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गौरैया बचाओ: बाल पर्यावरण योद्धा श्रेया कुमावत (ब्रांड एम्बेसडर )की प्रेरक पहल

मूक पक्षियों की सेवा ही सच्ची मानवता

गौरैया बचाओ: बाल पर्यावरण योद्धा श्रेया कुमावत (ब्रांड एम्बेसडर )की प्रेरक पहल

संस्कार दर्शन राहुल रत्नावत

शाहपुरा। विश्व गौरैया दिवस के अवसर पर एक अत्यंत प्रेरणादायक दृश्य देखने को मिला, जब बाल पर्यावरण योद्धा “ग्रीन लिटिल बेबी” के नाम से प्रसिद्ध श्रेया कुमावत संस्था बी. आर. फाउंडेशन मध्य प्रदेश की नन्हे हाथों में पर्यावरण अभियान की ब्रांड एंबेसडर ने मासूम बच्चों के साथ मिलकर गौरैया संरक्षण हेतु विशेष जागरूकता अभियान चलाया। इस सराहनीय पहल ने न केवल बच्चों में प्रकृति के प्रति प्रेम और जिम्मेदारी का भाव जगाया, बल्कि समाज को भी एक सशक्त संदेश दिया कि अब समय आ गया है जब हम सब मिलकर पर्यावरण संरक्षण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं।

कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने उत्साहपूर्वक अपने हाथों से पक्षीघर (बर्ड हाउस), पानी के लिए परिंडे और दाने के लिए फीडर तैयार किए। विशेष बात यह रही कि इन फीडर को प्लास्टिक की बोतलों के पुनः उपयोग (रिसाइक्लिंग) से बनाया गया, जिससे पर्यावरण संरक्षण का दोहरा संदेश भी प्रसारित हुआ—एक ओर गौरैया के लिए सुरक्षित आश्रय, तो दूसरी ओर प्लास्टिक कचरे में कमी।

इस अवसर पर श्रेया कुमावत ने बताया कि गौरैया, जो कभी हर घर-आंगन की चहचहाहट का अभिन्न हिस्सा हुआ करती थी, आज धीरे-धीरे विलुप्ति की ओर बढ़ रही है। इसके पीछे पेड़ों की अंधाधुंध कटाई, तेजी से बढ़ता शहरीकरण, मोबाइल टावरों का रेडिएशन और बढ़ता प्रदूषण प्रमुख कारण हैं। उन्होंने सभी से आह्वान किया कि छोटे-छोटे प्रयासों के माध्यम से हम इस नन्हीं चिड़िया को पुनः अपने जीवन का हिस्सा बना सकते हैं।

इस आयोजन में संस्था बी. आर. फाउंडेशन के संस्थापक कृष्ण परिहार“ के उल्लेखनीय सहयोग से इस अभियान को सशक्त आधार प्रदान किया। उन्होंने श्रेया कुमावत के प्रयासों की सराहना करते हुए इसे समाज के लिए एक अनुकरणीय पहल बताया। कार्यक्रम के अंत में बच्चों को पक्षीघर, फीडर एवं परिंडे वितरित किए गए तथा सभी से अपील की गई कि वे गर्मियों के मौसम में अपने घरों में पक्षियों के लिए दाना-पानी की व्यवस्था अवश्य करें, ताकि गौरैया को सुरक्षित आश्रय मिल सके और उसकी मधुर चहचहाहट फिर से वातावरण में गूंज उठे। कार्यक्रम का समापन एक प्रेरणादायक संकल्प के साथ हुआ- “जब हर घर बनेगा गौरैया का घर, तब फिर से गूंजेगी चहचहाहट हर डगर।”

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