समाचार मध्यप्रदेश मंदसौर 20 मार्च 2026 शुक्रवार

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उप मुख्यमंत्री श्री जगदीश देवड़ा ने पशुपतिनाथ मंदिर में सूर्य उपासना कर ब्रह्मध्वज स्थापित किया
“सम्राट विक्रमादित्य” पर आधारित भव्य नाट्य प्रस्तुति का हुआ मंचन
मंदसौर 19 मार्च 2026/ विक्रम संवत् 2083 के शुभारंभ के अवसर पर मंदसौर स्थित पशुपतिनाथ मंदिर परिसर (आराधना हॉल) में प्रातः 10:00 बजे भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर मध्यप्रदेश के उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने सूर्य उपासना कर विधिवत ब्रह्मध्वज की स्थापना की। भगवान पशुपतिनाथ मंदिर में भगवान पशुपतिनाथ की आरती में भाग लिया, स्वयं आरती कर पूजा अर्चना की। कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद बंशीलाल गुर्जर, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती दुर्गा विजय पाटीदार, नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती रमादेवी बंशीलाल गुर्जर, पूर्व विधायक श्री यशपाल सिंह सिसोदिया, संत श्री महेशमणि चैतन्य महाराज, जनपद अध्यक्ष श्री बसंत शर्मा, श्री मदनलाल राठौर सहित अन्य जनप्रतिनिधियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। प्रशासनिक अधिकारियों में कलेक्टर श्रीमती अदिती गर्ग, पुलिस अधीक्षक श्री विनोद कुमार मीना, अपर कलेक्टर श्रीमती एकता जायसवाल एवं एसडीएम श्री शिवलाल शाक्य सहित बड़ी संख्या में नागरिक एवं पत्रकार उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ जेके जैन एवं आभार डिप्टी कलेक्टर श्री रोहित राणा द्वारा माना गया।
कार्यक्रम की शुरुआत सूर्य उपासना से हुई, जिसके पश्चात ब्रह्मध्वज स्थापित किया गया। यह आयोजन भारतीय नववर्ष वर्ष प्रतिपदा (गुड़ी पड़वा) के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया।
इस अवसर पर मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति विभाग एवं मध्यप्रदेश नाट्य विद्यालय के सहयोग से “सम्राट विक्रमादित्य” विषय पर भव्य नाट्य प्रस्तुति का मंचन किया गया, जिसे उज्जैन की परिष्कृती सामाजिक सांस्कृतिक संस्था द्वारा प्रस्तुत किया गया। नाट्य प्रस्तुति में विक्रमादित्य के जीवन, बेताल पच्चीसी, 32 पुतली सिंहासन, शकों पर विजय, नवरत्न, उनकी वीरता एवं न्यायप्रियता का प्रभावशाली मंचन किया गया।
कार्यक्रम के दौरान “भारत का नववर्ष विक्रम संवत्” विषयक पुस्तिका का वितरण भी किया गया, जिससे आमजन भारतीय परंपराओं एवं नववर्ष के ऐतिहासिक महत्व को समझ सकें।
उप मुख्यमंत्री श्री देवड़ा ने अपने संबोधन में वर्ष प्रतिपदा की सभी को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि मध्यप्रदेश शासन द्वारा इस परंपरा को पुनर्जीवित करते हुए प्रत्येक जिला मुख्यालय पर ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजनों से आमजन को भारतीय संस्कृति एवं इतिहास की समृद्ध विरासत से परिचित होने का अवसर मिलता है। उन्होंने सभी के लिए नववर्ष को मंगलमय, सुखद एवं प्रदेश व देश के लिए कल्याणकारी होने की कामना की।
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उप मुख्यमंत्री श्री जगदीश देवड़ा ने पशुपतिनाथ मंदिर परिसर से जल गंगा जल संवर्धन अभियान का किया शुभारंभ
