
रिपोर्टर जितेन्द्र सिह चंद्रावत रतलाम
विकास से दुर हो रहा बछोड़िया; नारकीय जीवन जीने को मजबूर हजारों ग्रामीण, न सड़कें, न सफाई, न अस्पताल
ग्राम वासियों द्वारा चुनावी बहिष्कार किया जाएगा
ढोढर । जावरा विधानसभा क्षेत्र का बछोड़िया गांव आज आधुनिक भारत की चमक से कोसों दूर, आदिम युग की समस्याओं से लहूलुहान है।
गांव की सड़कें इस कदर जर्जर हैं कि बाहरी लोग अब यहाँ आने से कतराते हैं। ग्रामीणों का दर्द है कि गांव की बदहाली देखकर लोग अपनी बेटी का रिश्ता यहाँ करने से साफ मना कर देते हैं। हर कोई यही कहता हे गांव के भीतर की स्थिति और भी भयावह है। रास्तों पर उचित सफाई की कोई व्यवस्था नहीं है। नालियां चोक होने के कारण गंदा पानी सड़कों पर बह रहा है, जिससे पैदल चलना भी दूभर है।
धतुरिया-सुखेड़ा मार्ग: मंडी जाने वाले इस मुख्य रास्ते पर पुलिया का अभाव है। बारिश आते ही मंडी का संपर्क पूरी तरह कट जाता है।
मांडवी नदी मार्ग: राजस्थान (प्रतापगढ़, दलोट, चुपना) को जोड़ने वाले सडक इसके साथ ही गांव में मांगलिक भवन और श्मशान घाट पर शेड जैसी बुनियादी सुविधाओं का वर्षों से अभाव है।
ग्रामीणों का अल्टीमेटम: ‘काम नहीं, तो वोट नहीं’
प्रशासन की लंबी चुप्पी से आक्रोशित ग्रामीणों ने अंतिम चेतावनी दी है। यदि मानसून से पहले (जिसमें अभी 3 महीने शेष हैं) इन प्रमुख सड़कों, सफाई और पुलिया का काम शुरू नहीं हुआ, तो पूरा गांव उग्र आंदोलन करेगा और आने वाले समय में ‘चुनावी बहिष्कार’ जैसा कड़ा कदम उठाएगा।



