। विकास और कल्याणकारी योजनाओं के बीच संतुलन स्थापित करने के प्रयासों से प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।
=============
मध्यप्रदेश बनेगा स्पेसटेक नीति-2026 से अंतरिक्ष तकनीक का प्रमुख केंद्र: मुख्यमंत्री डॉ. यादव
भारत की नई अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में सशक्त भूमिका में रहेगा मध्यप्रदेश
निवेश, नवाचार और स्टार्टअप को मिलेगा बढ़ावा
युवाओं के लिए खुलेंगे उच्च कौशल रोजगार के नए अवसर
मंदसौर 22 मार्च 2026/ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश को स्पेस टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित करने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने मध्यप्रदेश स्पेसटेक नीति-2026 लागू की है। यह नीति स्पेसटेक नवाचार, विनिर्माण, अनुसंधान और तकनीक आधारित अनुप्रयोगों को बढ़ावा देकर प्रदेश को भारत की तेजी से विकसित हो रही अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण केंद्र बनाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वैश्विक स्तर पर अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था तेजी से विस्तार कर रही है और भारत इस क्षेत्र में नई संभावनाओं के साथ आगे बढ़ रहा है। मध्यप्रदेश अपनी मजबूत औद्योगिक संरचना, प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों, डिफेंस कॉरिडोर और उभरते टेक्नोलॉजी इको सिस्टम के कारण स्पेसटेक निवेश के लिए एक अनुकूल और आकर्षक गंतव्य बन रहा है। यह नीति प्रदेश की वैज्ञानिक और खगोलीय विरासत को भविष्य उन्मुख तकनीकी नेतृत्व में बदलने का एक दूरदर्शी प्रयास है, जो युवाओं के लिए नए अवसर तैयार करेगी और प्रदेश को स्पेसटेक सेक्टर में नई पहचान दिलाएगी।
स्पेसटेक इको सिस्टम के समग्र विकास का विजन
स्पेसटेक नीति-2026 अंतरिक्ष क्षेत्र के अपस्ट्रीम, मिडस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम सभी क्षेत्रों के विकास का व्यापक रोडमैप प्रस्तुत करती है।इसमें सैटेलाइट और लॉन्च व्हीकल कंपोनेंट निर्माण, प्रणोदन प्रणाली, एवियोनिक्स, उन्नत सामग्री, असेंबली-इंटीग्रेशन-टेस्टिंग, मिशन संचालन, ग्राउंड स्टेशन, स्पेस सिचुएशनल अवेयरनेस और एआई आधारित डेटा एनालिटिक्स जैसे क्षेत्रों को शामिल किया गया है।नीति में आधुनिक मैन्युफैक्चरिंग, टेस्टिंग और डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जाएगा और युवाओं को विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रमों में स्पेसटेक क्षेत्र के लिए तैयार किया जाएगा।
अनुसंधान और नवाचार को मिलेगा नया आधार
नीति में स्पेसटेक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किया जाएगा, जहां अनुसंधान, नवाचार, प्रोटोटाइप विकास और स्टार्टअप इनक्यूबेशन को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही स्मालसेट डिजिटल ट्विन लैब एण्ड स्पेस इनोवेशन सैंडबोक्स जैसी आधुनिक सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी। उज्जैन में खगोल भौतिकी और अंतरिक्ष विज्ञान के लिए अनुसंधान एवं विकास केंद्र स्थापित कर प्रदेश की वैज्ञानिक विरासत को आधुनिक तकनीकों से जोड़ा जाएगा।
स्टार्ट-अप और उद्योगों के लिए आकर्षक प्रोत्साहन
नीति में स्टार्टअप्स को 75 लाख रुपये तक आइडिया-टू-प्रोटोटाइप अनुदान, एक करोड़ रुपये तक टेक्नोलॉजी अधिग्रहण सहायता और 200 करोड़ रुपये का रणनीतिक फंड निवेश, राज्य भागीदारी कोष से उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही एक पेटेंट पर 50 प्रतिशत प्रतिपूर्ति, परीक्षण सुविधाओं के लिए 1 करोड़ रुपये तक सहायता और इसरो, इन-स्पेस और आईएसओ प्रमाणन के लिए 75 प्रतिशत प्रतिपूर्ति (अधिकतम 10 लाख रूपये) का प्रावधान किया गया है। डिजाइन लिंक्ड इंसेंटिव और इनक्यूबेशन सुविधाओं के लिए भी विशेष प्रोत्साहन दिए जाएंगे।
कौशल विकास से तैयार होगा भविष्य का कार्यबल
स्पेसटेक सेक्टर में योग्य मानव संसाधन तैयार करने के लिए उच्च शिक्षण संस्थानों में विशेष पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे। इसके लिए 20 लाख रुपये तक का अनुदान दिया जाएगा। छात्रों को 6 माह तक 10 हजार रुपये प्रतिमाह स्टाइपेंड के साथ इंटर्नशिप के अवसर मिलेंगे। साथ ही कर्मचारियों के कौशल उन्नयन के लिए 50 हजार रुपये तक सहायता और शोधकर्ताओं के लिए स्पेसटेक फेलोशिप का भी प्रावधान किया गया है।
विश्वस्तरीय अधोसंरचना का होगा विकास