मंदिर परिसर में प्याऊ का लोकार्पण, जल संरक्षण के लिए जनभागीदारी पर दिया जोर
मंदसौर 19 मार्च 2026/ जिले में जल संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए उप मुख्यमंत्री श्री जगदीश देवड़ा ने आज भगवान पशुपतिनाथ मंदिर परिसर से “जल गंगा जल संवर्धन अभियान” का विधिवत शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने मंदिर परिसर में आमजन की सुविधा के लिए निर्मित प्याऊ का लोकार्पण भी किया। कार्यक्रम में नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती रमादेवी बंशीलाल गुर्जर, अन्य जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में आमजन, पत्रकार उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के दौरान उप मुख्यमंत्री ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि जल ही जीवन का आधार है और वर्तमान समय में जल संरक्षण अत्यंत आवश्यक हो गया है। “जल गंगा जल संवर्धन अभियान” के माध्यम से जिले में जल स्रोतों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए व्यापक स्तर पर कार्य किए जाएंगे। यह अभियान 30 जून 2026 तक संचालित होगा।
उन्होंने बताया कि अभियान के अंतर्गत तालाबों, नदियों, कुओं, बावड़ियों सहित अन्य पारंपरिक जल संरचनाओं का जीर्णोद्धार किया जाएगा। साथ ही इन जल स्रोतों की नियमित साफ-सफाई, गहरीकरण एवं मरम्मत के कार्य भी सुनिश्चित किए जाएंगे, जिससे वर्षा जल का अधिकतम संचयन हो सके।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि यह अभियान केवल शासन का नहीं, बल्कि जन-जन का अभियान है। इसमें आम नागरिकों, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों एवं शासकीय विभागों की सक्रिय सहभागिता आवश्यक है। उन्होंने सभी से अपील की कि जल संरक्षण के इस पुनीत कार्य में बढ़-चढ़कर भाग लें और आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों को सुरक्षित रखें।
इस अवसर पर उन्होंने मंदिर परिसर में शुरू की गई प्याऊ व्यवस्था की सराहना करते हुए कहा कि इससे श्रद्धालुओं एवं आमजन को गर्मी के मौसम में शुद्ध पेयजल उपलब्ध होगा, जो एक सराहनीय पहल है।
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जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत जिले में सार्वजनिक जल स्रोतों की व्यापक सफाई से हुई शुरुआत
मंदसौर 19 मार्च 2026/ जिले में जल संरक्षण और जल स्रोतों के पुनर्जीवन के उद्देश्य से आज से जल गंगा संवर्धन अभियान का शुभारंभ हुआ। इस अभियान के अंतर्गत नगर परिषद मल्हारगढ़ सहित पूरे जिले में सार्वजनिक कुओं, नालों एवं तालाबों की साफ-सफाई और संरक्षण कार्य प्रारंभ किए गए।
नगर परिषद मल्हारगढ़ में अभियान की शुरुआत वार्ड क्रमांक 03 स्थित कान कुईया तथा वार्ड क्रमांक 12 स्थित पुराने दशहरा मैदान में स्थित सार्वजनिक कुओं की सफाई से की गई। इस दौरान कुओं के अंदर एवं आसपास जमा गंदगी को हटाया गया, साथ ही आसपास के क्षेत्रों में स्वच्छता अभियान चलाया गया।
अभियान के तहत कुओं पर किए गए अतिक्रमण को हटाने की कार्रवाई भी की गई तथा कुओं पर स्थापित हेडपंपों की मरम्मत एवं सुधार कर उन्हें पुनः चालू किया गया, जिससे आमजन को स्वच्छ एवं सुलभ पेयजल उपलब्ध हो सके।
