जहां ज्ञान भक्ति और कर्म होते हैं उसे परिवार में भगवान का जन्म होता है- श्री गौर दास जी महाराज वृंदावन

जहां ज्ञान भक्ति और कर्म होते हैं उसे परिवार में भगवान का जन्म होता है- श्री गौर दास जी महाराज वृंदावन
मल्हारगढ़ हरि कथा सत्संग मंडल द्वारा नगर में सात दिवसीय भगवान श्री राम कथा का आयोजन किया जा रहा हैश्री राम कथा पंडित श्री गोरदास जी महाराज वृंदावन द्वारा श्रवण कराई जा रही है
कथा के प्रथम दिवस पर गुरुजी गौर दास जी महाराज ने कहा कि मनु और शतरूपा ने भगवान को प्राप्त करने के लिए अनेक वर्षों तक गौर तपस्या की उसकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान ने दर्शन दिए और तपस्या का कारण बताया तब मनु ऋषि ने कहा कि भगवान मुझे आपके जैसा पुत्र चाहिए तो भगवान ने उसे आशीर्वाद दिया और कहा कि मैं राजा दशरथ के यहां में जन्म लूंगा और तुम्हारा मनोरथ पूरा होगा।
राजा दशरथ के तीन विवाह हुए की प्रथम विवाह कौशल्या से हुआ फिर सुमित्रा और केकयी से हुआ अब सवाल यह उठता है कि दशरथ जी के तीन विवाह क्यों हुए क्योंकि यह तीनों ही वेदों के मार्ग है। कौशल्या ज्ञान का प्रतीक, सुमित्रा उपासना और भक्ति का प्रतीक, टेकरी कर्म का प्रतीक थी। और जहां यह तीनों मार्ग मिलते हैं वहां पर भगवान जन्म लेते हैं
इसलिए भगवान ने राजा दशरथ के यहां पर दसवीं पीढ़ी के रूप में जन्म लिया।
वशिष्ठ मुनि राजा दशरथ के 61 में कुल गुरु थे। एक दिन वशिष्ठ मुनि की धर्म पत्ति ने वशिष्ठ मुनि से कहा की महाराज अभी तक* राजा दशरथ के पुत्र नहीं हुआ है* तो भविष्य में हम किसकी जजमानी करेंगे इसकी मुझे बहुत चिंता हो रही है तब वशिष्ठ जी ने कहा कि राजा दशरथ के मन में पुत्र की लालसा ही नहीं है।अगर तुम लालसा पैदा कर सकती हो तो मैं उसको पुत्र दे सकता हूं । वशिष्ठ मुनि की पत्नी अपने पोते पाराशर जी को लेकर राजा दशरथ के महल में गई। राजा दशरथ ने गुरु माता की सेवा की। कुछ देर बाद पाराशर जी जोर-जोर से रोने लगे। राजा दशरथ ने पाराशर जी को चुप करने के अनेक प्रयास किया फिर भी पाराशर जी रोते रहे। तब राजा दशरथ ने गुरु माता से कहा की माता यह बच्चा चुप क्यों नहीं हो रहा है। तब वशिष्ठ मुनि की धर्मपत्नी ने कहा कि हे राजा यह बच्चा इसलिए रो रहा है कि आपका कोई संतान नहीं है और भविष्य में यह किसकी जजमानी करेगा। यह सुनकर राजा दशरथ बहुत दुखी हुआ राजभर नींद नहीं आई। सुबह उठकर राजा दशरथ वही वशिष्ठ मुनि के पास गए ।और अपनी कथा सुनाइ। तब वशिष्ठ जी ने राजा दशरथ को चार पुत्रों का आशीर्वाद देते हुए कहा की संगी ऋषि को बुलाकर पुत्र का अनुष्ठान कराओ। राजा दशरथ ने श्रूगी ऋषि से अनुष्ठान कराया तब यज्ञ में सोने के पात्र में खीर का कटोरा लेकर अग्नि देव प्रकट हुए हुए और वशिष्ठ जी ने खीर का कटोरा लेकर भगवान को भोग लगाया और राजा दशरथ ने यह खीर तीनों रानियो को वितरण की गई ।महाराज श्री ने कहा कि यहां पर भी एक सवाल उठता है ।की तीनों रानीयो को खीर ही वितरण क्यो की गई क्यों की खीर भी ज्ञान भक्ति और कर्म का प्रतीक है चावल कर्म का प्रतीक है। दूध ज्ञान का प्रतीक है। और मीठा भक्ति का प्रतीक है जहां यह तीनों मार्ग मिलते हैं वहां पर ही भगवान अवतार लेते हैं ।
गुरु जी ने राम जन्म की कथा का विस्तार से वर्णन किया और राम जन्म के अवसर पर हर्ष उल्लास के साथ पुष्प वर्षा की गई और भगवान श्री राम का जन्मोत्सव मनाया और महाआरती की गई और प्रसाद वितरण किया गया।
इस अवसर पर समाजसेवी ओमप्रकाश बटवाल, विधायक प्रतिनिधि रमेश चंद्र विजयवर्गीय, पूर्व सरपंच शिवलाल पाटीदार, संस्कार विद्यालय की व्यवस्थापक सत्येंद्र पाटीदार, सेवानिवृत अध्यापक घीसालाल मुंगेर मोल्या खेड़ी, कालुदास बैरागी, जगदीश तिवारी, महेश विजयवर्गी, जगदीश जी विजयवर्गी, प्रहलाद विजयवर्गी, मांगीलाल भाना, पीएल कारपेंटर साहब, धर्मेंद्र गहलोत, पुरुषोत्तम तिवारी पिपलिया मंडी, पत्रकार राधेश्याम बैरागी, पूर्व सभापति हेमंत गुप्ता, समाजसेवी विष्णु भारती, सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्र के अनेक गणमान्य नागरिक और बड़ी संख्या में महिलाएं उपस्थित थी।