नीति में स्पेसटेक उद्योगों को 40 प्रतिशत तक पूंजी अनुदान (अधिकतम 150 करोड़ रुपये) दिया जाएगा। महिला उद्यमियों को अतिरिक्त प्रोत्साहन भी मिलेगा। स्पेस सिस्टम एवं एप्लीकेशन पार्क, परीक्षण प्रयोगशालाएं, क्लीन रूम और हाई परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग आधारित डेटा सेंटर स्थापित किए जाएंगे। परीक्षण सुविधाओं के लिए 15 करोड़ रुपये तक अनुदान और स्टार्ट-अप एवं एमएसएमई को परीक्षण लागत पर 30 प्रतिशत तक प्रतिपूर्ति भी दी जाएगी।
विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण को मिलेगा बढ़ावा
स्पेसटेक के प्रति रुचि बढ़ाने के लिए ‘अंतरिक्ष विहार’ स्पेस एक्सप्लोरेशन पार्क स्थापित किया जाएगा। ‘मिशन कल्पना’ में स्कूल विद्यार्थियों में नवाचार को प्रोत्साहित किया जाएगा। इसरो के युवा वैज्ञानिक कार्यक्रम (युविका) में विद्यार्थियों की भागीदारी बढ़ाने के लिए सहयोग दिया जाएगा और चयनित विद्यार्थियों को 25 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की जाएगी।
निवेशकों के लिए सुगम प्रक्रियाएं
नीति के क्रियान्वयन के लिए एमपीएमईडीसी को नोडल एजेंसी बनाया गया है। निवेशकों और स्टार्टअप्स को सिंगल विंडो क्लीयरेंस, ऑनलाइन पंजीयन और सरल प्रक्रियाओं के माध्यम से सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्पेसटेक नीति-2026 प्रदेश में निवेश आकर्षित करने, उद्योगों को नई गति देने और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। यह नीति मध्यप्रदेश को अंतरिक्ष तकनीक के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में स्थापित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।
============
सुपर 5 हजार योजना के लिए 10वीं–12वीं के विद्यार्थी 31 मार्च तक करें आवेदन
मंदसौर 22 मार्च 26 / सहायक श्रम आयुक्त ने जानकारी देते हुए बताया कि मध्यप्रदेश भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अंतर्गत पंजीबद्ध निर्माण श्रमिकों के पुत्र/पुत्रियों के लिए संचालित “सुपर 5 हजार” योजना अंतर्गत शैक्षणिक सत्र 2024–25 में माध्यमिक शिक्षा मंडल की 10वीं परीक्षा में प्रथम 5 हजार तथा 12वीं कक्षा में संकायवार प्रथम 5 हजार विद्यार्थियों की प्रावीण्य सूची श्रम सेवा पोर्टल पर अपलोड कर दी गई है।
योजना अंतर्गत पात्र विद्यार्थियों को मंडल द्वारा एकमुश्त 25 हजार रुपये की नगद प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। पात्र निर्माण श्रमिकों की संतानों द्वारा विद्यालय के माध्यम से निर्धारित आवेदन पत्र 31 मार्च 2026 तक प्रस्तुत किए जा सकते हैं।
आवेदन के साथ आवश्यक दस्तावेजों में निर्माण श्रमिक का पोर्टल जनरेटेड परिचय पत्र, निर्माण श्रमिक/पंजीयन धारक की बैंक पासबुक की छायाप्रति (जिसका बैंक खाता विवरण परिचय पत्र में अंकित हो), संस्था प्रमुख द्वारा जारी वर्तमान में अध्ययनरत होने का प्रमाण पत्र एवं अंकसूची की छायाप्रति संलग्न करना अनिवार्य होगा।
अधिक जानकारी हेतु संबंधित विद्यालय या श्रम कार्यालय से संपर्क किया जा सकता है।
==============
वाहनो के दस्तावेज शीघ्र दुरुस्त करवायें : अतिरिक्त क्षैत्रीय परिवहन अधिकारी
मंदसौर 22 मार्च 26 / अतिरिक्त क्षैत्रीय परिवहन अधिकारी द्वारा बताया गया कि समस्त स्कूल संचालक, ऑटो रिक्शा संचालक एवं मार्ग परमिट पर संचालित यात्री बस संचालक जिले में संचालित समस्त वाहनो के दस्तावेज जैसे परमिट, फिटनेस, बिमा, मोटरयान कर, एच.एस.आर.पी नम्बर प्लेट, पी.यु.सी. आदि को दुरुस्त करवाना सूनिश्चित करें। परिवहन विभाग द्वारा विशेष चेकिंग अभियान चलाकर म.प्र. मोटरयान अधिनियम की धाराओ के अंतर्गत नियमानुसार कार्यवाही की जावेगी।
===========
मन्दसौर। पवित्र त्यौहार ईद के शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित समापन के पश्चात जिला वक्फ कमेटी मन्दसौर द्वारा शहर की माकूल व्यवस्थाओं के लिए जिला प्रशासन, पुलिस विभाग और नगर पालिका परिषद के प्रति आभार व्यक्त किया गया है। जिला वक्फ कमेटी के अध्यक्ष शाकिर हुसैन गढ़वी ने कहा कि इस वर्ष ईद के मौके पर प्रशासन द्वारा किए गए इंतजाम अत्यंत सराहनीय रहे, जिससे आमजन और अकीदतमंदों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ा।
अध्यक्ष शाकीर हुसैन गढ़वी ने विशेष रूप से नगर पालिका परिषद द्वारा की गई साफ-सफाई और पेयजल व्यवस्था की प्रशंसा की, वहीं पुलिस विभाग द्वारा यातायात प्रबंधन और सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों को त्यौहार की सफलता का मुख्य आधार बताया। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन की सक्रियता और विभिन्न विभागों के आपसी समन्वय के कारण ही पूरा पर्व आपसी भाईचारे और सौहार्द के वातावरण में संपन्न हुआ। इस सफल आयोजन और सहयोग के लिए शाकिर हुसैन गढ़वी ने समस्त प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों को बहुत-बहुत धन्यवाद देते हुए उनके कार्यों की सराहना की है।