इस अवसर पर जनप्रतिनिधियों, नगर परिषद के कर्मचारियों एवं पत्रकारों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और स्वयं श्रमदान कर सफाई कार्य किया। सभी ने मिलकर जल संरक्षण के इस महत्वपूर्ण अभियान को सफल बनाने का संकल्प लिया।
प्रशासन द्वारा बताया गया कि जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत जिले के सभी नगरीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों में जल स्रोतों की साफ-सफाई, संरक्षण एवं पुनर्जीवन के कार्य निरंतर किए जाएंगे। अभियान का मुख्य उद्देश्य जल स्रोतों को संरक्षित कर भविष्य में जल संकट की स्थिति से निपटना एवं जल उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
प्रशासन ने आमजन से भी अपील की है कि वे इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाएं और अपने आसपास के जल स्रोतों को स्वच्छ एवं सुरक्षित बनाए रखने में सहयोग करें, ताकि जल संरक्षण की यह मुहिम जन आंदोलन का रूप ले सके।
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थड़ोद में मानस पाठ के साथ जल स्त्रोत व वृक्ष पुजा संपन्न
मंदसौर। ग्राम थडोद में श्री श्री मॉ शक्ति सेवा संस्था द्वारा नववर्ष गुढ़ी पड़वा के अवसर पर जल शक्ति से नव भक्ति कार्यक्रम का कुएॅ की पुजा अर्चना आरती कर कर विधि विधान से जल गंगा संवर्धन अभियान का शुभारंभ किया गया। जन अभियान परिषद के जिला समन्वयक श्रीमती तृप्ति बैरगी निर्देशन व ब्लॉक संमन्वयक विनोद गौड़ के नेतृत्व में संस्था सचिव श्रीमती राधिका तिवारी ने विकासखण्ड मल्हारगढ़ के सेक्टर मुंदड़ी के गांव थडोद ग्रामवासी के साथ जल स्रोतों की पूजा, मानस पाठ के साथ वृक्ष की आरती कर का कार्य किया। इस अवसर पर संस्थापक पं. श्री गोपाल तिवारी द्वारा बताया की अभियान का उद्देश्य मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस अभियान की सफलता के लिए सभी वर्गों को एकजुट होकर काम करने का आह्वान किया है, ताकि श्वकसित मध्यप्रदेश के संकल्प को पूरा किया जा सके। जल शक्ति से भक्ति के भाव के साथ, शासन अभियान को जन आंदोलन बनाकर जल स्रोतों को पुनर्जीवित करना। इस अवसर पर गांव के पुजारी जगदीश बैरागी के साथ ग्रामीणजन एवं माताएं बहने उपस्थित रहे।
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जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत नगर परिषद पिपलिया मंडी में ‘जल मंदिर’ का किया शुभारंभ
मंदसौर 19 मार्च 2026/ जल संरक्षण और जनसहभागिता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संचालित जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत आज नगर परिषद पिपलिया मंडी द्वारा “जल मंदिर” का शुभारंभ किया गया।
कार्यक्रम के दौरान जनप्रतिनिधियों एवं नगर परिषद के अधिकारियों द्वारा जल मंदिर का उद्घाटन किया गया। यह जल मंदिर आमजन को स्वच्छ एवं ठंडा पेयजल उपलब्ध कराने के साथ-साथ जल संरक्षण के प्रति जागरूकता का भी केंद्र बनेगा।
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14 से 15 वर्षी खिलाड़ी बालिकाओं ने लगवाया एचपीवी वैक्सीन, अन्य बच्चियों को किया जागरूक
