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शोध छात्रों ने प्रो. गोपीनाथ को किया भावपूर्ण अभिनंदन गुरु-शिष्य परंपरा की अनूठी मिसाल

शोध छात्रों ने प्रो. गोपीनाथ को किया भावपूर्ण अभिनंदन गुरु-शिष्य परंपरा की अनूठी मिसाल

गोरखपुर जंगल कौड़ियां समाज में रिश्तों के ह्रास के दौर में गोरखपुर विश्वविद्यालय (दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय) के वाणिज्य संकाय के पूर्व संकायाध्यक्ष एवं सेवानिवृत्त आचार्य प्रोफेसर गोपीनाथ के निर्देशन में पीएचडी पूर्ण कर चुके शोध छात्रों ने गुरु-शिष्य के पवित्र संबंध को नई ऊंचाई दी है। उनके पूर्व छात्रों ने विशेष अभिनंदन समारोह आयोजित कर प्रो. गोपीनाथ का सम्मान किया, जो आज के समय में एक दुर्लभ और प्रेरणादायक उदाहरण है।यह समारोह जंगल कौड़ियां क्षेत्र में आयोजित किया गया, जिसमें गोरखपुर परिक्षेत्र के क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी प्रोफेसर उदयभान यादव ने अध्यक्षता की। मुख्य अतिथि के रूप में लखनऊ परिक्षेत्र के उच्च शिक्षा अधिकारी प्रोफेसर अश्वनी मिश्रा ने भारतीय ज्ञान परंपरा में गुरु के स्थान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि गुरु का स्थान ईश्वर से भी ऊंचा होता है। गुरु न केवल मार्गदर्शक होते हैं, बल्कि शिष्य की छिपी शक्तियों को जागृत कर उसके जीवन का कायाकल्प करते हैं।कार्यक्रम में राजकीय महाविद्यालय मुसाफिरखाना, अमेठी के वाणिज्य विभाग के प्रोफेसर राम सुरेंद्र यादव ने अपने शोधकाल के अनुभव साझा करते हुए कहा, “आज जो कुछ भी मैं हूं, उसमें गुरु का महत्वपूर्ण योगदान है।” इसी तरह महंत अवेद्यनाथ राजकीय महाविद्यालय, जंगल कौड़िया के वाणिज्य प्रवक्ता डॉ. अमरनाथ तिवारी ने बताया कि गुरु जी से प्राप्त प्रेरणा, शिक्षा और आदर्शों ने ही उनके जीवन की राह को सरल बनाया।समारोह की शुरुआत प्रो. गोपीनाथ के माल्यार्पण, उत्तरीय प्रदान, पुष्पगुच्छ अर्पण और स्मृति चिन्ह भेंट के साथ हुई। अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो. उदयभान यादव ने ऐसे आयोजनों की वर्तमान समाज में प्रासंगिकता पर जोर दिया और अपना व्यक्तिगत अनुभव साझा किया।प्रोफेसर गोपीनाथ ने सभी शोध छात्रों का आभार व्यक्त करते हुए कहा, “आप सब मेरे जीवन की असली कमाई हैं। सत्य, कर्तव्यनिष्ठा और समर्पण के साथ आगे बढ़ें, यही मेरी शुभकामना है।”इस अवसर पर प्रो. गोपीनाथ की धर्मपत्नी एवं शहीद सुखदेव कॉलेज ऑफ बिजनेस स्टडीज (SSCBS), दिल्ली की प्राध्यापिका डॉ. निधि केसरवानी सहित दर्जनों शोध छात्र उपस्थित रहे, जिनमें बृजवास कुशवाहा (बरेली कॉलेज), डॉ. श्वेता भट्ट (बुद्धा पीजी कॉलेज, कुशीनगर), डॉ. उपेंद्र सिंह, डॉ. अंकित तिवारी, डॉ. ऋतु जैन आदि शामिल थे। सभी ने गुरु के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त की और अपने अनुभव साझा किए।

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