दीक्षार्थी व तपस्वी का शॉल, श्रीफल एवं स्मृति-चिन्ह भेंट कर किया बहुमान

दीक्षार्थी व तपस्वी का शॉल, श्रीफल एवं स्मृति-चिन्ह भेंट कर किया बहुमान
सीतामऊ – भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में जैन धर्म त्याग, तप और संयम की अनुपम साधना के लिए जाना जाता है। इसी परंपरा के दो अत्यंत महत्त्वपूर्ण आयाम हैं— दीक्षा और वर्षीतप। ये दोनों केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और आत्मोन्नति की गहन साधना हैं, जो व्यक्ति को सांसारिक मोह-माया से ऊपर उठाकर आत्मकल्याण के मार्ग पर अग्रसर करती हैं।इसी परिपेक्ष में जेठ वदी चतुर्थी 6 मई 2026 को सागर समुदायवर्ती आचार्य भगवंत श्री आनंदचंद्र सागर सूरीश्वरजी महाराजा के पावन निश्रा में दीक्षित होने जा रहे रामगंज मंडी निवासी संयम मेहता के सीतामऊ आगमन पर संयम जीवन की भावना से प्रेरित दीक्षार्थी का विशेष बहुमान कर उनके उज्ज्वल आध्यात्मिक भविष्य की मंगलकामना की गई। साथ ही वर्षीतप की कठिन तपस्या में लीन रामगंज मंडी निवासी श्रीमती अंतिमबाला महावीर मेहता के वर्षीतप की तपस्या अनुमोदनार्थ बियासने का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर वर्षीतप की कठिन तपस्या करने वाले तपस्वनी का शॉल, श्रीफल एवं स्मृति-चिन्ह भेंट कर मध्यप्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ जिलाध्यक्ष एवं सकल जैन श्रीसंघ पूर्व अध्यक्ष हेमंत कुमार जैन व जैन वैश्विक धर्मसंघ के प्रदेश संयोजक नयन जैन के निवास स्थान पर परिजनों व इष्टमित्रों की उपस्थिति में बहुमान किया गया। वहीं दीक्षा मार्ग पर अग्रसर दीक्षार्थी संयम मेहता व वर्षीतप तपस्विनी अन्तिमबाला मेहता का विशेष अभिनंदन करते हुए उनके उज्ज्वल आध्यात्मिक जीवन की मंगलकामना की गई। इस अवसर पर हेमन्त जैन, अनिल जैन डग, अंशुल मेहता, नयन जैन, कल्प जैन, विशाल जैन, श्रेयांश जैन, केशरबाला जैन, वर्षा जैन, साक्षी जैन आदि उपस्थित रहे।
दीक्षा महोत्सव में पधारने के लिए की अपील –
मेरी दीक्षा 6 मई 2026 को आचार्य भगवंत आनन्दचंद्र सागर सूरीश्वर जी महाराजा की पावन निश्रा में रामगंजमंडी में आयोजित होगी आप सभी दीक्षा महोत्सव में पधारकर मुझे सफल संयम जीवन के लिए आशीर्वाद प्रदान करे।
-संयम मेहता,रामगंज मंडी (दीक्षार्थी)