मंदसौर 19 मार्च 2026/ जिला खेल अधिकारी द्वारा बताया गया कि जिले में किशोरियों के स्वास्थ्य संरक्षण हेतु चलाए जा रहे एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) वैक्सीनेशन अभियान के अंतर्गत 14 से 15 वर्ष आयु वर्ग की खिलाड़ी बालिकाओं ने उत्साहपूर्वक वैक्सीन लगवाकर एक सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत किया। इन बालिकाओं ने न केवल स्वयं टीकाकरण कराया, बल्कि अन्य बच्चियों को भी इसके प्रति जागरूक कर वैक्सीन लगवाने के लिए प्रेरित किया।
खिलाड़ी बालिकाओं ने बताया कि एचपीवी वैक्सीन गर्भाशय ग्रीवा कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से बचाव के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने अपने साथियों एवं स्कूल की अन्य छात्राओं को वैक्सीन के महत्व के बारे में समझाते हुए कहा कि समय पर टीकाकरण कराना सुरक्षित भविष्य के लिए जरूरी है।
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नव संवत्सरः कृषि, जल और विकास के रोड मैप का संकल्प · डॉ. मोहन यादव
मंदसौर 19 मार्च 26 / चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से प्रारंभ होने वाला नवसंवत्सर हमारी सांस्कृतिक चेतना, वैज्ञानिक दृष्टि और प्राकृतिक जीवन पद्धति का प्रतीक है। इस वर्ष विक्रम संवत् 2083 का शुभारंभ हुआ है। यह मध्यप्रदेश के लिए गर्व और गौरव का विषय है कि भारतीय कालगणना की गौरवशाली परंपरा उज्जयिनी से प्रारंभ हुई है।
सम्राट विक्रमादित्य के राज्याभिषेक से आरंभ हुआ विक्रम संवत् भारतीय संस्कृति की चेतना और राष्ट्र की अस्मिता का प्रतीक है। सम्राट विक्रमादित्य न्यायप्रियता, पराक्रम, धैर्य, ज्ञानशीलता और सुशासन के आदर्श हैं। विदेशी आक्रांताओं को पराजित कर उन्होंने राष्ट्र की रक्षा और भारतीय संस्कृति के गौरव को प्रतिष्ठित किया। उनके शासनकाल में सुशासन की आदर्श परंपराएं स्थापित हुईं। उन्होंने न्याय और नीति के जो आदर्श स्थापित किए, वे आज भी शासन और प्रशासन के लिए प्रेरणास्रोत हैं।
विक्रमादित्य के सुशासन की परंपरा का उल्लेख ‘सिंहासन बत्तीसी’ की कथाओं में मिलता है। यह उस आदर्श शासन-व्यवस्था का प्रमाण है जिसमें योग्य मंत्रियों, विद्वानों और नीति-निपुण व्यक्तियों के सहयोग से राज्य संचालित किया जाता था। सम्राट विक्रमादित्य ने जिस तरह ज्ञान, संस्कृति और प्रशासनिक व्यवस्था को विकसित किया, वह भारतीय राज्य परंपरा की श्रेष्ठता का प्रतीक है।
सम्राट विक्रमादित्य के व्यक्तित्व और भारतीय ज्ञान परंपरा के विभिन्न आयामों को जन-जन तक पहुँचाने के उद्देश्य से प्रदेश में ‘विक्रमोत्सव-2026’ का आयोजन किया जा रहा है। 12 फरवरी 2026 से 30 जून 2026 तक चलने वाला यह 139 दिवसीय उत्सव दीर्घ आयोजन का कीर्तिमान स्थापित करेगा। इसमें विभिन्न सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और बौद्धिक कार्यक्रमों के माध्यम से सम्राट विक्रमादित्य के जीवन, उनके आदर्श और उपलब्धियों को समाज तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
उज्जयिनी प्राचीन काल से ही भारत की सांस्कृतिक और वैज्ञानिक चेतना का केन्द्र रही है। बाबा महाकाल की पावन नगरी का संबंध कालगणना, खगोल विज्ञान और आध्यात्मिक साधना से रहा है। हमारे पूर्वजों ने हजारों वर्ष पहले ग्रहों की गति और नक्षत्रों की स्थिति का गहन अध्ययन कर जो कालगणना पद्धति विकसित की, वह आज भी विश्व के लिए आश्चर्य का विषय है। उज्जैन की वेधशाला और वैदिक कालगणना हमारी ज्ञान परंपरा का प्रमाण है।
हमारे लिए यह प्रसन्नता का विषय है कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में विश्व की पहली विक्रमादित्य वैदिक घड़ी का पुनर्स्थापन किया गया। यह घड़ी भारतीय समय गणना की परंपरा को आधुनिक युग में पुनर्जीवित करने का महत्वपूर्ण प्रयास है।
भारतीय नववर्ष प्रकृति के नवोदय का पर्व है। इस समय प्रकृति नवजीवन से समृद्ध होती है,पृथ्वी पर नवचेतना और नवसृजन का संचार होता है। देश भर में मनाए जाने वाले नवसंवत्सर के विभिन्न नाम हैं। कहीं इसे गुड़ी पड़वा, कहीं उगादि, कहीं चैती चांद और कहीं नवरोज के रूप में मनाया जाता है।इसी दिन से चैत्र नवरात्र का भी शुभारंभ होता है। नवरात्र के नौ दिन साधना, आत्मशुद्धि और शक्ति उपासना का अवसर है। भारतीय जीवन पद्धति में पर्व और परंपराएं व्यक्ति और समाज के समग्र विकास का मार्ग प्रशस्त करती हैं।
मध्यप्रदेश में नवसंवत्सर का आयोजन विकास और जनकल्याण के नए संकल्पों के साथ किया जा रहा है। नवसृजन के प्राकृतिक उत्सव अवसर पर मुझे यह बताते हुए प्रसन्नता है कि मध्यप्रदेश में यह वर्ष कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। कृषि हमारे प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और किसान अर्थव्यवस्था की आधारशिला है, इसलिए किसानों की आय बढ़ाने, कृषि को लाभकारी बनाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती के लिए अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिये गये हैं। इस वर्ष हमने पहली कृषि कैबिनेट बैठक बड़वानी जिले के भीलट बाबा देवस्थल नागलवाड़ी में की है। इसमें कृषि विकास और कल्याण के लिए 27 हजार 500 करोड़ रुपये की योजनाओं को स्वीकृत किया गया।
कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों को प्रोत्साहित करने, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन के लिए प्रदेश में योजनाएं लागू की गई हैं। हमारा लक्ष्य है कि किसान उत्पादन बढ़ाने के साथ कृषि-आधारित उद्योगों के माध्यम से अतिरिक्त आय अर्जित करें और आत्मनिर्भर बनें।
यशस्वी प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन में हम विरासत के साथ विकास मार्ग पर आगे बढ़ रहे हैं। इसी अनुरूप प्रदेश में ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक स्थलों के संरक्षण और विकास पर कार्य किया जा रहा है। ओंकारेश्वर, उज्जैन, मैहर और अन्य प्रमुख तीर्थस्थल आध्यात्मिक पर्यटन स्वरूप में विकसित हो रहे हैं। मुझे यह बताते हुए प्रसन्नता है कि वर्ष 2028 में उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ पर्व के लिए होने वाली समस्त तैयारियां प्रगति पर हैं। इसके साथ ही श्रीराम वनगमन पथ और श्रीकृष्ण पाथेय जैसी योजनाओं के माध्यम से भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा को नई पीढ़ी से जोड़ा जा रहा है।
भारतीय नववर्ष का आयोजन हमें प्रकृति संरक्षण की प्रेरणा देता है।हमारी परंपरा में गुड़ी पड़वा के दिन सूर्योदय से पहले स्वच्छ जल में स्नान करने और सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा है। अर्घ्य देने की परंपरा में जल स्रोतों की पवित्रता और संरक्षण का संदेश है। जल संरक्षण के इसी भाव के साथ मध्यप्रदेश में आज से “जल गंगा संवर्धन अभियान” प्रारंभ किया जा रहा है। नववर्ष प्रतिपदा पर शिप्रा तट उज्जैन से प्रारंभ होने वालेइस तीसरे राज्य स्तरीय अभियान में जल संरक्षण की पारंपरिक पद्धतियों और नवीन तकनीकी, नवाचारों के साथ प्रदेश के जल स्रोतों को सुरक्षित किया जायेगा।
मेरा प्रदेशवासियों से आग्रह है कि जल गंगा संवर्धन अभियान को जन आंदोलन बनाएं। प्रकृति के नवसृजन, अवसर पर आज हम विकसित मध्यप्रदेश निर्माण का संकल्प लें। नवचेतना, नवजागृति के साथ आइये हम सब मिलकर प्रदेश के नवकल्याण की ओर बढ़ें और विकसित भारत निर्माण में सहभागी बनें।
मुझे विश्वास है कि नव संवत्सर मध्यप्रदेश की प्रगति, समृद्धि और नई उपलब्धियों का वर्ष सिद्ध होगा। आपके सुखी, समृद्ध और आनंदमय जीवन के लिए आप सभी को नव संवत्सर की पुनः हार्दिक मंगलकामनाएं।
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सिंह राजपूत सामाजिक संगठन की महिला विंग ने हर्षाेल्लास के साथ मनाया हिंदू नववर्ष
कार्यक्रम की शुरुआत मां नालछा माता के दर्शन और पूजन के साथ हुई। इसके पश्चात महिला विंग की पदाधिकारियों और सदस्यों ने मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं का आत्मीय स्वागत किया। संगठन द्वारा प्राचीन परंपरा का निर्वहन करते हुए दर्शनार्थियों को तिलक लगाकर उनका अभिनंदन किया गया। साथ ही, स्वास्थ्य और आध्यात्म के प्रतीक नीम एवं मिश्री का प्रसाद वितरित कर सभी को नववर्ष की मंगलकामनाएं प्रेषित की गईं।
इस गरिमामयी आयोजन में महिला विंग की पूरी टीम ने सक्रिय सहभागिता निभाई। कार्यक्रम का नेतृत्व अध्यक्ष श्रीमती सीमा सिंह कुशवाह ने किया, जिनके साथ उपाध्यक्ष श्रीमती सपना चंदेल, सचिव श्रीमती अपर्णा कुशवाह, कोषाध्यक्ष श्रीमती सपना तोमर और सह सचिव श्रीमती पूजा सेंगर एवं श्रीमती वैशाली चौहान, मीडिया प्रभारी श्रीमती किरण सेंगर, संगठन मंत्री श्रीमती साधना तोमर, कार्यकारिणी सदस्य सुश्री माधवी कुशवाह, श्रीमती सीमा भदौरिया, श्रीमती उमा राणावत, श्रीमती मंजु तोमर, श्रीमती अरुणा भदौरिया, श्रीमती शर्मिला चौहान, नीलम रानी चौहान और प्रतिभा तोमर सहित अनेक महिलाओ ने सहभागिता की।
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श्री जांगिड़ ब्राह्मण सुथार पंचायत चंद्रपुरा ट्रस्ट का महिला मंडल का गठन
होली मिलन समारोह भी हुआमंदसौर। श्री जांगिड़ ब्राह्मण सुथार पंचायत चंद्रपुरा ट्रस्ट मंदसौर का होली मिलन समारोह 18 मार्च 2026 बुधवार को संपन्न हुआ जिसमें नवनिर्वाचित महिला मंडल का गठन भी किया गया। होली मिलन समारोह चंद्रपुर स्थित श्री चारभुजा नाथ मंदिर परिसर में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।
श्री जांगिड़ ब्राह्मण सुथार पंचायत चंद्रपुरा ट्रस्ट मंदसौर में नवनिर्वाचित महिला मंडल का गठन करते हुए अध्यक्ष के रूप में श्रीमती मनोरमा स्व. लोकेंद्र झलोया एवं उपाध्यक्ष श्रीमती आशा डॉ. श्याम तिवारी एवं श्रीमती आशा शिवदयाल शर्मा साथ ही सचिव श्रीमती वीणा शरद तिवारी एवं मोनिका अभिनव झलोया को मनोनीत कर नवीन महिला मंडल कार्यकारिणी का गठन किया गया।
तत्पश्चात होली मिलन समारोह में हर वर्ष की तरह श्री अंगिरा ऋषि शिक्षण समिति के द्वारा प्रतिभा सम्मान किया गया जिसमें 10वीं एवं 12वीं में प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हुए छात्रों को प्रोत्साहन राशि डॉक्टर श्याम जी तिवारी द्वारा सप्रेम भेंट की गई तथा मोमेंटो एवं शाल, श्रीफल श्री लक्ष्मीनारायण जी गुगरिया धमनार वालों की तरफ से भेंट किया गया।
मिलन समारोह की इसी कड़ी में नवयुवकों द्वारा जिला चिकित्सालय में रक्तदान की नई पहल कर समाज को नई राह की ओर अग्रसर किया।
कार्यक्रम में समाज के वरिष्ठजन, नवयुवक एवं बड़ी संख्या में महिलाएं उपस्थित थे। कार्यक्रम को संबोधित श्री अर्जुन जी झलोया, संचालन शरद तिवारी एवं आभार डॉ. श्याम जी तिवारी द्वारा प्रेषित किया गया।
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दिल्ली में आयोजित लोकतंत्र विजय दिवस में शामिल होने 5 लोकतंत्र सेनानी आज होंगे नीमच से रवाना
नीमच। देश की राजधानी दिल्ली में आयोजित होने वाले लोकतंत्र विजय दिवस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए जिला लोकतंत्र सेनानी संघ के 5 लोकतंत्र सेनानी आज 19 मार्च को दोप. 3 बजे नीमच रेल्वे स्टेशन से रवाना होंगे, जिन्हें लोकतंत्र की रक्षा और आपातकाल के दौरान संघर्षों के लिए सम्मानित किया जाएगा। इस अवसर पर उन्हें विदाई देने के लिए जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और नागरिक उपस्थित रहेंगे।
उक्त जानकारी देते हुए लोकतंत्र सेनानी संघ जिला नीमच के अध्यक्ष श्यामप्रसाद शर्मा ने बताया कि दिल्ली में आयोजित इस कार्यक्रम में देशभर से लोकतंत्र सेनानी भाग लेंगे, जहां उनके संघर्षों और बलिदान को याद किया जाएगा। साथ ही लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा और मजबूती पर चर्चा भी होगी। देश में समय-समय पर लोकतंत्र से जुड़े कार्यक्रम और सम्मेलन आयोजित होते रहते हैं, जिनमें लोकतांत्रिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने पर जोर दिया जाता है।
श्री शर्मा ने बताया कि वर्श 1975 में श्रीमति इंन्दिरा गांधी ने आंतरिक अशांति के नाम पर आपातकाल लगाकर लोकतंत्र की हत्या कर दी थी और सम्पूर्ण देश को जेलखाना बना दिया था। ना अपील, ना दलील और वकील, जिसको चाहे आपातकाल में मीसा लगाकर जेल में बंद कर दिया था। लाखों कार्यकर्ताओं के आन्दोलन व गिरफ्तारी के बाद इन्दिरा गांधी ने 21 मार्च को आपातकाल हटा लिया था, जिसके बाद उनकी पार्टी चुनाव में बूरी तरह पराजित हो गई थी। लोकतंत्र सेनानी संघ इस दिन को लोकतंत्र विजय दिवस के रूप में प्रतिवर्ष मनाता है और सम्पूर्ण भारत वर्ष के प्रमुख लोकतंत्र सेनानी इसमें हिस्सा लेते हैं।
इस वर्ष लोकतंत्र विजय दिवस दिल्ली में आयोजित हो रहा है, जिसमें भाग लेने नीमच से लोकतंत्र सेनानी संघ के जिलाध्यक्ष श्यामप्रसाद शर्मा, सदस्य – एडवोकेट सुरेशचन्द्र शर्मा, रणजीतसिंह तोमर, कैलाशचन्द्र गोयल, एडवोकेट राजेश शर्मा आज रवाना होंगे।



